शर्मीली लड़की की सील पैक चूत के मजे

Sharmili ladki ki seal pack chut ke maje:

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मेरा नाम सुनील है मैं बरेली का रहने वाला हूं। मेरे पापा इंजीनियर हैं और मेरी मम्मी भी बैंक में जॉब करती हैं। उन दोनों के पास मेरे लिए बचपन से ही समय नहीं था इसलिए उन दोनों ने मुझे बचपन में मुंबई के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया। मैं बचपन से ही बोर्डिंग स्कूल में पढ़ा और उसके बाद तो जैसे मेरा घर से कोई लेना-देना ही नहीं था। धीरे धीरे मेरे मन में मेरे माता-पिता को लेकर बिल्कुल अलग धारना बनने लगी। मैं सोचने लगा कि जैसे यह मेरे दुश्मन है। उन्होंने बचपन से ही मुझे अपने पास बिल्कुल भी नहीं रखा इसीलिए मैं उनके प्यार को ना तो कभी समझ पाया और ना ही वह लोग मुझे कभी समझ पाए।

धीरे-धीरे जब समय बीत गया तो मैंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी कर ली। मैंने कॉलेज की पढ़ाई भी मुंबई से ही पूरी की। मुझे ऐसा लगता कि जैसे मेरे दोस्त ही मेरा परिवार है। उन्होंने ही मेरी हमेशा मदद कि। मुझे जब भी उनकी जरूरत पड़ी वह लोग हमेशा मेरे साथ खड़े थे। मेरे माता-पिता ने सिर्फ मुझे पैसों की कोई कमी नहीं होने दी और उन्होंने मुझे एक अच्छे स्कूल और एक अच्छे कॉलेज में पढ़ाया। जब मेरा कॉलेज भी पूरा हो गया तो मैं कुछ दिनों के लिए बरेली चला गया। मैं जब बरेली गया तो मेरा घर में बिल्कुल मन नहीं लग रहा था क्योंकि मेरे पापा और मम्मी दोनों अपने ऑफिस चले जाते हैं और मैं बरेली में ज्यादा किसी को पहचानता भी नहीं था इसी कारण मैं अधिक समय अपने घर पर रहता। मैं घर में बहुत ज्यादा बोर होने लगा। मुझे समझ नही आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए। मैं सोचने लगा कि मुझे दोबारा मुंबई चले जाना चाहिए लेकिन मुंबई जाने के लिए मेरे पास पैसे भी नहीं थे और मैं मुंबई जाकर क्या करता परन्तु फिर भी मैंने मुंबई जाने का मन बना लिया।

मैंने अपने पापा मम्मी से बात की तो मैंने उन्हें कहा की मैं अब मुंबई में ही नौकरी करना चाहता हूं और वहीं रहना चाहता हूं। वह लोग कहने लगे कि नहीं अब तुम हमारे साथ बरेली में ही रहोगे। मैंने उन्हें कहा मैं बरेली में नहीं रहना चाहता क्योंकि यहां मेरा मन नहीं लगता। मुझे मुंबई में रहने की आदत हो चुकी है। यह बात मेरे घर वालों को बिल्कुल हजम नहीं हो रही थी और वह लोग जैसे मुझ पर बरेली में रहने के लिए जबरदस्ती करने लगे। मैंने भी पूरा मन बना लिया था कि मुझे मुंबई जाना है। मैंने अपनी मम्मी से कहा कि मुझे आप पैसे दे दीजिए मैं मुंबई जाना चाहता हूं। वह कहने लगी कि कुछ दिन तो तुम हमारे पास रुक जाओ। उसके बाद तुम चले जाना। मैंने उन्हें कहा कि कुछ दिन मतलब कितने समय आपके पास रुकना है। वह कहने लगी दो महीने तो तुम हमारे पास रहो उसके बाद तुम चले जाना। मैंने सोचा चलो दो महीने की ही बात है दो महीने तो यूं ही कट जाएंगे पता भी नहीं चलेगा। उसके बाद मैं अपने घर में ही रहता था। कभी कबार मैं शाम को मोहल्ले में बाहर टहलने के लिए निकल जाता। मुंबई से मेरे दोस्तों का मुझे फोन आता तो वह लोग कहते की तुम यहां कब आ रहे हो। मैं उन्हें कहता की दो महीने बाद मैं वहां आ जाऊंगा। मेरा तो जैसे घर पर बिल्कुल मन ही नहीं लग रहा था। एक दिन मैं छत में खड़ा था छत में मैंने देखा कि पड़ोस में एक लड़की रहती हैं। वह मुझे कभी आज तक नहीं देखी थी। वह छत में कपड़े सुखा रही थी तो मैं उसे बड़े ध्यान से देख रहा था लेकिन उसकी नजर मुझ पर नहीं पड़ी। जब उसने मुझे देखा तो वह भी मुझे ध्यान से देखने लगी और उसके बाद वह शर्मा कर नीचे भाग गई। मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आया कि यह क्या हो रहा है। वह तो ऐसे शर्मा रही थी जैसे कि पुराने जमाने की लड़की हो। मैं छत में ही खड़ा था और मैं कुछ देर बाद नीचे चला गया। अब यह सिलसिला अक्सर होने लगा। मैं उसे हमेशा छत में देखने लगा और वह मुझे देखकर मुस्कुराती उसके बाद वह शरमाते हुए छत से नीचे चली जाती। मैं उससे बात करना चाहता था लेकिन मुझे ना तो उसका नाम पता था और ना ही मुझे पता था कि मैं उससे बात कर भी पाऊंगा या नही। बस हम दोनों एक दूसरे को छत से ही देखा करते।

एक दिन मैंने उसे छत से इशारा कर दिया और इशारों में उसे कहा कि मुझे तुमसे बात करनी है। वह कहने लगी कि कल मैं घर से बाहर निकलुंगी तो तब तुम मुझसे बात कर लेना। मैं भी अगले दिन सुबह ही बन ठन कर तैयार हो गया और मैं अपने छत पर उसका इंतजार करने लगा। जब वह छत पर आई तो उसने मुझे कहा कि तुम आ जाओ। मैं अब उसके पीछे पीछे जाने लगा। जब हम दोनों घर से थोड़ा सा आगे निकल गए तो मैंने उससे बात की और उसका नाम पूछा। उसका नाम सुनैना था। मैंने सुनैना को पहली बार ही देखा था वह देखने में बहुत सुंदर और बहुत ही शर्मीली नेचर की थी। मैं उससे बात करने की कोशिश करता लेकिन वह शर्मा जाति और मुझसे बात ही नहीं करती। उस दिन हम दोनों साथ में ही मार्केट चले गए लेकिन हम दोनों की ज्यादा बातें नहीं हुई। वह मुझसे ज्यादा बात नहीं कर रही थी परंतु मेरे लिए एक अच्छी बात यह हुई कि मैंने उसका नंबर ले लिया। मैं जब उससे फोन पर बात करता तो वह मुझसे फोन पर बड़ी खुलकर बात करती लेकिन जब भी मैं उसे मिलता तो वह मुझसे बात ही नहीं करती। मैं तो घर में हमेशा ही अकेला रहता था। मेरा जब मन होता तो मैं सुनैना को फोन कर देता। एक दिन मैं सुनैना से अश्लील बाते करने लगा वह शर्माने लगी। उस दिन मैंने उसके फिगर का साइज पूछ लिया।

उस दिन के बाद तो उसे देखकर मेरा मूड खराब होने लगा। मैं उसको घर में बुलाने की कोशिश करने लगा लेकिन वह घर में कभी नहीं आती। परंतु एक दिन वह मेरे घर में आ गई। जब सुनैना घर में आई तो मैंने उसे कहा तुम मेरे लिए कुछ खाने के लिए बना दो। उसने मेरे लिए मैगी बनाई। हम दोनों बैठकर मैगी खा रहे थे और बड़े मजे से मूवी देख रहे थे। मैंने जब उसकी मोटी जांघों पर अपने हाथ को रखा तो वह मेरे हाथ को अपनी जांघों से हटाने लगी लेकिन मैंने दोबारा से उसकी जांघों पर अपने हाथ को रखते हुए सहलाना शुरू कर दिया। वह भी पूरे मूड में हो चुकी थी। वह मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी। मैंने उसे अपनी बाहों में लेते हुए दबाना शुरू कर दिया। जब हम दोनों के बदन एक दूसरे से टकराते तो हम दोनो गर्म होने लगे। मैंने सुनैना से कहा तुम अपने कपड़े उतार दो। उसने जैसे ही अपने कपड़े उतारे तो उसने उस दिन लाल रंग की पैंटी और ब्रा पहनी हुई थी। मैं उसकू बदन को देख कर बहुत खुश हो गया। मैंने उसकी ब्रा को खोलते हुए उसके स्तनों को अपने हाथों के बीच में मसलना शुरु किया। जब हम दोनों पूरी तरीके से मूड में हो गए तो मैंने उसकी पैंटी को उतारते हुए कुछ देर तक सुनैना की योनि को अपनी उंगली से सहलाना जारी रखा। जब वह मूड मे होने लगी तो उसकी चूत ने पानी  छोड़ना शुरू किया। मैंने सुनैना की योनि को चाटना शुरु किया। जब वह मूड में हो गई तो मुझे कहती तुम मेरी चूत बड़े अच्छे से चाट रहे हो। उसकी योनि पर एक भी बाल नहीं था। मैंने सुनैना को कहा तुम मेरे लंड को कुछ देर तक सकिंग करो। उसने 2 मिनट तक मेरे लंड को चूसा। मैंने अपने लंड को सुनैना की चूत मे डालने की कोशिश की लेकिन मेरा लंड उसकी योनि में नहीं जा रहा था परंतु मैंने कोशिश करते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। उसकी योनि से खून का बहाव बड़ी तेजी से होने लगा। मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन मुझे बहुत आनंद आ रहा था। मैं उसे लगातार तेज धक्के मारता जाता। जब मैंने उसे तेजी से धक्के मारे तो उसके स्तन हिलने लगे। मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था। मै उसकी टाइट योनि की गर्मी को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया और जैसे ही मेरा वीर्य सुनैना की योनि के अंदर गिरा तो हम दोनों ने एक दूसरे को कसकर पकड़ लिया। मैं उसके साथ काफी देर तक लेटा हुआ था। वह मुझे कहने लगी अब तो मुझे तुम्हारे पास हमेशा ही आना पड़ेगा। वह हमेशा मेरे पास आने लगी और जितने दिन में घर पर रहा उतने दिनों तक मैने सुनैना की चूत मारी।


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