सलवार फाड़ के लंड डाला

Salwar faad ke lund dala:

antarvasna, kamukta मेरा नाम विशाल है मैं बहुत ही शरारती किस्म का लड़का हूं मेरी शरारतो की वजह से हमारा पूरा मोहल्ला परेशान रहता है, मेरी उम्र 27 वर्ष हो चुकी है लेकिन अब भी मैं पहले की तरह ही बिगड़ा हुआ हूं, मैं कभी किसी के घर का शीशा तोड़ देता और कभी किसी कॉलोनी के लड़कों के साथ झगड़ा कर लेता लेकिन मुझे उस वक्त अपनी छवि को सुधारना पड़ा जब मेरे जीवन में निकिता आई निकिता हमारी कॉलोनी में नई नई आई थी और वह बड़ी ही शरीफ लड़की है। जब मैंने उस पर चांस मारने की कोशिश की तो उसने मुझे कहा तुम्हारे जैसे कई लड़के मैंने देखे हैं जो कि मुझ पर चांस मार देते है लेकिन उन आवारा लड़कों को मैंने अपनी चप्पल से जवाब दिया है, उसकी यह देख कर दो मेरा दिल उस पर और भी फिदा हो गया, मैं उसे अपना बनाने की सोचने लगा लेकिन यह संभव होना मुश्किल था क्योंकि वह बिल्कुल टस से मस होने को तैयार नहीं थी, मैंने भी सोचा कि अब उससे प्यार से ही मैं अपनी तरफ कर सकता हूं, मैंने उसके पीछे जी जान लगा दी और उसे अपना बनाने की कोशिश की लेकिन ऐसा हो ही नहीं पाया।

एक दिन मुझे मेरे दोस्त ने राय दी और कहा अरे भैया तुम कुछ काम ही नहीं करते हो तो कोई लड़की तुमसे क्यों बात करेगी तुम जब कुछ कमाओगे या कुछ करोगे तो ही वह तुमसे बात करेगी, यह बात सुनकर उस दिन मेरे दिल में यह बात जाग उठी की मुझे कुछ करना है और फिर मैंने नौकरी के लिए इंटरव्यू देने शुरू कर दिए लेकिन कहीं पर भी मेरा सिलेक्शन नहीं हो पा रहा था, मैं अपने दोस्तों से मिला और कहा कि यार मैं तो थक चुका हूं लेकिन अभी तक मुझे कोई नौकरी नहीं मिल पा रही है लेकिन उसी वक्त मुझे मेरे दोस्त ने कहा कि तुम कल मेरे ऑफिस में चलना वहां पर शायद तुम्हारी जॉब लग जाए क्योंकि मैं अपने बॉस से तुम्हारी सिफारिश कर दूंगा। मैं अगले दिन अपने दोस्त के साथ चला गया और वहां पर मेरा सिलेक्शन हो भी हो गया लेकिन मुझे तनख्वा बहुत कम मिल रही थी मैंने सोचा इतने कम में मैं कैसे अपना गुजारा कर लूंगा परंतु मुझे निकिता को किसी भी प्रकार से अपना बनाना था और उसकी नजरों में मैं एक अच्छा इंसान भी बनाना चाहता था इसीलिए मैंने वहां नौकरी करने की सोची।

जब मुझे नौकरी करते हुए थोड़ा समय हो गया तो मैं एक दिन निकिता से मिला और निकिता से मैंने बात की, उसने जब मुझे देखा तो मैंने उस दिन शर्ट और पैंट पहनी हुई थी, उसे यह तो प्रतीत हो गया था कि मैं किसी जगह नौकरी करने लगा हूं, उसने मुझसे बड़े ही शांत स्वभाव में बात किया और कहने लगी लगता है तुम्हारी अब कहीं नौकरी लग चुकी है इसीलिए तुम अब कॉलोनी में दिखते नहीं हो, नहीं तो पहले तुम यहां पर आवारागर्दी करते रहते थे, मैंने उसे कहा समय के साथ बदलना पड़ता है यदि समय के साथ बदलाव नहीं आता तो मैं कैसे अपने आप को समझ पाता लेकिन यह बदलाव सिर्फ तुम्हारी वजह से आया है और मैं तुम्हारा शुक्रिया करना चाहता हूं। वह कहने लगी इसमें मेरा क्या योगदान है? मैंने उसे कहा यदि तुम मेरे अंदर यह नौकरी का जोश पैदा नहीं करती तो शायद मैं नौकरी भी नहीं करता लेकिन तुमने मेरे अंदर एक जोश पैदा कर दिया और उसके बाद मैं नौकरी करने की अपने मन में ठान बैठा था, अब मैं जॉब करने लगा हूं और जितना भी मुझे नौकरी से मिलता है वह मेरे लिए पर्याप्त है। उस दिन निकिता भी मुझसे बहुत खुश हुई और कहने लगी तुम्हारी इस बात से मुझे बहुत अच्छा लगा और वह यह कहते हुए चली गई, उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी मैं उस मुस्कान को देखकर समझ गया कि यह अब मुझसे प्यार करने लगी है और कुछ दिनों बाद वह मुझसे खुद ही बात करने लगी, जब उसकी मुझसे बात हुई तो एक दिन वह मुझे कहने लगी की मैं भी सोच रही हूं कि कहीं जॉब कर लूं, मैंने उसे कहा तो तुम मेरे ऑफिस में ही जॉब क्यों नहीं कर लेती? वहां पर कुछ दिन पहले मेरे बॉस कह रहे थे कि हमें ऑफिस में एक लड़की की आवश्यकता है, तुम मेरे साथ चलो मैं अपने बॉस से तुम्हारी बात कर लूंगा। मैं उसे अपने साथ लेकर गया और उसका भी हमारे ऑफिस में सिलेक्शन हो गया, अब तो जैसे निकिता मेरी ही हो चुकी थी और हम दोनों हमेशा साथ में जाते, मैं उसे सुबह के वक्त ऑफिस लेकर जाता और शाम को भी वह मेरे साथ ही आती थी, हम दोनों को ऑफिस जाते हुए करीबन 15 दिन हो चुके थे इन 15 दिनों में मैं काफी हद तक निकिता के नजदीक आ चुका था,निकिता को भी मेरे साथ रहना बहुत अच्छा लगता और उसे भी मेरे साथ समय बिताना अच्छा लगने लगा।

मैंने एक दिन निकिता से कहा कि तुम्हें मेरे साथ अच्छा तो लगता है? वह कहने लगी क्यों नहीं मुझे तुम्हारे साथ बहुत अच्छा लगता है और मैं अब तुम पर पूरा भरोसा भी करती हूं परंतु पहले शायद मैं तुम पर भरोसा नहीं करती थी और तुम्हारे बारे में मेरे दिमाग में गलत धारणा थी परंतु वह पूरी तरीके से बदल चुकी है, मैं अब तुम्हारी बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करती हूं तुम्हारे लिए मेरे दिल में बहुत जगह है। जब निकिता ने मुझसे यह बात कही तो मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने उसे गले लगा लिया। उस दिन तो मैं सिर्फ उसे गले ही लगा पाया लेकिन उसके अगले दिन वह बड़ी ही माल बनकर ऑफिस आई हुई थी वह मेरे सामने बैठी थी उसने सफेद कलर की सलवार पहनी हुई थी उसके अंदर उसने काले कलर की पैंटी पहनी थी जो कि उसके सलवार से साफ साफ दिख रही थी। मैंने उसकी जांघ पर हाथ लगाया और उसकी सलवार को फाड़ दिया। वह मुझे कहने लगी तुमने यह क्या कर दिया, मैंने उसे कहा मुझे तुम्हें देखकर बहुत उत्तेजना पैदा होने लगी।

वह मुझे कहने लगी अब मैं क्या करूं, मैंने उसे कहा तुम बाथरूम में चलो मैं आ रहा हूं। वह बाथरूम में गई मैंने उसकी पूरी सलवार फाडते हुए उसकी योनि के अंदर लंड डाल दिया। उसको चोदकर मुझे बड़ा मजा आ रहा था उसकी योनि से खून बह रहा था मै बहुत ही अच्छे से मजा ले रहा था मैंने काफी देर तक उसकी चूत का मजा लिया। जो मेरी इच्छा भर गई तो उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही तरल पदार्थ बाहर की तरफ को आने लगा। मैं उसकी चूत का ज्यादा समय तक मजा नहीं ले पाया, मेरे लंड से वीर्य बाहर की तरफ निकल आया। मैने अपने वीर्य को उसकी योनि के अंदर ही गिरा दिया, जब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो वह बहुत ही गुस्से में हो गई और कहने लगी तुमने यह क्या कर दिया अब मैं क्या करूं। मैंने उसे कहा तुम अपनी इस सलवार से अपनी चूत को साफ कर लो मैं तुम्हारे लिए बाहर से कोई दूसरा सलवार लेकर आता हूं। उसने मुझे कहा तुम्हारे अंदर का जानवर पहले जैसा ही है तुम बिलकुल भी सुधरे नहीं हो, उसकी योनि से वीर्य टपक रहा था, मैं उसे देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगा। मैंने दोबारा से उसे घोडी बनाते हुए उसकी चूत में लंड डाल दिया, मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा जैसे ही मेरा वीर्य दोबारा उसकी योनि में गिरा तो उसने मुझे कहा लगता है तुम सुधरने वाले नहीं हो तुम जल्दी से जाओ और सलवार लेकर आओ मैं ऑफिस का काम कैसे करूंगी। मैंने उसे कहा तुम तब तक अपनी चूत को अच्छे से साफ कर लो मैं अभी आता हूं, मैं दौड़ता हुआ वहां से बाहर गया लेकिन मुझे दुकान कहीं मिल ही नहीं रही थी मुझे एक दुकान मिली, मैंने वहां से सलवार ले ली और उसे लेकर में जल्दी से बाथरूम की तरफ दौड़ा मैंने वह सलवार निकिता को दे दी। वह मुझे कहने लगी तुम्हारा दिमाग तो सही है तुम ऐसी हरकत करके बिल्कुल भी अच्छा नहीं कर रहे हो। मैंने उसे कहा क्या तुम्हें आज अच्छा नहीं लगा उसने मुझे कुछ भी नहीं कहा। उसकी ख़ामोशी से मैंने अंदाजा लगा लिया उसे बहुत ही मजा आया लेकिन वह जानबूझकर ऐसा कह रही है उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। मेरा जब भी मन करता मै निकिता क चोदता, वह मुझसे हमेशा अपनी चूत मरवाती लेकिन उसके बावजूद भी वह हर बार मुझसे ऐसा व्यवहार करती जैसे कि वह मुझ पर कोई एहसान कर रही हो। मुझे तो अपना काम निकालना होता, मुझे अपने पानी को निकालने से मतलब है इसीलिए मैं हमेशा उसे चोदता रहता हूं और वह भी मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार रहती है।


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