स्कूल के प्यार की गांड

School ke pyar ki gaand:

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मेरा नाम रमन है मैं पंजाब के गुरदासपुर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र अब 45 वर्ष हो चुकी है। मैंने काफी समय अपना गुरदासपुर में ही काटा लेकिन जब मैं अपने आप को समझने लगा और मुझे लगा कि मुझे अपने परिवार के लिए कुछ कर लेना चाहिए तो मैंने भी बहुत कड़ी मेहनत करनी शुरू कर दी और इसी के चलते मैं विदेश चला गया। जब मैं विदेश गया तो मुझे ना तो अच्छे से अंग्रेजी आती थी और ना ही मैं इतना ज्यादा पढ़ा लिखा था कि मैं वहां पर रहकर काम कर सकूं लेकिन मैंने उसके बावजूद भी हिम्मत नहीं हारी। कुछ समय तक मैं छोटे-मोटे काम करता रहा लेकिन जब मैं बड़े लोगों के संपर्क में आने लगा तो फिर मैंने भी  बड़े काम करने शुरू कर दिए थे और वहीं से मुझे एक स्टार्टअप मिलना शुरू हुआ। मैंने काफी पैसे विदेश में कमा लिए थे इसीलिए मैंने सोचा कि क्यों ना अब मैं गुरदासपुर में ही जाकर कुछ काम शुरू कर लूं इसीलिए मैं जब गुरदासपुर चला गया।

वहां पर मैंने एक छोटी सी इंडस्ट्री डाल दी लेकिन गुरदासपुर बड़ी जगह नहीं है इसीलिए मैंने दिल्ली में ही रहने का फैसला कर लिया और मैंने एक घर दिल्ली में भी ले लिया। मुझे दिल्ली में रहते हुए 4 वर्ष हो चुके हैं और मैंने दिल्ली में ही अपना सारा कुछ काम शुरू कर लिया है। मेरे जितने भी परिचित है मैंने उनके ही घर वालों को अपने यहां पर रोजगार मुहैया करवाया हुआ है, अधिकतर लोग मेरी कंपनी में मेरी जान पहचान के हैं या फिर वह किसी न किसी प्रकार से मुझे पहचानते हैं इसीलिए वह लोग मुझे बहुत अच्छा काम कर के देते हैं। एक दिन मैं ऑफिस में ही बैठा हुआ था तो उस दिन मेरे मैनेजर मेरे पास आ गए और कहने लगे सर मुझे किसी कारणवश अब ऑफिस से रिजाइन देना पड़ेगा, मैंने उनसे पूछा कि क्या आपको कंपनी में कोई समस्या है या फिर आप को कोई दिक्कत है। वह कहने लगे सर आपने जितना कुछ भी मुझे दिया है इतना शायद ही कोई कंपनी दे पाती और आपने तो मुझे हमेशा ही एक दोस्त की तरह समझा आप जैसा दोस्त मिल पाना तो मुश्किल है लेकिन मेरी कुछ समस्याएं हैं इसलिए मुझे रिजाइन देना पड़ेगा।

मैंने भी उनसे ज्यादा बात नहीं की और उनसे कहा ठीक है जब तक मैं किसी को रख नहीं लेता तब तक आप काम संभाल लीजिए और उसके बाद आप अपना निर्णय ले लीजिएगा। मैंने भी अपनी सेक्रेट्री से कहा कि आप इस पोस्ट के लिए एड दे दीजिएगा, उन्होंने कहा ठीक है मैं इस पोस्ट के लिए ऐड दे दूंगी। कुछ दिनों बाद ही इंटरव्यू था  तो उसमें काफी सारे लोग आए हुए थे। मेरी नजर जब अंजली पर पड़ी तो मैं उसे अच्छे से पहचान नहीं पाया क्योंकि यह काफी समय पुरानी बात हो चुकी है, मैंने अपने ऑफिस के पीएम से कहकर अंजलि को अपने केबिन में बुला लिया, जब अंजलि ने मुझे देखा तो वह मुझे कहने लगी कि मुझे आप कहीं देखे देखे से लग रहे हैं। मैंने अंजली से पूछा कि क्या तुम गुरदासपुर में रहती थी, वह कहने लगी हां मैं गुरदासपुर में ही रहती थी लेकिन अब मेरी शादी दिल्ली में हो चुकी है और मैंने अपनी पुरानी कंपनी से रिजाइन दे दिया है इसीलिए मैं यहां पर इंटरव्यू देने आई हूं। मैंने जब उसे बताया कि यह मेरा ही ऑफिस है तो वह यह सुनकर बड़ी शॉक्ड रह गई क्योंकि उसे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मैं इतनी बड़ी कंपनी कभी खोल भी पाऊंगा। मैं अंजलि को स्कूल के समय में बहुत पसंद करता था लेकिन मैंने अंजली से कभी भी अपने दिल की बात नहीं कही और जब इतने सालों बाद मैंने अंजलि को दिखा तो मुझे ऐसा लगा जैसे अंजली आज भी पहले जैसी ही है, वह बिल्कुल भी नहीं बदली है उसका बात करने का अंदाज भी पहले जैसा ही है। मैंने अपनी सेक्रेटरी को अपने रूम में बुलाया और उसे कहा कि तुम मैडम का इंटरव्यू करवा देना, मैं अभी कहीं काम से जा रहा हूं। मैंने उसके बाद अंजली से इजाजत ली और कहा कि मैं कहीं काम से जा रहा हूं तुम्हें कुछ दिनों बाद मिलता हूं। अंजलि ने भी इंटरव्यू दिया उसके बाद उसका सिलेक्शन हो चुका था क्योंकि मैंने ही अपनी सेक्रेटरी से कह दिया था कि आप लोग अंजलि को ही सेलेक्ट करवा दीजिएगा। जब मैं ऑफिस में आया तो मैंने उसे बधाई दी और कहा कि चलो तुम्हारा सिलेक्शन हो गया। उसने मुझसे पूछा कि तुमने ही शायद अपने ऑफिस में कह दिया था कि मेरा सिलेक्शन हो जाना चाहिए, मैंने उसे कहा हां मैंने ही तुम्हारे सिलेक्शन के लिए बात की थी।

अंजली ने मुझसे कहा कि मुझे तुमसे बात करनी है यदि तुम्हारे पास वक्त हो तो थोड़ा समय तुम मेरे लिए निकाल लेना, मैंने अंजलि से कहा ठीक है ऑफिस में तो यह संभव नहीं हो पाएगा लेकिन मैं तुम्हें फोन कर दूंगा जब भी मेरे पास वक्त होगा तो मैं तुम्हें बोल दूंगा। मैं दरअसल बहुत बिजी था इसलिए मैं ज्यादा समय नहीं निकाल पा रहा था। एक दिन मैं घर पर था, मुझे लगा शायद आज मेरे पास कुछ भी काम नहीं है इसलिए मैंने अंजलि को फोन कर दिया और उससे पूछा अभी तुम कहां पर हो तो वह कहने लगी मैं अभी ऑफिस के लिए निकल रही हूं। मैंने उससे उसकी लोकेशन पूछी और मैंने अंजलि को अपनी कार से रिसीव कर लिया। हम दोनों जब कार में बैठे हुए थे तो मैं अंजली के साथ अपनी पुरानी बातें शेयर कर रहा था और उसे अपने बारे में भी बताया कि मैंने किस प्रकार से मेहनत की है और उसके बलबूते ही मैंने आज इतना बड़ा मुकाम हासिल किया। अंजली भी मेरी बातों से बहुत प्रभावित हो रही थी, वह मेरी तरफ बड़े ध्यान से देख रही थी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उसे कुछ चाहिए लेकिन वह मुझसे कहना नहीं चाहती है। उसने भी मुझे अपने जीवन के बारे में बताया तो वह प्यार के लिए तड़प रही थी। मैंने उसे कहा मैं तुम्हें पूरा प्यार दूंगा, मैं जब उसे अपने साथ अपने फ्लैट में ले गया तो हम दोनों ही वहां बैठ कर बात कर रहे थे। मैंने जब अंजली की जांघों पर हाथ रखा तो उसकी जांघ अब भी बहुत टाइट थी।

मैंने उसके होठों को किस कर लिया, उसके होठों को मैंने बड़े अच्छे से चूसा जिससे कि उसके होंठ बहुत ज्यादा लाल हो गए थे। मैंने जब उसे नंगा किया तो उसकी बड़ी गांड मुझे अपनी तरफ खीच रही थी। मैंने अंजलि को घोड़ी बना दिया मैंने उसकी योनि को बहुत देर से चाटा, मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो उसे बड़ा आनंद आया वह बहुत चिल्लाने लगी। मेरा लंड उसकी चूत के पूरे अंदर तक समा चुका था, मैंने उसे बड़ी तेज गति से चोदना शुरू कर दिया था। अंजलि जिस प्रकार से मेरा साथ दे रही थी मैं बहुत खुश था मैंने अंजलि को 5 मिनट तक बड़े अच्छे से चोदा लेकिन जब मेरा वीर्य पतन उसकी योनि में हुआ तो हम दोनों कुछ देर तक बैठे रहे। जब मैंने अंजली की गांड को दबाना शुरू किया तो मुझे उसकी गांड मारने का बड़ा मन हुआ और मैंने भी अंजलि से अपनी इच्छा जाहिर की उसने मुझे बिल्कुल भी मना नहीं किया। उसने अपने आप ही मेरे सामने अपनी गांड को पेश कर दिया। मैंने भी अपने लंड पर अच्छे से तेल मल लिया और जैसे ही मैंने अंजलि की गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो वह मचल पडी। वह कहने लगी तुम्हारा लंड तो कुछ ज्यादा ही मोटा है। वह मेरे लंड को अपनी गांड के अंदर लेते हुए बहुत अच्छा महसूस कर रही थी वह मुझे भी कह रही थी मुझे तुम्हारे साथ में सेक्स कर के बड़ा मजा आ रहा है। उसके मुंह से जिस प्रकार से मादक आवाज निकल रही थी वह पूरे तरीके से मुझे अपनी और आकर्षित करती। उसकी गांड से खून बाहर निकल रहा था और मैं भी बड़ी तेजी से झटके मार रहा था मै डेढ मिनट में झडने वाला था। जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने वीर्य को उसकी चूतड़ों के ऊपर गिरा दिया। अंजलि ने बहुत मजे लिए हम दोनों ने एक दूसरे के साथ काफी देर तक 69 किया। मैंने अंजलि के मुंह के अंदर भी अपने वीर्य को गिराया उसके बाद से अंजलि जैसे मेरा परमानेंट जुगाड़ बन गई हो। वह हमेशा ही मुझसे चुदने के लिए उतारू रहती है जब मैं उसकी गांड मारता हू तो वह बहुत खुश होती है।


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