सौम्या के होठों का स्पर्श

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Saumya ke hothon ka sparsh मेरा ट्रांसफर नॉएडा हो जाता है मैं इससे पहले जालंधर में रहता था लेकिन अब मेंरा ट्रांसफर नॉएडा हो चुका था इसलिए मैं नॉएडा चला गया। जब मेरा ट्रांसफर नॉएडा हुआ तो मैं नॉएडा में ही रहने लगा और मैं चाहता था कि मेरी फैमिली भी मेरे साथ रहने के लिए आ जाए। मेरा परिवार अमृतसर में रहता है लेकिन अब वह लोग मेरे पास नॉएडा रहने के लिए आ गए थे पापा भी अपने जॉब से कुछ समय पहले ही रिटायर हुए हैं और वह अब मेरे साथ नॉएडा में ही रहने लगे थे। पापा मम्मी मेरे साथ ही रहने लगे थे और वह लोग चाहते थे कि अब मैं शादी कर लूं तो मैंने भी उनकी बात मान ली। पापा के एक पुराने मित्र हैं उनकी ही बेटी से जब उन्होंने मेरी शादी की बात कही तो मुझे भी इससे कोई एतराज नहीं था लेकिन पहले मैं उससे मिलना चाहता था। जब पहली बार मैं सौम्या से मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा धीरे धीरे सौम्या और मैं एक दूसरे से घुलने मिलने लग गए थे और उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को अक्सर मिलने लगे थे। 

जल्द ही हम दोनों के परिवार वालों ने हम दोनों की सगाई करवाने का फैसला कर लिया। मुझे भी उनकी बात से कोई एतराज नहीं था और ना ही सौम्या को इसमे कोई आपत्ति थी उसके बाद हम दोनों की सगाई हो गई। हम दोनों की सगाई हो जाने के बाद हम दोनों काफी ज्यादा खुश थे कि हम दोनों की सगाई हो चुकी है। हम दोनों एक दूसरे को जानने के लिए ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करने लगे थे हम दोनों को जब भी मौका मिलता तो हम दोनों एक दूसरे को मिल लेते। मैं सौम्या को अच्छे से समझने लगा था और उसके साथ मुझे समय बिता कर अच्छा लगता वह भी मुझे अब काफी समझने लगी थी और हम दोनों के बीच प्यार भी बढ़ने लगा था। हम चाहते थे कि हम दोनों जल्द ही शादी कर ले और फिर कुछ ही समय मे हम दोनों की शादी भी हो गई। जब हम दोनों की शादी हो गई तो हम दोनों के परिवार वाले काफी खुश हुए और मैं भी सौम्या को अपनी पत्नी के रूप में पाकर बहुत खुश हुआ, सौम्या मेरी पत्नी बन चुकी थी। 

कब हम दोनों की शादी को दो वर्ष बीत गए कुछ पता ही नहीं चला दो वर्ष बीत जाने के बाद एक दिन जब मुझे पता चला कि मेरा ट्रांसफर लखनऊ हो गया है तो इस बात से मैं काफी ज्यादा दुखी था। मैंने जब यह बात सौम्या को बताई तो सौम्या मुझे कहने लगी कि क्या अब आप लखनऊ चले जाएंगे तो मैंने सौम्या को कहा तुम्हें तो मालूम ही है कि मुझे लखनऊ जाना ही पड़ेगा। सौम्या चाहती थी कि मैं उसे अपने साथ लखनऊ लेकर जाऊं लेकिन यह संभव नहीं हो पाया। मैं अब लखनऊ आ चुका था और लखनऊ में मुझे कुछ ही दिन हुए थे और मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था मैं अपनी फैमिली को बहुत ज्यादा मिस कर रहा था। मेरी बात सौम्या से फोन पर होती रहती थी मैं चाहता था कि हम लोग लखनऊ में साथ में रहे लेकिन यह संभव नहीं था क्योंकि सौम्या भी अब नौकरी करने लगी थी। सौम्या स्कूल में पढ़ाने लगी थी जिस वजह से सौम्या का लखनऊ में रह पाना मुश्किल था लेकिन मैं सौम्या से मिलने के लिए चला जाया करता था। काफी समय हो गया था जब मैं अपने घर नहीं जा पाया था और सौम्या से मेरी फोन पर ही बात हो रही थी। मैंने सौम्या को कहा कि मैं जल्दी ही घर आऊंगा और मैं जल्द ही घर चला गया जब मैं अपने घर गया तो मुझे काफी अच्छा लगा मैं सौम्या और अपने मम्मी पापा से मिलकर काफी ज्यादा खुश था और वह लोग भी मुझसे मिलकर खुश थे। कुछ दिनों तक मैं घर पर ही रहा और फिर मैं वापस लखनऊ आ गया जब मैं लखनऊ आया तो एक दिन मेरी तबीयत मुझे कुछ ठीक नहीं लग रही थी तो मैंने उस दिन छुट्टी ले ली और मैं घर पर ही था।

उस दिन मुझे काफी ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही थी तो मैं अपने नजदीकी डॉक्टर के पास चला गया था उन्होंने मुझे कुछ दवाइयां लिखकर दी और कहा कि आप कुछ दिन आराम कीजिएगा लेकिन मेरी तबीयत काफी बिगड़ने लगी। मैंने इस बारे में सौम्या को बताया तो पापा मम्मी और सौम्या मुझसे मिलने के लिए लखनऊ आ गए और वह लोग मेरा अच्छे से ध्यान रख रहे थे। मेरी तबीयत में जल्दी सुधार आने लगा मैं बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस कर रहा था लेकिन अब मैं ठीक हो चुका था और अपने ऑफिस जाने लगा था। सौम्या मेरे पास ही रहना चाहती थी सौम्या ने अपने स्कूल से रिजाइन दे दिया और वह मुझे कहने लगी कि मैं आपके साथ ही रहना चाहती हूं। पापा मम्मी को भी इस बात से कोई एतराज नहीं था तो सौम्या मेरे साथ ही रहने लगी। पापा मम्मी भी उसके बाद अमृतसर चले गए और वह लोग अमृतसर में ही रहने लगे। सौम्या भी घर पर अकेले बोर हो जाया करती थी इसलिए सौम्या चाहती थी कि वह किसी स्कूल में पढ़ाये। एक दिन सौम्या इंटरव्यू देने के लिए गई तो उसका वहां पर सिलेक्शन हो गया उसके बाद सौम्या स्कूल में पढ़ाने के लिए जाने लगी। सौम्या सुबह चले जाया करती थी और दोपहर को वह घर लौट आया करती थी और मैं अपने ऑफिस से शाम के वक्त लौटा करता था।

जब मैं अपने ऑफिस से शाम के वक्त लौटता तो सौम्या के साथ मैं कुछ देर बैठकर बातें जरूर किया करता था। मैं इस बात से खुश था कि सौम्या मेरे साथ ही रहने लगी है। सौम्या और मैं अब साथ में ही रह रहे थे इसलिए हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा भी ले लिया करते। एक दिन मैं घर लौटा तो उस दिन सौम्या ने लाल रंग की नाइटी पहनी हुई थी वह कुछ ज्यादा ही मूड में नजर आ रही थी। मैंने सौम्या से कहा लगता है आज तुम मूड में नजर आ रही हो। सौम्या ने मुझे कहा हां मुझे आपकी बहुत ज्यादा याद आ रही थी और आज आपके साथ मुझे सेक्स करने का भी मन है और यह कहकर वह मेरी बाहों में आ गई। सौम्या मेरी बाहों में थी मैं सौम्या के स्तनों को दबा रहा था। अब हम दोनों उत्तेजित होने लगे थे मैंने सौम्या के होंठों को चूमना शुरू कर दिया।

मैंने जब सौम्या के होंठों को चूमना शुरू किया तो मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगने लगा था और सौम्या को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। मैंने सौम्या से उसके कपड़े उतारने के लिए कहा तो वह अपने कपड़े उतार चुकी थी। जब मैंने सौम्या की ब्रा को खोल कर उसके स्तनों को अपने हाथ से महसूस करना शुरू किया तो मुझे अब और भी ज्यादा मजा आने लगा। सौम्या को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है अब मैं एक पल के लिए भी रह नहीं पा रही हूं। मैं भी समझ चुका था सौम्या की चूत से निकलती हुई गर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ चुकी है। मैंने सौम्या की पैंटी को नीचे किया और सौम्या की योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा और सौम्या को भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा है मैंने सौम्या को कहा मजा तो मुझे भी बहुत ज्यादा आ रहा है और मैं काफी ज्यादा खुश हूं। मैंने सौम्या की चूत को काफी देर तक चाटा। सौम्या की चूत से निकलती हुई आग बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मैंने अपने मोटे लंड को सौम्या की योनि पर लगाकर अंदर की तरफ डालना शुरू किया।

सौम्या की चूत से गर्म पानी बाहर की तरफ निकल रहा था जैसे ही मैंने धीरे धीरे अपने मोटे लंड को सौम्या की चूत के अंदर प्रवेश करवाना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा। मेरा मोटा लंड सौम्या की योनि के अंदर चला गया जब मेरा मोटा लंड सौम्या की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और सौम्या की योनि के अंदर से निकलता हुआ खून भी मेरी गर्मी को और भी बढ़ाता जा रहा था। मैंने सौम्या के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। मैंने सौम्या की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया था मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था और सौम्या को भी काफी ज्यादा मजा आ रहा था। जब मैं सौम्या को धक्के मार रहा था तो वह बोली और तेजी से चोदो मैंने उसे काफी तेज गति से धक्के मारे जिसके बाद मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाया और मैंने सौम्या को कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। सौम्या मुझे कहने लगी मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है और मैंने सौम्या की योनि के अंदर ही अपने माल को गिरा कर अपनी इच्छा को पूरा कर दिया। मेरे माल ने सौम्या की गर्मी को शांत कर दिया था अब सौम्या की चूत की गर्मी शांत हो चुकी थी। मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आया जब मैंने सौम्या के साथ सेक्स किया। मै जितने दिनों तक इंदौर में रुका उतने दिनो तक मैने सौम्या को खूब जमकर चोदा। वह बहुत ज्यादा खुश थी जब मैंने उसके साथ सेक्स किया। वह मेरे लिए बहुत ही ज्यादा तड़पती है।


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