वीर्य से नहलाकर टूर यादगार बनाया

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Veerya se nahlakar tour yaadgar banaya मैं अपनी शादीशुदा जिंदगी से इतनी ज्यादा परेशान हो चुकी थी कि मैं गुस्से में अपने मायके कानपुर चली आई मेरी मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम्हें अपने पति से झगड़ा नहीं करना चाहिए था। हम लोगों के बीच अक्सर किसी ना किसी बात को लेकर झगड़े होते ही रहते थे और हम दोनों की जिंदगी पूरी तरीके से बदल चुकी थी मैं अपने पति के साथ रहना ही नहीं चाहती थी मैं चाहती थी कि अपने पति को डिवोर्स देकर उनसे अलग हो जाऊं। मैंने अरेंज मैरिज की थी मेरे माता पिता के कहने पर ही मैंने शादी के लिए हां कही थी मैं नही चाहती थी कि मैं शादी करूं लेकिन मेरे माता पिता के कहने पर मैं शादी के लिए राजी हो गई थी। जब मेरी शादी हुई तो उसके कुछ समय बाद ही मेरे पति और मेरे बीच झगड़े शुरू हो गए फिर मैंने अपने पति से अलग होने के बारे में सोच लिया था। मैं कुछ दिन कानपुर में ही थी मेरे माता पिता मेरे और मेरे पति के झगड़ों से बिल्कुल भी खुश नहीं थे और उन्होंने मेरे पति को फोन किया।

जब उन्होंने मेरे पति को फोन किया तो उन्होंने मुझसे बात करनी चाही लेकिन मैंने बात करने से मना कर दिया मेरी मां मुझ पर बहुत गुस्सा हो चुकी थी और वह कहने लगी कि क्या तुम राकेश के साथ बात नहीं कर सकती। मैंने अपनी मां से कहा मां मैं राकेश के साथ रहना ही नहीं चाहती हूं मेरे भी कुछ सपने थे लेकिन राकेश ने मेरे सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया है और अब मैं अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हूं। मुझे मालूम था कि मेरे पास अब और कोई रास्ता नहीं है लेकिन फिर मैंने अपनी एक सहेली को फोन किया जो कि मुंबई में नौकरी करती थी हम दोनों कॉलेज में साथ पढ़ा करते थे लेकिन कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद वह मुंबई चली गई। मैंने भी अब मुंबई जाने का फैसला कर लिया था मैंने अपने माता-पिता को इस बारे में कुछ भी नहीं बताया और मैं उनको बिना बताए ही मुंबई चली गई। मुझे भी लगा कि मुझे अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीनई चाहिए, मैं और मेरी सहेली साथ में रहने लगे हम दोनों साथ में ही रहते थे और मैंने अब अपनी नौकरी की तलाश करनी शुरू कर दी थी। हालांकि यह सब इतना आसान होने वाला नहीं था लेकिन काफी मुश्किल के बाद मुझे नौकरी मिल चुकी थी और जब मुझे नौकरी मिली तो उसके बाद मैंने अपने पापा मम्मी को फोन कर के यह बात बता दी थी कि मैं मुंबई में ही नौकरी कर रही हूं। मेरे पति और उनके परिवार वालों ने तो मेरे परिवार का जीना ही मुश्किल कर दिया था वह लोग मेरे बारे में उनसे पूछने लगे।

जब मेरे घर वालो ने उन्हे मेरे बारे में बताया तो मेरे पति ने मुझे फोन किया और कहने लगे कि क्या तुम अब कभी भी वापस नहीं लौटोगी। मैंने उन्हें कहा देखो राकेश मुझे नहीं लगता कि हम दोनों साथ में जिंदगी बिता सकते हैं इसलिए हम दोनों का अलग हो जाना ही बेहतर होगा। राकेश के पास भी शायद अब कोई और जवाब नहीं था राकेश को अपनी गलती का एहसास हो चुका था उसने मुझसे अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी लेकिन मैंने उससे कहा कि राकेश अब मैं अपनी पुरानी जिंदगी पीछे छोड़ आई हूं। राकेश ने मुझसे इस बारे में काफी बात की लेकिन मैंने राकेश को साफ तौर पर मना कर दिया मैं और राकेश साथ में अब रह ही नहीं सकते थे मैं मुंबई में अपनी जॉब से बहुत खुश थी और मैं नहीं चाहती थी कि मैं अब वापस जाऊं। मैं ना तो अपने माता पिता के पास जाना चाहती थी और ना ही मैं राकेश के पास जाना चाहती थी। मैंने राकेश का फोन रख दिया उसके बाद मैंने कभी भी राकेश का फोन नहीं उठाया हम दोनों अलग ही हो चुके थे अब ना तो मेरा राकेश से कुछ लेना देना था और ना ही राकेश का मुझसे अब कोई संपर्क था। राकेश मुझे कई बार फोन भी करता लेकिन मैं उसका फोन नहीं उठाती मेरी सहेली की वजह से ही मेरे अंदर इतनी हिम्मत आ पाई और मैं अपनी जिंदगी अब अच्छे से जी रही थी। राकेश और मेरे बीच के झगड़ों से मैं मानसिक रूप से बहुत ज्यादा तनाव में आने लगी थी और मैं इतनी ज्यादा तनाव में आ गई थी कि मुझे लगा कि शायद मैं अब अपनी जिंदगी कभी अपने तरीके से जी ही नहीं पाऊंगी लेकिन अब सब कुछ अच्छे से चलने लगा था और मैं बहुत खुश थी। एक दिन मेरे पिताजी का मुझे फोन आया और वह कहने लगे कि मैं मुंबई में हूं मैं यह बात सुनकर बहुत खुश हो गई थी मैं जब उनसे मिलने के लिए गई तो उन्होंने उस दिन मुझे कहा कि बेटा साक्षी तुम्हें अब घर वापस लौट आना चाहिए। मैंने अपने पिताजी को मना कर दिया और कहा कि पिताजी अब मैं घर वापस नहीं लौटना चाहती मैं अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हूं।

मैंने अपने पापा को कहा कि मैं मुंबई में ही खुश हूं वह कहने लगे कि बेटा तुम मेरे साथ घर चलो लेकिन मैंने उनके साथ जाने से मना कर दिया और मैं वापस अपने फ्लैट में लौट आई थी। उसके बाद भी मुझे पापा ने कई बार फोन किया लेकिन मैंने उनका फोन ही नहीं उठाया फिर मैंने उनका फोन उठाते हुए कहा कि पापा मैं आपके साथ वापस लौटना नही चाहती। उन्हें भी अब यह बात पता चल चुकी थी कि मैं उनके साथ वापस नहीं लौटना चाहती हूं, मैं अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती थी और वह भी उसके बाद कानपुर वापस लौट चुके थे। इसी बीच हमारे ऑफिस का एक टूर घूमने के लिए लोनावला जाने वाला था हमारे ऑफिस में सब लोगों की रजामंदी के बाद ही यह टूर संभव हो पाया था। मैंने अपनी सहेली को कहा कि मैं दो दिनों के लिए लोनावाला जा रही हूं तो वह कहने लगी ठीक है साक्षी और जब तुम लौटोगी तो तुम मुझे फोन कर देना।

मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें फोन कर दूंगी और उसके बाद मैं लोनावला के लिए निकल चुकी थी मैं जब लोनावाला पहुंची तो मुझे बहुत अच्छा लगा मैं पहली बार ही लोनावला गई थी। हमारे ऑफिस के कई लोग इससे पहले भी लोनावला जा चुके थे और वह लोग लोनावला के बारे में बात कर रहे थे हम लोग जिस होटल में रुके हुए थे वह होटल बड़ा अच्छा था। मैं जिस रूम में थी उस रूम में मेरे साथ काम करने वाली पायल भी रुकी हुई थी पायल और मेरे बीच अच्छी दोस्ती है। पायल फोन पर अपने बॉयफ्रेंड से बात कर रही थी मैंने पायल को देखा तो वह गुस्से में थी और उसने फोन काट दिया। वह अपने मुंह मे पता नही क्या बड़बड़ा रही थी मैंने पायल से कहां पायल क्या हुआ? वह कहने लगी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ मेरा झगड़ा हो गया है। मैंने पायल को कहा तुम इस बारे मे ना सोचो और इस बारे में भूल जाओ मैंने पायल को शांत कराया। हम लोग लोनावाला मे पूरी तरीके से इंजॉय करना चाहते थे हमारे ऑफिस में ही काम करने वाले सीनियर जिनका नाम रितेश है वह बड़ी हैंडसम है हालांकि उनकी शादी हो चुकी है और उनके बच्चे भी काफी बड़े हैं लेकिन मैं जब भी उन्हें देखती तो उनकी तारीफ हमेशा किया करती। मुझे नहीं पता था कि लोनावला आने के दौरान मेरे और रितेश के बीच शारीरिक संबंध बन जाएंगे रितेश हमारे रूम में बैठे हुए थे पायल भी हमारे साथ बैठी हुई थी लेकिन थोड़ी देर बाद पायल चली गई। रितेश और मैं साथ में बैठे हुए थे हम दोनों बात कर रहे थे मै रितेश की तरफ देख रही थी और मैं चाहती थी कि वह मेरे साथ सेक्स करे। मैंने रितेश के साथ सेक्स करने के बारे में सोच लिया था जब हम दोनों एक दूसरे को लिप किस कर रहे थे तो उस दौरान हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी और उन्होंने मेरे स्तनों को भी दबाना शुरू किया। मैंने भी उनके लंड को बाहर निकालकर हिलाना शुरू किया वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुके थे और मेरे अंदर की गर्मी भी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं उनके लंड को लेने के लिए बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी।

मैंने उनके लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया था जब मैंने उनके लंड को अपने मुंह के अंदर तक लिया तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और उनके लंड को अपने मुंह मे लेकर मुझे जिस प्रकार आनंद आता वह अलग ही था। वह मुझे कहने लगे तुम ऐसे ही मेरे लंड को सकिंग करते रहो मैंने बहुत देर तक उनके लंड को अपने मुंह के अंदर तक लेकर चूसना जारी रखा फिर उन्होंने भी मेरे कपड़े उतारकर मुझे नंगा कर दिया। मेरी पैंटी को उतारकर उन्होंने जब मेरी चूत के अंदर उंगली घुसानी शुरू की तो इतने समय बाद मेरी अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैं उनके लंड को लेने के लिए उत्सुक थी। जैसे ही उन्होंने अपने मोटे लंड को मेरी चूत के अंदर डाला तो मैं चिल्ला उठी और वह मुझे कहने लगी क्या हुआ? मैंने उन्हें कहा आपका लंड तो बहुत ही ज्यादा मोटा है उनका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर तक प्रवेश हो चुका था। मैं उनका पूरा साथ दे रही थी उन्होंने मुझे अपनी बाहों में कस कर जकड़ा हुआ था और जिस प्रकार से उन्होंने मुझे अपनी बाहों में जकड़ रखा था उससे मैं इतनी ज्यादा गर्म होने लगी कि मैंने उन्हें कहा शायद मैं अपने आपको रोक नहीं पाऊंगी।

वह अपनी पूरी ताकत के साथ मुझे धक्के मार रहे थे और उनका मोटा लंड जिस प्रकार से मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था उससे मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाई और मैंने अपने पैरों से उन्हें जकडना शुरू किया। वह भी समझ चुके थे कि अब मैं झड़ने वाली हूं। उन्होंने मुझे तेजी से धक्के मारने शुरू किए वह इतनी तेज गति से मुझे धक्के मार रहे थे कि मेरी चूत के अंदर उनका वीर्य गिर गया तो मुझे बहुत ही आनंद आया। वह भी बहुत ज्यादा खुश हो गए थे लोनावला का ऑफिस का टूर हमारा बहुत ही अच्छा रहा सब लोगों ने बड़ा ही इंजॉय किया लेकिन मेरे और रितेश के बीच जो संबंध बना मुझे हमेशा याद रहेगा कि कैसे रितेश ने मेरे साथ सेक्स किया था।


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