वह दिन याद है

Antarvasna, hindi sex story:

Wah din yaad hai यह बात कुछ वर्ष पुरानी है उस वक्त मैं अपनी दीदी के साथ रहा करता था उनके पति विदेश में नौकरी करते हैं इसलिए मुझे उनके साथ रहना पड़ा मैं उनके साथ रहकर ही अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहता था और जब मेरी पढ़ाई पूरी हो गई तो उसके बाद मैं नौकरी की तलाश में लखनऊ चला आया। जब मैं लखनऊ आया तो उसके बाद मेरी दीदी से फोन पर बात होती रहती थी एक दिन दीदी ने मुझे कहा कि सुनील तुम काफी दिनों से घर नहीं आए हो तुम मुझसे मिलने के लिए आ जाओ। दीदी बनारस में रहती हैं तो मैं उनसे मिलने के लिए चला गया और जब मैं उनसे मिलने गया तो मैंने दीदी से पूछा कि जीजा जी घर कब आएंगे। दीदी कहने लगी कि सुनील तुम्हें तो पता ही है कि उनका कुछ भी पता नहीं कि वह घर कब आएंगे अभी कुछ समय पहले ही तो वह गए थे। दीदी ने मुझे उस दिन बताया कि जीजा जी अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं इसलिए वह जल्द ही घर आ जाएंगे और अपना कारोबार शुरू करेंगे वह दीदी के साथ ही रहना चाहते हैं।

मैं और दीदी बात कर रहे थे कि तभी दीदी के पड़ोस में रहने वाली एक लड़की वहां पर आई मैंने उसे उससे पहले कभी नहीं देखा था दीदी ने मेरा परिचय आकांशा से करवाया। जब मेरी बात आकांक्षा से हुई तो आकांक्षा को पहली नजर में ही जैसे मैंने पसंद कर लिया था और उसे देखकर मेरी दिल की धड़कन तेज होने लगी थी लेकिन मैं दीदी के घर पर ज्यादा दिनों तक नहीं रुकने वाला था और उसके बाद मेरी आकांक्षा से बात भी नहीं हुई और मैं वापस लखनऊ आ चुका था। जब मैं लखनऊ वापस आया तो मैं आकांक्षा को याद करने लगा और मैंने उसे उस दिन फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी मेरी फ्रेंड रिक्वेस्ट उसने तुरंत स्वीकार कर ली और हम दोनों की बातें होने लगी। हम दोनों की पहले फेसबुक चैट के माध्यम से बात होती थी काफी समय तक हम दोनों ने एक दूसरे से फेसबुक चैट के माध्यम से बात की लेकिन फिर हम दोनों की फोन पर बात होने लगी थी उसने मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दिया था इसलिए हम दोनों की देर रात तक बात हुआ करती थी।

मुझे आकांक्षा से बात कर के बहुत अच्छा लगता और वह भी मुझसे बात कर के काफी खुश थी आकांक्षा और मेरे बीच प्यार बढ़ने लगा था। मैं जब दीदी को मिलने जाता तो आकांक्षा मुझे मिल जाती और मुझे बहुत ही अच्छा लगता यह बात मेरी दीदी को भी पता चल चुकी थी। उस दिन जब दीदी ने मुझे कहा कि देखो सुनील तुम आकांशा को भूल जाओ उसके पापा कभी भी तुमसे उसका रिश्ता नहीं कर पाएंगे क्योंकि आकांक्षा के पिताजी बहुत ही सख्त मिजाज हैं और वह बहुत ही गुस्सैल किस्म के हैं वह आकांशा को किसी से मिलने भी नहीं देते और उन्हें अगर यह पता चला तो वह तुम पर बहुत गुस्सा हो जाएंगे। मुझे शायद इस बात का इतना अंदाजा नहीं था मुझे लगा था कि यह सब बड़ी आसानी से हो जाएगा लेकिन यह सब इतनी आसानी से कहां होने वाला था। अभी तक आकांक्षा के पापा को कुछ भी पता नहीं चल पाया था और हम दोनों फोन पर बातें किया करते थे आकांक्षा भी कई बार मुझसे अपने पापा का जिक्र कर के डर जाती और कहती कि अगर कभी पापा को तुम्हारे और मेरे बारे में पता चला तो वह मेरी शादी करवा देंगे। मुझे नहीं पता था कि आकांक्षा अपनी जगह बिल्कुल ठीक है और जब उसके पापा को इस बारे में पता चला तो उसके पापा ने उसका रिश्ता कहीं और ही तय कर दिया उन्होंने आकांक्षा पर मुझसे मिलने पर भी पाबंदी लगा दी। आकांशा मुझसे मिल ही नहीं पाती थी, वह चोरी छुपे मुझसे फोन पर बात कर लिया करती थी हम दोनों की फोन पर ही बातें होती थी और मुझसे जब भी आकांशा बात करती तो वह मुझे कहती कि सुनील मैं तुम्हें कहती थी ना की पापा को इस बारे में पता चला तो वह कभी भी हम दोनों के रिश्ते को स्वीकार नहीं करेंगे और उन्होंने मेरा रिश्ता कहीं और ही तय कर दिया। उन्होंने एक पैसे वाले लड़के से आकांशा की शादी तय कर दी थी वह लड़का एक अच्छे पद पर था और उसका परिवार काफी संपन्न था अब आकांक्षा मुझसे मिल भी नहीं पाती थी लेकिन उससे मेरी फोन पर बातें होती थी आकांक्षा को लेकर मैं भी काफी चिंतित रहता था।

मैंने एक दिन आकांशा से कहा कि हम लोग कहीं भाग चलते हैं लेकिन आकांक्षा ने मुझे मना कर दिया और कहा कि नहीं सुनील मैं नहीं भाग सकती मेरी और तुम्हारी परिवार की भी इसमे बदनामी होगी। मैंने आकांशा को कहा क्या फिर तुम उस लड़के से शादी कर लोगी तो वह मुझे कहने लगी कि मुझे अभी इस बारे में कुछ नहीं पता कि मुझे क्या करना है लेकिन हमारी सगाई तो हो ही चुकी है और अब पापा मेरी शादी करवा ही देंगे। मैंने उस दिन फोन रख दिया और मैं बहुत परेशान था मैं आकांक्षा से मिलना चाहता था उसे मिले हुए भी मुझे काफी समय हो चुका था। जब मैं आकांक्षा से मिला तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा वह मुझसे मिलने के लिए दीदी के घर पर आ गई। दीदी उस दिन घर पर नहीं थी इसलिए हम दोनों साथ में बैठे हुए थे काफी देर तक हम लोगों ने बात की और जब आकांक्षा ने मुझे गले लगा लिया और कहा सुनील मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊंगी। मैंने उसे कहा मैं भी तुम्हारे बिना कहां रह पाऊंगा काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे लेकिन जब आकांक्षा ने मेरे होठों को चूम लिया तो मेरे अंदर भी एक करंट सा दौड पडा।

मै उसके होठों को चूमने लगा उसके होठों को चूम कर मुझे बहुत ही अच्छा लगा वह भी बहुत ज्यादा खुश थी। हम दोनों एक दूसरे के साथ बिस्तर पर लेटे थे हम दोनों एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार हो चुके थे उसने अपने गदराए हुए बदन को मुझे सौंप दिया था। मैंने उसके होठों को तब तक चूसा जब तक उसके होठों से खून नहीं आ गया और उसके बदन की गर्मी इतनी बढ़ने लगी थी कि वह अपने कपड़े उतारकर मुझे कहने लगी तुम मेरे स्तनों को अपने मुंह में ले लो। मैंने उसके स्तनों को देखा तो मैं अपने लंड को उसके स्तनों से रगड़ने लगा उसके स्तनों के बीच दरार में मैं जब अपने लंड को रगड रहा था तो मुझे अच्छा महसूस हो रहा था और वह भी बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई थी। उसने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी ओर खींचा और अपने मुंह में ले लिया वह उसे अंदर लेकर चूस रही थी मुझे अच्छा लग रहा था। वह बहुत ज्यादा खुश हो रही थी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया था मैंने उसकी योनि को सहलाना शुरू किया तो उसकी योनि से पानी बाहर निकलने लगा उसकी चूत से जब पानी निकलने लगा तो मैंने उसे अपनी जीभ से चाटना शुरु किया और बड़े ही अच्छे से मैं उसकी चूत को चाटता जा रहा आकांक्षा पूरी तरीके से तड़पने लगी थी। वह एक पल भी नहीं रह पा रही थी उसने मुझे कहा कि सुनील आज तुम मेरी चूत मारकर मुझे अपना बना लो। मैंने उसे कहा मैं तो आज तुम्हें अपना बना ही लूंगा क्योंकि आज के बाद शायद हम लोग कभी मिल भी ना पाए। वह मुझे कहने लगी कि तुम बिल्कुल सही कह रहे हो लेकिन मैं तुम्हें हमेशा याद रखूंगी यह कहते ही मैंने उसकी चूत मे लंड डाल दिया उसकी चूत से खून की पिचकारी  बाहर की तरफ निकली और वह मेरे लंड पर लगी। जब मेरे लंड पर खून की पिचकारी लगी तो मुझे अच्छा लगने लगा था वह भी बहुत ही ज्यादा उत्तेजीत हो गई उसने मुझे कहा मुझे मजा आ रहा है और ऐसा लग रहा है जैसा तुम ही मेरे पति हो और मैं तुम्हारे साथ सुहागरात मना रही हूं।

उसने अपने पैरों को खोल लिया था मैंने उसकी जांघों को कसकर पकडे हुआ था जब मैंने उसकी जांघों को कस कर पकड़ा था तो मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं अच्छे से उसके साथ संभोग कर रहा था। आकांक्षा की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी उसकी गर्मी इतनी बढ चुकी थी उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था वह मुझे साफ प्रतीत हो रहा था वह बहुत जल्द ही झडने वाली थी। उसकी चूत से खून बहुत तेजी से बाहर निकल रहा था जल्द ही वह झड़ गई तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ गया। मैंने उसे कहा अभी मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई है आकांक्षा की चूत बहुत ज्यादा टाइट है लेकिन अभी तक मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई थी।

जब मैं उसकी योनि के अंदर बाहर लंड को करता तो वह मुझे कहने लगी आज तो ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं तुम स चूत मरवती ही रहूं। आकांक्षा मुझे कहने लगी तुमने मेरी चूत पूरी तरीके से छिलकर रख दी है। उसकी चूत से खून बाहर करना निकल रहा था मैंने उसे कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है कुछ देर बाद मेरा वीर्य गिरने वाला था। मैंने लंड को बाहर निकालकर उसके स्तनों पर वीर्य गिरा दिया आकांक्षा खुश हो गई और कहने लगी मैं तुम्हारे साथ एक बार और सेक्स करना चाहती हूं। मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को लगाया और दोबारा से उसकी योनि के अंदर लंड प्रवेश करवा दिया उसकी योनि में लंड जाते ही उसके मुंह से चीख निकली और वह चिल्ला उठी। मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया था जब मैं ऐसा कर रहा था तो उसे मजा आता और  वह मुझे कहने लगी मुझे तेजी से धक्के मारो। मैं उसे तेज गति से धक्के मारे जा रहा था जिस से कि मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैंने काफी देर तक उसकी चूत का मजा लिया और उसकी चूत के अंदर ही अपने माल को गिरा कर उसकी इच्छा को मैंने पूरी तरीके से शांत कर दिया था। उसके बाद आकांक्षा की शादी हो गई लेकिन आज भी मुझे वह दिन याद है जब मैंने उसके साथ संभोग किया था।


Comments are closed.