प्यारी पुष्पा भाभी

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Pyari pushpa bhabhi मैं अमृतसर का रहने वाला हूं परन्तु मैंने अपने कॉलेज की पढ़ाई अम्बाला से की और उसके बाद अम्बाला में ही मैं जॉब करने लगा था। अम्बाला में मैंने काफी वर्षो तक जॉब की उसके बाद मैं अमृतसर वापस लौट आया और अमृतसर में ही जॉब करने लगा। मेरी शादी को दो वर्ष हो चुके है इन दो वर्षों में मैंने काफी मुश्किले झेली है। शादी के कुछ समय बाद मेरी पत्नी की तबियत बहुत खराब हो गयी थी जिसमे की मेरे काफी सारे पैसे लगे मैंने अपनी सारी जमा पूंजी अपनी पत्नी के इलाज में लगा दिए थे। मेरे घर मे मेरी माँ और मेरी पत्नी ही है मेरे पिताजी की मृत्यु को भी काफी समय हो चुका है उनकी मृत्यु एक एक्सीडेंट के दौरान हुई थी उसके बाद से मैं ही अपने घर को देख रहा हूँ। पिताजी की मृत्यु के बाद घर की और मां की जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही आ गयी और उसके कुछ समय बाद मैंने भी शादी कर ली। मैंने अपनी मां के लिए ही सुनीता से शादी की ताकि मां को भी किसी का सहारा मिल जाएगा।

उस वक्त मैं अम्बाला में जॉब करता था और मां घर पर अकेली रहती थी इस वजह से मैंने शादी करना ही उचित समझा। शादी के कुछ समय बाद मैं अम्बाला वापस चला गया था परन्तु उसके थोड़े ही समय बाद मेरी पत्नी की तबियत खराब हो गयी और मुझे अम्बाला से वापस अमृतसर आना पड़ा। मेरी पत्नी की देखभाल के लिए मेरी मां थी लेकिन मेरी मां भी ज्यादा भागदौड़ नही कर सकती क्योकि उनकी अब उम्र भी हो चुकी है इसलिए मुझे ही आना पड़ा। जब मैं घर आया तो मैं ही सुनीता को अस्पताल लेकर गया और उसका चेकप करवाया। मेरी पत्नी सुनीता अस्पताल में पन्द्रह से बीस दिन तक रही उसके पेट मे कुछ दिक्कत हो गयी थी जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। सुनीता के इलाज के दौरान मेरा काफी खर्चा हुआ और इस बीच मेरे पास कोई भी जॉब नही थी मेरे जितने भी जमा किये हुए पैसे थे वह सब मैंने सुनीता के इलाज में लगा दिए थे। सुनीता अब पहले से ठीक हो चुकी थी और उसकी देख भाल के लिए मैं और मां थे हमने सुनीता को कोई भी कमी नही होने दी।

मेरी गैर मौजूदगी में सुनीता ने मेरी माँ का बहुत ध्यान रखा था वह मां की खूब सेवा किया करती थी जिससे मेरी माँ काफी खुश रहती थी। सुनीता जब अस्पताल से घर आ गयी तो उसके बाद मैं भी जॉब की तलाश में था मैंने कई जगह इंटरव्यू दिए लेकिन मुझे कहीं भी जॉब नही मिल रही थी तो मैंने सोचा कि मैं वापस अम्बाला चले जाऊं लेकिन थोड़े समय बाद मुझे अमृतसर में ही एक अच्छी जॉब मिल चुकी थी। जब मुझे जॉब मिली तो मैं काफी खुश था मैं इस बात से भी काफी खुश था कि मैं अब अपनी मां और अपनी पत्नी के साथ ही रहने वाला हूँ। मैं अब अपनी जॉब पर जाने लगा था मैं सुबह के वक्त ऑफिस जाता और शाम को ही मेरा घर लौटना हो पाता था। हमारे जीवन में सब कुछ ठीक चलने लगा था और मैं काफी ज्यादा खुश भी था मेरे जीवन में सब कुछ ठीक चलने लगा है लेकिन एक दिन मैं जब घर लौट रहा था उस दिन रास्ते में मेरी बाइक एक्सीडेंट हो गया जिस वजह से मुझे काफी ज्यादा चोट लगी। मैं घर पहुंचा तो मेरी पत्नी सुनीता बहुत ज्यादा घबरा गई वह कहने लगी आपको काफी ज्यादा चोट लगी है आपको अभी हॉस्पिटल जाना चाहिए। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं मैं पास के क्लीनिक में गया। मैं जब वहां पर गया तो वहा मुझे हमारे पड़ोस में रहने वाली पुष्पा भाभी मिली। जब वह मुझे मिली तो उन्होंने मुझसे कहा आपको क्या हुआ आपको चोट कैसे लगी?

मैंने उन्हें सारी बात बताई और कहा मेरा एक्सीडेंट हो गया था जिससे कि मुझे काफी ज्यादा चोट लगी वह मुझे कहने लगी आप अपना ध्यान रखिए। मैं अब घर वापस आ गया था कुछ दिनों बाद मैं ऑफिस जाने लगा था लेकिन पुष्पा भाभी से मेरी मुलाकात हर रोज हुआ करती। मैं जब भी उनसे मिलता तो मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगता और उन्हें भी बहुत ज्यादा अच्छा लगता था। वह भी हर रोज घर पर आने लगी थी उनके पति अपने काम के सिलसिले में बाहर रहते थे वह सुनीता के पास आ जाया करती। जब भी वह सुनीता के पास आती तो मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगता और उन्हें भी बहुत ही अच्छा लगता था लेकिन पुष्पा भाभी बिल्कुल भी ठीक नहीं थी उनका चाल चलन और चरित्र ठीक नहीं था जिस वजह से मैं अक्सर उन्हें किसी ना किसी नए पुरुष के साथ देखा करता था। उनका मन अब मेरे ऊपर आ चुका था वह मुझ पर डोरे डालने लगी थी। जब भी वह घर पर आती तो मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगता और उन्हें भी काफी ज्यादा अच्छा लगता था लेकिन हम दोनों एक दूसरे के  प्रति कुछ ज्यादा ही प्रभावित होने लगे थे मुझे वह बहुत ही ज्यादा अच्छी लगने लगी थी। मैं चाहता था मैं उनके साथ शारीरिक संबंध बनाऊ लेकिन यह संभव नहीं था क्योंकि घर पर मैं यह सब नहीं कर सकता था इसलिए एक दिन मैंने पुष्पा भाभी से मिलने की बात कही और मैं उनके घर पर चला गया। मैं जब उनके घर उनसे मिलने के लिए गया तो वह भी काफी ज्यादा खुश थी और मुझे भी बहुत ही अच्छा लग रहा था उन्होंने मुझे कहा मैं आपके लिए चाय बना कर ले आती हूं। वह मेरे लिए चाय बना कर ले आई जब वह मेरे लिए चाय बना कर लाई तो मैं और वह चाय पी रहे थे हम दोनों साथ में बैठे हुए थे मेरा मन उनके साथ सेक्स करने का था और मैंने जब उनकी मोटी जांघ पर अपने हाथ को रखा तो मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था और उन्हें भी काफी ज्यादा मजा आ रहा था। मैंने अब अपने लंड को बाहर निकाला जब मैंने अपने लंड को हिलाना शुरू किया तो वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी और कहने लगी मैं आपके लंड पर तेल से मालिश कर देती हूं।

उन्होंने मेरे लंड पर तेल लगाना शुरू किया और मेरे लंड को पूरी तरीके से चिकना बना दिया। मेरा मोटा लंड पूरी तरीके से कड़क हो चुका था मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया था। मैं चाहता था मैं उनके साथ सेक्स करू उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे सकिंग करना शुरू कर दिया था जब वह मेरे मोटे लंड को सकिंग कर रही थी तो उन्हें बहुत ज्यादा मजा आ रहा था और मुझे भी काफी ज्यादा मजा आने लगा था। मेरे अंदर की गर्मी बढ़ने लगी थी वह मुझे कहने लगी आपके लंड को चूसने में मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। मैंने उन्हें कहा आप मेरे लंड को बस ऐसे ही चूसते रहिए उन्होंने मेरे लंड से पूरी तरीके से पानी बाहर निकाल दिया था मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगा था। मेरी उत्तेजना इस कदर बढ़ने लगी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था और ना ही वह रह पा रही थी। मैंने उनके कपड़ों को उतारना शुरू किया। जब मैंने उनके कपड़ों को उतारना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी आप मेरे स्तनों का रसपान कर लीजिए। मैंने उनके स्तनों का रसपान करना शुरू किया जब मैं उनके स्तनों को चूस रहा था तो उनको बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और वह अपने पैरों को आपस में मिलाएं जा रही थी। मै उनके बड़े स्तनों को दबा रहा था तो उनसे मैंने दूध बाहर निकाल दिया था और मैं उस दूध का सेवन करने लगा था। अब मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से मैंने उनकी गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया था वह मेरे साथ बहुत ज्यादा खुश थी।

वह कहने लगी तुमने भी तो मेरी गर्मी को बढा कर रख दिया है अब मैं समझ चुका था मुझे उसकी चूत मै अपने लंड को घुसाना ही होगा। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाते हुए अंदर की तरफ डालना शुरू किया तो मेरा मोटा लंड उसकी चूत के अंदर की तरफ चला गया। मेरा मोटा लंड जैसे ही उसकी चूत के अंदर गया तो मुझे मजा आने लगा। मैंने उसे कहा तुम्हारी चूत तो बहुत ही ज्यादा टाइट है। वह बोली साहब मेरी चूत मारने वाला कोई है ही नहीं। मैंने उसे कहा तुम्हारे पति क्या तुम्हारी इच्छा को पूरा नहीं करता है। उसने मुझे कहा वह तो एक नंबर के शराबी है वह कभी घर ही नहीं आता है और मेरी इच्छा को वह पूरा नहीं कर पाता है। मैंने उसे कहा कोई बात नहीं आज मैं तुम्हारी इच्छा को पूरा कर दूंगा। मैंने उसकी इच्छा को पूरा करने का फैसला कर लिया था मैं उसे तेज गति से धक्के मार रहा था।

वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो रही थी और मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है। वह मुझे बोली आप ऐसे ही धक्के मारते रहिए। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था उसे चोदकर मैं बहुत ज्यादा खुश था। मैंने उसे कहा मुझे मजा आ रहा है वह कहने लगी मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है आप बस ऐसे ही मुझे धक्के मारते रहिए। उसकी चूतडो पर जब मैं प्रहार करता तो उसकी चूतडो से एक अलग ही आवाज पैदा हो रही थी जो कि एक अलग ही गर्मी पैदा कर रही थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं उसे तेजी से धक्के मारता। मेरे अंदर की गर्मी को उसने पूरी तरीके से बढा कर रख दिया था। वह मुझे कहने लगी साहब आपने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया है। मैंने उसे कहा तुमने भी तो मेरी गर्मी को बढ़ा दिया है।

मैंने उसे और भी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए जिससे कि उसकी चूतडे हिलने लगी। वह मेरी तरफ अपनी चूतडो को मिलाकर मुझे कहने लगी मुझे ऐसे ही चोदते जाओ। मैं उसे लगातार तेजी से चोदे जा रहा था मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था जब मैं उसे चोद रहा था। मेरे अंदर की गर्मी बढने लगी थी और उसके अंदर की गर्मी भी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैं समझ चुका था अब हम दोनों एक दूसरे का साथ बिल्कुल भी नहीं दे पाएंगे मैंने अपने माल को उसकी चूतडो पर गिराया। वह बोली आज तो आपने मेरी इच्छा पूरा कर दी है उसके बाद तो जैसे वह मेरे लंड को लेने के लिए तैयार रहती और जब भी मेरा मन होता तो मैं उसे चोद दिया करता। मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता जब भी मैं उसे चोदा करता और वह भी अपनी चूत मरवाने के लिए बहुत ज्यादा उतावली रहती।


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