सही समय पर हथौड़ा मारा

Sahi samay par hathauda mara:

antarvasna, hindi sex kahani ललिता से मेरी मुलाकात अस्पताल में हुई, ललिता अस्पताल में एक नर्स है और मैं अक्सर अपने पिताजी को अस्पताल में डॉक्टर के पास दिखाने के लिए लेकर जाता था क्योंकि उन्हें मुझे महीने में एक या दो बार अस्पताल में लेकर जाना पड़ता था, मैं जिन डॉक्टर के पास अपने पिताजी का इलाज करवा रहा था उन्ही डॉक्टर के यहां पर ललिता भी काम करती थी ललिता उन्ही के डिपार्टमेंट में वहां नौकरी करती थी। मुझे एक दिन एक दवाई नहीं मिल रही थी तो मैंने ललिता से इस बारे में पूछा और कहा कि मुझे यह दवाई नहीं मिल रही है, वह मुझे कहने लगी आप मुझे अपना नंबर दे दीजिए मैं यह दवाई आपके लिए मंगवा दूंगी, मैंने उसे अपना नंबर दे दिया और उसने मेरे लिए वह दवाई मंगवा ली जब उसने मेरे लिए वह दवाई मंगवाई तो उसने मुझे तुरंत ही फोन कर दिया और कहा कि कुंदन जी आप मुझसे दवाई ले लीजिएगा। मैं लेता से मिलने के लिए उस वक्त अस्पताल चला गया, मैंने उससे वह दवाई ले ली मैंने ललिता का धन्यवाद दिया और कहा कि मैडम आप ने मेरी बहुत मदद की है, वह कहने लगी इसमें मदद की कैसी बात है आपने मुझे कहा था तो मैंने आपको दवाई दिलवा दी, मुझे उस वक्त ललिता के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन मैं अक्सर अपने पिताजी को अस्पताल लेकर जाता था तो वह मुझे मिल ही जाती थी वह मुझे जब भी मिलती तो हमेशा मेरे पिताजी का हाल-चाल पूछ लिया करती और कहती अब तुम्हारे पिता की तबीयत कैसी है?

मैं उससे कहता अब तो पहले से ठीक है। मुझे जब भी कोई दवाई नहीं मिलती या मुझे कोई परेशानी होती तो मैं ललिता को फोन कर लिया करता था, हम दोनों के बीच में अच्छी बातचीत होने लगी थी और हम दोनों अब दोस्त भी बन गए थे हालांकि उसकी उम्र मुझसे बड़ी है लेकिन मुझे उसके बारे में नहीं पता था कि उसके पति और उसके बीच में झगड़े होते रहते हैं जिससे कि वह दोनों अलग हो चुके हैं। एक दिन मैंने उससे पूछ लिया था कि तुम्हारे घर में कौन-कौन रहते हैं? वह कहने लगी मैं तो अब अकेली रहती हूं और मेरे घर में कोई भी नहीं रहता।

मैंने उसे कहा लेकिन तुम्हारी शादी तो हो चुकी है, वह कहने लगी हां मेरी शादी तो हो चुकी है परंतु मैं अपने पति के साथ नही रहती मैं उनसे अलग रहती हूं, मैंने उस वक्त उससे ज्यादा इस बारे में पूछना उचित नहीं समझा और मैं वहां से चला गया लेकिन जब मैं अगली बार उससे मिला तो मैंने उससे इस बारे में पूछा, उसने मुझे सब कुछ बता दिया और कहने लगी कि मेरे पति का किसी लड़की के साथ पहले से ही अफेयर चल रहा था लेकिन उन्होंने मुझे इस बारे में नहीं बताया था और उनके माता-पिता ने मुझसे उनकी शादी करवा दी जब मेरी शादी हो गई तो उसके कुछ समय बाद मुझे इस बारे में पता चला लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी मुझे लगा कि चलो यह सब तो इनका बीता हुआ कल है समय के साथ सब कुछ बदल जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ वह उल्टा मुझे ही दोष देने लगे और कहने लगे कि तुम्हारी वजह से ही मेरा जीवन बर्बाद हो गया है यदि तुम मुझे शादी के लिए हां नहीं कहती तो शायद मेरे माता-पिता शादी का फैसला बदल चुके होते, मुझे कई बार लगता था कि शायद यह मेरी वजह से ही हुआ है लेकिन मैं कहीं भी गलत नहीं थी परंतु मेरे पति की मेरे प्रति कोई भी जिम्मेदारी नहीं थी, मैं तो सिर्फ जैसे घर पर एक पुतला बनकर रह गई थी मैंने शादी के बाद अपनी नौकरी भी छोड़ दी थी लेकिन जब यह बातें कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी तो मुझे दोबारा से नौकरी करनी पड़ी मैंने नौकरी करने का तो फैसला कर लिया था, मेरे और मेरे पति के बीच में बहुत दूरियां बढ़ चुकी थी इसीलिए मैंने अलग रहना ही बेहतर समझा और पिछले दो वर्षों से मैं अलग ही रह रही हूं। ललिता का चेहरा देखकर मुझे बहुत बुरा लगा उसका चेहरा बिल्कुल बदल चुका था मैंने उसे सांत्वना देते हुए कहा कि आपको देखकर मुझे कभी भी ऐसा नहीं लगा कि आप इतने कष्टों से जूझ रही हैं लेकिन आप बड़ी हिम्मत वाली महिला है, ललिता मुझे कहने लगी क्या तुम्हारी शादी हो चुकी है? मैंने उससे कहा नहीं मेरी शादी नहीं हुई है। वह कहने लगी लेकिन तुम्हारी तो उम्र शादी की हो चुकी है अब तक तुमने शादी क्यों नहीं की, मैंने उसे कहा मैं अभी शादी नहीं करना चाहता क्योंकि मैं अभी पूरी तरीके से सेटल नहीं हुआ हूं इसलिए मैं थोड़ा रुक कर शादी करूँगा, मैं पहले अपने जीवन में कुछ कर लूं उसके बाद ही मैं शादी करूंगा, मेरे घर में मेरे भैया की शादी हो चुकी है।

इतनी बाते हम दोनों को जानने के लिए काफी थी, ललिता हमेशा मेरी मदद किया करती थी मुझे जब भी कुछ भी जरूरत होती तो वह हमेशा ही मेरी मदद कर दिया करती थी। ललिता देखने में तो सुंदर थी मैंने सोचा ललिता पर चांस मार लिया जाए। मैंने भी ललिता पार ऐसे ही चांस मार लिया, मैं उसे मैसेज करने लगा उसकी और मेरी बात मैसेज मे तो बहुत होने लगी थी। उसके बाद हम दोनों के बीच फन पर बातें होने लगी फोन पर भी हम दोनों अशलील बातें किया करते हम दोनों की बात अब इतनी अधिक होने लगी मुझे सिर्फ मौके की देर थी लेकिन मुझे मौका नहीं मिल पा रहा था परंतु वह घड़ी भी नजदीक आ गई जब मुझे ललिता के बदन की खुशबू को महसूस करने का मौका मिली गया। एक दिन रात को मुझे ललिता फोन कर रही थी लेकिन मैं उसका फोन नहीं उठा पाया मैंने जब उसे कॉल किया तो वह मुझसे कहने लगी कल मेरी मुलाकात मेरे पति से हुई थी उन्हें देखकर मुझे सेक्स करने की इच्छा जाग उठी लेकिन उनके साथ में सेक्स नहीं कर सकती थी इसलिए मुझे अपनी इच्छा को दबाना पड़ा। मैंने भी बिल्कुल सही समय पर ललिता से बात की और कहा मुझे कल आपसे मिलना है कल मुझे कुछ काम है। वह कहने लगी लेकिन मै तो घर से जल्दी निकल जाती हूं।

मैंने उससे कहा जब आप शाम को घर लौट आओगी तो उस वक्त मैं आपके घर आ जाऊंगा। शाम को मै ललिता के घर पर चला गया हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। उसने मुझे सारी बात बताई मैंने जब उसकी जांघ पर हाथ रखा तो जैसे मैंने उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया था उसने मुझे अपना सब कुछ मान लिया था। वह मेरे गले लग कर रोने लगी मैंने उसे वही बिस्तर पर लेटा दिया और उसने उस दिन सफेद रंग की चादर बिछाई हुई थी। हम दोनों के बीच ही ज्यादा गर्मी बढने लगी, चादर का तो पता ही नहीं था कि वह चादर कहां चली गई। मैं उसके स्तनों को दबा रहा था और कभी उसके होठों को चूसता जाता मेरे अंदर इतनी गर्मी बढ़ गई मैंने उसके होठों पर अपने दांत के निशान भी मार दिए। हम दोनों पूरे उत्तेजित हो चुके थे, मैंने भी जल्दी से अपने लंड को बाहर निकाल लिया। ललिता के अंदर इतनी ज्यादा गर्मी बढ चुकी थी कि उसने मेरा लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, जब उसने मेरे लंड को चूस लिया तो वह मुझे कहने लगी मैंने काफी समय बाद किसी के लंड को अपने मुंह में लिया है मुझे तुम्हारा लंड अपने मुंह में लेकर बहुत अच्छा लगा। जब मैंने उसकी गोरी और चिकनी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो उसके मुंह से चिल्लाने की आवाज निकाल पडी मेरा लंड धीरे-धीरे उसकी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखते हुए बड़ी तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए। मैं उसकी चूत इतनी तेज गति से मार रहा था उसकी चूत से पानी बड़ी तेजी से निकल रहा था। वह मुझे कहने लगी मैं ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी। उसने मुझसे यह बात कही तो मैं उसे उतनी ही तेज गति से चोद रहा था लेकिन मैं ज्यादा देर तक उसकी गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया मैंने अपने माल को उसके स्तनों पर गिरा दिया। जब हम दोनों के बीच अंतरंग संबंध बन चुके थे तो उसके बाद वह मेरी ही हो चुकी थी वह मेरे लिए पूरे तरीके से तड़पने लगी थी क्योंकि उसके जीवन मे मेरे सिवा और कोई भी नहीं था इसलिए वह मुझे ही अपना सब कुछ मानने लगी थी।


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