स्लीपिंग बैग के अंदर चूत चुदाई

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Sleeping bag ke andar chut chudai मैं सुबह मनाली पहुंचा सुबह मनाली का नजारा बड़ा ही सुहावना था और मौसम बड़ा ही खुशगवार था मैंने जब सामने ही एक ठेले वाले को कहा की भैया चाय बना दो तो उसने कहा ठीक है भैया अभी बनाता हूं। उसने मेरे लिए चाय बना दी मैं चाय पी रहा था क्योंकि मौसम भी काफी खुशनुमा था और मुझे ठंड भी लग रही थी। मैंने चाय की एक चुस्की ली थी कि तभी सामने से मुझे एक जाना पहचाना सा चेहरा नजर आया। मैं उसे पहचानने की कोशिश करने लगा तो मुझे ध्यान आया यह तो गरिमा है गरिमा सामने देख मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई मैंने गरिमा को देखा और कहा तुम यहां कैसे। हम दोनों एक दूसरे को देख कर चौंक उठे मैंने गरिमा से कहा मैं तो ऐसे ही बस यहां घूमने आया हूं तो गरिमा ने मुझे बताया कि मैं भी यहां घूमने के लिए आई हूं। गरिमा कहने लगी क्या तुम अकेले आये हो तो मैंने गरिमा से कहा हां मैं अकेला आया हूं शायद हम दोनों ही अकेले थे और मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मुझे गरिमा का साथ मनाली में मिल जाएगा।

मैंने गरिमा से कहा कि तुम चाय पियोगी वह कहने लगी नहीं उसने चाय के लिए मना कर दिया और मैं चाय पी रहा था जैसे ही मेरी चाय खत्म हुई तो गरिमा कहने लगी कि तुम यहां कहां ठहरे हो। मैंने गरिमा से कहा कि मेरे भैया ने होटल बुक कर दिया था गरिमा कहने लगी कि अच्छा तो तुम्हारे होटल का क्या नाम है मैंने गरिमा से कहा अभी मैं तुम्हें देख कर बताता हूं। मैंने होटल की बुकिंग की स्लिप जब गरिमा को दिखाई तो गरिमा कहने लगी मैं भी तो इसी होटल में रुकी हुई हूं मैंने गरिमा से कहा यह भी बड़ा अजीब इत्तेफाक है पहले तो तुम मुझे यहां मिल गई और उसके बाद मैं जिस होटल में रुका हूं तुम भी उसी होटल में रुकी हुई हो। गरिमा कहने लगी ऐसा कभी कबार हो जाता है मैंने गरिमा से कहा लेकिन मेरे साथ तो पहली बार ही ऐसा हो रहा है गरिमा मुझे कहने लगी चलो फिर हम लोग चलते हैं। हम दोनों ही पैदल होटल में चले गए हालांकि थोड़ी बहुत चढ़ाई थी लेकिन हम दोनों होटल में पहुंच चुके हैं मैंने जब रिसेप्शन पर अपने बुकिंग की स्लिप दिखाई तो रिसेप्शन पर खड़े लड़के ने कहा कि सर मैं सामान छुड़वा देता हूं।

उसने होटल के ही एक अन्य स्टाफ़ से कह कर मेरा सामान मेरे रूम में रखवा दिया और मेरा सामान रूम में जब उसने रख दिया तो गरिमा मुझे कहने लगी कि रोहित तुम भी थोड़ा आराम कर लो मैं भी अपने रूम में जा रही हूं। मैंने गरिमा से कहा कि तुम्हारा रूम नंबर क्या है गरिमा ने मुझे अपना रूम नंबर बता दिया जब गरिमा ने मुझे अपना रूम नंबर बताया तो मैंने गरिमा से कहा ठीक है हम लोग शाम को मिलते हैं और फिर मैं और गरिमा शाम के वक्त मिले। जब हम दोनों शाम के वक्त एक दूसरे से मिले तो मेरे दिल में कई सवाल थे जो मैं गरिमा से पूछना चाहता था और गरिमा भी शायद मुझसे कई सवाल पूछना चाहती थी। मैंने जब गरिमा से कहा कि गरिमा तुमसे मैं एक बात पूछूं तो वह मुझे कहने लगी हां रोहित पूछो ना मैंने गरिमा से कहा हर्षित कहां है गरिमा मेरे चेहरे की तरफ देखने लगी कुछ देर तक तो वह चुप हो गई लेकिन उसने मुझे कहा कि हर्षित तो मेरे जीवन से बहुत दूर जा चुका है। मैंने गरिमा से कहा तुम क्या बात कर रही हो हर्षित और तुम्हारे बीच में तो बहुत अच्छा रिलेशन था और कॉलेज के पहले दिन से ही तुम लोग एक दूसरे के साथ बहुत अच्छे से रहते थे और सब कुछ ठीक तो था। मुझे गरिमा ने कहा कि हर्षित अब मेरे जीवन से बहुत दूर जा चुका है और जब हम लोगों का कॉलेज पूरा हो गया था तो उसके बाद हर्षित भी बदलने लगा हर्षित पहले जैसा बिल्कुल भी नहीं रह गया था वह आए दिन मुझसे झगड़ा करता था और मैंने भी सोचा कि शायद हो सकता है हम दोनों के बीच कुछ अनबन हो रही हो लेकिन बात बहुत आगे बढ़ चुकी थी और आखिरकार हम दोनों ने एक दूसरे से अलग होना ही बेहतर समझा। मैंने गरिमा से पूछा तो तुम अभी क्या कर रही हो तो गरिमा कहने लगी मैं अपने पापा के साथ ही उनका काम संभाल रही हूं लेकिन कुछ दिनों से मुझे काफी अकेलापन सा महसूस हो रहा था और दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी से मैं कुछ दिनों के लिए दूर जाना चाहती थी इसलिए मैं कुछ दिनों के लिए मनाली आ गई।

मैंने गरिमा से कहा तुमने बहुत अच्छा किया, गरिमा मुझसे पूछने लगी कि तुम आजकल क्या कर रहे हो मैंने गरिमा से कहा बस कुछ नहीं मैं भी अपने भैया के साथ ही उनका बिजनेस संभाल रहा हूं लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझे कुछ अपना करना चाहिए इसलिए मैं कुछ दिन अपने आप को समय देना चाहता था। गरिमा कहने लगी रोहित तुमने बहुत अच्छा किया जो कुछ दिन अपने आप को समय देने के लिए मनाली आ गए। गरिमा और मेरी स्थिति बिल्कुल एक जैसी ही थी हम दोनों एक ही ट्रेन में सवार थे क्योंकि गरिमा भी अपने आप से परेशान थी और मैं भी अपने आप को समझ नहीं पा रहा था शायद एक दूसरे की परेशानी का जवाब हम दोनों के पास ही था। गरिमा मुझे कहने लगी कि कल मैं यहां से लॉन्ग ट्रिप के लिए निकल रही हूं मैं बुलेट किराए पर ले लूंगी। मैंने गरिमा से कहा क्या मैं तुम्हें ज्वाइन कर सकता हूं तो गरिमा कहने लगी क्यों नहीं तुम भी मुझे ज्वाइन कर लो बल्कि यह तो मेरे लिए और भी अच्छा होगा कम से कम मुझे भी किसी का साथ मिल जाएगा और रास्ते में मैं बोर भी नहीं होऊंगी।

अगले दिन हम लोग कुछ और लोगों से मिले जब हम लोगों ने उन्हें ज्वाइन किया तो उनका पूरा ग्रुप हमारे साथ लद्दाख के लिए जाने वाला था। जब हम सब लोग मिले तो हमारा परिचय भी आपस में हुआ। गरिमा उन लोगों को पहले से जानती थी इसलिए उसी ने मेरा परिचय करवाया था हम लोग अपने टूर पर निकल चुके थे। यह टूर बड़ा ही मजेदार होने वाला था यह सफर उस वक्त और भी मजेदार हो गया जब गरिमा बुलेट चला थी और मैं उसे पीछे पकड़ कर बैठा। मेरा लंड उसकी चूतडो से टकरा रहा था मैं कभी कभार उसके स्तनों को भी दबा दिया करता। वह सारी बात समझ रही थी लेकिन उसके बावजूद भी उसने मुझसे कुछ नहीं कहा परंतु वह एक लड़की है वह भी अपने आपको कैसे रोक पाती। जब हम लोग मनाली से करीब 100 किलोमीटर आगे निकल चुके थे तो हमने वहां रुकने के बारे में सोचा और उस दिन हम लोगो का वहीं रुकने का प्लान था। सारी व्यवस्था पहले से ही हो चुकी थी गरिमा मुझे कहने लगी रोहित ठंडी हो रही है आओ आग जलाते हैं हम दोनों लकड़ी इकट्ठा करने लगे और हमने आग जलाई। जब हम दोनों ने आग जलाई तो गर्मी पैदा होने लगी थी क्योंकि वहां पर ठंड का प्रभाव बहुत ज्यादा था इसलिए आग से कुछ गर्मी तो महसूस हो रही थी। हम दोनों ही साथ में बैठे हुए थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे तभी उस गर्मी में ना जाने हम दोनों की आंखों में ऐसा क्या हुआ कि हम दोनों की आंखें एक दूसरे की आंखों से मिलने लगी। मैंने जब गरिमा के होठों से अपने होठों को मिलाना शुरू किया तो गरिमा के अंदर से भी एक करंट निकलने लगा और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। मैंने गरिमा के मुंह को कसकर पकड़ लिया था और उसे चूमे जा रहा था मैं इतना बेकाबू हो गया कि मैंने उसे वही जमीन पर लेटा दिया और उसके होठों को चूम कर मैंने पूरी तरीके से मसल कर रख दिया था।

अब वह चाहती थी कि मैं उसकी योनि के भी मजे लू अब वह बिल्कुल भी नहीं रुकने वाली थी और ना ही मैं रुकने वाला था। हम दोनों ही अपने टेंट के अंदर चले गए और मैंने जब अपने स्लीपिंग बैग को खोला तो उसके अंदर मैंने गरिमा को भी आने के लिए कहा। गरिमा ने भी अपने कपड़े उतार दिए और मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। हम दोनों का नंगा बदन एक दूसरे से टकरा रहा था और मेरा लंड तो ऊफान मारने लगा। अब मेरा लंड इतना तन कर खड़ा हो गया कि मैंने गरिमा की योनि मै अपने लंड को सटाया तो वह मचलने लगी और मैं भी पूरी उत्तेजना में आ गया। मैंने अपने लंड को गरिमा की योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया जैसे ही उसकी चूत के अंदर मेरा लंड प्रवेश हुआ तो वह मचलने लगी मैंने और गरिमा ने मेरे स्लीपिंग बैग को ही अपना आशियाना बना लिया था। हम दोनों ने एक दूसरे के बदन को कसकर पकड़ा हुआ था लेकिन अब वह मजा नहीं आ रहा था तो हम लोगों ने सोचा कि क्यों ना स्लीपिंग बैग से बाहर निकल कर एक दूसरे के साथ संभोग आनंद लिया जाए।

गरिमा और मैं स्लीपिंग बैग से बाहर निकाले हम दोनों का शरीर अब इतना गरम हो चुका था कि ठंड का एहसास तो बिल्कुल भी नहीं था। गरिमा की बड़ी चूतडो को मैंने कसकर दबा दिया और उसकी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को करने लगा। मै गरिमा की चूतडो को देखकर में उसके चूतड़ों का आनंद लेना चाहता था लेकिन ऐसा संभव हो ना सका और मैं उसके दोनों पैरों को खोल कर उसे धक्के मारने लगा था। गरिमा कहती कि थोड़ा धीरे से करो वह मेरे पेट पर अपने हाथ को लगा दिया करती और कहती थोड़ा धीरे से धक्के मारो। मेरा लंड पूरा गरिमा की चूत मे जा रहा था जब मेरा लंड गरिमा की योनि से टकराते तो मुझे और भी ज्यादा मजा आ जाता। मैं उसे लगातार तेजी से धक्के मार रहा था और गरिमा की योनि से भी पानी निकालने लगा था। मुझे भी एहसास हो गया था कि शायद मैं अब उसकी चूत के मजे ना ले सकूं इसीलिए तो मैंने भी अपने वीर्य को गरिमा की योनि में तेजी से गिरा दिया और जब मेरे लंड से मेरा वीर्य टपक रहा था तो उसे गरिमा ने अपने मुंह में लिया और वह उसे चाटने लगी। उसने चाट कर मेरे पूरे लंड के वीर्य को साफ कर दिया।


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