उफ्फ्फ चुदासी मत कहो ना

Uff chudasi mat kaho na:

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मेरा नाम मनोज है। मेरी उम्र 32 वर्ष है। मैं बाराबंकी का रहने वाला हूं। मैंने अभी तक शादी नहीं की है। मेरे घरवाले मुझे बहुत फोर्स करते हैं कि तुम शादी कर लो लेकिन मैंने अभी तक शादी नहीं की। क्योंकि मुझे कोई भी लड़की पसंद नहीं आई और जिन लड़कियों को मैं देखने गया वह मेरे समझ से बाहर थी। मुझे एक सिंपल और साधारण सी लड़की से शादी करनी है। जो कि मेरी भावनाओं को समझ सके और मेरे परिवार को अच्छे से रख पाए लेकिन अभी भी मेरी तलाश अधूरी थी और मैं अपने जॉब में ही बिजी रहता था। इस वजह से ना तो मुझे समय मिल पा रहा था और ना ही मेरे पिताजी अब मुझे कुछ कहते थे। उन्होंने भी अब मुझसे यह सब कहना छोड़ दिया। अब वह मुझसे शादी के बारे में कोई भी चर्चा नहीं करते हैं। उन्होंने मुझे कहा तुम कोई लड़की देख लो और हमें बता देना। जब तुम्हें कोई अच्छी सी लड़की मिल जाए तो हम तुम्हारी शादी उससे करवा देंगे। मेरी दिनचर्या का हिस्सा सिर्फ सुबह ऑफिस जाना और शाम को वहां से घर पर ही आना होता था। मुझे कभी भी यहां वहां जाना बिल्कुल भी पसंद नहीं था। मैं अधिकांश अपने घर पर ही समय बिताना पसंद करता हूं।

रविवार को मेरे ऑफिस की छुट्टी है। तो आज मैं घर पर ही था। मैंने सोचा आज अपना थोड़ा काम कर लेता हूं और दुकान से कुछ सामान ले आता हूं। मैं तैयार होकर दुकान में चला गया। अब मैं वहां पर शॉपिंग करने लगा। मैंने अपने  लिए कुछ कपड़े ले लिए थे और अब मैं वह कपड़े लेकर अपने घर के लिए निकल पड़ा। जैसे ही मैं घर पहुंचा तो मैंने अपना बैग को खोलकर देखा। तो उसमें लड़कियों के कपड़े थे। मैं तुरंत ही उसी दुकान में वापस गया और मैंने उन्हें कहा, की आपने मुझे लड़कियों के कपड़े दे दिए हैं। दुकान के जो ओनर थे उन्होंने मुझसे माफी मांगी और कहने लगे, यह शायद गलती से हो गया होगा। आप से पहले एक लड़की आई थी यह उनका ही सामान है। मैं ऐसे ही दुकानदार से बात कर रहा था। तभी उनके टेलीफोन में उस लड़की का फोन आया और वह कहने लगी कि मेरा सामान बदली हो चुका है। दुकान के ओनर ने उन्हें कहा कि आप शॉप में आ जाइए। वह गलती से आपका बैग चेंज हो गया है। इस वजह से आपके पास दूसरा सामान आ गया है। मैंने काफी देर तक वहां इंतजार किया। मैं ऐसे ही बहुत देर तक वहां बैठा हुआ था। तभी थोड़ी देर बाद वह लड़की दुकान में आई। मैंने उसे देखा तो वह लड़की मुझे एक नजर में ही पसंद आ गई और मुझे वह अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी। उसके लंबे घने बाल मुझे बहुत पसंद थे और उसकी कद काठी भी बहुत ही अच्छी थी। अब जैसे ही दुकानदार ने मेरा पास का सामान उस लड़की को वापस किया तो वह कहने लगे कि, आपका सामान इनके पास चला गया था। उसके लिए मैं आप दोनों को सॉरी कहना चाहता हूं।

मेरी उस लड़की से बात हुई तो उसने मुझसे मेरा नाम पूछा। मैंने जब उसे अपना नाम बताया तब मेरे अंदर भी उसके बारे में जानने की उत्सुकता जाग गई और मैंने भी उससे तब उसका नाम पूछा। उसने अपना नाम राधिका बताया। अब हम दोनों ने अपना सामान एक्सचेंज कर लिया था और हम दुकान से बातें करते हुए बाहर की तरफ आ रहे थे। मैंने राधिका को कहा कि आप मेरे साथ एक कप कॉफी पी सकती हैं। वह मुस्कुराने लगी और कहने लगी, क्यों नहीं। अब ऐसे ही हम दोनों वहां पास के एक रेस्टोरेंट में चले गए। वहां पर मैंने दो कोल्ड कॉफी ऑर्डर की। हम दोनों कॉफी की चुस्कियां लेकर बातें करने लगे। मैंने उससे उसके बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया कि मैं अभी कॉलेज कर रही हूं। मैंने उसे पूछा कि तुम्हारे घर में कौन-कौन लोग है। वह कहने लगी मेरे पिताजी एक बिजनेसमैन है और मेरी माता ग्रहणी है। मैं अब उससे काफी खुलकर बातें करने लगा और वह भी मुझसे बहुत अच्छे से बातें कर रही थी। मुझे बिल्कुल भी ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा था कि मैं उसे पहली बार मिल रहा हूं। मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैं उसे कई वर्षों से जानता हूं। क्योंकि उसका नेचर काफी हंसमुख था और वह काफ़ी मजाकिया भी थी। जोकि बीच-बीच में मजाक कर लेती थी। उसकी उम्र महज 23 वर्ष थी। हम लोगों की पहली मुलाकात बहुत ही अच्छी रही। मैंने तो अपने दिल में सोच लिया था कि अब इसी को मैं अपनी पत्नी बनाऊंगा लेकिन उसकी उम्र और मेरी उम्र में काफी अंतर था। मुझे यह डर था कि कहीं वह ना ना कह दे और मुझसे बात भी करना बन्द कर दे। इसलिए मैंने उससे कुछ कहना उचित नहीं समझा। मेरे पास उसका फोन नंबर भी आ ही चुका था। मैंने कई दिनों तक तो उसे फोन नहीं किया।

एक दिन मैंने सोचा आज मैं राधिका को फोन कर ही लेता हूं। जब मैंने उसे फोन किया तो वह मुझे कहने लगी आज इतने दिनों बाद आपने कैसे फोन कर लिया। मैंने उसे कहा बस ऐसे ही। सोचा आज आपको फोन कर लूं। हमारी फोन पर भी काफी देर तक बातें होती रही। मैंने राधिका के बारे में अपनी मां को बता दिया था। वह भी कहने लगी की  कभी उसे घर पर लेकर आना। मैंने उसे कहा अभी मेरी इतनी बात फिलहाल उससे नहीं हुई है कि वह हमारे घर पर आ जाए। मेरी मां उसे घर पर बुलाने के लिए  बहुत जिद करने लगी। जब मैंने उसे फोन किया तो मैंने उसे अपने घर आने का आग्रह किया। जिसे उसने मना नहीं किया और वह मेरे घर आने को तैयार हो गई।

जैसे ही उसका कॉलेज खत्म हुआ तो मैं उसे लेने उसके कॉलेज चला गया था। उसके बाद मैं उसे अपने घर पर ले आया। मैंने उसे अपने माता और पिता जी से मिलवाया। वह मुझे कहने लगी तुम्हारे घर वाले तो बहुत ही अच्छे हैं। मुझे उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा और अब वह हमारे घर से जाने लगी, तो मेरी मां ने कहा कि बेटा तुम राधिका को उसके घर तक छोड़ आओ। मैं राधिका को उसके घर तक छोड़ने गया तो रास्ते में हम लोग काफी सारी बातें करने लगे। मैंने उससे आज पूछ ही लिया क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड तो नहीं है। वह मुझे कहने लगी नहीं। मैंने अभी तक किसी को भी अपनी जिंदगी में आने नहीं दिया है। यह सुनकर मैं बहुत ज्यादा खुश हुआ और मैंने उसे कहा तुमने क्यों अभी तक कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनाया। वह कहने लगी मैं इन सब लफडो में नहीं पड़ती। तब मैंने उससे पूछा तो फिर तुम क्या चाहती हो। वह कहने लगी कि मैं अपनी जिंदगी को पहले अच्छे से जीना चाहती हूं। मैंने उससे अपने दिल की बात कह दी। उसने मुझे कहा तुम एक काम करना कल मेरे घर पर आना। उसके बाद हम बैठकर बातें करेंगे। मैंने राधिका को उसके घर पर छोड़ा और मैं वापस अपने घर के लिए निकल पड़ा।

अगले दिन जब मैं उसके घर गया तो उसने मुझे अपने माता-पिता से मिलवाया। मैंने उनसे काफी सारी बातें की और हम लोग काफी देर तक बैठे रहे। अब मैं उसके रूम में चला गया और वहां हम लोग काफी बातें करने लगे। वह मुझे समझा रही थी कि मैं शादी नहीं करना चाहती। मैंने उससे पूछा क्यों वह कहने लगी कि मुझे सिर्फ अपने चूत मरवाने में मजा आता है। वह मेरे सामने एकदम से नंगी हो गई  और मैं उसे देखकर पागल हो गया। मैंने तुरंत ही उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर रसपान करने लगा। ऐसे ही काफी देर तक मैं उसे चाटता रहा।  मुझसे उसके शरीर को देखकर बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था। मैंने भी अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसकी चूत मे डाल दिया और वहीं जमीन पर लेटा दिया। मैने उसे झटके मारने शुरू कर दिए जैसे ही मैंने उसे झटके मारे तो वह बड़ी तेजी से चिल्लाने लगी। मैं ऐसे ही उसे चोदे जा रहा था उसका पूरा शरीर हिल जाता और मैं ऐसे ही झटके मारने लगा लेकिन मुझे मजा भी नहीं आ रहा था। मैंने उसे अपने लंड के ऊपर बैठा लिया और अब वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करने लगी। ऐसे ही वह बहुत देर तक अपने चूतडो को ऊपर नीचे करती जाती। मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में ले रहा था और मैं उसे नीचे से बड़ी तेज से झटके मारता। मैंने उसके होठों को अपने होठों में ले लिया। उसकी टाइट योनि में जब मेरा लंड जा रहा था तो मुझे ऐसा प्रतीत होता मानो किसी छोटे से छेद में मेरा लंड चला गया होगा। अब मेरा वीर्य पतन होने वाला था मैंने तुरंत ही अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह में अपने लंड को घुसा दिया। वह  बहुत देर तक मेरे लंड को चूसती रही कुछ समय बाद मेरा वीर्य पतन हो गया और वह उसके मुंह में ही गिर गया। उसने मेरे सारे वीर्य को अपने अंदर ही निकल लिया।

 


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