सुनीता की चूत भी झड़ गयी

Antarvasna, kamukta:

Suneeta ki choot bhi jhad gyi मैं अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार हुआ ही था कि मुझे सुभाष का फोन आया और वह मुझे कहने लगा कि आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है तो तुम क्या मुझे मेरे ऑफिस तक छोड़ दोगे। मैंने सुभाष को कहा कि ठीक है मैं तुम्हें तुम्हारे ऑफिस तक छोड़ देता हूं। मैं जब अपनी मोटरसाइकिल से सुभाष के घर पर गया तो सुभाष घर पर तैयार होकर बैठा हुआ था मैंने उसे कहा कि अगर तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तो तुम ऑफिस क्यों जा रहे हो। वह मुझे कहने लगा कि आज मुझे कुछ जरूरी काम है इसलिए मुझे ऑफिस जाना पड़ रहा है। सुभाष की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए उसने मुझे कहा था कि तुम मुझे ऑफिस छोड़ दो। मैंने उसे उसके ऑफिस छोड़ा और वहां से मैं अपने ऑफिस चला गया।

जब मैं अपने ऑफिस गया तो उस दिन मेरे ऑफिस में काफी ज्यादा काम था और मैं अपने ऑफिस से जब घर के लिए लौटा तो मैंने सुभाष को फोन किया सुभाष ने मुझे बताया कि वह घर पर ही है। मैं सुभाष को मिलने के लिए उसके घर पर चला गया। जब मैं उसको मिलने के लिए गया तो वह मुझे कहने लगा कि तुमने बहुत ही अच्छा किया कि तुम मुझसे मिलने के लिए आ गए। मैं सुभाष को मिलने के लिए उसके घर पर गया तो मैंने उसे कहा कि तुम कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले लो। वह मुझे कहने लगा कि हां मैंने कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली है। मैं थोड़ी देर तक सुभाष के साथ बैठा रहा फिर मैं घर लौट आया। जब मैं घर लौटा तो पापा और मम्मी ने मुझसे कहा कि बेटा आज तुम देर से घर आ रहे हो मैंने उन्हें कहा कि हां सुभाष की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मैं उसके घर पर उससे मिलने के लिए गया हुआ था। पापा और मम्मी के साथ मैं थोड़ी देर बैठा रहा फिर मैं अपने रूम में चला गया और मैं अपने कपड़े चेंज करने के बाद बाहर हॉल में आकर पापा मम्मी के साथ बैठ गया था। वह लोग मुझे कहने लगे कि हम लोग कुछ दिनों के लिए रोहतक जा रहे हैं मैंने उन्हें कहा कि रोहतक में क्या कुछ जरूरी काम है।

पापा ने मुझे बताया कि रोहतक में उनके दोस्त की बेटी की शादी है इसलिए वह रोहतक जाने वाले थे। मैंने पापा से कहा कि मैं भी आपके साथ रोहतक चलता हूं पापा ने कहा कि अगर तुम अपने ऑफिस से छुट्टी ले लो तो तुम भी मेरे साथ रोहतक चलो। मैंने भी पापा से कहा कि ठीक है मैं आपके साथ रोहतक चलता हूं और हम सब हम लोगों ने रोहतक जाने का फैसला कर लिया था। हम लोग कार से ही रोहतक गए और जब हम लोग रोहतक गए तो वहां पर हम लोगों को काफी अच्छा लगा। पापा ने मुझे अपने दोस्त से मिलवाया, यह पहली बार था जब मैं उनके दोस्त से मिला था और उस शादी के दौरान जब मैं सुनीता से मिला तो सुनीता से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा। सुनीता और मैं एक दूसरे से बातें करने लगे थे। हालांकि हम लोगों की बातें ज्यादा तो नहीं हुई थी लेकिन उसके बाद जब मैं दिल्ली वापस लौट आया तो मेरे पास सुनीता का नंबर था जिस वजह से हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बातें किया करते। सुनीता और मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी और मुझे इस बात की बड़ी खुशी थी कि हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छे से बात कर पा रहे थे।

हम दोनों एक दूसरे के बहुत ज्यादा नजदीक आते जा रहे थे और अब हम दोनों एक दूसरे से फोन पर इतनी ज्यादा बातें करने लगे थे कि एक दिन मैंने सुनीता से कहा कि क्या तुम मुझसे मिलने के लिए दिल्ली आ सकती हो। सुनीता ने पहले तो उस बात को इतना सीरियस नहीं लिया लेकिन जब सुनीता दिल्ली आई तो मैं भी इस बात से बड़ा हैरान था। मुझे नहीं मालूम था कि सुनीता और मेरे बीच क्या चल रहा है लेकिन हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे थे और यही वजह थी कि हम दोनों का प्यार अब बढ़ता ही जा रहा था। सुनीता और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश हैं और मेरा जब भी मन होता तो मैं सुनीता से मिलने के लिए चला जाता। सुनीता से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगता है और हम दोनों एक दूसरे से मुलाकात कर ही लिया करते थे। एक दिन जब सुनीता ने मुझसे कहा कि वह दिल्ली में जॉब करना चाहती है तो मैंने सुनीता से कहा कि अगर तुम दिल्ली में जॉब करना चाहती हो तो मैं अपने ऑफिस में तुम्हारे लिए जॉब की बात कर सकता हूं।

सुनीता भी मेरी बात मान गई और वह मुझे कहने लगी कि ठीक है अगर तुम्हें लगता है कि मुझे तुम्हारे ऑफिस में जॉब मिल जाएगी तो मैं वहां पर जॉब करने के लिए तैयार हूं। सुनीता दिल्ली आने के लिए तैयार थी उसे मुझ पर पूरा भरोसा था और कुछ दिन बाद वह दिल्ली आ गई। जब सुनीता दिल्ली आई तो उसकी नौकरी लग चुकी थी सुनीता और मैं एक दूसरे के साथ समय बिताने लगे थे। हम दोनों को एक दूसरे के साथ काफी अच्छा लगता और जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ में समय बिताते उससे हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता। हम दोनों का प्यार दिन-ब-दिन गहरा होता जा रहा था मैं और सुनीता एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश हैं। जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा है उससे मेरे और सुनीता के बीच की नजदीकियां और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी। मैं चाहता था कि मैं सुनीता को अपने परिवार से मिलवाऊँ और मैंने जब सुनीता को अपनी फैमिली से मिलवाया तो सब लोग सुनीता से मिलकर काफी खुश थे।

सुनीता का हमारे घर पर अक्सर आना-जाना लगा रहता जब भी वह हमारे घर पर आती तो मुझे काफी अच्छा लगता। पापा और मम्मी को भी सुनीता के घर पर आने से कोई एतराज नहीं था और सब लोगों ने हम दोनों के रिश्ते को स्वीकार कर लिया था। मेरे लिए यह बहुत ही खुशी की बात है कि सब लोगों ने हमारे रिश्ते को स्वीकार कर लिया है और मैं इस बात से बड़ा खुश हूं कि सुनीता और मैं एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं। जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा है उससे मुझे काफी अच्छा लगता है और मैं बहुत ज्यादा खुश हूं कि सुनीता के साथ में मैं काफी अच्छा समय बिता पाता हूं। जब भी हम दोनों साथ में होते हैं तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता है। सुनीता और मैं साथ में ही ऑफिस जाया करते हैं और साथ में ही हम घर लौटा करते हैं इसलिए हम दोनों को ज्यादा से ज्यादा समय बिताने का मौका मिल जाता था। हम दोनों बहुत ज्यादा खुश है जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन को चला रहे हैं और हम दोनों का रिलेशन काफी अच्छे से चल रहा है।

सुनीता और मेरे बीच इस से पहले भी एक बार सेक्स संबध बन चुके थे लेकिन जब मैं और सुनीता घर लौटे तो उस दिन मैंने सुनीता से अपने घर पर चलने के लिए कहा क्योंकि मैं घर पर अकेला ही था इसलिए सुनीता घर पर आ गई। वह जब घर पर आई तो हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे। मैंने सुनीता के होंठों को चूमना शुरू कर दिया था। मैं उसके होठों को चूम कर उसकी गर्मी को दोगुना बढ़ा चुका था और वह भी काफी ज्यादा गरम हो चुकी थी। मैंने सुनीता से कहा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। सुनीता ने भी तुरंत मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया और वह मेरे लंड को हिलाने लगी। वह जिस तरीके से मेरे लंड को हिला रही थी उससे मैं पूरी तरीके से गर्म होता जा रहा था और वह भी बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी। जब सुनीता ने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो वह तड़पने लगी। उसने अपने सारे कपड़े उतार कर मुझे कहा तुम मेरी चूत जल्दी से मारो। मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरु किया और उसके स्तनों को चूस कर मैं उसकी गर्मी को बढाए जा रहा था।

जब मैं ऐसा कर रहा था तो वह काफी ज्यादा खुश थी। मैंने सुनीता के स्तनों को बहुत देर तक चूसा। जब मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। उसकी योनि से काफी ज्यादा पानी बाहर निकल रहा था। मैंने जैसे ही सुनीता की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह जोर से चिल्लाई और कहने लगी मेरी योनि में दर्द हो रहा है। अब हम दोनों को बहुत ही अच्छा लग रहा था जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे का साथ दे रहे थे।

मैंने सुनीता की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया था। वह बहुत जोर से सिसकारियां लेकर मेरी गर्मी को बढ़ाती जा रही थी। वह मुझे कहती मुझे बहुत अच्छा लग रहा है अब हम दोनों इतने ज्यादा गरम हो चुके थे कि हम दोनों एक दूसरे का साथ बिल्कुल भी नहीं दे पा रहे थे। मैंने सुनीता से कहा मैं तुम्हारी चूत में अपने वीर्य को गिराने वाला हूं। वह अपने पैरों के बीच में मुझे जकडने लगी हालांकि सुनीता भी झड़ चुकी थी लेकिन जैसे ही मैंने सुनीता की योनि में अपने वीर्य की पिचकारी को मारा तो वह खुश हो गई और मुझे बोली मैं बहुत ज्यादा खुश हूं। जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बनाए उस से हम दोनों को बड़ा ही अच्छा लगा था और हम दोनों बहुत ज्यादा खुश थे।

 


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