स्कूल की दोस्त से मेरी अन्तर्वासना

School ki dost se meri antarvasna:

हेल्लो मेरे प्यारे दोस्तों उझे आप सभी का दिल से धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप लोगों ने मेरी कहानी को सराहा और उसे इतना प्यार दिया | मैंने कभी भी अपनी जिंदगी ने नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा कुछ मिलेगा जिसे पाकर मैं भाव विभोर हो गया हूँ और मुझे बिलकुल भी शर्म नहीं आती ये बताने में कि मैं चुदाई की कहानी लिखता हूँ | उच्च भी हो किसी न किसी तरीके से मैं लोगों का मनोरंजन कर रहा हूँ और ये सबसे बड़ी सेवा है | मैंने हमेशा से अपने पापा से सीखा है कि अगर आप किसी को संतुष्ट कर रहे हो तो आप एक नेक इंसान हो और मुझे इस काम में बड़ा मज़ा भी आता है | पर इसका मतलब ये नहीं है कि आपको खुश करने के लिए मैं अपनी गांड खोल के खड़ा हो जाऊँगा और बोलूँगा लो मार्लो | नहीं ऐसा बिलकुल भी नहीं है और मुझे ऐसा कुछ करना पसंद भी नहीं है | मैं आज आपको अपने स्कूल की बाद सुनाता हूँ जिसमे मेरी गालियों से प्रभावित होकर एक लड़की ने मुझे अपनी चोट दे डाली और मैंने उसको चोदने में बिलकुल भी कमी नहीं छोड़ी | जी हाँ दोस्तों ये एक “सच्ची चुदाई एक चूत की कथा” | मैंने कई बार देखा है स्कूल या कॉलेज मैं जब भी आप कुछ उलटा करते हो तब आपकी ख्याति कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है क्यूंकि आप से सब इम्प्रेस हो जाते हैं और आप जैसा बनना चाहते हैं | इसलिए ये देश जो है वो पतन के रास्ते पर है और मुझे ये कहते हुए शर्म नहीं आ रही है के इसमें हम भी भागीदार हैं और कहीं न कहीं मुझे अन्दर से घृणा होने लगती है जहाँ पे औरत को केवल और केवल एक भोग की वास्तु समझा जाता है |

पर दोस्तों आ ज की कहानी में आपको पता चलेगा कि अगर इंसान चाहे तो वो कुछ भी कर सकता है और अगर वो समझले और सोचले कि औरत एक देवी है और उसका फायदा न उठाये तो वो बहुत ही कर्मठ और जुझारू साथी बन सकती है | तो दोस्तों बात शुरू होती है मेरे स्कूल से जहा पे मैं पढ़ा करता था और सरकारी स्कूल था वो तो वहाँ पे खूबसूरती का टी नामो निशाँ नहीं था | पर कहते हैं न कि बंजर ज़मीन पर भी एक बारिश की बूँद ज़रूर गिरती है | तो बस आप यही समझ लीजिये कि वो बारिश की बूँद जो है है वो गिर पड़ी थी हमारे स्कूल में | उस बूँद का नाम था रज्जो गाँव मंडला जिला दिंडोरी ग्राम हंडिया की रहने वाली थी वो | मैंने सब पता कर लिया था उसके बारे में और वो भी मस्त माल थी स्कूल का | मैंने सोच ही लिया था कि इसको मैंने पटा लेना है चाहे दुनिया वाले जो भी समझे | मैंने उससे बात नहीं की थी क्यूंकि मेरी गांड फटने में अव्वल रहती है | कुछ हुआ नहीं कि मेरी गांड फटी | बस यही सिलसिला था उसने दाखिला ले लिया पर वो आई दो दिन बाद से क्यूंकि उसके बाप की तबीअत ख़राब रहती है | मैंने तो सोचा था कि ये छोटी होगी पर ये तो हमारी क्लास में ही आ गयी अब इससे ज्यादा किसी को क्या चाहिए | मैंने सोचा चलो एक काम तो हो गया पर मेरी गांड तो गांड है उसे तो फटना ही था | फिर क्या था मैंने सोचा की इसके पीछे तो सारा स्कूल पड़ा होगा इसलिए  अपन कुछ ऐसा करते हैं जिससे ये खुद ही अपन से बात करना चालु कर दे |

मैंने क्लास में मजाक करना चालु कर दिया जिससे वो मुझे देखे और मेरा काम थोडा सा आसान हो | मैंने वहीँ पे कुछ ऐसा करना चालु कर दिया जिससे सर लोग और क्लास के बाकी बच्चे भी मेरी तरफ देखने लगे क्यूंकि मैंने आज तक किसी से भी मजाक नहीं किया अब उसको मेरा नाम पता चल गया था | मैंने उसके सामने वाली जगह ले ली और रोप्ज़ वहीँ पे बैठने लगा | उसके बाद क्या था मेरी उससे थोड़ी सी बात शुरू हो गयी और उसके बाद मैंने कोई भी मौका नहीं छोड़ा उससे बात करने का जिससे वो मुझसे इम्प्रेस हो जाये | मैंने तो यहाँ तक पता कर लिया था कि उसके बाप को बिमारी कौनसी है और उसका इलाज कहाँ चल रहा है | अब वो मुझे देखके मुस्कुराने लगी थी पर म अं तो था ही गांडू जो उसके इओशारे समझ नहीं पाता था | पर एक दिन मेरे दोस्त ने कहा भाई वो तुझे ऐसे देखती है न जैसे की तुझसे पटने वाली हो | मैंने कहा चल बने ऐसा कुछ भी नहीं है वो बस मुझे एक दोस्त की हैसियत से ही देखती है क्यूंकि मैंने उसकी बहुत मदद की है | उसने कहा भाई तू न लिख के रख ले ये लड़की न तुझसे बहुत जल्दी पटेगी और तुमलोगों का प्यार न अमर जैसा रहेगा | मैंने कहा भाई देख वो मेरी दोस्त इतनी मुश्किल से बनी है अगर तूने कुछ नज़र लगायी तो मैं तेरी गांड तोड़ दूंगा | उसने कहा भाई तू न मुझसे एक हफ्ते के बाद मिलना और तब बताने कि मैं सही था या गलत | मैंने कहा ठीक है भाई देखते है अगर ऐसा हुआ तो मैं तुझे एक पार्टी दूंगा मस्त वाली जैसी तूने अपने बाप राज में भी नहीं की होगी |

उसने कहा ठीक है भाई मैं इंतज़ार करूँगा उस पल का जब तू मुझे ऐसा कुछ करेगा | अब अगला हफ्ता पास आने लगा और हमारी बातचीत बढने लगी | मुझे लगा साला अगर मेरे दोस्त की बात सही हो गयी तो मैं पार्टी देके कंगाल हो जाऊंगा और फिर मेरे पास उसको घुमाने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा | पर मुझसे रहा भी नहीं जा रहा था क्यूंकि मैंने सोचा नहीं था इतनी खूबसूरत लड़की मुझसे पट जाएगी | मैंने बहुत अच्छे से सब चीज़ के बारे में सोचा और समझा फिर ही मैंने आगे बदने का फैसला लिया क्यूंकि मुझे एक मस्त लड़की चाहिए थी जो की आगे तक मेरा साथ दे सके | तो भाई लोग लड़की तो पटने की फ़िराक में थी और अब मैं भी तैयार हो चूका था | मैंने साड़ी तैयारी कर ली थी और उसके बाप के सामने भी इतनी इज्ज़त बना ली थी कि वो मुझे कुछ भी न कहे | उसकी माँ थी नहीं बाप भी बीमार रहता था और अकेली वही बची घर में तो उसे भी एक अच्छा लड़का चाहिए था | अब एक दिन स्कूल में वो मेरे पीछे ही बैठी थी तो धीरे से उसने मुझे एक परचा दिया | मैंने उसे पढ़ा तो मेरी आँखों में आंसू आ गये | मैंने उससे कहा आज घर में मिलना मैं आऊंगा | जैसे ही मैं उसके घर में गया उसके पापा नहीं थे और मैंने उसको सीधा गले से लगा लिया और कहा पागल इतना प्यार हो गया है तुझे मुझसे | उसने कहा हाँ पर अब हो गया तो हो गया मैं पीछे नहीं हटूंगी | पर्चे में लिखा था तेरे अलावा अगर किसी भी लड़के के साथ दिख जाऊं तो बीच रोड में नंगा घुमा के गोली मार देना और उसने साइन भी कर दिया था |

मैंने उसको तुरंत किस करना चालु कर दिया और उसने भी मुझे किस करना चालू कर दिया | मैंने उसे इतनी जोर से गले लगा रखा था कि हमारे बीच से हवा भी आर पार नहीं हो रही थी | फिर मैंने धीरे से उसका कुरता उतारा और उसके बाद मैंने उसके दूध को पीना चालु कर दिया | उसके बाद मैंने उसके छोटे छोटे निप्पल को चूसना चालू कर दिया | वो आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः कर रही थी | उसके बाद मैंने उससे कहा सुनो मेरा लंड अच्छा चूस के देखो ना | उसने मन कर दिया तो मैंने कहा ठीक है | फिर मैंने उसका पयजामा भी उतार दिया और उसकी छोटी सी चूत को चाटने लगा और उसपे हलके से बाल थे | उसका पसीना महक रहा था पर मुझे मज़ा आ रहा था | मैंने उसकी चूत को चाटना चालु कर दिया और वो आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः करने लगी | फिर उसने मेरा लंड पकड़ लिया और अपने आप मुह में ले लिया और फिर मेरी भी आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः की आवाज़ निकलने लगी जोर जोर से |

मैंने उसको उस दिन एक ही बार चोदा और उसकी सील खोल दी फिर हम अक्सर चुदाई करने लगे और वो मेरे बच्चे की माँ बन गयी तो घर वालों ने हमारी शादी करवा दी | बस यही पे समाप्त हुयी मेरी कहानी अब मैं चलता हूँ |


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