सनम तेरी चूत मेरे लंड की मंजिल

Sanam teri chut mere lund ki manjil:

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मेरा नाम रीना है और मैं फरीदाबाद की रहने वाली हूं। अभी मैं जॉब कर रही हूं और मैंने कॉलेज के तुरंत बाद ही यह जॉब ज्वाइन कर ली थी। उसके बाद से मैं यहीं पर काम कर रही हूं। मैं एक सीधी साधी और बहुत ही सिंपल तरीके की लड़की हूं। मेरे बहुत ही कम दोस्त हैं और जो भी है वह भी गिने-चुने ही हैं। मैं उनसे अभी भी संपर्क में रहती हूं। मेरे पड़ोस में सूरज नाम का लड़का रहता है। जो कि मेरे साथ बचपन से ही पड़ता था। वह मुझे अच्छा लगता था। यह मुझे कॉलेज में आकर मालूम पड़ा। पर मैंने उसे कभी भी अपनी फीलिंग शेयर नहीं की और ना ही मैंने उसे अपने बारे में कुछ बताया। इसी चुप्पी के चलते मेरी उससे कुछ खास बात नही हो पाई और अब सूरज विदेश में चला गया है। वह मुझे कई सालों से मिला भी नहीं है। कई बार मैं सोचती हूं कि काश मैंने सूरज से बात कर ली होती तो आज मैं उसे अपने दिल की बात बता पाती लेकिन अब बहुत ज्यादा समय हो चुका है। शायद उसके घर वालों ने भी उसके लिए कोई लड़की ढूंढ ही ली होगी। जिससे वह उसकी शादी करवा देंगे। स्कूल में मैं सूरज का बहुत सारा काम किया करती थी। क्योंकि वह पढ़ने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं था। इस वजह से मुझे ही उसका सारा काम करना पड़ता था और कॉलेज में भी मैं ही उसका प्रोजेक्ट बना कर उसे देती थी। तब वह प्रोफेसरों को अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट सबमिट किया करता था। वह मुझे बहुत ही ज्यादा मानता था और मेरी किसी भी बात को वह कभी भी मना नहीं करता था लेकिन मैं उसे कभी कह ही नही पाई की मैं उसे कितना पसन्द करती हूं, लेकिन अब कई सालों से मुझे सूरज मिला नहीं ही है। मैं भी अपने काम में कुछ ज्यादा ही बिजी रहने लगी हूं। ना ही वह अभी विदेश से घर आया है।

एक दिन उसकी मम्मी हमारे घर पर आई थी और कह रही थी कि शायद वह कुछ दिनों के लिए घर आ रहा है। मैं यह बात सुनकर बहुत खुश हुई और सोचने लगी कि मैं उसे इस बार अपने दिल की बात जरूर कह दूंगी। अब मैं अपने काम पर ही लग गयी और उसके आने का इंतजार करने लगी।

एक महीने बाद सूरज अपने घर आ गया और उसने मुझे मेरी छत पर देखा, तो उसने देखते ही मुझे आवाज़ लगा दी। जैसे ही मैंने उसे देखा तो मैं भी बहुत ज्यादा खुश हो गई। उसके बाद मैं तुरंत ही छत से नीचे आई और उसके घर में चली गई। जैसे ही मैं उसके घर में गई तो उसने मुझे झट से अपने गले लगा लिया और कहने लगा मुझे तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुई। वह मुझसे पूछ रहा था क्या तुम्हारी शादी अभी तक नहीं हुई। मैंने उसे कहा अभी तो नहीं पर आगे देखते हैं क्या पता हो जाए। अब ऐसे ही मैं उससे काफी देर तक बातें करने लगी। मैंने उससे भी पूछा कि तुम भी इतने सालों से घर नहीं आए। वह कहने लगा, काम ही ऐसा है और घर आने का समय भी नहीं मिल पाता है। हम लोगों ने काफी देर तक बातें की और अब मैं उसके घर से अपने घर पर आ गई। शाम के समय में सूरज हमारे घर पर मेरे पापा मम्मी से मिलने के लिए आ गया। मेरे पापा उसे देखकर बहुत खुश हुए। क्योंकि सूरज और मेरे पापा की बहुत ज्यादा बनती थी। अब वह उससे पूछने लगे कि तुम वहां क्या काम करते हो और कितने सालों से घर नहीं आए। तुम्हें क्या घर की याद नहीं आती थी। सूरज कहने लगा याद तो आती है लेकिन काम भी जरूरी है। यदि काम नहीं करेंगे तो आगे का भविष्य भी अच्छा नहीं होगा। इस वजह से मुझे विदेश में जाना पड़ा। ऐसा कहते हुए वह बहुत खुश भी हो रहा था और मेरे पिताजी के साथ बाते करने लगा। फिर उसने मुझसे भी थोड़ी देर तक बात की और हम दोनों अपने कॉलेज की पुरानी बातें याद करने लगे। उसने मुझसे रूही के बारे में पूछा। रुही उसकी कॉलेज में गर्लफ्रेंड थी। मैंने उसे बताया कि क्या तुम्हारी उससे बात नहीं होती है। वह कहने लगा मेरी तो न जाने  उससे कब से बात नहीं हुई। मैंने सूरज को बताया कि उसकी तो शादी हो चुकी है। वह यह सुनकर थोड़ा शॉक्ड हो गया लेकिन हम दोनों ऐसे ही काफी देर तक बात करते रहे। थोड़ी देर बाद वह भी अपने घर चला गया। जाते जाते उसने मुझे यह पूछा की क्या तुम्हारे पास समय है। नहीं तो कहीं घूमने चलते हैं। मैंने उसे कहा कि मेरी रविवार के दिन छुट्टी होती है। तो हम उस दिन कहीं घूमने का प्लान बना लेते हैं। अब यह कहते हुए वह अपने घर चला गया। उसके ऐसा कहने से मुझे बहुत अच्छा लगा। रविवार के दिन हम दोनों साथ में ही घूमने चले गए। उसने अपने लिए बहुत से कपड़े लिए और कुछ कपड़े उसने मुझे भी दिलवाये। हम दोनों ने उस दिन बहुत सारी शॉपिंग की और मूवी भी देखी। उसके बाद हम लोग घर वापस आ गए। सूरज मुझसे पूछने लगा, कहीं तुम मेरे साथ बोर तो नहीं हो गई। मैंने उसे कहा नहीं मुझे तो बहुत ही अच्छा लगा।

मैं रात भर सूरज के बारे में सोच रही थी मैं अपने छत में चली गई और रात काफी हो चुकी थी। मैंने छत में जाकर देखा तो कोई भी नहीं था। मैंने अब अपनी सलवार को नीचे करते हुए अपनी चूत मे उंगली डालना शुरू कर दिया। मैं सूरज के ख्यालों में थी और अपनी चूत में उंगली को अंदर बाहर करती जाती तभी ना जाने कहां से सूरज मेरे आगे से आ गया। मैंने उसे देखकर अपनी सलवार को जल्दी से ऊपर किया। मैंने उससे पूछा तुम कहां से आ गए वह कहने लगा कि मैंने तुम्हें देख लिया था और मैं तुम्हारी छत में कूदकर आ गया। उसने अपने लंड को बाहर निकाला जो कि खड़ा हो रखा था और मैंने तुरंत ही उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया। मैंने उसके लंड को बहुत ही अच्छे से सकिंग करना शुरू कर दिया और ऐसे ही काफी देर तक उसके लंड को सकिंग करती जाती। मुझे इतना अच्छा लग रहा था कि मेरा मन उसके लंड को छोडने का नही हो रहा था और मैंने उसे गले तक लेते हुए अच्छे से चूसा। उसने मुझे छत में लेटाते हुए मेरे दोनों पैरों को खोल दिया और मेरी सलवार को उतारते हुए मेरी चूत को चाटने लगा। उसने इतने अच्छे से मेरी चूत को चाटा कि मेरी चूत गिली हो गई। अब वह मेरे स्तनों को भी दबा रहा था और मेरे होठों को भी उसने बहुत देर तक अपने होठों में लिया। उसने अपने खड़े लंड को मेरी योनि में जैसे ही घुसाया तो मुझे ऐसा लगा मेरी इच्छा जैसे पूरी हो गई हो। वह बड़ी तेजी से मुझे झटके मारता जाता और मैं बहुत तेज चिल्ला रही थी लेकिन वह मुझे छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था। उसने मुझे कस कर पकड़ लिया वह मेरे स्तनों को भी अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। कुछ देर तक तो वह इतनी तेजी से मुझे धक्के मारने लगा कि मेरी कमर भी छील चुकी थी।

उसका वीर्य मेरी चूत के अंदर ही गिर गया और मुझे बहुत ही गर्म महसूस हुआ। उसने मुझे खड़ा करते हुए मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी योनि से अभी उसका माल टपक रहा था लेकिन उसने एक ही झटके में मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। वह ऐसे ही धक्के मारने लगा और बड़ी तेजी से मुझे धक्का मार रहा था। जिससे कि मेरी चूतडे उसके लंड से टकरा जाती है और धराशाई हो जाती। अब वह इतनी तेज तेज मुझे चोद रहा था कि मेरी चूतड़ों से बहुत तेज आवाज निकल रही थी। मुझे भी अब मज़ा आने लगा और मेरी चूत से पानी गिरने लगा। अब मैं भी अपने चूतड़ों को उसके लंड से सटाने लगी और उसके लंड पर धक्का देती। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। मैंने भी उसके साथ बहुत देर तक धक्के मारे और वह मुझे बहुत देर से चोद रहा था लेकिन उसका भी झड़ नहीं रहा था मुझे भी मज़ा आ रहा था। हम दोनों  ने ऐसे ही काफी देर तक संभोग किया। उसके बाद मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी जान निकल गई हो और मैं समझ गई कि मेरा झड चुका है। सूरज का अभी भी नहीं झडा था और वह ऐसे ही मुझे चोदे जा रहा था लेकिन उसका वीर्य गिर गया और मुझे बहुत अच्छा लगा जब उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर ही गिर गया। हम दोनों अब ऐसे ही छत में बैठे रहे और मैंने उससे अपने दिल की बात बता दी। उसने मुझे कहा कि ठीक है अगली बार देख लेंगे क्या करना है। इसी दौरान में प्रेग्नेंट हो गई लेकिन सूरज अभी तक विदेश से वापस नहीं आया है।

 


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