तुम्हें धोखा नहीं दूंगी

Tumhe dhokha nahi dungi:

antarvasna, kamukta मैं एक दिन बस से अपने ऑफिस के लिए जा रहा था और उसी बस में मुझे एक लड़की दिखाई दी जिसका चेहरा बिल्कुल ही मेरी पत्नी की तरह मिलता जुलता था उसे देख कर तो एक बार मुझे ऐसा लगा कि कहीं यह मेरी पत्नी ही तो नहीं है, मैं उसे बहुत देर से देख रहा था मेरा मन कर रहा था कि मैं उससे बात करूं लेकिन उससे मेरी बात करने की हिम्मत नहीं हो पाई और जब उस लड़की की नजर भी मुझ पर पड़ी तो वह मेरी तरफ बड़े ही गुस्सा में देखने लगी और उसने अपनी आंखों को भी बड़ा बड़ा कर लिया, मैं उसकी आंखों में ही देख रहा था कुछ देर तक तो उसने मुझे कुछ नहीं कहा लेकिन जब वह अपनी सीट से खड़ी हुई तो वह बड़ी से गुस्से में थी, वह मुझे कहने लगी क्या आपको तमीज नहीं है आप ऐसे ही किसी महिला को इतनी देर से घूर रहे हैं यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।

वहीं पास में बैठा एक 20 22 साल का युवक भी खड़ा उठ गया और उसने मुझे कहा तुम जैसे ही लोग लड़कियों को छेड़ते हैं, मैं उसे कुछ भी नहीं कह पाया क्योंकि मेरी गलती थी इसलिए मैंने कुछ भी नहीं कहा, उस लड़की ने मेरे गाल पर जोरदार तमाचा मारा तो उसके बाद भी मैंने उसे कुछ नहीं कहा, जब मेरा ऑफिस आ गया तो मैं वहां से अपने ऑफिस चला गया लेकिन उस लड़की का चेहरा मेरे दिमाग में ही था और उसकी बड़ी बड़ी आंखों ने तो जैसे मेरे दिल पर अपनी जगह बना ली थी,  मैं जब अपने ऑफिस में गया तो उस दिन मेरा काम करने का बिल्कुल भी मन नहीं हुआ मेरे ऑफिस में मेरे दोस्त कहने लगे पंकज आज तुम्हें क्या हो गया है तुम बिल्कुल भी बात नहीं कर रहे हो, मैंने उन्हें कहा नहीं बस आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही यह कहते हुए मैं वहां से खड़ा उठ कर बाथरूम की तरफ चला गया, मैं जब बाथरूम में गया तो मैंने अपनी जेब से फोन निकालते हुए अपनी पत्नी की तस्वीर देखनी शुरू कर दी मैं अपनी पत्नी की तस्वीर देख रहा था और मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी पत्नी ने मुझे इतना बड़ा धोखा दिया, मेरी पत्नी किसी अन्य पुरुष के साथ भाग गई इसका दुख मुझे सता रहा था और उस वजह से मैं काफी ज्यादा तनाव में आ गया।

मैंने अपने ऑफिस के मैनेजर से कहा सर मैं आज काम नहीं कर पाऊंगा मुझे आज आप छुट्टी दे दीजिए, उन्होंने कहा ठीक है आज तुम घर चले जाओ। मैं वहां से अपने घर आ गया और उस दिन मुझे बहुत ही ज्यादा तकलीफ हो रही थी मैं जब भी अपनी पत्नी के बारे में सोचता तो मुझे बहुत दुख होता, उस दिन मैंने अपनी बहन को फोन किया और जब मैंने उससे बात की तो मुझे थोड़ा हल्का महसूस हुआ मैंने उसे बताया कि आज मैंने सुजाता की तरह ही एक लड़की को देखा उसकी शक्ल हूबहू वैसे ही थी, मेरी बहन कहने लगी तुम किसी अच्छे डॉक्टर को दिखा लो मुझे लगता है कि तुम्हें अब किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाना चाहिए, मैंने उसे कहा नहीं उसकी शक्ल हूबहू बिलकुल सुजाता कि तरह ही थी। मैं अपनी बहन से जब भी बात करता हूं तो मुझे काफी अच्छा महसूस होता है और उस दिन उसके साथ मैं एक घंटे तक फोन पर बात करता रहा मुझे अब पहले से बेहतर महसूस हो रहा था मैं अपने घर में अपने माता पिता से भी बात नहीं करता क्योंकि जब से मेरे साथ यह घटना घटित हुई है उसके बाद से मैंने अपने माता पिता से भी बात करना कम कर दिया है क्योंकि उन्होंने सुजाता को मेरे लिए पसंद किया था और मुझे कई बार ऐसा लगता है कि जैसे इसके लिए कहीं ना कहीं वह लोग भी जिम्मेदार हैं क्योंकि मैं उस वक्त शादी करना नहीं चाहता था लेकिन उन्होंने ही मुझे जबरदस्ती शादी करने के लिए कहा और मुझ पर उन्होंने शादी का दबाव बनाया। कुछ ही दिनों बाद मैं दोबारा से बस में जा रहा था और वह लड़की मुझे दोबारा दिख गई, उस दिन उस लड़की ने मुझसे बात की और कहा की कहीं आज दोबारा से तुम उस दिन की तरह हरकत मत करना नहीं तो आज मैं तुम्हें नहीं छोडूंगी, उसने बहुत ही गुस्से में मुझे यह सब कहा, मैंने उससे कहा मैडम क्या मैं आपसे पांच मिनट बात कर सकता हूं? वह कहने लगी हां कहिए आपको क्या कहना है।

मैंने जब उसे अपनी पत्नी की तस्वीर दिखाई तो वह मेंरे चेहरे पर देखने लगी और जब मैंने उसे सारी सच्चाई बताई तो उसने अपनी गलती के लिए मुझसे माफी मांगी और कहने लगी सर मैं आपसे उस दिन के लिए माफी मांगती हूं, मैंने उससे कहा कोई बात नहीं आपको कौन सा इस बारे में पता था। उस लड़की को अपनी गलती पर बहुत ही बुरा लग रहा था, मैं जब बस से उतरा तो वह भी मेरे पीछे पीछे आने लगी और उसने मुझे आवाज देते हुए रोका और मुझे कहा सर मेरा नाम कनिका है और आपको मेरी वजह से उस दिन बहुत ही बुरा लगा मैं उसके लिए आपसे माफी मांगना चाहती हूं, मेरा दिल भी जैसे कनिका से बात करने के लिए मुझे कह रहा था और मैंने उससे बात की, हम दोनों की बात 5 मिनट तक होती रही मैंने उसे अपने बारे में सब कुछ बता दिया और उस दिन उसे मेरी बातें सुनकर बहुत बुरा भी लगा। मैंने कनिका से कहा कनिका मेरा जीवन अधूरा है मेरी पत्नी ने जिस प्रकार मेरे साथ बेवफाई की है उसको भुलाने में मुझे बहुत समय लगा लेकिन जब भी मैं तुम्हें देखता हूं तो तुम्हारे चेहरे को देखकर मुझे मेरी पत्नी की याद आती है मुझे तुम्हारे ऊपर अपना हक महसूस होता है। मैंने कनिका से कहा क्या मैं तुम्हें अपनी बाहों में ले सकता हूं। कनिका ने कुछ देर तक तो सोचा लेकिन जब वह मेरी बाहों में आई तो मुझे बहुत ही सुकून मिला, मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी पत्नी मेरे जीवन में वापस लौट आई हो। उस दिन के बाद मेरे जीवन में कनिका आ चुकी थी और कनिका को भी यह बात अच्छे से पता है मेरे जीवन में बहुत ही तनाव है वह मेरे तनाव को कम करने की हरसंभव कोशिश करती रही। मैंने उससे एक दिन पूछा क्या तुम्हें मेरे साथ में समय बिताना अच्छा लगता है वह कहने लगी हां पंकज मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

कनिका की उम्र मुझसे कम है लेकिन वह बहुत ही समझदार और अच्छी लड़की है। मैं एक दिन कनिका से फोन पर बात कर रहा था उस दिन पहली बार हम दोनों के बीच में सेक्स को लेकर बात हुई। सेक्स को लेकर हमारी बातें बढ़ने लगी थी एक दिन कनिका को मैंने अपने घर पर बुला लिया। कनिका जब मेरे पास बैठी हुई थी तो मैंने कनिका से कहा क्या तुम कुछ लोगी। वह कहने लगी नहीं पंकज मुझे कुछ नहीं चाहिए मैं कनिका के पास बैठ गया हम दोनों के बदन से गर्मी निकाल रही थी मैं कनिका से चिपकने की कोशिश करने लगा। मैंने जब कनिका को अपनी बाहों में लिया तो वह मेरी बाहों में आने को बेताब थी मैंने कनिका के गुलाबी होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया तो वह कहने लगी पंकज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। यह कहते हुए मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए जब उसका 34, 28 और 36 का फिगर मेरी आंखों के सामने था तो मैंने उसकी गांड पर अपने हाथ को फेरना शुरू किया। जब मैंने उसकी चूत में उंगली डालने की कोशिश की तो मेरी उंगली उसकी योनि में नहीं गई मैंने अपने लंड पर तेल लगाते हुए कनिका की योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। जब मेरा लंड उसकी योनि में घुसा तो उसकी योनि से खून निकल रहा था मैं उसकी चूत बड़ी तेजी से मार रहा था उसकी योनि से लगातार उतनी ही तेजी से खून का बाहव हो रहा था। वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी उसके मुंह से जो गर्म सांस निकल रही थी उससे मेरी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगती। मैंने बड़ी तेज गति से उसे धक्के देने शुरू कर दिए मैं उसके सामने ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया क्योंकि वह एक कच्ची कली थी। मैं उसकी गर्मी को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया लेकिन उस दिन उसके साथ संभोग करके मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हुआ उस दिन के बाद तो जैसे कनिका ने मेरे जीवन मैं अपनी पूरी जगह बना ली। मुझे जब भी उसकी आवश्यकता होती तो वह हमेशा मेरे साथ खड़ी होती मैंने उससे कई बार कहा कि कहीं तुम भी मुझे मेरी पत्नी की तरह धोखा ना दे देना। वह मुझे कहने लगी नहीं पंकज मैं कभी भी तुम्हें धोखा नहीं दूंगी।


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