ये क्या हुआ चुदाई करके

Ye kya hua chudai karke:

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मेरा नाम राजीव है और मैं 11वीं में पढ़ने वाला छात्र हूं। मेरी उम्र 18 वर्ष है। हमारे स्कूल में एक टीचर हैं उनका नाम सुरजीत है। वह बहुत ही ज्यादा मारते हैं। यदि किसी को पढ़ाई में कुछ भी समझ नहीं आता तो वह उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाते है और उसे बहुत ज्यादा मारते भी थे। इसलिए सब बच्चे उनसे बहुत ही डरते थे। यदि उनके पास कोई ट्यूशन पढ़ने नहीं जाता तो वह उसे भी अपनी क्लास में फेल कर देते हैं। उन्होंने मुझे भी पिछले साल इसी वजह से फेल कर दिया था। मैं अब इस वर्ष भी फेल नहीं होना चाहता था। नहीं तो मुझे स्कूल से निकाल दिया जाता। इस वजह से मैंने अब फैसला कर लिया था कि मैं सुरजीत सर के घर पर पढ़ाई करने जाऊंगा। मैंने इस बारे में अपने पिताजी से भी बात की तो वह कहने लगे कि ठीक है। तुम एक काम करो उनके घर पर पढ़ाई करने चले जाओ।

मैं उनके घर पर पढ़ाई करने जाने लगा। उनके घर पर वह और उनकी पत्नी रहती थी। जिनका नाम दीपिका है। पहले वह जब प्यार से दीपू कह कर बुलाते तो मैं समझता था की उनके लड़के का नाम ही दीपू होगा लेकिन बाद में जब देखा तो दीपिका ही दीपू थी। वह अपनी  पत्नी को घर पर प्यार से ऐसा ही कहकर पुकारते थे। जब पढाते समय वह हमें कुछ पूछा करते तो वह किसी को नहीं आया तो उसे  बहुत मार पड़ती। जिसकी वजह से बच्चे अब उनसे बहुत ज्यादा डरने लगे थे और मुझे भी उनसे बहुत ही ज्यादा डर भी लगता था लेकिन मुझे इस साल फेल नहीं होना था। इस वजह से मैं उनके घर पर पढ़ने आता था। जब मैं घर पर जाता तो मेरे पिताजी हमेशा मुझसे पूछते कि बेटा तुम्हारे टीचर कैसा पढ़ाते हैं। मैं उन्हें यही कहता कि वह तो बहुत ही अच्छा पढ़ाते हैं। उनके जैसा तो कोई भी नहीं पढ़ाता है। स्कूल में भी वह  वैसे ही गुस्सा किया करते थे। वह बहुत ही गुस्से वाले थे। एक दिन वह हमें अपने घर पर पढ़ा रहे थे तो उनकी पत्नी के हाथ से चाय का कप छूट गया। तो उन्होंने उस पर अपना पूरा गुस्सा निकाल दिया। उन्होंने उसे बहुत ही ज्यादा मारा लेकिन हम सब कुछ भी नहीं बोल पाए। अगर हम कुछ बोलते हैं तो उसके बाद वह हमें भी मारते हैं। इस वजह से हमने कुछ भी नहीं बोला। हम उनसे बहुत डरते थे।  मुझे उनके पास पढ़ते हुए 6 महीने से ऊपर हो चुके थे और हमारे हाफ इयरली एग्जाम भी आ गए थे। मैंने जब वह एग्जाम दिए तो उसके बाद मेरे बहुत ही अच्छे नंबर आये। मैं समझ गया कि इस साल मैं पास हो जाऊंगा और अगर मैं उनके पास पढ़ने नहीं जाता तो वह मुझे जरूर फेल कर देते। मेरे घर वाले भी इस बात से बहुत खुश थे और वह यही कह रहे थे कि चलो तुम्हारे इस बार बहुत अच्छे नंबर आए। नहीं तो पिछले साल की तरह तुम फेल ही हो जाते। मैं उन्हें यह बात नहीं बता सकता था कि पिछली बार मुझे सुरजीत सर ने जान बूझ कर फेल किया था और अब उनके पास मैं ट्यूशन जा रहा हूं। इसलिए वह मुझे पास कर रहे हैं। अब मैं ऐसे ही घर से स्कूल जाता हूं और स्कूल से घर आने के बाद उनके पास पढ़ने के लिए।

कुछ दिनों बाद हमारे स्कूल में एक ड्राइंग कंपटीशन भी था। मुझे ड्राइंग का बहुत ही शौक था। तो मैं उसकी भी तैयारी करने लगा लेकिन सुरजीत सर को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं था। जब मैंने उन्हें यह बात बताई तो वह मुझ पर गुस्सा हो गये लेकिन मैंने उन्हें कहा कि सर ये मेरा शौक है। इस वजह से मैं ड्राइंग कंपटीशन में हिस्सा लेना चाहता हूं। मैंने उन्हें जैसे कैसे मना ही लिया और वह मान गए। अब मैंने अपने स्कूल के ड्राइंग कंपटीशन में हिस्सा लिया। मैं उसकी काफी समय से तैयारी भी कर रहा था और जब मैंने ड्राइंग कंपटीशन में हिस्सा लिया था तो उस कंपटीशन को मैंने ही जीता। क्योंकि मैं ड्राइंग बहुत ही अच्छे से बनाता हूं। मैंने अपने घर पर भी बहुत सारी पेंटिंग बनाई हैं। आज ना जाने उनका मूड किस बात से इतना खुश था। जब मैं उनके घर पर गया तो उन्होंने सबके सामने मुझे एक चॉकलेट दी और कहने लगे कि राजीव ने आज स्कूल में कंपटीशन जीता है। उसकी खुशी में मैं राजीव को एक चॉकलेट देना चाहता हूं। मेरे तो समझ में ही नहीं आ रहा था। आज पता नहीं उन्हें क्या हो गया है। मैंने भी चुपचाप वह चॉकलेट अपने बैग में रख ली लेकिन मुझे पता नहीं था कि वह मुझसे अपने घर में पेंटिंग बनवाना चाहते थे। कुछ दिन बाद उन्होंने मुझे कहा कि तुम एक काम करना। मेरे लिए एक बढ़िया सी पेंटिंग बनाकर ले आना। मैं दिल ही दिल में सोचने लगा कि सुरजीत सर कितने ज्यादा मतलबी इंसान है। मुझे तो बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ रहा था लेकिन फिर भी मैंने अपने आप को रोक लिया।

मैंने अब सूरजीत सर के लिए एक बहुत बढ़िया सी पेंटिंग बनाई और उन्हें दे दी। जिससे वह बहुत खुश हुए और मुझे कहने लगे कि तुमने बहुत ही बढ़िया पेंटिंग बनाई है। जब उन्होंने वह पेंटिंग अपनी पत्नी को दिखाई तो वह भी बहुत खुश हुई हो गई मुझे कहने लगी कि तुम बहुत ही अच्छे से पेंटिंग बनाते हो। तुमने कहां से सीखी है मैंने उन्हें बताया कि मुझे बचपन से ही शौक था और मैं घर पर पेंटिंग ही करता रहाता हू।

जब अगले दिन में सुरजीत सर के घर गया था। उन्होंने मुझे कहा कि तुम किचन में जाओ और मेरी पत्नी की थोड़ा मदद कर दो आज हमारे घर पर कुछ मेहमान आने वाले हैं। मैं जब उनकी मदद कर रहा था तो मेरी नजरों उनकी कमर पर जाती। जैसे ही मैं उनकी कमर को देखता तो मेरे अंदर से एक उत्तेजना जाग जाती। मैंने उन्हें एक झटके में अपने बाहों में ले लिया और बड़े कस कर दबा दिया। उनकी गांड मेरे मेरे लंड पर लग रही थी और वह कहने लगी तुम यह क्या कर रहे हो। मैंने उन्हें कहा कि कुछ नहीं मैं बस ऐसे ही आपकी गांड का नाप ले रहा था। अब मैंने उनकी गांड को दोबारा दबाना शुरु किया वह भी उत्तेजित हो गई। मैंने उनके स्तन और उनके होठों पर किस कर दिया। उनको मैने जमीन पर लेटा दिया। मैंने उनकी साड़ी के ऊपर करते हुए उनकी चूत को चाटना शुरू किया और बहुत देर तक ऐसे ही मैं करता रहा। अब उनसे भी सब्र नहीं हो रहा था और उन्होंने अपने पैरों को और चौड़ा कर दिया। मैंने उनके ब्लाउज के बटन को खोलते हुए उनके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया।

वह बड़ी तेजी से मादक आवाज निकाल रही थी। अब मैंने अपने लंड को उनकी योनि में डाल दिया और बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा। मैं जैसे ही तेज गति सो धक्का मारता तो वह बड़ी तेजी से चिल्लाने लग जाती और मुझे यह सब देख कर बहुत ही अच्छा लग रहा था। जैसे सूरजीत हमारी गांड मारता है वैसे आज मैं उसकी पत्नी को चोद रहा था।  मुझे अंदर ही अंदर से बहुत अच्छी खुशी मिल रही थी और मैं ऐसे ही बड़ी तेजी से धक्के मारते जाता। अब दीपिका भी मेरा पूरा साथ देने लगी और वह बड़ी तेज आवाज में चिल्लाने लगी। मेरा वीर्य गिरने वाला था और मैंने जैसे ही अपने वीर्य को उसकी योनि में गिराया तो मुझे थोड़ी देर अच्छा लगा लेकिन उसका बदन बहुत ही अच्छा था।

वह मुझसे देख कर रहा नहीं गया और मैंने दोबारा से उसे वही घोड़ी बनाते हुए। अपने लंड को उसकी योनि में डाल दिया और ऐसे ही बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा। मै इतनी तेज धक्के मार रहा था कि उसका पूरा शरीर हिल जाता और उसकी बड़ी तेज आवाज निकलने लगी। उसकी बड़ी-बड़ी गांड मेरा देखकर मेरा मन पूरा खराब हो जाता और मैं और तेजी से धक्के मारते जाता। मैंने उसे इतनी तेजी से धक्के मारना शुरू किया कि वह कभी आगे जाती और कभी पीछे लेकिन मैंने उसे छोड़ा नहीं अब उसने भी अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ करते हुए मुझसे टकराने लगी। मैंने भी उसे ऐसे ही झटके मारना प्रारंभ रखा। एक समय बाद मैंने उसके चूतड़ों पर ही अपने वीर्य को गिरा दिया और उसने अपनी साड़ी को नीचे किया मैंने अपने लंड को पैंट में डालते हुए थोड़ी देर बाद सूरजीत सर के पास चला गया। वह मुझे कहने लगे कि तुमने मैडम का हाथ अच्छे से बटाया। मैंने उन्हें कहा कि मैंने बहुत ही अच्छे से उनके साथ काम किया है यदि आपको भरोसा नहीं है तो आप उनसे भी पूछ सकते हैं। वह कहने लगा ऐसी कोई बात नहीं है। मैं मन ही मन बहुत खुश था और जब भी मैं उसके घर जाता तो मैं उसकी पत्नी को बहुत अच्छे से चोदता।


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