विनय के साथ मेरा चुदाई का सपना पूरा हुआ

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Vinay ke sath mera chudai ka sapna pura hua विलायत जाने के सपने से ही मेरा मन प्रफुल्लित हो उठता और आखिर होता भी क्यों नहीं क्योंकि मेरी शादी जो विदेश में होने जा रही थी। मैं बचपन से ही सोचा करती थी कि मेरी शादी विदेश में ही हो मेरी मौसी की लड़की विलायत में ही रहती है और वह जब भी वहां से चंडीगढ़ आती है तो हमेशा वहां की बड़ी तारीफ किया करती है। मुझे भी लगता था कि जब मैं शादी करूं तो मेरी शादी विलायत में हो और आखिरकार मेरे लिए जो रिश्ता आया उससे मैं बड़ी खुश हुई। जब मेरे लिए एन आर आई लड़के का रिश्ता आया तो मैं खुशी से झूम उठी थी मेरे लिए रंजीत का रिश्ता आया रंजीत विदेश में एक अच्छी कंपनी में इंजीनियर हैं। वह मेरी मौसी के परिचित हैं और उन्होंने ही हम दोनों परिवारों को मिलवाया था रंजीत से मेरी सगाई के वक्त मुलाकात हुई थी उससे पहले मेरी उससे सिर्फ एक दो बार ही मुलाकात हो पाई थी। सब लोग खुश थे क्योंकी इतना अच्छा रिश्ता था और भला उसे कौन ठुकरा सकता था।

पिताजी ने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतना अच्छा रिश्ता मेरे लिए आ जाएगा और मैं तो शादी के नाम से ही खुश थी। मेरी सारी सहेलियां मुझे छेड़ती और कहती की तुम तो विदेश चली जाओगी और हमें तुम भूल जाओगी मैं सब से कहती की ऐसा कुछ भी नहीं होगा। मैं हर रोज शाम के वक्त रंजीत से मैसेज पर बात किया करती थी मुझे रंजीत से बात करना अच्छा लगता था। अब हम दोनों की शादी का दिन भी तय हो गया था शादी का मुहूर्त निकल चुका था हमारे परिवार और हमारे सब रिश्तेदार बड़े खुश थे। घर में खुशियों का माहौल था परन्तु जैसे ही रंजीत की सच्चाई सबके सामने आई तो घर का माहौल जैसे मातम में बदल गया वह तो गनीमत रही कि शादी होने से पहले ही रंजीत की सच्चाई सबके सामने आ गई। मेरे मामा जी को पता नहीं कहां से यह खबर लगी और उन्होंने जब मेरे पिताजी को यह बात बताई तो पिताजी जैसे सदमे में आ गए। उन्होंने मेरी मां से जब यह बात कही तो घर की खुशियां मातम में तब्दील हो चुकी थी मेरे भी सपने चकनाचूर हो चुके थे और मेरी खुशियां जमीन पर आ गिरी थी। जब पिताजी को यह बात पता चली कि रंजीत तो पहले से ही शादीशुदा है तो वह बहुत ज्यादा दुखी हो गए थे और सारे रिश्तेदार भी अब अपने घर जाने लगे थे।

सब लोग पिताजी को हिम्मत देने की कोशिश करते लेकिन पिताजी तो जैसे अब अंदर से टूट चुके थे और इस बात को अभी कुछ ही समय हुआ था घर में बिल्कुल ही दुख का माहौल था और कोई भी किसी से अच्छे से बात नहीं करता। मैंने तो जैसे हंसना ही छोड़ दिया था और आखिरकार होता भी क्यों नहीं मेरे सपने को चकनाचूर हुए थे और रंजीत के परिवार ने इतना बड़ा धोखा हमें जो दिया था। रंजीत तो पहले से ही शादीशुदा था यदि यह बात हमें पहले पता होती तो शायद कभी भी पापा इस रिश्ते के लिए हामी नहीं भरते लेकिन एक एन आर आई लड़के का रिश्ता आना बहुत बड़ी बात थी और भला उसे मेरा परिवार कैसे ठुकरा सकता था। उन्होंने भी गलती की कि उन्होंने रंजीत के बारे में पूरी जांच पड़ताल नहीं की लेकिन मेरा जीवन तो पूरी तरीके से बर्बाद हो चुका था। मेरी मम्मी ने मुझे कहा बेटा देखो जो होना था वह तो हो चुका है इसमें तुम्हारी तो कोई गलती नहीं है तुम अब इस बात को भूल कर आगे बढ़ने की कोशिश करो और अपने पिताजी को भी समझाओ वह तो बिल्कुल टूट चुके हैं और वह किसी से भी बात नहीं करते। मैंने भी अपने पिताजी को देखा तो मुझे लगा मुझे भी उन्हें समझाना चाहिए मैंने अपने पिताजी से बात की तो वह कहने लगे सब लोग कितने खुश थे और घर में कितना अच्छा माहौल था लेकिन जब से यह बात सबको पता चली है तब से जैसे हमारे रिश्तेदार ने हमारे घर आना ही बंद कर दिया है मैं इस बात से बहुत ज्यादा दुखी हूं। मैंने पिताजी को झूठी मुस्कुराहट से कहा कि पापा मैं खुश हूं आप बेवजह ही चिंता कर रहे हैं ऐसा कुछ नहीं है लेकिन पिता जी कहां मानने वाले थे वह तो जैसे अपनी सारी दुनिया छोड़कर बस एक बंद कमरे में बैठे हुए थे क्योंकि उन्होंने अपने जीवन भर की जमा पूंजी मेरी शादी में लगा दी वह पैसा तो अब वापस नहीं आने वाला था और ऊपर से मेरी शादी भी नहीं हो पाई।

अब उन्हें इस बात की चिंता थी कि मुझसे शादी कौन करेगा क्योंकि लड़की की शादी टूट जाती है तो सब लोग ना जाने उसके बारे में क्या क्या सोचते हैं लेकिन मैंने इस बात को भूल कर अब आगे बढ़ने के बारे में सोच लिया था। मैंने जब अपने लिए नौकरी देखनी शुरू की तो मुझे एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिल चुकी थी मैं चाहती थी कि कम से कम नौकरी कर के मेरा मन तो लगा रहेगा इसीलिए मैं नौकरी करना चाहती थी। मैं अपने ऑफिस सुबह चली जाया करती थी और शाम को मैं घर लौटती उस बीच मेरी ऑफिस में भी कुछ अच्छी सहेलियां बन चुकी थी इसलिए मैं अब उनसे भी बात करने लगी थी। जब मैंने अपनी सहेली अर्चना को अपने बारे में बताया तो वह कहने लगी की तुम्हारे साथ ऐसा क्या हुआ था। मैंने उसे कहा मेरी शादी होने वाली थी और हम लोगों ने सब तैयारियां कर ली थी लेकिन उसके कुछ समय बाद जब हमें रंजीत की असलियत पता चली तो जैसे मेरी दुनिया ही खत्म हो गई थी। अर्चना कहने लगी कि अब तुम्हें इन सब बातों को भूल कर आगे बढ़ना पड़ेगा। मैंने अर्चना से कहा तभी तो मैं यहां जॉब करने के लिए आई हूं ताकि मैं अपने आप में बिजी रख सकूं और मेरे दिमाग में यह बात ना आये कि मेरे साथ इतना सब कुछ हुआ है, अर्चना मुझे बहुत ही अच्छे से समझने लगी थी और मुझे अर्चना के साथ अच्छा लगता है। एक दिन अर्चना कहने लगी कि पूनम हम लोगों को कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए मैंने उससे कहा लेकिन हम लोग कहां घूमने जाएंगे।

वह कहने लगी हम लोगों को कुछ दिनों के लिए शिमला का टूर बनाना चाहिए सुना है वहां बड़ा अच्छा मौसम हो रखा है मैंने अर्चना से कहा ठीक है मैं तुम्हें इस बारे में आज रात को बताती हूं। अर्चना मुझे कहने लगी ठीक है तुम मुझे आज रात को बता देना मैं उसके हिसाब से ही प्लान बना लूंगी। अर्चना अपनी जिंदगी को बड़े ही अच्छे तरीके से जीती थी और वह कोई भी समस्या को अपने दिमाग में नहीं आने देती इसलिए तो वह हमेशा खुश रहती थी। वह मुझे भी कहती थी की अब तुम यह सब भूल कर आगे बढ़ जाओ यदि तुम इस बारे में ही सोचते रहोगे तो शायद तुम कभी भी आगे नहीं बढ़ पाओगे। मुझे भी यही लगता था कि अर्चना बिल्कुल सही कह रही है इसीलिए अर्चना के साथ मेरी बहुत अच्छी बनने लगी थी। हम लोग शिमला जाने की तैयारी करने लगे थे और मैं भी शिमला जाने के लिए मान गई थी। जब हम लोग शिमला गए तो इतने समय बाद शिमला जाना मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था क्योंकि मेरे जीवन में इतने उथल पुथल होने के बाद सब कुछ सामान्य होने लगा था और यह सब अर्चना की बदौलत ही संभव हो पाया था। अर्चना ने मुझे कहा कि देखा शिमला आकर तुम्हारा मन खुश हो गया मैंने अर्चना को कहा हां तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो शिमला आकर मेरा मन खुश हो गया है। हम लोग शिमला में करीब एक हफ्ता रुकने वाले थे मेरे पिताजी मुझे बार-बार फोन कर रहे थे क्योंकि उन्हें हमेशा ही मेरी चिंता सताती रहती थी इसीलिए वह मुझे फोन कर रहे थे लेकिन जब हम लोग शिमला में इंजॉय कर रहे थे तभी मेरी मुलाकात एक अनजान शख्स से हुई उसका नाम विनय है।

विनय से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा मुझे ऐसा लगा कि जैसे विनय मेरा अपना है हम दोनों के बीच इतनी अच्छी दोस्ती हो गई कि मैं कभी सोच भी नहीं सकती जी की विनय के रूप में मुझे एक अच्छा साथी मिल जाएगा। विनय की बातें मुझ पर जादू कर रही थी विनय ने मुझे कहा तुम कितने दिनों बाद वापस जाओगी? मैंने विनय से कहा तीन-चार दिन बाद हम लोग वापस निकल जाएंगे। विनय कहने लगा ठीक है क्या तुम मेरे घर पर आ सकती हो? विनय ने मुझे अपने घर पर बुला लिया मैं विनय के घर पर गई तो विनय के घर पर कोई भी नहीं था। मैंने उसे कहा क्या तुम यहां अकेले रहते हो वह कहने लगा हां मैं यहां अकेला ही रहता हूं। मैंने विनय से कहा तुम्हारे मम्मी पापा कहां है? वह कहने लगा मेरे मम्मी पापा के अलग होने के बाद मैं यहीं पर रहने लगा था। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर ही रहे थे कि तभी अचानक से विनय ने मेरी जांघ पर अपने हाथ को रखा तो मेरे अंदर से जैसे जवानी बाहर निकलने लगी थी और मैं अपने आपको ना रोक सकी।

मेरे होंठ विनय के होठों से टकराने लगे थे वह भी बहुत ज्यादा खुश था और आखिरकार हम दोनों ही एक-दूसरे के साथ सेक्स संबंध बनाने के लिए तैयार हो गए। यह मेरा पहला ही मौका था और मुझे बहुत घबराहट हो रही थी लेकिन विनय ने जब मेरी रसभरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगता और मैंने भी विनय के लंड को बहुत देर तक अपने मुंह में लेकर चूसा। विनय मुझे कहता कि आज वाकई में मजा आ गया मैंने उसे कहा तुम अब मेरी चूत में अपने लंड को डाल दो। विनय ने अपने मोटे लंड को मेरी योनि पर सटाते हुए अंदर की तरफ धक्का दिया तो उसका पूरा लंड मेरी योनि के अंदर जा चुका था। मुझे बड़ा मजा आता और काफी देर तक मैंने विनय का साथ दिया। मेरे अंदर गर्मी कुछ ज्यादा ही गर्मी बढ़ने लगी थी मैंने विनय से कहा अब मैं रह नहीं पाऊंगी तो विनय कहने लगा तुम मेरी आंखों में आंखें डाल कर देखते रहो। मैं विनय की आंखों में आंखें डाल कर देखती तो विनय मुझे और भी तेजी से धक्के मारता और कुछ ही देर बाद उसने वीर्य की पिचकारी से मुझे नहला दिया।


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