सफेद चूतड़ों को लाल कर दिया

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Safed chutadon ko laal kar diya मेरे और हर्षिता के बीच बहुत अच्छी दोस्ती है हर्षिता को मैं पिछले दो वर्षों से जानता हूं एक दिना हर्षिता मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आई क्योंकि वह हमारे पड़ोस में ही रहती है। वह जब उस दिन हमारे घर पर आई तो मेरी मम्मी ने हर्षिता से पूछा बेटा घर में सब कुछ ठीक तो है ना, हर्षिता ने बताया हां आंटी जी घर में सब कुछ ठीक है। हर्षिता का हमारे घर पर अक्सर आना-जाना था इस वजह से मेरी मम्मी भी हर्षिता को अच्छे से पहचानती थी और हर्षिता और मेरे बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी। वह मुझे कहने लगी कि राजेश क्या तुम मेरे साथ आज अस्पताल चल सकते हो मैंने हर्षिता को पूछा कि अस्पताल में क्यों जाना है तो उसने मुझे बताया कि हॉस्पिटल में उसके नाना एडमिट हैं। मैंने उससे कहा कि ठीक है मैं तुम्हारे साथ हॉस्पिटल चलता हूं लेकिन मुझे तैयार होने में 10 मिनट लग जाएंगे। मैं जल्दी से बाथरूम में गया और मैं नहा कर बाहर आया मैं जब नहा कर बाहर आया तो उस वक्त हर्षिता मेरा इंतजार कर रही थी मैंने नाश्ता भी नहीं किया था और मैं बिना नाश्ता किए ही हर्षिता के साथ चला गया। हालांकि मम्मी ने मुझे कहा था कि बेटा तुम नाश्ता कर के चले जाना लेकिन फिर भी मैं हर्षिता के साथ बिना नाश्ता किये ही चला गया।

जब मैं उस दिन उसके साथ हॉस्पिटल पहुंचा तो उसके नाना जी की तबीयत काफी ज्यादा खराब थी हम लोग वहां पर काफी देर तक रुके फिर मैं वापस अपने घर लौट आया था हर्षिता भी मेरे साथ ही वापस घर लौट आई थी। हर्षिता ने उस दिन मुझे शाम के वक्त फोन किया और कहा कि राजेश तुम्हारा बहुत ही धन्यवाद जो तुमने मुझे इतनी मदद की मैंने उससे कहा कि इसमें धन्यवाद देने की कोई बात नहीं है मुझे पता है कि तुम मुझे अपना मानती हो। मैं और हर्षिता एक दूसरे के साथ हमेशा ही होते हैं। अगले दिन जब मैं अपने ऑफिस में गया तो मेरे बॉस ने उस दिन मेरे काम को लेकर मुझे काफी कुछ कह दिया था जिससे कि मुझे बहुत बुरा लगा और मैं घर लौट आया था। मैं जब घर लौट रहा था तो उस दिन मेरा मूड बिल्कुल भी अच्छा नहीं था हर्षिता उस दिन मेरे पास आई और कहने लगी कि राजेश क्यों ना हम लोग कहीं घूम आते हैं।

मैंने उसे मना किया और कहा कि आज मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है कुछ दिनों से हमारे ऑफिस में हमारा टारगेट काफी ज्यादा बढ़ा हुआ था लेकिन उसे मैं पूरा नहीं कर पाया जिस वजह से मेरे बॉस ने मुझे काफी कुछ कह दिया था। मुझे वह बात बहुत ही ज्यादा बुरी लगी इसलिए मैं घर पर ही रहना चाहता था लेकिन हर्षिता के कहने पर मैं उसके साथ चला गया और जब मैं हर्षिता के साथ गया तो मुझे काफी अच्छा लगा। हम दोनों ने उस दिन साथ में मूवी देखी और अच्छा समय साथ में बिताया मुझे हर्षिता के साथ बहुत ही अच्छा लगा और फिर हम दोनों साथ में घर लौट आए। जब शाम के वक्त मैं घर लौटा तो मेरा मूड काफी अच्छा था और अगले दिन से मैं अपने काम पर पूरी तरीके से ध्यान देने लगा था मेरा टारगेट भी पूरा हो चुका था और उसके बाद मुझे अपने ऑफिस के टूर के सिलसिले में हैदराबाद जाना था और मैं हैदराबाद चला गया। कुछ दिनों तक हैदराबाद में रुकने के बाद मैं वापस लौट आया जब मैं वापस लौटा तो मैं और हर्षिता मेरे घर पर ही थे उस दिन हम दोनों साथ में काफी अच्छा समय साथ में बिता रहे थे। हर्षिता ने मुझे बताया कि वह जॉब करने के लिए बेंगलुरु जाने वाली है मैंने हर्षिता को इस बात के लिए बधाई दी और कहा चलो यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि तुम्हारा बेंगलुरु में जॉब का सिलेक्शन हो चुका है। वह कहने लगी कि राजेश उसके लिए मुझे काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ी और जिस कंपनी में मेरा सिलेक्शन हुआ है वहां पर मुझे काफी अच्छी सैलरी भी मिल रही है जिससे कि मैं बहुत ज्यादा खुश भी हूं। मैं और हर्षिता साथ में काफी देर तक बैठे रहे हर्षिता बेंगलुरु जाने वाली थी जिस दिन वह बेंगलुरु जाने वाली थी उस दिन मैं ही उसे एयरपोर्ट तक छोड़ने के लिए गया था। हर्षिता ने मुझे कहा कि राजेश तुम मुझे फोन तो करते रहोगे ना मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं मैं तुम्हें फोन करता रहूंगा और तुम अपना ध्यान रखना।

हर्षिता भी अब बेंगलुरु जा चुकी थी और वह बेंगलुरु में ही जॉब करने लगी थी दो महीने बाद जब वह घर आई तो उससे मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा हम लोग उस वक्त साथ मे ज्यादा समय तो नहीं बिता पाए लेकिन मुझे काफी अच्छा लगा और उसके बाद वह बेंगलुरु वापस चली गई। हम लोगों की फोन पर बातें होती रहती हैं और मुझे हर्षिता के साथ बात करना अच्छा लगता था हर्षिता और मैं अब काफी कम मिला करते थे लेकिन फोन पर हम लोगों की अक्सर बातें हो जाया करती थी। एक दिन हर्षिता का मुझे फोन आया और वह काफी ज्यादा परेशान लग रही थी मैंने उससे उसकी परेशानी का कारण पूछा तो उसने मुझे कुछ भी नहीं बताया लेकिन मैंने उससे कहा कि यदि तुम काफी परेशान हो तो कुछ दिनों के लिए तुम छुट्टी लेकर घर क्यों नहीं आ जाती। हर्षिता ने कहा कि हां तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मैं कुछ दिनों के लिए घर आना चाहती हूं। हर्षिता थोड़े दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी लेकर घर आ चुकी थी।

हर्षिता जब घर आई तो वह मुझसे मिलने के लिए आई हुई थी। मैंने हर्षिता से पूछा तुम इतनी परेशान क्यों हो? हर्षिता ने उस दिन अपनी परेशानी की वजह बताई और कहा बेंगलुरु मे जॉब करने के दौरान उसकी मुलाकात रजत के साथ हुई और रजत से उसकी नजदीकियां बढ़ने लगी। मैं यह सुनकर बिल्कुल भी खुश नहीं था मेरे चेहरे का रंग उतर गया मैंने हर्षिता से पूरी बात पूछी तो उसने मुझे बताया कि रजत ने उसे धोखा दिया वह पहले से ही शादीशुदा था। मैंने हर्षिता के कंधे पर हाथ रखा और उसे मैंने अपनी बाहों में लेने की कोशिश की तो वह मेरी बाहों में आ गई। हम दोनों एक दूसरे की बाहों मे थे मेरी छाती और हर्षिता के स्तनो से टकरा रही थी। वह मुझे कहने लगी रजत ने मेरे साथ बहुत ही गलत किया वह काफी उदास थी मैंने उसकी आंखों से आंसू पोछे और कहा हर्षिता तुम्हें रोने की जरूरत नहीं है मैं तुम्हारे साथ हमेशा खड़ा हूं। हर्षिता ने मुझे दोबारा से गले लगा लिया और जब उसने मुझे गले लगाया तो उसके निप्पल मेरी छाती से टकराने लगे थे मैंने भी उसके स्तनों को दबा दिया। मैं जब उसके बूब्स को दबाने लगा मैंने उसके स्तनों को पूरी तरीके से मसल कर रख दिया था और उसके होंठ मेरे होंठों से टकराने लगे थे। हम दोनों एक दूसरे के बहुत ही ज्यादा करीब आ चुके थे अब मेरा लंड इतना ज्यादा तन कर खड़ा हो चुका था कि वह उसकी चूत में जाने के लिए बेताब था। मैंने अपने मोटे लंड को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया उसकी चूत के अंदर मेरा मोटा लंड गया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसकी टाइट चूत रजत भी मार चुका होगा। उसने मुझे रजत के बारे में बताया उसके और रजत के बीच काफी बार शारीरिक संबंध बने थे लेकिन मै उसकी चूत का आनंद लेना चाहता था। मैंने हर्षिता की चूत के मजे बहुत देर तक लिए अब मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो चुका था मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से मैं हर्षिता की चूत के मजे ले रहा था वह बहुत जोर से सिसकियां लेती और मेरे अंदर की गर्मी को बढा कर रख देती। उसने जिस प्रकार से मेरी गर्मी को बढा कर रख दिया था उससे तो मैं बिल्कुल भी झेल नहीं पा रहा था।

मैंने हर्षिता को कहा मुझे लग रहा है कि शायद मैं अब अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पाऊंगा। वह मुझे कहने लगी राजेश मुझे तुम्हारे साथ अपनी चूत मरवाकर बहुत अच्छा लग रहा है हर्षिता को तो जैसे लंड लेने की आदत हो चुकी थी इसलिए उसे बहुत मजा आ रहा था। उसकी चूत की दीवार से मेरा लंड टकरा रहा था तो उससे एक अलग प्रकार की आवाज पैदा होती वह अपने पैरों को खोलने लगी थी। मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रखकर उसे बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू किए जिससे कि उसकी चूत चिकनी हो गई। उसकी चूत से निकलता हुआ पानी बढने लगा था मुझे महसूस हुआ कि मेरा वीर्य मेरे अंडकोषो से बाहर की तरफ आ चुका है। मैं जब उसे धक्के दे रहा था तो ना जाने कब मेरा वीर्य उसकी चूत के अंदर ही गिर गया और मेरा वीर्य जब उसकी चूत में गिरा तो मुझे बहुत ही मजा आया वह भी बड़ी खुश हो गई थी। उसके बाद तो मैंने अपने लंड पर तेल की मालिश करते हुए उसे घोड़ी बना दिया वह अब मेज के सहारे खड़ी थी और मेरा लंड उसकी चूत मे धीरे-धीरे प्रवेश हो चुका था। मेरा लंड उसकी चूत मे जाते ही वह बहुत जोर से चिल्ला कर कहने लगी तुमने मेरी चूत फाड़ दी है।

मुझे अब उसे चोदने में बहुत मजा आ रहा था मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बहार बड़ी आसानी से हो रहा था मुझे लग रहा था कि मैं बस उसे धक्के देता रहूं। मैंने उसे बड़े ही अच्छे से धक्के दिए मैं उसकी चूत का मजा काफी देर तक लेता रहा उसकी बड़ी चूतडो से मेरा लंड टकरा रहा था तो उसकी सफेद चूतडे अब लाल होने लगी थी लेकिन मेरा लंड में पूरी तरीके से छिलकर बेहाल हो चुका था जिस वजह से मैंने उससे कहा कि मैं अब ज्यादा देर तक अपने आपको नहीं रोक पाऊंगा। वह कहने लगी तुम बस मुझे धक्के देते रहो वह भी अपनी चूतडो को मुझसे मिलाए जा रही थी। मैं भी उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मैंने उसे इतनी तेज गति से धक्के मारे कि मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था उसके बाद मेरा वीर्य भी उसकी चूत के अंदर चला गया। मेरा वीर्य उसकी चूत मे जाते ही मैं बहुत खुश हुआ और हर्षिता के भी सारे  दुख को मैंने दूर कर दिया था। हर्षिता बहुत ही ज्यादा खुश थी वह रजत के बारे में भूल चुकी थी।


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