विलायत से आई देसी माल को चोदा

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Vilayat se aayo desi maal ko choda इतने वर्षों बाद मैं अपने मम्मी के पास जाता हूं मैं जब अपनी मम्मी को देखता हूं तो वह बूढ़ी हो चुकी थी उनकी आंखों के नीचे झुर्रियां पड़ चुकी थी और वह मुझे अच्छे से पहचान भी नहीं पाई। मैंने अपनी मम्मी से कहा मम्मी मैं रोहित हूं तो मेरी मम्मी ने मुझे गले लगा लिया मेरी मां का प्यार मेरे लिए शायद उस वक्त बहुत बड़ा था क्योंकि इतने वर्षों से मैं उनसे दूर था। मेरे पापा और मम्मी के डिवोर्स के बाद मुझे पापा ने हीं पाला पोषा और उन्होंने दूसरी शादी कर ली लेकिन मुझे मां का वह प्यार शायद कभी मिल भी नहीं पाया था। मेरी मां ने इतने वर्ष अकेले तकलीफों में कांटे अब मैं नहीं चाहता था कि वह और तकलीफ सहे इसीलिए मैंने उन्हें कहा कि आप मेरे साथ चलिए। अब मैं अपने पैरों पर खड़ा हो चुका था और एक अच्छी कंपनी में एक अच्छे पद पर था मैं चाहता था कि मेरी मां अब मेरे साथ ही रहे। मैंने अपनी मां को कहा मां आप मेरे साथ ही चलिए तो वह भी मेरे साथ आने के लिए तैयार हो गई उन्हें भी जैसे मेरा इंतजार था कि मैं एक न एक दिन लौट कर जरूर आऊंगा। मैं उन्हें अपने साथ अपने फ्लैट पर ले आया मैं अपने फ्लैट पर अकेला ही रहता था जब से मेरी जॉब लगी है तब से मैं अपने पापा से अलग रहने लगा क्योंकि मेरी सौतेली मां का व्यवहार मेरे प्रति कभी अच्छा था ही नहीं।

मैं अपनी मां को अपने साथ ले आया था तो मैं बहुत खुश था और अपनी मां के साथ इतना अच्छा समय बिता पाना शायद मेरी किस्मत में कभी था ही नहीं लेकिन समय ने मुझे ऐसा मौका दिया तो मैं भी इस मौके को गंवाना नहीं चाहता था मैं अपनी मां को हर वह खुशी देना चाहता था जिससे कि वह दूर थी। सुबह के वक्त मेरे घर पर काम करने वाली बाई आती थी उसने जब मेरी मां को देखा तो वह मुझे कहने लगी कि साहब क्या आप अपनी मां को ले आए हैं तो मैंने उसे कहा हां मैं अपनी मां को अपने साथ ले आया हूं। मेरी मां ने ना जाने कितनी तकलीफे अकेले रहकर सही होंगी इसका अंदाजा मैं उनके खुरदुरे हाथों से लगा सकता था मेरे लिए यह बहुत ही तकलीफ वाली बात थी कि मैं अपनी मां से इतने वर्षों तक मिल ही नहीं पाया लेकिन अब वह मेरे साथ ही थी तो मुझे इस बात की खुशी थी कि कम से कम मैं अपनी मां को अपने साथ वापस तो ले आया हूं।

मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता था मैं ज्यादातर किसी से भी बात नहीं करता था लेकिन जब मेरी मां आई तो उन लोगों से भी मेरी बात होने लगी। मुझे पता चला कि उनके दो बच्चे हैं और दोनों ही विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं अंकल भी किसी सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं अंकल का नाम सोहन है और आंटी का नाम कल्पना उन लोगों का हमारे घर पर अब आना जाना था। मेरी मां का हाल चाल पूछने के लिए सोहन अंकल और कल्पना आंटी अक्सर आती ही रहती थी। मैं एक दिन अपने ऑफिस से घर लौटा तो मां बिस्तर पर लेटी हुई थी मैंने उन्हें कहा मां आपकी तबीयत तो ठीक है ना तो वह कहने लगी कि हां रोहित बेटा मेरी तबीयत ठीक है लेकिन उन्होंने मुझे बताया नहीं कि उनकी तबीयत खराब है मैं बहुत चिंतित हो गया और उन्हें तुरंत ही नजदीकी अस्पताल में ले गया। जब मैं उन्हें वहां पर ले गया तो डॉक्टर ने मुझे कहा कि आपकी मां को तो बहुत तेज बुखार है मैंने डॉक्टर को कहा सर आप कुछ दवाइयां दे दीजिए तो डॉक्टर कहने लगे कि हां मैं कुछ दवाइयां दे देता हूं। डॉक्टर ने कुछ दवाइयां दे दी और फिर मैं मां को घर ले आया जब मैं मां को घर लेकर आ रहा था तो उस वक्त रास्ते में मेरी मुलाकात सोहन अंकल से हुई उन्होंने मुझे कहा रोहित बेटा तुम कहां से आ रहे हो। मैंने उन्हें कहा अंकल मैं मां को अस्पताल लेकर गया था मां की तबीयत ठीक नहीं थी तो सोहन अंकल कहने लगे कि बहन जी को क्या हो गया था। मैंने उन्हें बताया कि उन्हें बहुत तेज बुखार था लेकिन मां ने मुझे इस बारे में नहीं बताया वह कहने लगे कि चलो बेटा तुम बहन जी को लेकर चलो मैं आता हूं। मैं मम्मी को लेकर अब अपने घर पर आ चुका था मैंने मां को कहा आप आराम कीजिए थोड़ी देर बाद काम के लिए बाई भी आ चुकी थी और वह कहने लगी कि साहब मैं खाना बना देती हूं। मैंने उसे कहा मां के लिए कुछ हल्का सा बना देना क्योंकि मां को बहुत तेज बुखार है इसलिए वह ज्यादा खा नहीं पाएंगे तो वह कहने लगी कि ठीक है साहब मैं कुछ हल्का सा बना देती हूं।

अब मैं और मां कुछ देर साथ में बैठे रहे फिर मैं अपने कमरे में चला गया मैं अपने कमरे में जब गया तो मैं लैपटॉप पर अपने ऑफिस का कुछ काम कर रहा था थोड़ी देर काम करने के बाद मैं मां के पास आया तो मैंने मां को देखा वह सोई हुई थी तभी मेरा फोन बजा मैंने फोन उठाया तो पापा का फोन था। पापा मुझे कहने लगे कि रोहित बेटा तुम तो मुझसे मिलने के लिए आते भी नहीं हो मैंने पापा से कहा पापा मुझे आज कल समय ही नहीं मिल पाता है। पापा मुझे कहने लगे कि रोहित मैंने सुना है कि तुम अपनी मां को अपने साथ ले आए हो मैंने पापा को कहा पापा इतने वर्ष तक उन्होंने तकलीफ देखी है अब मैं नहीं चाहता कि मैं उन्हें अकेले छोड़ू मैं उनकी सेवा करना चाहता हूं। पापा मुझे कहने लगे कि बेटा यह तो अब तुम्हारी मर्जी है अब तुम बड़े हो चुके हो तुम समझ सकते हो तुम्हें क्या करना है। पापा भी शायद अपनी दूसरी शादी से खुश नहीं थे उन्हें भी इस बात का पछतावा हमेशा से ही था कि वह मां को कभी मिल ही नहीं पाए क्योंकि उनके अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह मां से माफी मांग पाते इसीलिए तो उन्होंने हमेशा मां से दूरी बनाकर रखी।

वह भी कहीं ना कहीं इस बात से खुश थे कि मैं अपने साथ मां को ले आया हूं कुछ दिनों बाद मां की तबीयत ठीक हो गई और मां कहने लगी कि बेटा अब मेरी तबीयत पहले से बेहतर है। मैंने मां को कहा मां आप अपना ध्यान दीजिए यदि आपको कभी भी कोई परेशानी होती है तो आप मुझे बता दिया कीजिए मां कहने लगी ठीक है रोहित बेटा आगे से मैं तुम्हें बता दिया करूंगी। मेरी मां चाहती थी कि वह कुछ दिनों के लिए मेरी मौसी के पास चली जाएं तो उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा मैं कुछ दिनों के लिए तुम्हारी मौसी के पास जाना चाहती हूं। मैंने मां को कहा ठीक है मां मैं आपको मौसी के घर छोड़ दूंगा मैंने अगले दिन मां को मौसी के घर छोड़ दिया और मैं वापस घर लौट आया। मैंने जब मां को फोन किया तो मां कहने लगी बेटा तुम्हारी मौसी के साथ मैं ठीक हूं तुम चिंता मत करो लेकिन मुझे मां की चिंता हमेशा ही सताती रहती थी। सोहन अंकल की बेटी सुरभि घर पर आई हुई थी जब वह घर पर आई तो मुझे सोहन अंकल ने सुरभि से मिलवाया। मैं जब सुरभि से मिला तो मुझे उसे मिलकर अच्छा लगा वह बहुत ही मॉडर्न थी क्योंकि वह विदेश में पढ़ रही थी इसलिए उसके ख्यालात बहुत ही अलग थे। मुझे उसके साथ जितना भी समय बिताने का मौका मिला मैंने उसे कहा तुम तो यहां पर बोर हो जाती होंगी? वह कहने लगी नहीं यहां पर मेरे कुछ पुराने दोस्त हैं उनसे मैं मिल लिया करती हूं। मां घर पर नहीं थी इसलिए जब सुरभि मुझसे मिलने के लिए आई तो मैंने सुरभि से बात की सुरभि ने उस दिन छोटी सी स्कर्ट पहनी हुई थी मैं उसकी तरफ देख रहा था। मैंने जब उसके कोमल और मुलायम जांघ की तरफ नजर मारी तो मेरे अंदर से एक अलग ही आग पैदा होने लगी मैंने जैसे ही सुरभि की जांघ पर अपने हाथ को रखा तो वह भी मचलने लगी शायद वह भी अपने आपको रोक ना सकी उसने मुझे किस कर लिया।

जब उसने मेरे होंठों को चूमा तो मैं भी अपने आपको रोक ना सका और उसके बदन की गर्मी को मैं महसूस करने लगा। मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया उसके तन बदन को मैं महसूस करने लगा उसके हर एक हिस्से को मैंने चाटना शुरू किया। जब मैंने उसके बड़े स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैं उसके स्तनों का रसपान बहुत देर तक करता रहा जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया तो उसे भी आनंद आने लगा मुझे भी अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा जब उसकी चूत से गिला पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा तो मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर प्रवेश करवा दिया और जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी मैं उसे चोदने लगा। उसकी टाइट चूत का मजा लेने में बड़ा आनंद आता उसकी भारी-भरकम गांड को मैं अपने हाथ से दबा रहा था।

मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और तेजी से चोदना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी आपके साथ सेक्स का बड़ा आनंद आ रहा है। मैंने उसे कहा तुम्हें चोदना में मुझे बहुत मजा आ रहा है वह मुझे कहने लगी आप वाकई में बड़े कमाल के हैं मैंने उसकी चूत के मजे बहुत देर तक लिए उसने मुझे बताया कि कॉलेज में उसने बहुत लोगों के साथ सेक्स का आनंद लिया है। मैंने उसे कहा लेकिन आज तो मुझे भी तुम्हारे साथ सेक्स करने में मजा आ गया वह चूत मरवाकर बहुत ज्यादा खुश हो गई थी और उसकी खुशी का अंदजा मैने लगा लिया उसने अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ करते हुए कहा मुझे चोदना शुरू करो? मैं उसकी चूतड़ों को पकड़कर उसकी चूत के अंदर बाहर बड़ी तेजी से धक्के मारता रहा मैंने बहुत देर तक उसे धक्के मारे वह पूरी तरीके से खुश हो गई थी मुझे भी बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि मैं उसके साथ सेक्स का सुख ले पाऊंगा लेकिन उसने मुझे पूरे मजे दिए और मेरे साथ उसने खुलकर सेक्स का एंजॉय किया मैंने भी अपने वीर्य को उसकी चूत के अंदर गिराया था तो उसे मजा आ गया।

 


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