तेरी चूत की बिरयानी मारू

Teri chut ka biryani maroon:

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मेरा नाम मीरा है और मैं एक हाउसवाइफ हूं। मेरे पति काम के सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते है और मैं घर पर ही होती हूं। मैं घर पर अपने बच्चों का ध्यान रखती हूं और वह काम पर ध्यान देते हैं। कुछ दिनों बाद मेरे पति ने मुझे बताया कि उनका विदेश में कहीं नौकरी का बंदोबस्त हो गया है। इसलिए वह विदेश जाना चाहते हैं। उन्होंने मुझे कहा कि मुझे वहां पर बहुत ही अच्छी सैलरी भी मिलेगी। इसलिए मैं सोच रहा हूं कि विदेशी चला जाऊं। वहां अच्छे से मेहनत करने के बाद अपना भविष्य अच्छे से सवांर पाएंगे। मैंने उन्हें कहा ठीक है। तुम अपने हिसाब से देख लो। अगर तुम्हें लगता है वहां जाकर कुछ अच्छा हो सकता है तो तुम विदेश चले जाओ। मेरे पति मुझे समझाने लगे की वहां पर मुझे बहुत ही अच्छी तनख्वा मिल रही है और मुझे बहुत सारी फैसिलिटी भी मिलने वाली है। जो कि यहां पर बिल्कुल भी नहीं मिलने वाली। यह बात उन्होंने मुझे कहीं तो मुझे भी लगा कि उन्हें बाहर ही चला जाना चाहिए। कुछ दिनों बाद उनके ऑफिस वालों ने उन्हें विदेश भेज दिया और वह विदेश चले गए। उनके विदेश जाने के बाद हमारी फोन पर बातें हो जाया करती थी लेकिन अब उतनी बात नहीं हो पा रही थी। मैं भी अपने बच्चों की पढ़ाई का पूरा ध्यान रख रही थी और मेरे पति मुझे हर महीने पैसे भेज दिया करते थे। जिससे मैं अपने घर का खर्चा चलाती थी और बच्चों की स्कूल की फीस भर दिया करती थी। विदेश गए हुए उन्हें भी काफी समय हो चुका था और ऐसे ही मेरा भी समय बीता जा रहा था।

हमेशा की तरह इस बार भी उन्होंने कुछ पैसे भेजे थे। तो वह पैसे मैंने अपने घर पर ही रख लिए। मैंने सोचा तीन-चार दिन में बैंक में जमा कर दूंगी। यही सोच कर मैंने वह पैसे घर पर ही अलमारी में रख दिये। कुछ दिन बाद जब मैंने अलमारी खोल कर देखा तो वह पैसे वहां नहीं थे। मैंने पहले अपने बच्चों से पूछा कि क्या तुमने अलमारी से वह पैसे निकाल लिए। वह कहने लगे नहीं, हमने तो नहीं निकाले अब मुझे थोड़ा टेंशन होने लगी। मुझे ऐसा लगा शायद मैंने कहीं और रख दिये हो। फिर मैंने घर का कोना कोना छान मारा लेकिन मुझे वह पैसे कहीं पर भी नहीं मिले। उसके बाद मैंने थोड़ी देर बैठ कर शांत दिमाग से सोचने लगी कि मैंने वह पैसे कहां रखे होंगे लेकिन इतना सोचने के बाद भी मुझे कुछ याद नहीं आ रहा था। मुझे इतना ही याद था कि वह पैसे मैंने अपनी अलमारी में ही रखे हैं। उसके बाद फिर मुझे ध्यान आया कि मैंने तो वह पैसे अलमारी में ही रखे थे कही पैसे अलमारी से चोरी तो नही हो गए हैं। मैं तुरंत ही पुलिस स्टेशन गई और वहां पर कंप्लेंट दर्ज करवा दी।

वहां पर एक इंस्पेक्टर थे। उनका नाम राघव था। जब मैंने उन्हें यह बात बताई तो वह कहने लगे कि हमें आपके घर आना पड़ेगा और देखना पड़ेगा कि सच मे पैसे चोरी हुए है या नही। अब वह हमारे घर जांच-पड़ताल के लिए आ गए। जब तो उन्होंने सारा घर देखा तो उन्हें लगा वाकई में पैसे गुम है। मैंने उन्हें बताया कि मैंने यहां अलमारी में ही सारे पैसे रखे थे। अब उन्होंने मेरी कंप्लेंट दर्ज करवा दिया और उन्होंने कहा कि आप चिंता मत कीजिए। हम देख लेंगे आपके पैसे कहां गए और किसने चोरी किये हैं। इस सिलसिले में मुझे कई बार पुलिस स्टेशन जाना पड़ता था। मैं बहुत ज्यादा थक जाती थी। क्योंकि पुलिस स्टेशन से घर आओ और घर से फिर वहां जाओ। बहुत ही समस्या वाली बात है। मुझे कई बार ऐसा लग रहा था कि मैंने गलत ही पुलिस में कंप्लेंट करवा दी। मुझे घर पर अपने बच्चों का ध्यान रखना चाहिए। कुछ दिनों बाद उन्होंने वह पैसे मुझे वापस लौट दिए। उन्होंने मुझे पुलिस स्टेशन बुलवाया और कहने लगे कि आपके पैसे जो चोरी हुए थे वह हमें मिल चुके हैं। हमने चोर को पकड़ लिया है। मैं बहुत खुश हुई और पुलिस स्टेशन गई तो उन्होंने मुझे वह पैसे लौटा दिए। मैंने उनसे पूछा कि यह मेरे घर से कैसे चोरी हुए। वह कहने लगे कि आपके घर में चोर चोरी के सिलसिले से आया था और उस चोर ने आपके घर से चोरी कर ली। मैंने इंस्पेक्टर राघव से शुक्रिया कहा और वहां से चली गई। अब मैं अपने काम पर लगी रहती थी। बच्चों के लिए खाना बनाती और उनके साथ ही समय बिताती थी। एक दिन मुझे स्पेक्टर राघव मिले और कहने लगे की आप यहां कहां जा रहे हैं। तो मैंने उन्हें बताया कि मैं अपने बच्चों को स्कूल लेने के लिए जा रही हूं। तो उन्होंने भी मुझे बताया कि वह भी अपने बच्चों को स्कूल लेने के लिए जा रहे हैं। तब मुझे पता चला कि उनके बच्चे भी उसी स्कूल में पढ़ते हैं। जिस स्कूल में मेरे बच्चे पढ़ते हैं। एक दिन स्कूल में पैरेन्ट्स मीटिंग थी। मैं स्कूल मीटिंग में चली गई और उस दिन मुझे वहां पर इस्पेक्टर मिले। अब हमारी बातें काफी होने लगी थी। वह एक नेक इंसान भी थे। उन्होंने मेरी मदद भी की थी और मुझे वह पैसे भी दिला दिए थे। नहीं तो शायद वह पैसे मुझे मिलते भी नहीं। उन्होंने जब मुझे पेरेंट्स मीटिंग में देखा तो वह कहने लगे कि आज आप भी आई है। मैंने उन्हें कहा कि हां आज मैं भी आई हूं। मैंने राघव से काफी देर तक स्कूल में बात की और उसके बाद मैं अपने घर चली गई।

एक दिन वह भी हमारे घर पर आ गए और कहने लगे कि मैं इस तरफ आया था तो सोचा आप से मिलता हुआ चलू। मैं उनके इरादों को समझ चुकी थी मैं समझ चुकी थी कि उनको मेरी चूत मारनी है और मैंने भी अब उन्हें इशारों इशारों में बता दिया कि मैं भी अब तैयार हो चुकी हूं। वह सोफे पर बैठे हुए थे तो मैं उनके बगल में जाकर बैठ गई और हम दोनों काफी देर तक ऐसे ही बातें करने लगे। तभी अचानक से उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और जब उन्होंने मेरा हाथ पकडा तो उसके बाद मेरे स्तनों को भी दबाना शुरु कर दिया और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। जब वह मेरे स्तनों को दबा रहे थे मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरे अंदर से कुछ अलग ही तरीके से करंट निकल रहा है। अब उन्होंने मुझे वहीं सोफे पर लेटाते हुए मुझे चूमना शुरू कर दिया और चूमते-चूमते उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। उन्होंने मेरे पेट को भी चूमना शुरू किया तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। जब वह मेरे पेट को चूम रहे थे और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे चूत का पानी निकल रहा है।

अब उन्होंने मेरे चूत को थोड़ी देर तक चाटा और उन्होंने तुरंत ही अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दिया और वह मुझे ऐसे ही चोदने लगे। लेकिन उनका मन अभी नहीं भरा था उनका वीर्य बहुत जल्दी गिर गया। उन्होंने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरे चूतड़ों को पकड़ते हुए अपने लंड को दोबारा से हिलाना शुरू किया और हिलाते हिलाते उन्होंने मेरी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। राघव को बहुत ही मजा आ रहा था वो कहने लगे कि मुझे गांड मारने में ही मजा आता है चूत मारने में तो मुझे इतना मजा नहीं आता। वह ऐसे ही बड़ी तेजी से मुझे धक्के मारने लगे वह इतनी तेज धक्के मार रहे थे कि मेरी गांड में दर्द होने लगा और गांड से खून भी निकलने लगा। राघव बहुत ही मजे मे मुझे धक्के देते जाता मै कहने लगी कि आपका वीर्य गिर चुका है वह कहने लगे अभी तो शुरूआत है अभी तो काफी देर लगेगी। ऐसा कहते हुए उन्होंने मुझे और तेज तेज धक्के मारने लगे। मेरा शरीर अब हिलने लगा लेकिन उन्होंने मेरी चूतडो को पकड़ा हुआ था इस वजह से मुझे बहुत मजा आ रहा था। वह भी मुझे ऐसे ही धक्के मार कर चोद रहे थे और मेरा शरीर कांपने लगा। जब उनका लंड मेरी गांड मे जा रहा था तो मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई मोटी सी चीज मेरी गांड के अंदर जा रही हो। मैं भी थोड़ी देर बाद अपनी चूतडो को उनके लंड से टकराने लगी ताकि उनका जल्दी से मेरी गांड के अंदर गिर जाए। मैंने जैसे ही अब उनके लंड पर धक्का मारना शुरू किया तो वह बड़ी तेज तेज झटका मार रहे थे। मरे गांड के छेद से जो गर्मी उत्पन्न हुई उससे उनका वीर्य मेरी गांड के अंदर ही गिर गया। जब उन्होंने गांड से अपना लंड निकाला तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हुआ।

 


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