वह मुझसे बहुत प्यार करती है

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Wah mujhse bahut pyar karti hai अपने दोस्त के माध्यम से मैं जब पहली बार आरोही से मिला तो मुझे आरोही से मिलकर बहुत अच्छा लगा आरोही से मिलकर मुझे ऐसा लगा कि जैसे उसके और मेरे ख्यालात बिल्कुल एक जैसे मिलते हैं। आरोही के भी बहुत बड़े सपने थे और मैं भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई जाना चाहता था आरोही और मैं हम दोनों ही मुंबई जाना चाहते थे। आरोही को मॉडलिंग करनी थी और मुझे भी अपना भविष्य मुंबई में नजर आता था हम लोग छोटे शहर के रहने वाले हैं इसलिए हम दोनों ने एक दिन यह फैसला किया कि हम लोग मुंबई चले जाएंगे। मैंने भी थोड़े बहुत पैसे जमा करने शुरू कर दिए थे क्योंकि मैं जिस कंपनी में जॉब करता था वहां पर मेरी सैलरी अच्छी खासी थी इसलिए मैं अब अपनी तनख्वाह से कुछ पैसे बचाने लगा। आरोही भी पैसे जमा करने लगी थी हम दोनों के बीच तो प्यार था ही और हम दोनों ने अब यह फैसला कर लिया था और हम दोनों मुंबई चले गए।

मुंबई जाने से पहले ना जाने कितनी ही तकलीफो का हमें सामना करना पड़ा क्योंकि हमारे परिवार वाले हमें मुंबई नहीं भेजने के लिए तैयार नही थे। मेरे पिताजी तो चाहते ही नहीं थे कि मैं मुंबई जाऊं परंतु मैं मुंबई चला गया और आरोही भी मेरे साथ मुंबई आ गई हम दोनों मुंबई चले गए और उसके बाद आरोही अपनी बहन के साथ रहने लगी। मैंने भी अपने लिए फ्लैट ले लिया था लेकिन फ्लैट का किराया ज्यादा होने की वजह से मैंने अपने साथ दो लड़कों को रख लिया वह मेरे साथ रूममेट के तौर पर रहने लगे और वह मुझे जो पैसे देते उससे मैं किराया दे दिया करता। सब कुछ बिल्कुल वैसा ही चल रहा था जैसा कि हम लोगों ने सोचा था एक दिन आरोही ने मुझे मिलने के लिए बुलाया हम दोनों कॉफी शॉप में मिले और वहां पर हम दोनों बैठ कर बात कर रहे थे। आरोही मुझे कहने लगी कि निखिल मुझे लगता है मेरा सपना पूरा नहीं होगा क्योंकि आरोही को अभी तक कुछ ऐसा होता हुआ दिख नहीं रहा था मेरी भी अभी तक जॉब नहीं लगी थी हम लोगों को करीब 3 महीने हो चुके थे और इन तीन महीनों में हमारे साथ कुछ भी ठीक नहीं हुआ।

उसके कुछ समय बाद मेरी जॉब लग गई और मैं एक कंपनी में जॉब करने लगा वहां पर मुझे अच्छी सैलरी मिलने लगी थी लेकिन आरोही अभी भी अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाई थी परंतु इस दौरान उसने मुझे अपने एक दोस्त से मिलवाया लेकिन मुझे वह लड़का मुझे कुछ ठीक नहीं लगा उसका नाम विराज था। विराज बिल्कुल भी ठीक नहीं था मैंने आरोही को उससे दूर रहने के लिए कहा लेकिन आरोही को लगा की वह उसकी मदद करेगा परंतु मैं विराज की नियत तो पहले ही समझ चुका था विराज मुझे कभी ठीक लगा। मैंने आरोही को उससे दूर रहने के लिए कहा था इस बीच हम दोनों के कई बार झगड़े भी हो जाया करते थे क्योंकि आरोही को लगता था कि मैं अब उस पर कुछ ज्यादा ही पाबंदियां लगाने लगा हूं। आरोही मेरे साथ नहीं रहती थी लेकिन उसके बावजूद भी मुझे आरोही का ध्यान रखना था लेकिन आरोही कुछ दिनों तक मुझसे बात ही नहीं कर रही थी उसे लगा था कि मैं उस पर कुछ ज्यादा ही पाबंदियां लगा रहा हूं जिस वजह से वह बहुत ज्यादा नाराज हो गई थी। मैंने आरोही को कई फोन किये लेकिन उसने मेरा फोन नहीं उठाया फिर एक दिन मैंने आरोही को मैसेज किया तो उसका मुझे रिप्लाई आया आरोही ने मुझे मिलने के लिए बुलाया। वह मुझे मिलने के लिए आई और जब वह मुझे मिलने के लिए आई तो उसने मुझे कहा कि निखिल मुझे माफ कर दो मैंने उसे कहा लेकिन तुम मुझसे माफी किस बात के लिए मांग रही हो। उसे भी अब अपनी गलती का एहसास हो चुका था क्योंकि विराज बिल्कुल भी अच्छा लड़का नहीं था उसने ना जाने कितनी ही लड़कियों को इससे पहले भी धोखा दिया था यह बात आरोही को पता चल चुकी थी इसलिए उसे लगा की उसे मुझ से माफी मांगनी चाहिए। मैंने आरोही को कहा अब तुम यह बात छोड़ो और अब तुम आगे बढ़ने के बारे में सोचो मैंने आरोही को बहुत समझाया और उसके बाद उसे भी अब काम मिलना शुरू हो चुका था वह अब काम करने लगी थी जिस वजह से वह खुश रहने लगी थी। हम दोनों के बीच प्यार तो पहले से ही था और अब हम दोनों को अपने सपने सच होते हुए दिखाई दे रहे थे मैं जिस कंपनी में जॉब करता था उस कंपनी में मेरा प्रमोशन भी हो चुका था और हम लोग कुछ दिनों के लिए अपने घर जाना चाहते थे।

मैंने आरोही से कहा कि क्या तुम भी मेरे साथ घर चलोगी तो वह कहने लगी हां क्यों नहीं और हम दोनों कुछ दिनों के लिए अपने घर चले गए। काफी समय बाद अपने माता पिता से मिलकर अच्छा लग रहा था और उनके साथ मैं बहुत खुश था इतने समय बाद अपने माता पिता के साथ अच्छा समय बिता कर मैं काफी खुश था। उसी बीच आरोही ने मुझे फोन कर के बुलाया और हम लोग मेरे घर के पास ही मिले जब हम लोग मिले तो उस वक्त आरोही मुझे कहने लगी कि निखिल मुझे घर में बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा हम लोगों को मुम्बई चले जाना चाहिए। मैंने आरोही से कहा कि लेकिन मैं तो घर पर कुछ दिन रहना चाहता हूं आरोही मुझे कहने लगी कि मैं कुछ दिनों के बाद मुंबई चली जाऊंगी मैंने आरोही को समझाया लेकिन वह मेरी बात नही मानी और वह मुंबई चली गई। कुछ दिनों तक हम लोगों की फोन पर ही बातें होती रही और मुझे लगा कि मुझे भी अब मुंबई वापस चले जाना चाहिए क्योंकि मुझे भी काफी अकेलापन महसूस हो रहा था और मैं भी मुंबई जाने की तैयारी करने लगा। मैंने आरोही से कहा कि मैं आज रात तक मुंबई पहुंच जाऊंगा तो आरोही मुझे कहने लगी की मैं अपने किसी काम से बाहर हूँ उससे मेरी ज्यादा देर तक तो बात नहीं हो पाई।

शाम के वक्त मैं मुंबई पहुंच गया जब शाम के वक्त मैं मुंबई पहुंचा तो मैंने आरोही को फोन कर दिया था और  आरोही से मेरी काफी देर तक फोन पर बात हुई उसने मुझे कहा कि मैं बस थोड़ी देर बाद आ रही हूँ। मैंने उसे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारा इंतजार रेलवे स्टेशन पर ही कर रहा हूं मैं आरोही का स्टेशन पर इंतजार कर रहा था लेकिन आरोही को पहुंचने में थोड़ा देर हो गई थी इसलिए जब वह पहुंची तो वह मुझे कहने लगी कि निखिल मैं स्टेशन पहुंच चुकी हूं। मैंने आरोही को कहा मैं स्टेशन से बाहर के लिए आ रहा हूं मैं स्टेशन से बाहर आया तो आरोही को मैंने देख लिया था। आरोही से कुछ दिनों बाद मैं मिल रहा था तो उसने मुझे देखते ही गले लगाया और कहने लगी कि निखिल मैं तुम्हें बहुत मिस कर रही थी। मैंने आरोही को कहा मैं भी तो तुम्हें मिस कर रहा था इसीलिए तो मैं भी वापस चला आया क्योंकि मुझे तुम्हारी बहुत ज्यादा याद आ रही थी। मैं और आरोही एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश थे। आरोही से काफी दिनों बाद मिलकर मैं बहुत ज्यादा खुश था। हम दोनों मेरे फ्लैट में चले आए जब हम लोग मेरे फ्लैट में आए तो हम दोनों साथ में बैठ कर बात कर रहे थे लेकिन इतने दिनों से हम लोगों के बीच सेक्स नहीं हो पाया था इसलिए मेरा मन उस दिन आरोही के साथ सेक्स करने का करने लगा। मैंने आरोही से जब इस बारे में कहा तो वह मुझे कहने लगी निखिल मेरा आज बहुत मन हो रहा है। उसने मेरे सामने अपने कपड़े उतार दिए और वह मेरे सामने नंगी बैठी हुई थी। मैं उसे देखकर बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रहा था मैंने उसे कहा मुझे लगता है मैं अपने आपको रोक नहीं पाऊंगा। मैंने आरोही के बदन को महसूस करना शुरु किया हम दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे मैं आरोही के स्तनों को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान कर रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था।

हम दोनों के बदन की गरमाहट पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। आरोही का शरीर कुछ ज्यादा ही गर्म होने लगा था उसकी योनि के अंदर जब मैंने अपनी उंगली को घुसाया तो मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा था। काफी समय बाद में आरोही के बदन को मै महसूस कर रहा था। जब उसकी चूत से पानी निकलने लगा तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था काफी देर तक मैंने उसकी चूत के अंदर उंगली डाली। उसके बाद वह अपने आपको बिल्कुल भी ना रोक सकी और उसने अपने पैरों को खोला जब उसने अपने पैरों को खोला तो मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को धीरे-धीरे घुसाना शुरू किया मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर तक जा चुका था। मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह बड़ी जोर से चिल्लाई। मैं उसे तेज गति से चोदने लगा मुझे अच्छा महसूस हो रहा था वह मेरा साथ बडे अच्छे से दे रही थी वह अपने पैरों को खोल रही थी।

वह मुझे कहती निखिल तुम ऐसा ही मुझे धक्के देते रहो। मैंने उसे काफी देर तक ऐसे ही धक्के दिए मैं जब उसके स्तन को अपने मुंह में लेकर उसे धक्के देता तो वह मुझे कहने लगी तुम मेरी योनि के अंदर तक अपने लंड को डाल दो। मैंने उसे घोड़ी बना दिया और जब मैंने उसे घोड़ी बनाया तो मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया और अब उसे में धक्का देने लगा। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर तक जा चुका था मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के दिए जाता। वह भी मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी जब वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाती तो मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ जाती। वह मुझे कहती तुम ऐसे ही मुझे चोदते रहो मैंने उसकी चूतड़ों को कसकर अपने हाथों में पकड़ा हुआ था जिससे कि मेरा लंड आसानी से उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था। उसकी चूतडो से अलग प्रकार की आवाज पैदा हो रही थी वह मेरी गर्मी को और भी ज्यादा बढ़ा रही थी। हम दोनों इतने ज्यादा गरम हो चुके थे और पसीना भी निकलने लगा था वह भी पूरी तरीके से पसीना पसीना होने लगी थी। गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगे थे लेकिन अभी तक मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई थी। मैंने आरोही को कहा आज तो मेरा मन ही नहीं भर रहा है वह मुझे कहने लगी तुम मुझे धक्के देते रहो। मैं उसे ऐसे ही काफी देर तक चोदता रहा। कुछ देर बाद मेरा वीर्य पतन हुआ तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हुआ। हम दोनो एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश हैं और वह मुझसे बहुत प्यार करती है।


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