तौलिया लिपटा रहने दो

Tauliya lipta rahne do:

antarvasna, hindi sex stories एक शाम मैं घर पर बैठकर घर का काम कर रही थी तभी तेजी से मेरा बच्चा दौड़ता हुआ मेरे पास आया उसकी आंखों में आंसू थे वह रो रहा था, मैंने उससे कारण पूछा कि बेटा तुम क्यों रो रहे हो? लेकिन उसने मुझे कुछ जवाब नहीं दिया, जब मैंने उसे डांटते हुए पूछा कि तुम रो क्यों रहे हो तो उसने मुझे सारी बात बताई और कहने लगा पड़ोस के एक लड़के ने मुझे धक्का दिया और मुझे चोट लग गई। मैं जब बाहर गई तो बाहर काफी बच्चे खेल रहे थे, हमारे घर के बाहर काफी बड़ा स्पेस है जहां पर बच्चे खेलते रहते हैं। मैंने अपने लड़के से पूछा कि तुम्हें कौन से बच्चे ने धक्का दिया? वह मेरा हाथ पकड़ते हुए मुझे उस बच्चे के पास लेकर गया, वह जब मुझे उसके पास लेकर गया तो उसकी मम्मी भी वहीं पर खड़ी थी मैंने उस बच्चे से प्यार से पूछा कि बेटा आपने क्या रोहन को धक्का दिया है, वह कहने लगा आंटी गलती से धक्का लग गया।

उसकी उम्र भी ज्यादा नहीं थी इसलिए मैंने उसे कुछ नहीं बोला फिर मैंने रोहन से कहा कि बेटा तुम अब चुप हो जाओ मैंने उस बच्चे को डांट दिया है, तब उसकी मम्मी भी मेरे पास आई और कहने लगी दीदी क्या हुआ? मैंने उसे सारी बात बताई वह कहने लगी आपको तो पता ही है कि बच्चे कितने जिद्दी होते हैं और उन्हीं की जिद की वजह से मुझे यहां आना पड़ा। मुझे नहीं पता था कि कोमल लखनऊ की रहने वाली है मेरी भी पढ़ाई लखनऊ से ही हुई है इसीलिए मैं कोमल से बात करने लगी, उसने मुझे बताया कि हमें कुछ ही दिन हुए हैं और हम लोग अब इस कॉलोनी में ही रहने लगे हैं उसके पति ने कॉलोनी में घर खरीद लिया था। मैंने कोमल से कहा आप को जब समय मिले आप हमारे घर पर आइएगा, वह कहने लगी क्यों नहीं अब तो आप हमारी शहर की ही निकल गई तो अब आपके घर आना ही पड़ेगा। मैंने उसे कहा अभी मैं चलती हूं आप मेरे घर जरूर आइएगा यह कहते हुए मैं अपने बच्चे को लेकर वहां से चली गई, मैं जब घर आई तो मेरे पति सार्थक भी घर पर आ चुके थे सार्थक कहने लगे मुझे आए हुए तो काफी समय हो चुका है और तुम लोग पता नहीं कहां चले गए मैं तुम्हें फोन कर रहा था लेकिन तुमने अपना फोन घर पर ही छोड़ दिया, मैंने सार्थक को सारी बात बताई, सार्थक कहने लगे चलो कोई बात नहीं मुझे बहुत तेज भूख लगी है क्या तुम मेरे लिए कुछ बना सकती हो? मैंने सार्थक से कहा मैं तुम्हारे लिए अभी गरमा-गरम पकोड़े बना देती हूं।

मैंने सार्थक के लिए पकोड़े बनाये और साथ में गरमा गरम चाय बना दी सार्थक को पकोड़े बहुत ही पसंद है वह खुश हो गए और कहने लगे तुम्हारे हाथों में तो जादू है। हम दोनों के बीच काफी मजाक होता रहता है सार्थक ने मुझे कभी भी ऐसा महसूस नहीं होने दिया कि हम दोनों पति पत्नी हैं हम दोनों पहले से ही एक दोस्त की तरीके से रहते हैं। कुछ दिनों बाद कोमल मेरे घर पर आई, कोमल जब घर पर आई तो मैंने कोमल से कहा चलो तुम कम से कम हमारे घर तो आई मैं सोच रही थी कि शायद तुम हमारे घर आओगी ही नहीं, कोमल कहने लगी नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो कब से सोच रही थी लेकिन मुझे आने का वक्त नहीं मिल पा रहा था। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे कोमल मुझे कहने लगी हम लोग कहीं घूमने का प्लान बनाते हैं, मैंने उससे कहा मुझे इस बारे में अपने पति से बात करनी पड़ेगी यदि वह हां कह देते हैं तो हम लोग घूमने के लिए चल सकते हैं, कोमल कहने लगी आप जरूर अपने पति से बात कर लीजिएगा। वह हमारे घर पर एक घंटे तक बैठी रही एक घंटे तक हम लोगों ने खूब गप्पे लड़ाई और उस दिन समय का ही पता नहीं चला कब एक घंटा बीत गया जब शाम को सार्थक ऑफिस से लौटे तो मैंने सार्थक से कहा कि कोमल हमारे घर पर आई थी और वह घूमने की बात कर रही थी, वह कहने लगे हम लोग घूमने के लिए जयपुर जा सकते हैं जयपुर में मेरे दोस्त का एक पुश्तैनी मकान है और वह अब दुबई में रहता है मैं उससे बात कर सकता हूं यदि तुम कहो तो, मैंने सार्थक से कहा क्यों नहीं आप जरूर बात कर लीजिए।

जब हम लोगों का पूरा प्लान बन गया तो कोमल ने मुझे अपने पति से मिलवाया,  कोमल ने मुझे उनसे पहली बार ही मिलाया था, कोमल के पति का नाम दीपांशु है वह बहुत ही सीधे किस्म के व्यक्ति लग रहे थे लेकिन धीरे-धीरे हमारे बीच में बातें होने लगी हम लोग एक दूसरे के साथ खुलकर बातें कर रहे थे दीपांशु भी फिर मजाक के मूड में आ चुके थे और वह भी हमारे साथ मजाक कर रहे थे, हम लोग अपनी कार से ही जयपुर के लिए निकले थे, जब हम लोग जयपुर पहुंच गए तो मेरे पति ने कहां मैं अपने दोस्त से फोन पर बात कर लेता हूं। उन्होंने उससे फोन पर बात की तो वह हमें उनके घर पर लेकर चले गए वहां पर उन्होंने एक चौकीदार रखा हुआ था जो कि घर की सारी साफ सफाई और घर की देखभाल करता था उसने हमें कहा साहब मैंने सफाई करवा दी है आप लोग आराम कर लीजिए। हम लोग जब घर के अंदर इंटर हो गए तो मैंने देखा की घर तो काफी पुराना है, मैंने सार्थक से कहा घर तो बहुत ही पुराना लग रहा है, वह कहने लगे यह तो उनका काफी पुराना घर है लेकिन अब यहां पर कोई भी नहीं रहता है। दीपांशु और कोमल भी दूसरे कमरे में आराम कर रहे थे मैंने उस दिन सार्थक से कहा सार्थक मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है। सार्थक कहने लगे आज तो मेरे बस की बात नहीं है मैं बहुत थक चुका हूं उस दिन मेरा बहुत मन हो रहा था।

मै कोमल से मिलने दूसरे रूम में गई तो कोमल बाथरूम में नहा रही थी दीपांशु बेड में लेटे हुए थे उन्होंने तौलिया लपेटा हुआ था जैसे ही उन्होंने मुझे देखा तो वह शर्माने लगे। मैंने उन्हें कहा आप ऐसे ही लेटे रहिए मैंने उनसे पूछा कोमल कहां है। वह कहने लगे कोमल तो बाथरूम में नहा रही है। उनके बगल में उनका बच्चा लेटा हुआ था मैं उनके पास जाकर बैठ गई। दीपांशु मुझसे कहने लगे कोमल को नहाने में बहुत टाइम लगता है वह ना जाने क्यों इतना समय लेती है। हम दोनों बैठे हुए थे उस दिन मेरी चूत में कुछ ज्यादा ही खुजली हो रही थी इसलिए मैं दीपांशु से सटकर बैठने की कोशिश करने लगी लेकिन वह तो जैसे मुझे भाव ही नहीं दे रहे थे। मैंने भी अपने सूट से अपने स्तनों को थोड़ा बाहर करने की कोशिश की तो मेरे स्तनों की लकीर उनको दिखाई देने लगी। वह बड़े ध्यान से मेरे स्तनों की लकीर को देख रहे थे उन्हें मेरे इशारे तो समझ आने लगे थे उन्होंने जब मेरी जांघ पर अपने हाथ को रखा तो मैं समझ गई अब दीपांशु मुझसे सेक्स की उम्मीद कर रहे हैं। मैंने उन्हें कहा क्या आप मेरी इच्छा पूरी कर सकते हैं उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया उन्होने सीधा ही मुझे अपने नीचे लेटाते हुए मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। जब उन्होंने मेरे कपड़े उतारे तो उन्होंने मेरी चूत के अंदर अपनी दो उंगलियों को डाल दिया जब उनकी उंगलिया अंदर गई तो मुझे दर्द हुआ मैं उनकी भावना को समझ चुकी थी उनके अंदर कितना जोश पैदा हो चुका है। मै भी उनके लंड को अपने हाथ से हिलाने लगी मैं बड़ी तेजी से उनके लंड को हिला रही थी मुझे बहुत अच्छा लगता जब मैं अपने हाथ से उनके लंड को हिला रही थी। उन्होंने जब अपने लंड को मेरी चूत पर सटाया तो मेरी चूत पूरी चिकनी हो चुकी थी जैसे ही उन्होंने धक्का देकर अपने लंड को मेरी योनि के अंदर तक डाला तो मेरे अंदर गर्मी बढने लगी मैंने अपने दोनों पैरों को खोल लिया दीपांशु मुझे तेजी से धक्के मार रहे थे, 10 मिनट तक उन्होंने मुझे इतने अच्छे से चोदा की मेरे अंदर की सारी गर्मी उन्होंने बाहर निकाल दी। मुझे उनके साथ सेक्स करने मे एक अलग ही अनुभूति हुई हम दोनों ने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। जब हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए तो कोमल भी नहा कर बाहर आ गई वह मुझे कहने लगी शालिनी दीदी आप कब आए ? मैंने उसे कहा मुझे तो आए हुए 10 मिनट हो चुके हैं दीपांशु मेरे चेहरे की तरफ देख रहे थे, मुझे अंदर ही अंदर से इतनी खुशी महसूस हो रही थी मुझे नहीं पता था कि दीपांशु से मैं अपनी चूत की खुजली मिटाऊंगी।


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