मेरी भाभी का गरमा गरम यौवन

Meri bhabhi ka garma garam yauvan:

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मेरा नाम रोहन है मैं बुलंदशहर का रहने वाला हूं, मैं एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता हूं और मुझे फाइनेंस कंपनी में काम करते हुए एक वर्ष हो चुका है, मैं अपना काम बड़े अच्छे से कर रहा हूं। मैं जिस कंपनी में काम करता हूं वहां के मैनेजर से मेरी बहुत अच्छी बातचीत है क्योंकि वह मेरे मोहल्ले में ही रहते हैं और मैं उन्हें पहले से ही जानता था लेकिन मुझे पहले यह बात नहीं पता थी परंतु जब से मैं वहां काम करने लगा तब से मेरी और उनके बीच में बड़ी अच्छी दोस्ती हो गई। हम लोग कभी कबार शाम के वक्त एक साथ बैठ जाते हैं और छोटी मोटी पार्टी कर लेते हैं। वह शादीशुदा है, वह कभी कबार मेरे साथ बैठ जाया करते हैं और हम लोग दो चार पैक मार कर अपने घर चले जाते हैं। एक दिन मैं उनके साथ ऑफिस में लंच टाइम में बैठा हुआ था, वह मुझसे कहने लगे कुछ दिनों बाद ऑफिस में मुंबई से एक टीम काम देखने के लिए आ रही है लेकिन जितना काम होना था उतना काम तो हो नही पाया इसलिए मैं बहुत ज्यादा टेंशन में हूं। मैंने उन्हें कहा सर आप चिंता मत कीजिए, तब तक काम शुरू हो जाएगा और सब लोग अपना टारगेट पूरा कर पाएंगे।

उन्होंने भी सब लड़कों के ऊपर डंडा कर दिया था और कहने लगे मुझे जब तक काम नहीं मिलता तब तक मैं किसी को भी छुट्टी नहीं देने वाला, काम की वजह से ऑफिस से किसी को भी छुट्टी नहीं मिल रही थी, उसी दौरान मुझे मेरे भैया का फोन आया और वह कहने लगे तुम कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले लो, मैंने अपने भैया से कहा कि आज कल छुट्टी मिलना तो संभव नहीं हो पाएगा परंतु फिर भी मैं कोशिश करूंगा कि कुछ दिनों के लिए मैं छुट्टी ले लूँ। मैंने भैया से कहा वैसे कुछ काम था क्या, वह कहने लगे की तुम्हारी भाभी कुछ दिनों के लिए घर आ रही हैं और तुम्हें उन्हें उनके मायके लेकर जाना है, मैंने कहा भैया कुछ दिनों का काम और है यदि वह निपट जाता है तो उसके बाद मैं फ्री हो जाऊंगा। वह कहने लगे ठीक है तुम देख लो यदि तुम्हें छुट्टी मिल जाए तो तुम मुझे फोन कर देना। मैं उस वक्त दुविधा में था, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए लेकिन मैंने उसके बावजूद भी अपने मैनेजर से बात कर ली, वह मुझे कहने लगे वैसे तो ऑफिस में बहुत काम है लेकिन तुम मेरे परिचित हो इसलिए मैं तुम्हें कुछ दिनों के लिए छुट्टी दे देता हूं परंतु फिर भी तुम कोशिश करना कि जितना जल्दी हो सके तुम वापस आ जाओ।

मैंने उन्हें कहा ठीक है सर मैं कोशिश करूंगा कि जितना जल्दी हो सके मैं वापस आ जाऊंगा। उस दिन ऑफिस से फ्री होने के बाद मैंने अपने भैया को फोन किया,  मैंने अपने भैया को कहा कि आप भाभी को भेज दो, उन्होंने भाभी को अगले दिन भेज दिया। मेरे भैया दिल्ली में रहते हैं उन्हें दिल्ली में रहते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं। मेरी भाभी का नाम मोनिका है, वह भी स्कूल में पढ़ाती हैं। जब मेरी भाभी घर आई तो मेरे मम्मी पापा मेरी भाभी से मिलकर बहुत खुश हुए, वह लोग कहने लगे तुम कितने दिनों के लिए घर आई हो, भाभी कहने लगी अभी तो मैं कुछ समय घर पर रहूंगी लेकिन मेरे पापा की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए मुझे अपने मायके जाना पड़ेगा। मेरी भाभी का मायका भी बुलंदशहर में ही है। मेरी मम्मी ने कहा तुम्हारे पिताजी को क्या हुआ है, भाभी कहने लगी मेरे पिताजी की तबीयत कुछ ठीक नहीं है और वह बहुत ज्यादा बीमार हो गए हैं इसीलिए मुझे अपने पिताजी को देखने के लिए जाना पड़ेगा। मेरी मम्मी ने कहा कल हम लोग भी तुम्हारे साथ चलते हैं। अगले दिन मैं अपने मम्मी पापा और भाभी को अपने साथ भाभी के मायके ले गया। जब मेरी भाभी अपनी मम्मी से मिली तो वह बहुत खुश प्रतीत हो रही थी लेकिन उन्हें अपने पिताजी के बीमार होने का भी बड़ा दुख था। भैया का फोन भी मुझे उस वक्त आ गया, मैंने भैया से कहा कि मेरे साथ मम्मी पापा भी हैं और मैं भाभी को भी उनके मायके ले आया हूं, भैया कहने लगे तुम थोड़ा संभाल लेना, मैंने उन्हें कहा आप चिंता मत कीजिए मैं संभाल लूंगा क्योंकि भैया पर ही सारी जिम्मेदारियां थी।

भाभी घर में अकेली हैं इसीलिए मुझ पर ही घर की सारी जिम्मेदारी हैं। मैंने भाभी से कहा क्या आप भैया से बात करेंगे, उन्होंने मेरे भैया से फोन पर बात की और वह लोग काफी देर तक फोन पर बातें करते रहे। जब भाभी ने फोन रखा तो हम सब लोग उनके पिता जी से मिले, उनके पिता जी वाकई में बहुत ज्यादा सीरियस थे, वह अच्छे से बोल भी नहीं पा रहे थे। मुझे भी उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वह बहुत ही बीमार हो। मेरी मम्मी और पापा ने उनसे उनकी तबीयत के बारे में पूछा तो वह कहने लगे मेरी तबीयत ठीक नहीं है और मैं बहुत ज्यादा बीमार हो गया हूं, ना जाने ऐसा क्या हो गया कि मेरी तबीयत ठीक नहीं हो रही। उस दिन हम सब लोग भाभी के घर ही रुक गए रात को जब सब लोग सो चुके थे तो मैं छत पर टहल रहा था, कुछ देर बाद मैं जब सिढियों से नीचे उतर रहा था तो नीचे बाथरूम में मैंने देखा भाभी बाथरूम के अंदर थी, वह कुछ तो कर रही थी मैं थोड़ा सा सिढियो से ऊपर चढ़ा तो मैंने देखा भाभी अपनी योनि के अंदर उंगली डाल रही थी, मैं बड़े ध्यान से देखने लगा लेकिन उन्हें यह पता नहीं चला कि मैं ऊपर से देख रहा हूं। जब वह बाहर निकली तो मैंने भाभी से कहा आप तो बड़े ही मजे में अपनी योनि के अंदर उंगली डाल रही थी। वह मुझे कहने लगी तुमने कैसे देखा मैंने उन्हें बताया कि मैंने सीढ़ियों से सब देख लिया मैं जब छत से नीचे उतर रहा था तो मैं आपको देख रहा था आप बड़े ही मजे में अपनी योनि के अंदर उंगली डाल रही थी। भाभी कहने लगी हां तो तुम्हें उसमें कोई आपत्ति है क्या, मैंने भाभी को कसकर पकड़ लिया और उनके होठों को मैंने चूमना शुरू किया।

मैं उनके नर्म और मुलायम होठों को बड़े अच्छे से चूस रहा था। हम दोनों ही छत पर चले गए मैंने भाभी को अंधेरे में नंगा किया तो उनका बदन साफ दिखाई दे रहा था मैने उनके स्तनों का रसपान बहुत देर तक किया उसने मुझे बड़ा आनंद आ रहा था, मैं बहुत मजे ले रहा था। मैंने जब उनकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला वह चिल्लाने लगी और कहने लगी मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मैने उनके  चूचो का काफी देर तक रसपान किया, मेरे झटको से वह चिल्ला रही थी और कह रही थी तुम्हारा लंड तो बड़ा मोटा है। मैंने भाभी से कहा आपकी गांड भी कम उठी नहीं है आपकी गांड माराने का मौका मुझे मिल जाए तो मैं अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली समझूंगा। उन्होंने मुझे कहा पहले तुम मुझे संतुष्ट कर दो यदि तुम मुझे संतुष्ट कर पाए तो मैं तुम्हें अपनी गांड मारने का मौका जरूर दूंगी। मैंने उन्हें तेजी से धक्के मारे मैं इतनी तेजी से उन्हें धक्के मार रहा था वह अपने मुंह से मादक आवाज में चिल्ला रही थी। मैंने उन्हे पूरा संतुष्ट कर दिया, जैसे ही मेरा वीर्य उनकी योनि में गया उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया मेरा वीर्य उनकी योनि से टपक रहा था, मैंने उन्हें पूरा संतुष्ट कर दिया था इसलिए वह मुझसे बहुत खुश हो गई। उन्होंने मुझे कहा तुम मेरी गांड मार लो मैंने जैसे ही उनकी टाइट गांड के अंदर लंड डाला तो वह बड़ी तेजी चिखने लगी। मैंने उन्हें इतनी तेज धक्का मारे उनकी गांड से खून निकलने लगा। मैं उनकी गांड का भूखा हो चुका था मैंने उन्हें इतनी तेज गति से धक्के मारे कि उनकी बड़ी चूतड मेरे लंड से टकराती तो वह मेरे लंड से टकराते ही धराशाई हो जाती। मैं तेज गति से उन्हें धक्के मारता उनकी गांड बडी टाइट और मजेदार थी। मैंने बडे अच्छे से उनकी गांड मारी लेकिन उनकी गांड के छोटे से छेद को मैं ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया, जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैं बहुत ही खुश हुआ। मैंने उन्हें गले लगा लिया यह मेरा पहला ही मौका था जब मैंने अपनी भाभी के यौवन का रसपान किया था लेकिन उसके बाद तो जैसे लाइन ही लग गई थी। वह जब भी मुझे मिलती तो मैं उन्हें हमेशा खुश करता।


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