वह रात मेरे लिए खुशियां लेकर आई

Antarvasna, hindi sex story: मेरी पत्नी मुझ पर बेवजह शक करती थी इसलिए उसने मेरी दोस्त नंदनी के बारे में भी कहा कि तुम्हारा नंदनी के साथ में अफेयर चल रहा है मैं इस बात से बहुत दुखी हुआ और मैंने इसके लिए नंदिनी से माफी मांगी। उसने नंदनी को फोन कर के ना जाने क्या कुछ कह दिया था जिस वजह से मैं बहुत ही ज्यादा शर्मिंदा था नंदनी से तो मैं काफी दिनों से मिला भी नहीं था और ना ही मैं उससे बात कर रहा था परंतु मेरी पत्नी को ना जाने ऐसा क्यों लगता था कि नंदिनी के साथ मेरे रिलेशन है। मेरी पत्नी से मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुका था और मैं उससे डिवोर्स लेना चाहता था लेकिन पिताजी की वजह से मैं आशा से डिवोर्स नहीं ले पा रहा था क्योंकि पिताजी और आशा के पिताजी दोनों ही एक दूसरे के साथ बिजनेस करते हैं तो पापा नहीं चाहते थे कि बिजनेस में किसी भी प्रकार का कोई नुकसान हो इसी वजह से मैं आशा से डिवोर्स नहीं ले पा रहा था। पापा को मैंने कई बार अपने और आशा के रिश्ते के बारे में बताया था लेकिन वह कहने लगे कि बेटा तुम तो जानते ही हो कि आशा के पापा और मैं कितने पुराने दोस्त हैं और हम लोग साथ में बिजनेस भी तो करते हैं।

पापा की वजह से मैं आशा को बर्दाश कर रहा था मैं आशा से बहुत ही ज्यादा तंग आ चुका था क्योंकि मैं अपनी जिंदगी तो जी ही नहीं पा रहा था मैंने सोचा कि कुछ दिनों के लिए मैं अकेले कहीं चला जाता हूं इसीलिए मैं अकेले अपने दोस्त के फार्महाउस पर चला गया और वह भी मेरे साथ आया था। मेरा दोस्त रजत मुझसे कहने लगा कि रोहन तुम काफी परेशान दिखाई दे रहे हो मैंने उससे अभी तक कुछ भी नहीं कहा था लेकिन जब मैंने रजत को इस बारे में बताया तो रजत मुझे कहने लगा कि लगता है अब तुम माशा से कुछ ज्यादा ही परेशान हो चुके हो। आशा  से मैं इतना परेशान हो चुका था कि उससे मैं डिवोर्स लेना चाहता था यह बात मैंने रजत को भी बताई और रजत कहने लगा कि, तो फिर तुम आशा से डिवोर्स क्यों नहीं ले लेते मैंने उसे सारी समस्या बता दी। रजत नंदनी को भी जानता था मैंने जब रजत को नंदनी के साथ हुए वाक्य के बारे में बताया तो रजत कहने लगा कि आशा को ऐसा नहीं करना चाहिए था उसे नंदिनी के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए था नंदनी बहुत ही अच्छी और सुलझी हुई लड़की है।

नंदनी हम लोगों के साथ स्कूल से पढ़ती हुई आई है और वह बहुत ही अच्छी लड़की है रजत उसे अच्छी तरीके से पहचानता था क्योंकि रजत ने हीं सबसे पहले मेरी उससे मुलाकात करवाई थी वह रजत के पड़ोस में ही रहती है। कुछ दिनों तक मैं रजत के फार्महाउस में ही था इसलिए मैं थोड़ा खुश था और उसी बीच मुझे आशा का फोन आया और वह मुझे कहने लगी कि तुम अभी कहां हो। मैंने आशा को बताया कि मैं अपने किसी जरूरी काम से बाहर आया हूं मैंने आशा को इस बारे में कुछ नहीं बताया था लेकिन आशा को ना जाने कहां से यह बात पता चल गई और वह रजत के फार्महाउस पर आ गई। जब वह रजत के फॉर्म हाउस पर आई तो उसने ना जाने मुझे क्या कुछ नहीं कहा और रजत को भी उसने बहुत कुछ कहा जिस वजह से मैंने आशा को कहा कि तुम मुझे मेरी जिंदगी जीने क्यों नहीं देती हो। आशा मुझे कहने लगी कि ठीक है यदि तुम्हें ऐसे ही लगता है तो मैं अपने पापा के पास चली जाऊंगी मैंने उसे कुछ नहीं कहा और आशा अपना सामान लेकर अपने पापा के घर चली गई। जब इस बात का पता मेरे पापा को चला तो उन्होंने मुझे कहा देखो बेटा तुम्हें आशा से झूठ नहीं कहना चाहिए था मैंने पापा से कहा पापा कुछ दिन मैं अलग रहने के बारे में सोच रहा था और आशा को ना जाने यह बात कहां से पता चली जिस वजह से वह रजत के फार्महाउस पर भी आ गई और उसने वहां पर ना जाने मुझे और रजत को क्या कुछ कहा। आशा अब अपने मायके जा चुकी थी कुछ दिनों के लिए ही सही लेकिन मुझे अपनी जिंदगी जीने का मौका तो मिल गया था मेरे पास किसी भी चीज की कभी कोई कमी नहीं रही मेरे पापा ने हमेशा से ही मेरी जरूरतों को पूरा किया है और उसके बाद पापा के साथ ही मैं उनके बिजनेस में हाथ भी बटा रहा था। घर में मैं एकलौता हूं इसीलिए सब कुछ तो मेरा ही था लेकिन आशा ने मेरी जिंदगी को पूरी तरीके से बर्बाद कर के रख दिया था।

मेरा सबसे गलत फैसला आशा के साथ शादी करना ही था क्योंकि आशा ने कभी मुझे मेरी जिंदगी जीने ही नहीं दी वह तो हमेशा से ही चाहती थी कि मैं उसके मुताबिक चलूं लेकिन यह होना संभव नहीं था। पापा भी इस बात को अच्छी तरीके से जानते हैं और वह कहते हैं कि आशा को अपनी गलती का एहसास जरूर होगा मैंने पापा से कहा पापा उसे अपनी गलती का एहसास तो बिल्कुल भी नहीं होगा और मैं तो चाहता ही हूं कि वह मुझसे डिवोर्स ले ले मैं उससे बहुत ज्यादा तंग आ चुका हूं। पापा मुझे कहने लगे कि देखो बेटा डिवोर्स लेना किसी भी फैसले का कोई जवाब तो नहीं है ना मैंने उन्हें कहा पापा आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं लेकिन आप ही मुझे बताइए कि क्या मैं इस तरीके से आशा को बर्दाश करता रहूंगा। कुछ दिनों के लिए ही सही लेकिन मैं अपनी जिंदगी आराम से जी रहा था तभी एक दिन आशा ने मुझे फोन किया और वह मुझे कहने लगी की तुम्हें तो मेरी कोई फिक्र ही नहीं है। मैंने आशा से ज्यादा बात नहीं की और मैंने उससे कहा मैं पापा के साथ हूं तुमसे मैं बाद में बात करता हूं और मैंने फोन रख दिया। मैं बहुत ही खुश था क्योंकि मैं कुछ दिनों से अपने दोस्तों से भी मिल पा रहा था।

मैं इस बीच नंदनी से भी मिला मैं जब नंदनी से मिला तो वह मुझे कहने लगी आशा आजकल कहां है? मैंने उसे बताया वह अपने मायके गई हुई है उसने मुझसे झगड़ा कर लिया था जिसके बाद वह अपने मायके चली गई। नंदनी को मैंने पूरी बात बताई उसे अब यह पता चल चुका था कि वह अपने मायके जा चुकी है। नंदनी मुझसे कहने लगी रोहन मुझे नहीं मालूम था कि आशा तुम पर इतना शक करती होगी। मैंने उसे कहा मैं भी तो उसके साथ बहुत ज्यादा परेशान हो चुका हूं और मैं चाहता हूं कि वह मुझसे डिवोर्स ले ले लेकिन अभी तक उसने मुझसे डिवोर्स नहीं लिया है। नंदनी और मैं साथ मे उस दिन बैठे हुए थे। मैं नंदनी से अक्सर मिला करता उससे मिलकर मुझे बहुत ही अच्छा लगता था। एक दिन नंदनी के साथ में बैठा हुआ था उस दिन वह बहुत ही ज्यादा सुंदर लग रही थी मैंने नंदनी के हाथों को पकड़ते हुए उसके होठों पर किस कर दिया। वह मुझे कहने लगी रोहन तुम शादीशुदा हो और तुम्हें मालूम है ना अगर यह बात आशा को पता चली तो वह तुम्हें कभी भी माफ नहीं करेगी। मैंने नंदनी को कहा मुझे पता है लेकिन नंदनी भी अपने आप पर काबू नही कर पाई और उस दिन हम दोनों ने साथ में रुकने का फैसला किया। जब हम लोग कमरे मे थे मैं नंदनी को अपनी बाहों में लेना चाहता था। मैंने अब उसे अपनी बाहों में ले लिया जब मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैं जिस प्रकार से उसके होठों को चूम रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा गरम हो गई थी और मुझे कहने लगी मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं तुम्हारे होठों से खून निकाल दूं। नंदनी और मैं अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रहे थे मैने नंदनी के कपड़े उतारे और उसकी योनि को जब मैं चाटने लगा तो मुझे अच्छा लग रहा था। उसकी चूत से मैंने बहुत ज्यादा पानी बाहर निकाल दिया था उसकी चूत पर जब मैंने अपने लंड को लगाया तो वह मुझे कहने लगी तुम अपने लंड को अंदर की तरफ डाल दो। मैंने अपने मोटे लंड को नंदनी की चूत के अंदर प्रवेश करवा दिया मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर जा चुका था।

जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो वह बड़ी जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मैं अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही हूं। मैंने उसे कहा मैं भी अपने आपको नहीं रोक पा रहा हूं। वह कहने लगी तुम ऐसे ही मुझे धक्के देते रहो मैंने उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए। नंदिनी का गोरा बदन मेरी बाहों में था वह अपने पैरों को खोलने लगी जिस प्रकार से मैं उसे चोद रहा था उससे वह बहुत ही ज्यादा खुश हो रही थी और मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैने उसकी चूत से पानी कुछ ज्यादा ही बाहर निकाल दिया था। उसकी चूत से खून भी बाहर निकलने लगा था हम दोनों एक दूसरे का साथ बड़े अच्छे से दे रहे थे। नंदिनी मेरे ऊपर से आ गई उसने अपनी चूत मे मेरे लंड को ले लिया। मैंने उसे धक्के दिए वह बड़ी जोर से चिल्लाने लगी और कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मुझे धक्के देते रहो। मैंने उसे कहा मुझे तुम्हे चोदने मे बहुत मजा आ रहा है मैंने उसकी चूत बहुत ही देर तक मारी फिर वह मुझे कहने लगी मुझे लग रहा है मैं झड़ने वाली हूं।

वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी मैं उसे धक्के मार रहा था। मैंने उसके निप्पल को अपने मुंह में ले लिया था वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करती जा रही थी। मैने उसे कहा मैं तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदना चाहता हूं उसने अपनी चूतडो को मेरी तरफ किया हालांकि वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी थी लेकिन मेरी इच्छा अभी तक नहीं भरी थी क्योंकि मैंने ना जाने कबसे सेक्स का सुख ही नहीं लिया था। आशा के साथ मेरा सेक्स जीवन बिल्कुल भी अच्छे से नहीं चल रहा था इसलिए नंदनी को चोद कर मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था मैं जिस गति से धक्के मार रहा था उससे मुझे इतना मजा आ रहा था मैंने उसे बहुत देर तक धक्के मारे। वह मुझे कहने लगी अब मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मुझे धक्के मारते रहो। मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर बड़ी देर तक अपने लंड को किया। उसके बाद वह मुझसे चूतडे टकरा रही थी मेरे अंदर की गर्मी भी बाहर आने लगी थी और नंदनी की चूत से भी कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकल आया था। मैंने अपने वीर्य को नंदनी की गांड के ऊपर गिरा दिया उस रात हम दोनों साथ मे रुके वह रात मेरे लिए बहुत ही खुशियां लेकर आई।


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