सिर्फ बात ही करोगे क्या?

Sirf baat hi karoge kya?:

Hindi sex stories, antarvasna मैंने कभी भी अपने जीवन में कोई तकलीफ है नहीं देखी थी लेकिन जब मेरे पिताजी का बिजनेस में बहुत बड़ा नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई वह कर नहीं पाए और वह इस बात से बहुत सदमे में रहने लगे कि उनका बिजनेस कैसे आगे बढ़ेगा। वह अपने बिजनेस में हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर पाए जिस वजह से हमें अपना घर बेचना पड़ा मैंने उस वक्त अपनी 12वीं के एग्जाम दिए थे जब पापा ने घर भेज दिया उससे जो पैसे मिले उससे हमने एक छोटा सा घर लिया। पापा ने एक दुकान खोल ली लेकिन वह भी अच्छे से नहीं चलती थी पापा बस दुकान में ही बैठे रहते थे और वह दिन रात अपने नुकसान के बारे में सोचते रहते उन्होंने घर में बात करना भी बंद कर दिया था और वह घर में किसी से भी बात नहीं करते थे।

हम लोगों का जीवन बड़े ही अच्छे से गुजर रहा था लेकिन उस नुकसान की वजह से पापा को जो तकलीफ सहनी पड़ी उसे वह सह नहीं पाए और वह बहुत ज्यादा टेंशन में रहने लगे थे जिससे कि उनकी तबीयत भी खराब रहने लगी। वह तो मेरे मामा ने मुझे एमबीए की पढ़ाई करवाई उसके बाद मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब लग गया अब मेरे ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारी है मेरी दो बहने हैं उनकी शादी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर ही थी। मैं बखूबी अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहा था और मैंने कभी भी अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा मैं अपने पापा को खुश रखने की कोशिश किया करता था लेकिन उन्हें तो अपने बिजनेस में हुए नुकसान का इतना दुख हुआ कि वह अभी तक उसे नहीं भूल पाए थे। इस बात को काफी वर्ष हो चुके थे लेकिन फिर भी वह अभी तक नहीं भूले थे उसी बीच मेंरी बड़ी बहन पायल के लिए रिश्ता आया उसके लिए एक अच्छे घर से रिश्ता आया मम्मी को तो रिश्ता अच्छा लगा और मामा को भी वह रिश्ता काफी पसंद था। पायल का रिश्ता हम लोगों ने उसी लड़के से करवा दिया और पायल की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई। मेरे मामा ने मुझे कहा कि बेटा अब तुम जिम्मेदारियों को निभाना सीख चुके हो और अब तुम बड़े हो चुके हो तुम्हें भी अब शादी कर लेनी चाहिए लेकिन मैंने मामा से कहा मैं अभी शादी नहीं करना चाहता मैं पहले अपनी छोटी बहन की शादी करवाऊँगा उसके बाद ही मैं इस बारे में सोचूंगा।

मामा मुझे हमेशा कहा करते थे कि तुम शादी कर लो परंतु मैंने शादी का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दिया था और मैंने इस बारे में सोचा नहीं कि मैं शादी करूं उसी दौरान हम लोगों का ऑफिस का टूर घूमने के लिए गया। जब हम लोग घूमने के लिए गए तो हमारे साथ हमारे ऑफिस के और लोग भी आए हुए थे हमारे ऑफिस में ही एक लड़की है उसका नाम सुनैना है। हम लोग उस टूर में काफी इंजॉय कर रहे थे जब हमारे ऑफिस के सब लोग साथ में बैठे हुए थे तो हम लोग एक गेम खेल रहे थे उसी दौरान सबसे उनके बारे में पूछा गया तो मैंने अपने बारे में भी बताया और मैंने अपने पापा के बिजनेस में हुए नुकसान के बारे में सबको बताया। उसके बाद कैसे मैंने अपनी जिम्मेदारियों को निभाया यह सुनकर सब लोग खुश हुए और उन्होंने तालियां बजानी शुरू कर दी लेकिन मुझे नहीं पता था कि सुनैना को मेरी अच्छाइयां इतनी पसंद आएगी। जब हम लोग टूर से वापस लौटे तो सुनैना ने मुझसे बात करनी शुरू कर दी पहले मैं उसे सिर्फ काम को लेकर ही बात किया करता था लेकिन उसके बाद मैं उससे बात करने लगा था। मुझे सुनैना से बात करना अच्छा लगता मुझे नहीं मालूम था कि उसके दिल में मेरे लिए क्या चल रहा है वह मुझे दिल ही दिल चाहने लगी थी हम दोनों के बीच में अच्छी दोस्ती हो चुकी थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिताया करते थे। एक दिन लंच में सुनैना ने मुझे कहा राजेश तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो और तुम्हारे जैसे लड़के से शादी मेरी शादी हो जाए तो मैं अपने आप को बहुत ही खुशनसीब समझूंगी। मैंने सुनैना से कहा तुम भी बहुत अच्छी हो लेकिन मैं नहीं चाहता कि मैं अभी शादी करूं क्योंकि मुझे अभी थोड़ा समय और चाहिए। सुनैना ने मुझे कहा यदि तुम मुझसे शादी करना नहीं चाहते तो हम दोनों साथ में रह सकते हैं और हम दोनों जब तक एक दूसरे को नहीं समझते तब तक तुम शादी का कोई फैसला मत लेना। मैंने उसकी बात मान ली क्योंकि सुनैना बहुत अच्छी है तो मैं उसके साथ में रहने लगा जब मैं उसके साथ समय बिताता तो मुझे भी अच्छा लगता सुनैना मुझे दिल ही दिल चाहती थी।

मुझे इस बारे में तो मालूम ही था लेकिन मेरे दिल में सुनैना के लिए कोई प्यार नहीं था परंतु जब मैं उसके साथ रहने लगा तो उसकी अच्छाइयां मुझे नजर आने लगी और इसी बीच मैंने उसे अपनी मम्मी से भी मिलवाया। मेरे पापा ज्यादा बात नहीं किया करते थे लेकिन एक दिन सुनैना हमारे घर पर आई हुई थी तो उस दिन ना जाने पापा ने मुझे क्यों कहा कि सुनैना तुम्हारे लिए बहुत अच्छी रहेगी तुम उससे शादी कर लो। पापा ने इतने वर्षों बाद मुझसे कुछ कहा था तो मैं उनकी बात को भी कैसे टाल सकता था मैंने उनकी बात मान ली मैंने इस बारे में मामा से भी बात की तो वह कहने लगे कि बेटा यदि तुम्हें लड़की पसंद है तो तुम उससे शादी कर लो। मैंने मामा से कहा मामा आप एक बार सुनैना से मिल तो लीजिए वह कहने लगे ठीक है तुम मुझे सुनैना से मिलवा देना मैंने मामा को कुछ दिनों बाद सुनैना से मिलवा दिया। जब वह सुनैना से मिले तो उन्हें सुनैना काफी अच्छी लगी उन्होंने मुझे कहा कि सुनैना बहुत अच्छी और संस्कारी लड़की है तुम उससे शादी कर लो। मैंने भी सोचा कि सब लोग मुझे कह रहे हैं तो मुझे सुनैना से शादी कर लेनी चाहिए और मैंने सुनैना से शादी करने के बारे में सोच लिया था सुनैना के माता-पिता भी इस बात से बहुत खुश है क्योंकि जब मैं उनसे मिलता तो वह हमेशा मेरी तारीफ किया करते थे।

हम दोनों की शादी के लिए सब लोग तैयार हो चुके थे ऑफिस में भी हम दोनों के बारे में सबको पता था मैं चाहता था कि जल्द से जल्द अब मेरी शादी सुनैना से हो जाए इसी बीच में हमने सगाई भी कर ली। सब कुछ बड़े ही अच्छे से चल रहा था मैं सुनैना के साथ में खुश था और हम दोनों की शादी होने वाली थी मैंने अपनी शादी में अपने सारे दोस्तों को बुलाया था मैं नहीं चाहता था कि शादी में किसी भी प्रकार की कोई कमी रह जाए। अब सुनैना से मेरी शादी हो चुकी थी कुछ समय तक सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन ना जाने सुनैना को मेरी छोटी बहन सुमन से क्या दिक्कत थी उन दोनों के बीच कभी भी किसी भी बात को लेकर बनती नही थी। मेरी शादी के कुछ समय बाद उन दोनों के बीच में झगड़े होने शुरू हो गए मैं चाहता था कि सुमन की शादी भी अब जल्द से जल्द हो जाए ताकि उन दोनों के बीच जो भी झगड़े होते हैं वह सब ना रहे इसीलिए मैंने सुमन की शादी के लिए लड़का देखना शुरू किया। उसके लिए मुझे एक अच्छा लड़का मिल चुका था मैंने इस बारे में मामा और अपनी मम्मी पापा से बात की थी वह लोग भी तैयार हो गए और हम लोगों ने सुमन की शादी करवा दी अब सुमन की शादी भी हो चुकी थी। सुनैना और मुझे साथ में समय मिल जाया करता था हम दोनों जमकर सेक्स का मजा किया करते थे। मैं सुनाना को बहुत ही अच्छे से चोदा करता लेकिन अब सुनैना से मेरा मन भरने लगा था, हमारे पड़ोस में बिल्कुल ही टाइट माल भाभी आई जिनका नाम संजना है संजना भाभी के पीछे पूरा मोहल्ला पड़ा हुआ था लेकिन ना जाने उन्हें मुझ में ऐसा क्या दिखा की वह मुझे देखकर हमेशा ही खुश हो जाती।

मैं उन्हें देखकर उत्तेजित हो जाया करता मुझे इतना तो लग चुका था कि अब वह मेरे काबू में आ चुकी हैं। एक दिन मैंने मौका देखते हुए उन्हें इशारे किए वह मुझे कहने लगी आइए घर पर आ जाइए ना मैं उनके घर पर चला गया वह बड़ी ही तेज है। उनके घर पर उस दिन कोई भी नहीं था जब मैंने उन्हें कहा अरे भाभी आप तो बड़ी माल है। वह कहने लगी सब लोग यही कहते हैं मैंने उन्हें कहा लेकिन आपका फिगर तो बडा ही सॉलिड है। वह मुझे कहने लगी आप बात करेंगे या फिर कुछ और करेंगे मैंने भी उनके होठों को चूमना शुरू किया और उनके स्तनों को मैंने काफी देर तक अपने होंठो में लेकर चूसा उनको बहुत मजा आ रहा था और वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाती। उनके बड़े स्तनों को मैंने काफी देर तक अपने मुंह में लिया और मैंने उनका रसपान किया। अब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी वह मुझे कहने लगी हां अब आप अपनी इच्छा पूरी कर लीजिए। मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाला और उनकी योनि पर सटा दिया जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी योनि पर सटाया तो वह उत्तेजित होने लगी और पूरे जोश में आ गई।

मैंने अपने लंड को उनकी चूत मे डाला तो उनकी चूत से गिला पदार्थ बाहर की तरफ को निकालने लगा, मैंने उनकी योनि के अंदर अपने लंड को बड़ी तेजी से अंदर बाहर करना शुरू किया। वह पूरे जोश में आ चुकी थी और मैं भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था मैं अपनी पूरी ताकत से उनकी चूत मार रहा था वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लेती और पूरी तरीके से वह मेरा साथ देती उनको बहुत मजा आ रहा था और मुझे भी काफी मजा आता। कुछ देर तक तो मै उनकी चूत के मजे लिए जा रहा जब मेरा वीर्य पतन हो गया तो मैंने अपने लंड को उनके मुंह में डाल दिया और वह उसे सकिंग करने लगी। काफी देर तक उन्होंने ऐसा ही किया जब मैंने अपने लंड को उनकी गांड के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी लेकिन मुझे संजना भाभी की बड़ी गांड मारने पर बड़ा मजा आया। मैं बड़ी तेज गति से उनकी गांड मारता रहा वह पूरी तरीके से जोश में आ जाती और बहुत खुश हो जाया करती मैंने काफी देर तक उनकी बड़ी गांड के मजे लिए जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैं खुश हो गया और वह भी बहुत खुश थी।


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