संजना और सपना दोनों की चूत मारी

Sanjana aur sapna dono ki chut mari:

sex stories in hindi, desi kahani

मेरा नाम वैशाली है। मैं और अविनाश स्कूल से ही एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। हम इलाहाबाद के रहने वाले थे। हम दोनों को एक दूसरे से बहुत प्यार था। जब हमारी स्कूल की पढ़ाई पूरी हुई तब हमें कॉलेज की पढ़ाई करनी थी तो अविनाश आगे की पढ़ाई करने के लिए वह और उसकी फैमिली इलाहाबाद से मुंबई शिफ्ट हो गए। उसके बाद मैंने भी अपनी फैमिली से जिद की कि मुझे मुंबई से ही अपना ग्रेजुएशन करना है। मेरे काफी बोलने के बाद उन्होंने मुझे मुंबई शिफ्ट कर दिया और मैं वहीं रहने लगी थी। उसके बाद में अविनाश से मिली। मैं अविनाश से काफी दिनों बाद मिल रही थी इसलिए मैं उससे मिलने के लिए बहुत खुश हो रही थी। जब मैं कॉलेज जाती थी तब हम दोनों साथ में ही कॉलेज जाया करते थे। अविनाश के लिए ही मैं इलाहाबाद से मुंबई शिफ्ट हुई।

एक दिन अविनाश के दोस्त के घर में पार्टी थी। उस पार्टी में उसने मुझे भी इनवाइट किया था तो मैं और अविनाश उसकी पार्टी में चले गए।  अविनाश पहले से काफी बदल चुका था वह पहले जैसा नहीं था। जिस तरीके से वह स्कूल टाइम पर मेरे साथ बात किया करता था। उस तरीके से वह अब मेरे साथ नहीं रहता था। उस पार्टी में उसके सारे दोस्त शराब पी रहे थे और अविनाश भी मुझे जबरदस्ती शराब पिलाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन मैंने उससे कई बार मना किया कि मैं शराब नहीं पीती हूं। मेरे कई बार बोलने पर उसने मुझे जबरदस्ती पिलाने की कोशिश की मुझे इस बात पर बहुत गुस्सा आया और मैं वहां से चली गई।

अविनाश भी मेरे पीछे पीछे आया और उसने मुझे सॉरी कहा फिर घर छोड़ने के लिए भी कहा। मैंने उसे मना कर दिया और वहां से चली गई।

दूसरे दिन उसने मुझे सुबह कॉल किया और सॉरी कहने लगा। मैंने उससे कहा कि क्या हम आज शाम को मिल सकते हैं लेकिन उसने अपने किसी प्रोजेक्ट का बहाना बना लिया। मुझे कहा कि वह कॉलेज से सीधे घर जाएगा और अपना प्रोजेक्ट पूरा करेगा। मुझे उस पर शक होने लगा था क्योंकि उसी टाइम उसके दोस्त का फोन आया और उसने अविनाश को मिलने बुलाया।  अविनाश ने मुझसे प्रोजेक्ट का बहाना बनाया मुझे इस बात का बहुत बुरा लगा और मुझे कल की बातें याद आने लगी। उसके बाद मैं सोचती रही कि मेरा तो यहां अभी कोई भी दोस्त नहीं है मैं बहुत अकेली पड़ गई थी। फिर मैं अपने ऊपर वाले फ्लैट पर गई और जोर-जोर से दरवाजा खटखटाने लगी और एक लड़के ने दरवाजा खोला।

मुझे देख कर बोला कुछ काम है क्या मैंने उससे कहा कि मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है। उसने मेरी मदद करने के लिए मना कर दिया और दरवाजा बंद कर दिया। उसके बाद मैंने फिर से उसका दरवाजा खटखटाया वह मुझसे गुस्से से बोला कि तुम्हारे पास कुछ और काम नहीं है। उसकी यह बातें सुनकर मैं रोने लगी उसने मुझे रोता देख मुझसे सॉरी कहने लगा और मुझे अंदर आने के लिए कहा। जब मैं उसके कमरे पर गई तो उसका कमरा पूरा बिखरा हुआ था और कहीं पर बैठने की भी जगह नहीं थी। फिर भी उसने मुझे बैठने के लिए कहा और मेरा नाम पूछने के बाद उसने अपना नाम बताया  उसका नाम समीर था। समीर मेरे लिए पानी लेने के लिए किचन में चले गया। तब तक पीछे से दूसरा लड़का आया वह मुझे देखकर हैरान हो गया। उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और मैंने उसे अपना नाम बताया और उससे भी उसका नाम पूछा उसका नाम मयंक था। फिर हम तीनों आपस में बातें करने लगे और उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हें हमारी कैसी मदद चाहिए।

मैंने उन्हें अपने और अविनाश के बारे में बताया और कहा कि उन्हें अविनाश के बारे में पता करना है कि वह कहां जाता है और क्या करता है। पहले तो वह एक दूसरे को देखने लगे। उसके बाद उन्होंने मेरी मदद के लिए हां कर दी।

अगले दिन जब अविनाश क्लब में गया तो उसके पीछे समीर और मयंक भी गए। उन्होंने मुझे बताया कि वह एक लड़की के साथ बैठा हुआ था और दोनों ड्रिंक के साथ साथ किस भी कर रहे थे। मैं यह सब सुनकर हैरान हो गई लेकिन मुझे फिर भी यकीन नहीं हुआ। उस के दूसरे दिन मैंने अविनाश को कॉल किया कि मैं उससे मिलने उसके घर आ रही हूं और मैं उसके सभी दोस्तों से मिलना चाहती हूं। जब अविनाश ने अपने सारे दोस्तों को अपने घर पर बुलाया तो मैंने देखा कि वह उसी लड़की के साथ गले मिल रहा था। वह अजीब हरकतें करने लगे। उन्हें पता नहीं था कि मैं पहले से ही वहां मौजूद थी और मेरे दोनों नए दोस्त भी वहां पर मौजूद थे। वे दोनों बहुत ही अच्छे लड़के थे। उन्होंने मेरी बहुत मदद की जब मैंने अविनाश को ऐसे देखा तो मुझे बहुत गुस्सा आया गुस्से मे मैंने अविनाश को एक थप्पड़ भी मार दिया। अविनाश के सारे दोस्त मुझे देखने लग गए कि मैंने यह क्या किया। सब मुझे देखकर हैरान से हो गए थे लेकिन मैं भी क्या करती अविनाश ने मेरे साथ धोखा किया। वह मेरे होने के बावजूद भी किसी दूसरी लड़की से मिलने जाया करता था और मुझसे झूठ बोलता था। मैं उसे कभी माफ नहीं कर सकती फिर मैं और मेरे दोनों दोस्त वहां से चले गए थे। अविनाश ने मुझे रोकने की कोशिश की लेकिन मैंने उसे धक्का देकर वहां से हटा दिया और हम वापस घर चले गए।

उसके बाद हम लोग समीर और मयंक के फ्लैट में आ गए। मैं बहुत तेज तेज रो रही थी। उन दोनों से मेरा यह रोना देखा नहीं गया और उन्होंने मुझे कहा कि हम तुम्हारे लिए क्या कर सकते हैं। मैंने अपने सारे कपड़े फाड़ दिए और मैंने उन्हें कहा कि तुम मुझे अब चोदो। वह दोनों मेरी तरफ बड़ी ध्यान से देख रहे थे। उन दोनों ने अपनी पैंट से लंड को बाहर निकाला और मेरे मुंह में बारी बारी से देने लगे। मैं उनके लंड को बड़ी अच्छे से मुंह में ले रही थी क्योंकि मुझे अविनाश की याद आ रही थी। उसने मेरे साथ बहुत गलत किया था। मैंने समीर का लंड अपने गले तक ले लिया और उसे बहुत ही मज़ा आ रहा था। मैंने उन दोनों के लंड को अच्छे से सकिंग किया। मेरा बदन उनके सामने नंगा था। उन दोनों ने अब मेरे चूचो को अपने मुंह में लेना शुरू किया। दोनों ने मरे चूचो को अपने मुंह में लेकर चाटने लगे और उसके बाद समीर ने मेरी चूत को चाटना शुरू किया। उसने अपनी जीभ से मेरी चूत को अच्छे से चाटा। वह मेरे स्तनों को चाट रहा था और मयंक मेरी चूत मे अपना लंड रगड़ रहा था। जैसे ही वह अपने लंड को रगड़ता तो मेरा पानी निकल जाता। फिलहाल मेरे दिमाग से अविनाश का ख्याल निकल गया था और मुझे सिर्फ सेक्स की भूख थी। मयंक ने मेरे चूत मे अपना लंड डाल दिया और वह बड़ी ही तेजी से मुझे चोदने लगा। जैसे ही वह मुझे झटके मारता तो मेरे स्तन हिलते और समीर मेरे स्तनों को अपने हाथों से पकड़ कर मह मे ले लेता मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब वह मेरे साथ इस तरीके से कर रहा था। मैं यह सब देख कर बहुत खुश हो रही थी। मयंक ने दस मिनट तक ऐसा ही चोदा और उसने अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर ही डाल दिया। अब अपने लंड को बाहर निकालते हुए मेरे मुह मे डाल दिया और मैंने उसके लंड को अपने मुंह से साफ किया। समीर मेरी चूतड़ों को ऊपर उठाते हुए मुझे धक्के मारने लगा। उसने बड़ी ही तेज गति से मुझे धक्के मारने शुरू किया। जैसे ही वह मुझे झटके मारता तो मेरा पूरा शरीर हिलता जाता और मेरे शरीर के अंदर से अजीब सी बेचैनी पैदा हो जाती। समीर का बहुत ही मोटा लंड था तो जैसे ही वह मेरी चूत से बाहर की तरफ आता था मुझे अच्छा लगता और वह फिर अंदर घुसा देता मुझे यह सब बहुत ही अच्छा लग रहा था। उन दोनों ने मेरी इच्छा पूरी कर दी थी। समीर ने भी मेरी चूत मे अपना माल डाल दिया और उसने अपना लंड जैसे ही बाहर निकाला। मेरी चूत से माल टपक रहा था। वह दोनों मेरी चूत को ऐसे ही चाट रहे थे जैसे मेरी चूत मे कुछ अलग ही लगा हो।

अब मेरा गुस्सा शांत हो चुका था तो वह दोनों मुझे समझाने लगे यह सब कुछ नहीं होता है। तुम्हें सिर्फ सेक्स की भूख है जो कि हम दोनों ने मिटा दी और तुम्हें जब भी जरूरत पड़े तो तुम हमारे पास आ जाना। हम तुम्हारी चूत का भोसड़ा बना देंगे। मुझे भी यही एहसास हुआ कि मैं अविनाश के चक्करों में गलत पड़ी हूं। मैं अविनाश से बात भी नहीं करती। जब भी मन होता तो मैं अपनी चूत मरवाने समीर और मयंक के पास चली जाती हूं।

 


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