लौड़ा घुसा और तेरी चूत गयी

Lauda ghusa aur teri chut gayi:

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कुछ समय पहले की बात है जब मैं और मोहित घर से भाग गए थे। उस समय मैं और मोहित एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। लेकिन यह बात मेरे घरवालों को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी। इसलिए वह मुझे मोहित से मिलने नहीं देते थे। और जब मैं उनके मना करने पर भी मोहित से मिलने जाती तो वह मुझे घर पर एक कमरे में बंद करके रखते थे। क्योंकि उनको हर समय चिंता रहती की लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। एक बार मेरे पिताजी मोहित के घर गए और उसके परिवार वालों से मोहित को समझाने के लिए कहा। मेरे पिताजी पुलिस कर्मचारी थे। मेरा एक बड़ा भाई था और मेरी मां घर में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। और मोहित बहुत ही गरीब घर से था। इसलिए मेरे पिताजी मोहित को पसंद नहीं करते थे। और हमें मिलने भी नहीं देते थे। मैं अपने घर वालो से तंग आ गयी थी। वह मुझे घर से बाहर भी नही जाने देते थे। लेकिन हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे।

एक दिन मैं घर वालो से छुपके मोहित से मिलने चली गयी। और मैंने और मोहित ने सोचा कि हम घर से भाग जाएं। और फिर कहीं दूसरे शहर जा कर शादी कर ले। फिर हमारे दोस्तों ने यहां से भागने में हमारी मदद की। मैं अपने घर से थोड़े बहुत पैसे लेकर आई थी। लेकिन वह पैसे ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाले थे। हमें कुछ ना कुछ तो करना ही था। फिर कुछ दिनों बाद हम दोनों ने शादी कर ली और मोहित को एक अच्छी नौकरी भी मिल गई। हम दोनों अब मुंबई में ही थे। हम दोनों को यहां कई साल हो गए थे।  मोहित अच्छा कमा लेता था और मैंने भी पार्लर का काम शुरू कर दिया था। अब मैं भी थोड़ा बहुत कमा लेती थी। और फिर हम दोनो एक घर लेने की सोच रहे थे। तो कुछ समय बाद हम दोनों ने अपने लिए एक घर ले लिया। और हम अपने नए घर में शिफ्ट हो गए। हम दोनों बहुत खुश थे। एक दिन अचानक मैं पार्लर से घर आई। और मुझे अपने घरवालों की याद आने लगी मैंने सोचा क्यों ना घर वालों से मिलने कानपुर जाया जाए। लेकिन मुझे डर था कि कहीं मेरे पिताजी मोहित के साथ कुछ करना दे। वह हम दोनों से बहुत गुस्सा थे। फिर मैंने मोहित से इस बारे में बात की लेकिन मोहित ने घर जाने से इंकार कर दिया। और फिर मैंने भी कुछ नहीं बोला। क्योंकि अब रहना तो मुझे मोहित के साथ ही था।

समय के साथ मोहित का रवैया भी बदलता गया। वह बहुत बदल चुका था अब वह मुझसे अच्छे से भी बात नहीं करता था और ना ही हम दोनों के बीच बहुत प्रेम रह गया था। जिस तरीके से पहले हम लोगों के बीच में बहुत प्यार था। लेकिन मोहित अब मेरी बात को अच्छे से ना तो सुनता था और ना ही कुछ जवाब देता था। वह सिर्फ अपने काम में व्यस्त रहने लगा था। इस वजह से मुझे भी उससे काफी तकलीफ होने लगी थी। मैं भी अपने पार्लर के काम में ही लगी रहती थी। मैं भी उसे कुछ ज्यादा समय नहीं देती थी और ना ही वह मुझे समय दे पाता था। लेकिन मेरे अंदर सेक्स की भूख तो थी उसको मुझे मिटाना था। मोहित तो मेरा साथ ही नहीं देता था। वह आता था और फिर सो जाता था।

वही पड़ोस में हमारे यहां शर्मा जी रहा करते थे। वह मुझ पर बड़ी लाइन मारते थे। लेकिन पहले मैं मोहित के प्यार में पागल थी। मैं उनकी तरफ देखती तक नहीं थी। लेकिन अब मोहित भी मुझे कुछ अच्छे से रिस्पांस नहीं करता है। इसलिए मुझे मजबूरन शर्माजी की तरफ जाना पड़ा। शर्मा जी तो कब से चाहते ही थी कि वह मुझे चोदे। मैंने कभी भाव नहीं देती थी।

एक दिन शर्मा जी अपनी पत्नी को लेकर मेरे ब्यूटी पार्लर में आए और वह कहने लगे कि इनको आज अच्छा से चमका देना। मैंने उन्हें कहा मस्त माल बना दूंगी। शर्मा जी ने मुझे कहा कि आपसे अच्छी तो नहीं लग पाएगी। आप एक नंबर की माल हो और वह मुस्कुराने लगे उनकी पत्नी भी मुस्कुराने लगी। मैं शर्मा जी से अपनी नजदीकियां बढ़ाने लगी थी। हम दोनों का फोन पर भी संपर्क होने लगा था। वह भी मुझे फोन कर कर पूछ ही लेते थे। मेरे हाल चाल मैं भी उन्हें अपने हाल चाल बता दिया करती थी। अब हमारे बीच में फोन सेक्स भी होने लगा था। मैं भी अपने योनि में उंगली करती थी। शर्मा जी मुझसे बात करते तो मैं अपनी थोड़ी सी भड़ास निकाल देती थी।

मोहित अपने काम के सिलसिले में कहीं बाहर चला गया था। उसने मुझे कहा कि मैं एक हफ्ते में ही लौट पाऊंगा तो तुम अपना ध्यान रखना और कुछ भी जरूरत पड़े तो मुझे फोन कर देना। वह यह कहते हुए चला गया।

शर्मा जी से तो मेरा संपर्क थे। मैंने शर्मा जी को अपने घर पर बुला लिया और शर्मा जी से कहा कि मुझे आज तुमसे चुदना है। वो कहने लगे मैं आज तुम्हें उठा उठा कर चोदूंगा। उन्होंने मुझे अपनी बांहों में इतनी तेजी से लिया कि मेरी तो हालत ही खराब हो गई। उसके बाद उन्होंने मुझे अपने हाथों से उठाते हुए। मेरे बेडरुम की तरफ ले गए और वहां मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। उन्होंने मेरे पूरे कपड़े फाड़ दिए और कहने लगे आप देखना मैं तुम्हें कैसे चोदता हूं। उन्होंने अपने कपडो को भी उतार कर फेंक दिया और वह सिर्फ बनियान में खड़े थे। उनका लंड लटक रहा था। वह काफी मोटा और बड़ा था। मैं यह सोचकर बहुत खुश हो रही थी। की आज मेरी चूत मे शर्मा जी का लंड घुसेगा। उन्होंने मेरी पैंटी को भी उतार दिया और मेरी ब्रा को भी मुझे एकदम नंगा कर दिया। वह मुझे कहने लगे तुम्हारा फिगर तो एकदम सॉलिड है। जहां से तुम्हारी गांड उठनी चाहिए थी। वहीं से उठी हुई है और तुम्हारे स्तन भी काफी बड़े बड़े हैं। वह कहने लगे मेरे बीवी के तो कुछ भी नहीं है इसलिए मुझे मजा भी नहीं आता है।

शर्मा जी ने मेरी दोनों टांगों के बीच से अपने लंड को मेरे सुराग में डाल दिया। उन्होंने बड़ी तेजी से मेरे छेद में अपने लंड को डाला। उनका इतना मोटा लंड था जब मेरी चूत मे गया तो मैं एकदम से उछल पड़ी। मेरी सांसे कुछ देर के लिए रुक गई। फिर मैंने सांस लेते हुए शर्मा जी को कहा आपका तो हब्शियों के जैसा है। आपकी मां ने क्या खाकर आपको पैदा किया था। जो आपका इतना मोटा लंड है। शर्मा जी कहने लगे मेरे पिताजी को तो इससे भी बड़ा था। मेरी मां तो उनका लंड झेल भी नहीं पाती थी। इसी वजह से वह एक दिन वह चल बसी। शर्मा जी ने जैसे ही अपना घोड़े जैसा लंड अंदर बाहर करते और बड़ी तेजी से झटका मारते तो मेरी सांसे रुक जाती। वह ऐसे ही झटका मारते जाते मेरी चूतडे उनके लंड से टकरा रही थी। वह काफी तेजी से मेरी चूतड़ों पर धक्का मार रहे थे। मुझे यह काफी अच्छा लग रहा था और उन्होंने ऐसा काफी देर तक मेरे साथ किया। मुझे लगा शायद शर्मा जी का झड़ गया होगा। लेकिन उनका कहां झड़ने वाला था। वह तो एक नंबर के चोदू किसम के आदमी हैं। वह तो जब तक मेरी का चूत का भोसड़ा नहीं बना देंगे। तब तक मानने वाले नहीं थे। अब उन्होंने मुझे 69 बना कर करने लगे। मैंने जैसे ही उनका लंड अपने मुंह में लिया तो मेरी योनि का तरल पदार्थ मेरे मुंह में जा रहा था जो उनके लंड पर लगा था। जिससे कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उन्होंने मेरे गले तक पूरा लंड डाल दिया था और मुझे काफी अच्छा लग रहा था। जब वह ऐसा कर रहे थे वह मेरी योनि और गांड को इतने अच्छे से चाट रहे थे। मानो जैसे कुछ स्वादिष्ट चीज को खा रहे हो।

शर्मा जी भी बहुत उतावले हो गए थे। उन्होंने मेरी गांड के छेद को चाट कर पूरा लाल कर दिया था। उन्होंने मेरी गांड में अपना लंड लगा दिया और उसे धक्का मारने लगे। उन्होंने बड़ी तेजी से धक्का मारा और अपनी पूरी ताकत से मेरी गांड के छेद में अपना लंड प्रवेश करवा दिया। जैसे ही वह मेरी पूरी गांड मे गया तो मेरी चीख निकल पड़ी। उन्होंने धक्का मारना शुरू कर दिया। जैसे जैसे वह धक्का मारते जाते मुझे मजा आ रहा था। 5 मिनट के बाद  उनका झड़ गया और उन्होंने मेरी गांड को अपने माल से भर दिया। उन्होंने अपने लंड को कपड़े से साफ करते हुए। दोबारा से मेरी योनि में लंड प्रवेश करवा दिया और मुझे धक्का मारना शुरू किया। उनके रगड़न से जो गर्मी पैदा हुई। उससे अब मेरा भी योनि झड़ चुकी थी और कुछ ही समय बाद शर्मा जी ने भी अपना वीर्य मेरी योनि में घुसा दिया। उन्होंने इतनी तेजी से डाला मानो ऐसा लगा जैसे किसी पिचकारी से उनका वीर्य निकल रहा हो।

 


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