ठरकी चाची की गांड के घोड़े खोलें

Tharki chachi ki gaand ke ghode khole:

desi chudai ki kahani, antarvasna

मेरा नाम समीर है मैं दिल्ली का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 25 वर्ष है। मेरे पिताजी एक कंपनी में नौकरी करते हैं लेकिन उनकी तनख्वाह इतनी नहीं है कि वह हमारे घर का खर्चा निकाल पाए, लेकिन फिर भी वह हमारे घर का खर्चा चलाते हैं। अकेले घर का खर्चा उठाने में उन्हें बहुत तकलीफ होती थी परंतु वह किसी को भी नहीं बताते और ना ही उन्होंने मुझे कभी इस बारे में बताया लेकिन मुझे भी उन्हें देख कर कई बार लगता है कि मुझे कुछ काम कर लेना चाहिए। मेरे साथ के जितने भी दोस्त है वह सब अच्छी नौकरी पर है और वह बहुत ही पैसे वाले हैं। मेरे पिताजी ने मुझे एक अच्छे कॉलेज में दाखिला दिलवाया, ताकि मैं अच्छी पढ़ाई कर सकू। मैंने जब अपनी पढ़ाई पूरी कर ली तो उसके बाद मैं घर पर ही था क्योंकि मुझे एक अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही थी।

कुछ दिनों के लिए मैं एक कंपनी में काम करने गया था परंतु मुझे अच्छी तनख्वाह नहीं मिली वह कहने लगे कि तुम्हें कुछ दिनों तक यहां पर काम करना पड़ेगा, उसके बाद ही तुम्हें तनख्वा दी जाएगी इसलिए मैंने वह कंपनी छोड़ दी। मेरे पिताजी ने मेरी बहन की शादी भी हमारे रिश्तेदारों से पैसे लेकर करवाई, उनके सर पर बहुत कर्चा हो चुका है इसीलिए वह चाहते थे कि वह कर्ज जल्दी से जल्दी निपटा दें लेकिन वह हमारे रिस्तेदारो का पैसा नहीं लौटा पाए। मैंने सोचा मैं कहीं नौकरी कर लेता हूं लेकिन मुझे अच्छी नौकरी नहीं मिल रही थी इसलिए मैं हताश था। एक दिन मेरे चाचा ने मुझे फोन किया और कहने लगे की तुम आजकल क्या कर रहे हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं आज कल घर पर ही हूं। वह हमारी बहुत मदद करते हैं और हमेशा ही उन्होंने हमारी मदद की है। मेरे चाचा मुंबई में एक अच्छी कंपनी में काम करते हैं और मेरी चाची भी एक कंपनी में मैनेजर के पद पर है। वह लोग मुझे हमेशा ही कहते हैं कि तुम मुंबई आ जाओ लेकिन मैं वहां उनके पास नहीं जाना चाहता क्योंकि मुझे लगता था की मुंबई काफी दूर हो जाएगा और मेरे माता-पिता की देखभाल भी घर पर कोई नहीं कर पाएगा इसलिए मैं मुंबई नहीं जाना चाहता था परंतू अब मेरी स्थिति ऐसी बन चुकी है कि मुझे मुंबई जाना ही पड़ेगा इसलिए मैंने अपने चाचा से कह दिया कि मैं मुंबई आ रहा हूं।

मैंने यह बात अपने घर में भी बता दी और उसके कुछ दिनों बाद मैं मुंबई चला गया। जब मैं मुंबई पहुंचा तो मेरे पिताजी को मैंने फोन कर दिया था। मेरे चाचा चाची मुझे देखकर बहुत खुश हुए और कहने लगे तुम्हारा सफर अच्छा तो रहा, मैंने उन्हें कहा कि हां सफर तो मेरा बहुत अच्छा रहा। फिर हम लोग बैठकर आपस में बातचीत कर रहे थे और वह मुझसे पूछ रहे थे कि  तुम्हारे माता-पिता कैसे हैं, मैंने उन्हें कहा कि वह अच्छे हैं। मेरे चाचा मुझे कहने लगे अब तुम यही पर काम करोगे, मैं तुम्हारे लिए अपनी कंपनी में बात कर दूंगा और तुम मेरे साथ ही काम करना। मैंने कहा ठीक है। उन्होंने मेरा रिज्यूम अपनी कंपनी में अपने बॉस को दे दिया। अब मैंने वह कंपनी ज्वाइन कर लिया, मेरे चाचा और मैं साथ में ही जाया करते थे। मैं भी अक्सर अब काम के सिलसिले में बाहर जाता था। मेरे चाचा के दो छोटे बच्चे हैं, वह स्कूल में पढ़ाई करते हैं। वह लोग स्कूल में ही हैं और जब भी वह घर पर होते हैं तो मैं उनके साथ अच्छा समय बिताता हूं। मैं भी अपने काम से बहुत खुश हूं। मैंने अपने पिताजी को फोन किया और उनसे कहा कि मैं आपके खाते में कुछ पैसे भिजवा रहा हूं, मैने उनके खाते में पैसे भिजवा दिए। अब मेरे काफी दोस्त भी बनने लगे थे और मैं अपने काम में ही बिजी रहता था। मेरी चाची सुबह हमारे लिए नाश्ता बनाती थी और उसके बाद वह अपने ऑफिस चले जाती थी। मेरे चाचा और मैं भी ऑफिस चले जाते थे और शाम को हम देर से ही लौटते थे। मैं कभी कबार अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर लिया करता हूं और मेरे साथ के जितने भी दोस्त हैं वह अधिकतर मुंबई के ही रहने वाले हैं। अब मेरी उनके साथ बहुत अच्छे से बनने लगी थी और मुझे भी अपने दोस्तों के साथ पार्टी करना बहुत अच्छा लगता था। हमारे ऑफिस में ही एक लड़के का बर्थडे था, वह कहने लगा कि तुम मेरे घर पर आना, उसने हमारे ग्रुप वालों को इनवाइट किया था और जब हम उसके घर पर गए तो वहां हम लोगों ने बहुत इंजॉय किया।

उस दिन मैंने अपने चाचा को फोन किया,  मैंने उन्हें कहा कि मुझे आने में आज देरी हो जाएगी इसलिए आप लोग खाना खा लेना। मेरी चाची भी कहीं बाहर गई हुई थी इसलिए मेरे चाचा ने कहा कि तुम जब वापस लौटो तो अपनी चाची को भी अपने साथ ले आना। मैंने कहा ठीक है मैं चाची को भी साथ में ही ले आऊंगा। मैंने चाची को भी फोन कर दिया और उन्हें कहा कि आप कब तक लौटेंगे, वह कहने लगी की जब मैं यहां से निकलूंगी तो तुम्हें कॉल कर दूंगी। मैंने उन्हें कहा ठीक है और उसके बाद मैं अपने दोस्त की पार्टी में एंजॉय करता रहा। जब पार्टी खत्म हो गई तो मैंने चाची को फोन कर दिया और चाची कहने लगी की मैं आ चुकी हूं, तुम मुझे लेने आ जाओ। मैं चाची को लेने के लिए चला गया। चाची अपनी सहेली के घर पर थी, मैंने उन्हें वहां से रिसीव किया और उसके बाद हम लोग घर आ रहे थे, हम लोग ऑटो का इंतजार कर रहे थे लेकिन रात काफी हो गई थी। हमें एक ऑटो वाला मिला और हम उस ऑटो में बैठ गए। हम लोग घर आ रहे थे और मैं चाची के साथ बात कर रहा था। मैं चाची से पूछ रहा था आपका काम कैसा चल रहा है, वह कहने लगी मेरा काम अच्छा चल रहा है और मैं अपने दोस्त के पास आई हुई थी क्योंकि काफी समय से मैं अपनी दोस्त से मिल नहीं पाई थी।

हम दोनों हैं ऑटो मे थे तो मेरी चाची की बड़ी बड़ी गांड मुझसे टकरा रही थी काफी देर तक तो मैं अपने आप को कंट्रोल करता रहा लेकिन जब मुझसे बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने अपनी चाची की जांघ पर हाथ रख दिया। मैंने उनकी जांघ पर अपने हाथ को रखा तो वह भी मचलने लगी और पूरे मूड में आ गई। मैंने जैसे ही उनकी योनि को दबाया तो वह पूरे मूड में आ गई। जब हम लोग घर पहुंचे तो मेरे चाचा सो चुके थे हमारे पास दूसरी चाबी थी हम लोग दरवाजा खोल कर अंदर चले गए। मेरी चाची मेरे कमरे में आ गई और मेरी पैंट से मेरे लंड को बाहर निकाला और अपने मुंह में लेने लगी। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लिया और चूसने लगी मुझे भी बहुत आनंद आ रहा था। उसके बाद मैंने भी उन्हें पूरा नंगा कर दिया और उनकी गांड को मैंने अपने हाथों से पकड़ लिया। उनकी बडी बडी गांड देख कर मेरा पूरा मूड खराब होने लगा और मैंने भी जैसे ही उनकी गांड के अंदर अपने लंड को में डाला तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा और वह चिल्लाने लगी। मैंने उनकी गांड के अंदर तक अपने लंड को घुसा कर रख दिया काफी देर तक मैंने उन्हें ऐसे ही धक्के मारे। वह बहुत खुश हो रही थी और कह रही थी तुम मेरी गांड बड़े ही अच्छे से मार रहे हो मैंने काफी देर तक उन्हें ऐसे ही झटके मारे जिससे कि उनकी गांड का छेद पूरा बड़ा हो गया। मैं भी उनकी गांड की गर्मी को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया और जैसे ही मेरा माल उनकी गांड में गिरा तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ और उसके बाद मैंने उनकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। उनकी गांड मारने के बाद मुझे उनकी चूत मारने मे ज्यादा मजा नहीं आ रहा था इसीलिए मैंने कुछ देर तक उनकी योनि में अपने लंड को डाल कर रखा और उन्हें बड़ी तेज तेज धक्के मारते रहा। उन्हें बहुत मजा आ रहा था और उनकी चूत से पानी बाहर निकल रहा था। वह मुझे कहने लगी कि मेरा झडने वाला है मैंने भी उन्हें बड़ी तेज तेज झटके मारे जैसे ही मेरा माल उनकी योनि में गिरा तो उन्हें बहुत अच्छा लगा। वह कहने लगी तुमने मुझे आज बड़े ही अच्छे से चोदा है और आज के बाद तुम मुझे हमेशा ही ऐसे चोदते रहना और मेरी इच्छा को पूरी करते रहना। उनकी बातों से उनकी ठरक साफ झलक रही थी लेकिन मुझे उनकी गांड मारने में वाकई में मजा आया।


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