तुम्हें ऑफिस में बताता हूं

Tumhe office me batata hoon:

Hindi sex stories, antarvasna मैं एक हफ्ते बाद मनजीत को फोन करता हूं एक हफ्ते पहले ही मेरी मनजीत से फोन पर बात हुई थी मैंने जब मनजीत को फोन किया तो मनजीत मुझे कहने लगा मेरी पत्नी का पैर फैक्चर हो गया है। मैंने उसे कहा अभी कुछ दिन पहले ही तो मेरी तुमसे फोन पर बात हुई थी तब तो सब कुछ ठीक था वह मुझे कहने लगा मेरी पत्नी बाथरूम में कपड़े धो रही थी और उसके बाद जैसे ही वह बाथरूम से बाहर निकली तो ना जाने उसका पैर कैसे फिसल गया और उसके पैर में बहुत ज्यादा दर्द होने लगा यह तो शुक्र है कि मैं उस वक्त घर पर ही था इसलिए मैं तुरंत उसे अस्पताल लेकर चला गया अब उसे डॉक्टर ने कुछ दिनों के लिए आराम करने को कहा है।

मैंने मनजीत से पूछा लेकिन यह सब कैसे हो गया मनजीत मुझे कहने लगा यार अब क्या बताऊं बस अब जो होना था वह तो हो चुका है डॉक्टर ने कुछ दिनों के लिए रेखा को आराम करने के लिए कहा है, मैंने मनजीत से कहा चलो कोई बात नहीं तुम रेखा का ध्यान दो मैं कल तुम्हारे पास आता हूं। अगले दिन मैं मंजिल के घर पर चला गया उसके मम्मी पापा भी सब लोग घर पर ही थे जब मैं रेखा से मिला तो मनजीत वहीं बैठा हुआ था मनजीत मुझे कहने लगा यार क्या बताऊं मेरी तो किस्मत ही खराब चल रही है मैं कुछ भी करता हूं तो सब उल्टा हो जाता है मैंने मनजीत से कहा तुम टेंशन ना लो सब कुछ ठीक हो जाएगा। मनजीत मुझे कहने लगा यार कुछ दिनों पहले ही मैंने एक टेंडर भरा था और वह टेंडर भी नहीं निकल पाया मैंने मनजीत से कहा कोई बात नहीं कभी कबार ऐसा हो जाता है मनजीत को मैंने हौसला दिया और रेखा से उसकी तबीयत पूछी रेखा मुझे कहने लगी अब तो पहले से आराम है। मैंने जब रेखा को पूछा तुम्हारा पैर कैसे पिसला तो वह कहने लगी मैं बाथरूम से कपड़े धोकर बाहर ही आ रही थी कि अचानक से मेरा पैर फिसल गया और मेरे पैर में बहुत तेज दर्द होने लगा मैंने रेखा से कहा कोई बात नहीं तुम आराम करो सब कुछ ठीक हो जाएगा, कुछ दिनों बाद रेखा ठीक हो गई थी।

मनजीत ने कुछ दिनों बाद मुझे फोन किया वह कहने लगा मुझे कुछ पैसों की जरूरत है मैंने जो टेंडर भरा था वह टेंडर नहीं निकल पाया इसलिए मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता थी। मैंने मनजीत से कहा ठीक है तुम शाम को घर पर आ जाना और शाम को तुम पैसे ले लेना जब मैंने मनजीत से यह बात कही तो मनजीत कहने लगा ठीक है मैं शाम के वक्त घर पर आ जाऊंगा और जब मनजीत शाम को घर पहुंचा तो मैंने उससे पूछा तुम्हें कितने पैसे चाहिए वह कहने लगा मुझे दो लाख चाहिए। जब उसने मुझसे कहा कि मुझे दो लाख चाहिए तो मैंने उसे पूछा तुम इतने पैसो का क्या करोगे वह कहने लगा मैंने जिन व्यक्ति से पैसे लिए थे उन्हें मुझे पैसे लौटाने हैं मैंने मनजीत से कहा ठीक है तुम उसे पैसे लौटा दो। मैंने मनजीत को एक चेक दिया वह मेरे घर पर ज्यादा देर नहीं रुका उसके बाद वह वहां से चला गया जब मनजीत मेरे घर से चला गया तो मैंने मनजीत को फोन किया मनजीत मुझे कहने लगा तुमने मुझे फोन क्यों किया तो मैंने मंजिल को बताया मैंने तुम्हें फोन इसलिए किया था कि तुम्हारा बैग घर पर ही रह गया है मनजीत मुझे कहने लगा कोई बात नहीं है उसे घर पर ही रहने देना मैं दो-तीन घंटे बाद आकर वह बैग ले जाऊंगा। मैंने मनजीत से कहा ठीक है यदि मैं तुम्हें घर में ना मिलूं तो तुम देख ले लेना वह मुझे कहने लगा ठीक है मैं देख ले लूंगा उसके बाद मैंने फोन रख दिया मैं अपने काम से घर से निकल चुका था और शायद मनजीत घर से अपना बैग ले गया उसके बाद मनजीत से मेरी काफी दिन तक तो फोन पर बात नहीं हुई। एक दिन मनजीत का मुझे फोन आया वह कहने लगा मुझे तुम्हे तुम्हारे पैसे वापस लौटाने थे जो मैंने तुमसे लिए थे मैंने मनजीत से कहा कोई बात नहीं तुम पैसे दे देना लेकिन सैयद उसे यह सब अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए उसने मेरे पैसे लौटाने के बारे में मुझे कहा, मैंने उसे कहा ठीक है तुम मेरे पैसे लौटा देना और कुछ ही देर बाद मनजीत ने मुझे पैसे लौटा दिए। मनजीत पैसे के मामले में बहुत ज्यादा ईमानदार है इसीलिए मैंने उसे पैसे दे दिए थे क्योंकि उसे पैसों की आवश्यकता थी।

एक दिन मैं अपने घर से बाहर निकला ही था की मेरी कार कुछ ही दूरी पर खराब हो गई उस दिन मुझे जरूरी काम से कहीं जाना था मैंने सोचा मैं क्या करूं मैं वहीं खड़े होकर ऑटो का वेट करने लगा लेकिन उस दिन कोई ऑटो नहीं मिला मैं परेशान होकर वहां से थोड़ा सा पैदल निकला तो मैंने देखा वहां पर एक मैकेनिक था मैंने उसे कहा कि रास्ते में मेरी गाड़ी खराब हो गयी है क्या तुम उसे ठीक कर दोगे? वह कहने लगा हां मैं उसे ठीक कर दूंगा। मैं उसे अपने साथ लेकर गया जब मैं उसे अपने साथ लेकर गया तो वह मुझे कहने लगा आप की गाड़ी कैसे बंद हो गई थी मैंने उसे सारी बात बताई और कहा यार तुम्हें क्या बताऊं दरअसल मैं घर से निकला ही था कि गाड़ी अचानक से बंद हो गई आज पहली बार ही मेरी कार कहीं रास्ते में बंद हुई होगी वह कहने लगा सर कोई बात नहीं मैं देख लेता हूं। उसने गाड़ी खोलकर देखी तो उसने कहा मैं इसे अभी कुछ देर में ठीक कर दूंगा लेकिन आपको इंतजार करना पड़ेगा मैंने उसे कहा ठीक है तुम काम शुरु करो। उसने करीब 20 25 मिनट लिए और थोड़ी देर बाद गाड़ी स्टार्ट हो गई जब कार स्टार्ट हो गई तो उसके बाद मैं वहां से निकल गया मैं जब वहां से निकला तो मैंने देखा मनजीत किसी व्यक्ति के साथ बात कर रहा है वह दोनों आपस में बात कर रहे थे मैं यह सब देख रहा था लेकिन जब उन दोनों के बीच हाथापाई होने लगी तो मैं दौड़ता हुआ वहां गया और जब मैं उनके पास पहुंचा तो मैंने उनसे पूछा आखिरकार आप लोग झगड़ा क्यों कर रहे हैं।

उसे नहीं मालूम था कि मैं मनजीत का दोस्त हूं वह मुझे कहने लगा कि इन्होंने मुझसे कुछ काम करवाया था वह काम मैंने कर दिया था लेकिन उसके बाद इन्हें वह टेंडर नहीं मिला तो यह मुझ पर सारा गुस्सा निकाल रहे हैं। मैंने मनजीत से पूछा तो मनजीत कहने लगा यही वह व्यक्ति है जिसने मुझे कहा था कि मैं आपको वह टेंडर दिला दूंगा लेकिन अब यह अपनी बात से मुकर रहा है इसने मुझसे पैसे भी लिए है जिसकी वजह से मुझे तुम से पैसे लेने पड़े। मैंने मनजीत से कहा कोई बात नहीं है तुमने मुझसे ही तो पैसे लिए हैं किसी बाहर वाले से तो पैसे नहीं लिए मनजीत चुप हो गया उसके बाद हम लोग वहां से घर चले आए जब मैं घर लौटा तो मैंने मनजीत से कहा मुझे कोई जरूरी काम था लेकिन अब शायद वहां जा पाना संभव नहीं हो पाएगा इसलिए तुम बताओ तुम उससे क्यो झगड़ रहे थे मनजीत ने मुझे सारा माजरा बताया जो पैसे  मैने उस व्यक्ति को दिये थे और उस व्यक्ति ने मुझे काम नहीं दिलवाया। मैंने मनजीत से कहा इस बात को तुम भूल जाओ और आगे अपना काम शुरू करो कोई बात नहीं। मनजीत का गुस्सा शांत हो चुका था और फिर वह भी अपने काम पर लग गया अब वह अपने काम पर पूरी तरीके से मेहनत करने लगा। मनजीत ने उस पैसे की भरपाई तो कर ली थी, कुछ समय बाद मनजीत ने अपना एक नया ऑफिस खोल लिया। मैं उसके ऑफिस में हमेशा जाया करता था और उसी दौरान मनजीत ने अपने ऑफिस में एक रिसेप्शनिस्ट रख ली जिसका नाम चंद्रिका था, चंद्रिका बड़ी हॉट थी उसकी गांड देखकर मैं उस पर पूरी तरीके से फिदा हो जाता।

मैं जब भी उसे देखता तो हमेशा उसकी गांड मारने की सोचता था लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया क्योंकि वह मेरे इशारे समझ चुकी थी और मुझे उसे पटाने में बहुत समय लगा। मैंने जब चंद्रिका को पूरी तरीके से अपने काबू में कर लिया तो वह मुझे कहने लगी सर आजकल आप कुछ दिनों से बहुत ज्यादा ऑफिस आ रहे हैं, मैंने चंद्रिका से कहा बस ऐसे ही मैं आ जाता हूं क्योंकि तुम्हें देखे बिना मेरी आंखों को चैन ही नहीं आता है। जब मैंने उससे यह बात कही तो वह मुझे कहने लगी क्यों आपकी आंखों को चैन नहीं आता, मैंने उसे कहा वह तुम्हें अंदर ऑफिस में बताता हूं। वह कहने लगी आप मुझे ऑफिस में क्या बताएंगे मैंने उसे कहा तुम आओ तो सही वह मेरे साथ ऑफिस में आ गई। मनजीत कहीं गया हुआ था, जब वह मेरे साथ ऑफिस में आई तो मैंने उसके गुलाबी होठों को चूमना शुरू किया और उसे अपनी बाहों में ले लिया। वह मेरी बाहों में आ गई तो मुझे कहने लगी आप तो बड़े ठरकी किस्म के व्यक्ति हैं। मैंने उसे कहा क्यों तुम्हें क्या लगा था वह कहने लगी मुझे कुछ नहीं लगा था उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया।

वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी उसे मेरे लंड को चूसने में बहुत आनंद आ रहा था और वह काफी देर तक ऐसे ही करती जाती उसने जब मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में ले लिया तो वह मुझे कहने लगी आपका लंड तो बड़ा ही कडक है। मैंने उसे कहा तो वह अपने मुंह के अंदर तक मेरे लंड को लेती रही वह जब अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लेती और जब मैं पूरी तरीके से संतुष्ट हो गया तो मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया और उसकी योनि से गरम पदार्थ निकाल कर रख दिया। जब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई तो मैंने उसे चोदना शुरू किया उसकी टाइट चूत को मुझे धक्के देने में बड़ा मजा आता और मैं उसे बहुत देर तक चोदता रहा, जब उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही तरल पदार्थ बाहर की तरफ निकलने लगा तो वह मुझे कहने लगी है मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पाएगा और कुछ देर बाद वह झड गई। मेरा भी वीर्य कुछ समय बाद चंद्रिका की योनि में जा गिरा, जब मेरा वीर्य उसकी योनि में गिरा तो उसे बहुत ही अच्छा महसूस हुआ मैं अब भी मनजीत के ऑफिस में जाया करता हूं।


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