सेक्स भी जीवन का अहम हिस्सा है

Sex bhi jeevan ka aham hissa hai:

Antarvasna, hindi sex stories मौसी मुझे आवाज़ देते हुए कहने लगी कावेरी तुम कहां हो मैं अपने रूम में बैठकर पढ़ाई कर रही थी मेरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर ही था और मैंने अपने रूम के दरवाजे को बंद किया हुआ था। मेरी मौसी काफी देर से मुझे आवाज लगा रही थी लेकिन मैं अपनी पढ़ाई में इतना खोई हुई थी कि मैं उनकी बात को सुन हीं नही पाई तभी मेरी मम्मी ने बड़े ऊंचे स्वर में कहा वह लड़की ना जाने कहां खो जाती है। मैंने अपनी मम्मी को आवाज देते हुए कहा मम्मी मैं पढ़ाई कर रही हूं मेरी मम्मी कहने लगी तुम दरवाजा खोलो तुम्हारी मौसी तुमसे मिलने आई हुई है। मैंने अपने दरवाजे को खोला तो मौसी बिल्कुल दरवाजे के सामने ही खड़ी थी वह मुझे कहने लगी बेटा तुम पढ़ने में इतनी ज्यादा बिजी थी। मौसी ने मुझे कहा कावेरी बेटा तुमसे मिले हुए काफी समय हो गया था तो सोचा तुमसे मिल लेती हूं इसलिए आज तुमसे मिलने के लिए चली आई।

मौसी का मेरे प्रति बहुत ही प्यार है और मैं उनके प्यार को भली-भांति समझती हूं वह मुझे अपनी बेटी पूजा की तरह ही समझते हैं और मुझे बहुत प्यार भी करती हैं। मैं अपने पढ़ाई के चलते ज्यादा किसी से भी बात नहीं करती मेरे जीवन में कुछ सपने हैं उन सपनों को मुझे पूरा करना है मैं चाहती थी कि मैं एक पुलिस अधिकारी बनूं उसके लिए मैं जी जान से मेहनत कर रही थी इसीलिए मैं ज्यादा किसी से भी संपर्क नहीं रखती थी। मैंने अपनी दुनिया ही अलग बना ली थी और मेरी दुनिया में सिर्फ मैं और मेरी किताबे ही है मैं अपनी किताबों से ही बात किया करती मुझे किताबें पढ़ने में बड़ा अच्छा लगता है। मेरी मौसी कहने लगी कावेरी बेटा तुम कितनी पतली हो गई हो और तुम्हारे बाल देखो कितने रूखे हो चुके हैं, मेरे पास तो जैसे समय ही नहीं था मैंने अपनी दुनिया पूरी तरीके से अलग कर ली थी और इसीलिए मुझे तैयारी करने का अच्छा मौका भी मिल गया था। मेरी मां इस बात को नहीं समझती थी वह कहती थी कि इतना पढ़ लिख कर तुम क्या करोगी मेरे पिताजी मुझे बहुत मदद किया करते हैं।

मेरी मौसी कहने लगी चलो बेटा कुछ खा लो। मेरी मम्मी ने दोपहर का लंच बना दिया था मैंने और मौसी ने साथ में बैठकर लंच किया घर में मैं एकलौती हूं इसलिए सब लोग मेरा बहुत ध्यान रखते हैं। जब से मैंने पढ़ाई शुरू की है तब से तो जैसे मेरी दुनिया सिर्फ मेरे कमरे तक ही रह गई थी और मेरी सामाजिक गतिविधियां पूरी तरीके से खत्म हो चुकी थी। मौसी मुझे कहने लगी बेटा कभी तुम समय निकाल कर घर पर आना मैंने मौसी से कहा देखती हूं मौसी कुछ कह नहीं सकती यदि समय मिला तो जरूर आपसे मिलने के लिए आ जाऊंगी। मैं मौसी से कहने लगी मौसी मैं अभी पढ़ने के लिए जा रही हूं मौसी कहने लगी ठीक है बेटा तुम अपनी तैयारी करो और फिर मैं अपने कमरे में चली आई। मैंने अपने कमरे के दरवाजे को बंद कर लिया और अपनी किताब खोलकर मैं पढ़ने लगी मुझे सिर्फ और सिर्फ मेरा सपना नजर आता था और मैं अपने सपने को किसी भी हाल में पूरा करना चाहती थी। मेरे पिताजी मुझे कई बार समझाते और कहते बेटा तुम अपनी पढ़ाई पूरी मेहनत के साथ करो तुम्हें जरूर तुम्हारी पढ़ाई का फल मिलेगा। हमारे घर पर जो भी आता था वह सबसे पहले मेरे बारे में पूछा करता था लेकिन शायद मैं किसी से मिलना ही नहीं चाहती थी परंतु जब मेरी मुलाकात मोहित के साथ हुई तो शायद मैं मोहित के प्रति आकर्षित होने लगी। मोहित भी मुझे अपना अच्छा दोस्त मानने लगा था हम दोनों की मुलाकात एग्जाम के दौरान ही हुई थी और जब हम दोनों की मुलाकात हुई तो उसके बाद जैसे हम दोनों की किस्मत में एक होना ही लिखा था। मैं मोहित को अपने सच्चे दिल से प्यार करने लगी थी लेकिन अभी मेरा एग्जाम क्लियर नहीं हो पाया था और मैं अपनी पूरी मेहनत कर रही थी और मोहित भी अपनी तैयारी में जुटा हुआ था लेकिन अचानक से मुझे ना जाने क्या हुआ कि मेरा मोहित के प्रति कुछ ज्यादा ही रुचि जागने लगी। मैं और मोहित एक दूसरे के बिना रह नहीं पा रहे थे मेरा मन पढ़ाई से भी दूर हो चुका था मोहित और मैं फोन पर कभी कभार बात कर लिया करते थे।

मैंने जब यह बात अपने घर में बताई तो मेरी मां हैरान रह गयी और वह कहने लगी कावेरी बेटा तुम ठीक तो हो ना मैंने अपनी मां से कहा हां मैं ठीक हूं लेकिन मैं मोहित से प्रेम विवाह करना चाहती हूं। मैं चाहती थी कि मैं मोहित से प्रेम विवाह कर लूं उसके बाद मैं अपनी पढ़ाई पर भी ध्यान दूं मेरी मां को यह बात हजम ही नहीं हो रही थी और जब यह बात मेरे पापा को मालूम चली तो वह भी पूरी तरीके से हैरान रह गए। वह मुझे कहने लगे बेटा तुम क्या सच में मोहित से प्रेम करती हो मैंने अपने पिताजी को उत्तर दिया हां मैं सचमुच में मोहित से प्रेम करती हूं और उसी से मैं शादी करना चाहती हूं। मेरे पिताजी भी मुझसे मिलना चाहते थे और वह देखना चाहते थे कि आखिर मोहित में ऐसा क्या है कि मैं उसके पीछे इतनी पागल हो चुकी हूं कि मैंने अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी है। पापा ने कहा कि तुम मोहित को कल घर पर बुलाना मैं कल दफ्तर से जल्दी आ जाऊंगा मैने अपने पापा से कहा कि ठीक है पापा मैं कल मोहित को घर पर बुला लूंगी। पापा अगले दिन दफ्तर से जल्दी घर लौट आए जब पापा घर आए तो मोहित भी घर पहुंच चुका था कुछ देर तक तो सब लोग एक दूसरे को देखते ही रहे मोहित ने अपना सर नीचे कर लिया। पापा ने बात शुरू की और मोहित से उसके बारे में पूछना शुरू किया मोहित पापा के सवालों का जवाब बड़ी शालीनता से दे रहा था मैं अपने कमरे में ही बैठी हुई थी और वहीं से मैं सब कुछ देख रही थी। पापा ने मोहित के पिता जी के बारे में भी पूछा तो मोहित ने सारी जानकारी पिताजी को दी और उसके बाद पापा कहने लगे बैठा क्या तुम दोनों आपस में एक दूसरे से प्रेम करते हो।

मोहित ने जवाब दिया और कहा हां अंकल मैं कावेरी से प्रेम करता हूं और उसी से शादी करना चाहता हूं यह बात सुनकर पिताजी ने कहा बेटा लेकिन कावेरी के भी कुछ सपने हैं वह सपने अधूरे रह जाएंगे तो। मोहित ने जवाब देते हुए कहा कि नहीं अंकल कावेरी के सपने अधूरे नहीं रहेंगे शादी के बाद भी हम लोग तैयारी करेंगे और जब तक कावेरी का सिलेक्शन नहीं हो जाता तब तक वह तैयारी करती रहेगी। मेरे पिताजी ने कहा बेटा तुम दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हो तो भला मैं कौन होता हूं तुम दोनों को एक दूसरे से जुदा करने वाला। यह कहते ही पापा ने मुझ को स्वीकार कर लिया था और मैं बहुत ज्यादा खुश थी। कुछ ही समय बाद मेरी सगाई हो गई लेकिन सब लोग इस बात से बहुत चकित थे कि मैं प्रेम विवाह कर रही हूं क्योंकि किसी को भी कुछ उम्मीद नहीं थी। हम दोनों की सगाई तो हो ही चुकी थी इसलिए हम दोनों कभी कभार मिल लिया करते थे। मैं अब भी अपनी पढ़ाई में पूरी मेहनत झोक रही थी मैं कोशिश करती की मे मोहित से कम ही बात करूं। मोहित भी इस बात को भली-भांति समझते थे कि मैं अपनी तैयारी कर रही हूं मोहित भी अपनी तैयारी में लगे हुए थे लेकिन एक दिन मोहित ने मुझसे पूछा तुमने क्या पहना हुआ है? मुझे बड़ा अजीब सा महसूस हुआ मैं कुछ समझ ही नहीं पाई क्योंकि आज तक मैंने किसी से भी ऐसी कुछ बातें नहीं की थी लेकिन मोहित ने जब मेरे बदन के बारे में पूछा तो मैं भी उन्हें मना ना कर सकी। मैंने कहा आज मैने पिंक रंग की पैंटी ब्रा पहनी हुई है पहली बार इस तरीके की बातें थोड़ा अजीब सी लगी लेकिन उसके बाद जैसे इन बातों की आदत होने लगी थी।

मोहित और मै एक दूसरे से फोन सेक्स कर लिया करते थे मुझे भी सेक्स के मायने समझ आने लगे थे क्योंकि इससे पहले मैंने कभी भी सेक्स के प्रति इतनी रुचि नहीं दिखाई थी। मैं कमरे में बैठी रहती थी जब भ मोहित का फोन आता तो मैं उसके साथ फोन सेक्स किया करती थी। अब मैं हकीकत में मोहित के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थी मोहित ने एक दिन मुझे कहा तुम मेरे घर पर आ जाओ। मैं उनसे मिलने के लिए उसके घर पर चली गई जब मैं मोहित से मिलने गई तो उन्होने मेरे होठों को चूमना शुरू किया। पहली बार ही किसी के होठों से मेरे होठों टकरा रहे थे तो मुझे बहुत ही अच्छा सा महसूस हो रहा था लेकिन जब मोहित ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया तो मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी। जैसे ही मोहित ने मेरी चूत को चाटना शुरू किया तो मुझे बड़ा मजा आने लगा काफी देर तक यह सिलसिला जारी रहा। जब मोहित ने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मुझे बड़ा ही अजीब सा महसूस हुआ और काफी दर्द भी हुआ।

जब मैंने अपनी योनि की तरफ नजर मारी तो मेरी योनि से खून का बहाव हो रहा था मोहित ने मुझे कहा कि तुम अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लो। मैंने अपने दोनों पैरों को खोल लिया और मोहित का मोटा लिंग जिस प्रकार से मेरी योनि की अंदर बाहर होता तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होता। मोहित मुझे बड़ी तेज गति से धक्के दिए जा रहा था मोहित ने मुझे कहा कावेरी मैंने कभी तुम्हारे बारे में ऐसा सोचा नहीं था लेकिन सेक्स भी जीवन का एक हिस्सा है और शादी से पहले यह सब करना उचित नहीं है लेकिन मैं अपने आपको रोक ना सका। मोहित के साथ सेक्स करना बड़ा ही आनंदित कर देने वाला था जिस प्रकार से मोहित के मोटे से लिंग ने मेरी योनि की खुजली को मिटा दिया था उससे मुझे एहसास हो रहा था कि मैं ऐसे ही मोहित के लिंग को महसूस करती रहू। मोहित के मोटे लंड को मैंने बड़े अच्छे तरीके से महसूस किया मोहित ने मुझे अपना बना लिया। जैसे ही मोहित ने अपने वीर्य को मेरी योनि में डाला तो मैंने मोहित से कहा मोहित मुझे कपड़ा दे दो। मोहित ने मुझे कपडा दिया जब मैंने अपनी योनि को साफ किया तो मेरी योनि खून से खून रूक नहीं रहा था।


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