सच जब सामने आया

Antarvasa, hindi sex stories:

Sach jab samne aaya अंजली अब बड़ी होती जा रही थी उसकी उम्र 15 वर्ष हो चुकी थी मैं चाहती थी कि उसकी हर वह जरूरतें पूरी हो जिससे मैं हमेशा ही दूर रह गई। मैंने हमेशा से ही अंजलि को कहा कि बेटा तुम अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दो लेकिन अंजलि के बड़े होते ही उसके सवाल भी अब बड़े होने लगे थे। पहले वह हमसे कभी भी कुछ पूछा नहीं करती थी लेकिन समय के साथ-साथ वह मुझसे पूछने लगी थी उसके सवालों के जवाब शायद मेरे पास है ही नहीं क्योंकि उसके सवाल अब मेरे दिल को लगने लगे थे। वह जब मुझसे पूछती की पापा कहां है तो मैं उसे हमेशा ही यह बता दिया करती की पापा की मृत्यु हो गई है लेकिन मैं उसे कभी सच ना बता सकी। मेरे अंदर उससे कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी मुझे उससे सब कुछ छुपाना पड़ा शायद मैं उससे ज्यादा दिनों तक यह सब नहीं छुपा सकती थी। मैं छोटे से शहर की रहने वाली सामान्य सी लड़की थी लेकिन जब मेरी शादी प्रशांत के साथ हुई तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे सपने पूरे होते जा रहे हैं।

हम लोग पुणे के पास रहा करते थे वहां पर प्रशांत खूब मेहनत करते वह हमेशा से ही मेहनती थे। मुझे प्रशांत के साथ जीवन में वह मिला जो मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे ही मेरी किस्मत मे बदनसीब लिखी हुई थी और मै इससे ज्यादा दिनों तक बच ना सकी। मेरे जन्म के दौरान ही मेरे पिताजी की मृत्यु हो गई थी और प्रशांत के साथ मैं बहुत ही खुश थी लेकिन जल्द ही वह संकट आने वाला था जिससे कि मैं बिल्कुल भी अवगत ना थी। प्रशांत जिस दुकान में काम किया करता था उस दुकान में बहुत बड़ी चोरी हुई और उस चोरी का इल्जाम प्रशांत के सिर पर मार दिया गया हालांकि प्रशांत बेगुनाह थे और उनकी बेगुनाही को साबित करने के लिए मैं इधर से उधर भटकती रही। हमारे सारे रिश्तेदारों ने हमें पीठ दिखा दी थी और प्रशांत के माता पिता की तो उनकी तबीयत ही ठीक नहीं रहती थी वह पूरी तरीके से लाचार हो चुके थे। मेरे पास भी अब कोई रास्ता ना था मैं जब प्रशांत से मिली तो प्रशांत कहने लगे की तुम अंजलि को लेकर यहां से दूर चली जाओ मैं नहीं चाहता कि तुम यहां रहो।

मैंने प्रशांत से कहा लेकिन मैं यहां से दूर कहां जाऊंगी वह मुझे कहने लगे देखो तुम्हें जाना तो पड़ेगा ही यदि तुम यहां रहोगी तो अंजली के बड़े होने पर उस पर क्या असर पड़ेगा और तुम्हें तो मालूम ही है कि मेरा यहां से छूट पाना बिल्कुल ही मुश्किल है मुझ पर बेबुनियाद इल्जाम लगा दिए गए हैं और मुझे नहीं लगता कि अब मैं यहां से बच पाऊंगा। मुझे यह बिल्कुल भी ठीक नहीं लगा लेकिन मेरे पास भी कोई रास्ता ना था आस पड़ोस के लोग मुझे ताने देने लगे थे अकेली महिला होने के बावजूद भी मैं अपने ऊपर धैर्य रखने की कोशिश करती लेकिन अब मुझसे यह सब सहा नहीं जा रहा था मैं वहां से सब छोड़-छाड़ कर लखनऊ चली आई। जब मैं लखनऊ में आई तो लखनऊ मेरे लिए बिल्कुल ही नया था मेरे पास थोड़े बहुत ही पैसे थे मैंने उन पैसों से यहां पर अपनी नई जिंदगी बसाने का फैसला कर लिया था। मैं चाहती थी कि अंजली को कभी भी उसके पिताजी के बारे में कुछ पता ना चले हालांकि मैं उनसे मिलने के लिए जाया करती थी लेकिन मुझे अपने दिल पर पत्थर रखकर अंजलि से झूठ कहना पड़ा। मैं अंजलि को कभी नहीं बताना चाहती थी कि उसके पिताजी किसी की गलती की सजा भुगत रहे हैं लेकिन मेरे लिए तो सबसे बड़ी दुखद बात यह थी कि मुझे अपना बनाया हुआ घर छोड़कर लखनऊ आना पड़ा। लखनऊ आकर मैंने एक छोटे से कमरे में रहने का बंदोबस्त कर लिया था मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी तो नहीं थी लेकिन मैं काम कर के अपना और अंजली का पेट पाल लिया करती थी। महंगाई भी बढ़ती जा रही थी और मेरे पास भी ज्यादा पैसे नहीं होते थे इसलिए मैं चाहती थी कि मैं कोई काम शुरू करुं और उसी के चलते मैंने अपने ही पड़ोस में रहने वाली सुधा भाभी से मदद ली। उन्होंने भी मेरी मदद की और हम लोगों ने एक कॉलेज में कैंटीन का टेंडर डाला और वह टेंडर हमारा निकल चुका था अब मैं चाहती थी कि मैं अपने तरीके से यहां पूरी व्यवस्था करूं। मैंने वहां पर बड़े ही अच्छे से व्यवस्था की और सब कुछ अच्छे से चलने लगा मेरे पास अब जो कैंटीन का टेंडर था वह हर साल बढ़ा दिया जाता है।

जितने भी कॉलेज के प्रोफेसर हैं वह सब मुझे अब अच्छे से जानते हैं और अंजली की परवरिश भी मैं अच्छे से कर पा रही हूं। अंजली को भी मैंने एक अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया ताकि उसे कोई परेशानी ना हो मैं चाहती हूं कि अंजलि पढ़ लिख कर एक बडी अफसर बने मेरा यही सपना था। अब अंजलि के बड़े होते ही मैं थोड़ा डरने लगी थी मुझे डर इस बात का था कि अंजली अब हमेशा अपने पिताजी के बारे में मुझसे पूछती है। मुझे कुछ दिनों के लिए परेशान से मिलने के लिए जाना था तो मैंने सुधा भाभी से कहा भाभी मैं कुछ दिनों के लिए गांव जा रही हूं आप अंजलि का ध्यान रखेंगे। वह कहने लगी हां सुधा तुम चली जाओ मैं अंजली का ध्यान रख लूंगी और फिर मैं प्रशांत से मिलने के लिए चली गई। प्रशांत को मैंने जब दो वर्ष बाद देखा तो प्रशांत के चेहरे पर हल्की सी झुर्रियां पड़ने लगी थी और प्रशांत के बाल भी हल्के सफेद होने लगे थे। प्रशांत की उम्र अभी सिर्फ 45 वर्ष की थी लेकिन प्रशांत की सजा अब तक खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी उन्होंने ना जाना प्रशांत पर कौन सा आरोप लगा दिया था। जब मैं प्रशांत से मिली तो प्रशांत कहने लगे अंजलि कैसी है मैंने प्रशांत को अंजलि की तस्वीर दिखाई तो वह भावुक हो गए और कहने लगे मुझे तुम लोगों की बहुत याद आती है और अंजलि भी अब बड़ी हो चुकी है। मैंने प्रशांत से कहा अंजलि भी अब बड़ी हो चुकी है प्रशांत कहने लगे लगता है जल्दी मेरी सजा भी खत्म हो जाएगी मेरे आचरण के चलते यह लोग मेरी सजा खत्म करने वाले हैं।

मैंने प्रशांत से कहा लेकिन हम लोग अंजलि को क्या बताएंगे प्रशांत कहने लगे वह हम देख लेंगे फिलहाल तो मेरी सजा यहां से खत्म हो जाये, मैं यहां से बाहर निकल जाऊं उसके बाद ही हम लोग सोचेंगे क्या करना है। मैं प्रशांत से कहने लगी ठीक है मैं अभी चलती हूं और मैं घर वापस चली आयी लेकिन मेरे दिल में हमेशा प्रशांत की यादें है। जब मैं लखनऊ आई तो सुधा भाभी पूछने लगी तुम तो बड़ी जल्दी आ गई मैंने सुधा भाभी से कहा बस भाभी थोड़ा सा ही काम था इसलिए ज्यादा दिन वहां पर रुक ना सकी और अंजली भी तो है। सुधा भाभी कहने लगी अंजली का तो मैं ध्यान रख लेती मैंने सुधा भाभी से कहा कोई बात नहीं मैं अब आ चुकी हूं मैं अब अंजलि का ध्यान रख लूंगी आपका बहुत शुक्रिया जो आपने इतने दिनों तक अंजलि को देखा। भाभी कहने लगी तुम यह बात कह कर मुझे छोटा ना बनाओ मैंने भाभी से कहा ठीक है भाभी मैं अब आपसे यह बात नहीं कहूंगी। मैं अंजली को  घर पर ले आई लेकिन मुझे प्रशांत की बहुत याद सताती थी और मुझे लगता था कि इतने वर्षों मैंने कैसे प्रशांत के बिना आपनी जिंदगी काटी है और अभी भी मेरे पास प्रशांत नहीं था और आखिर कब तक मैं अपने आपको रोक पाती एक न एक दिन तो मेरे सब्र का बांध टूट ना ही था और हुआ भी यही मेरे अंदर से इंच्छाए जागने लगी थी। जब मेरे कंधे पर शांतनु जी ने अपना हाथ रखा तो मैं भी अपने आपको रोक ना सकी और शांतनु जी की बाहों में जाने के लिए मुझे विवश होना पड़ा आखिरकार मैं शांतनु की बाहों में चली गई।

उन्होने मुझे अपनी बाहों में लिया तो मैं उनसे कहने लगी आज तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है उन्होंने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया था और जिस प्रकार से उन्होंने मेरे कपड़ों को उतारा उससे मैं सोचने लगी कितने वर्षों बाद किसी व्यक्ति ने मेरे बदन को छुआ है। मैंने इतने वर्षों से किसी को भी अपने बदन को छूने का मौका नहीं दिया लेकिन जब शांतनु जी ने मेरे बदन को अपना बनाना चाहा तो मुझे भी अच्छा लगने लगा। मैंने शांतनु के लंड को अपने मुंह में ले लिया और जिस प्रकार से उनके लंड का रसपान कर रही थी उससे वह बहुत खुश हुए और उन्होंने मेरा होंठो को चूसना शुरू किया। काफी देर तक वह मेरे होठों को चूसते रहे फिर जब मैंने उनसे इच्छा जाहिर की कि आप मेरी योनि का रसपान कीजिए। उन्होने मेरी योनि का रसपान करना शुरू किया और जब उन्होंने मेरे पैरों को चौड़ा कर के मेरे दोनों पैरों के बीच से मेरी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मैं बहुत ज्यादा मचलने लगी थी लेकिन जैसे ही उनका लंड मेरी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा।

उन्होंने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था और वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहे थे काफी देर तक शांतनु ने मुझे अपने नीचे लेटा कर धक्के दिए। जब उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठाकर मेरी चूत के अंदर अपने मोटे लंड को प्रवेश करवाया तो मैं चिल्लाने लगी थी और मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उन्होंने मेरे साथ काफी देर तक संभोग किया। जब उन्होंने अपनी वीर्य की बूंदों को मेरी योनि के अंदर गिराया तो मैं भी बिल्कुल अपने आपको रोक न सकी और मैंने उन्हें गले लगा लिया। मैंने अपनी योनि को साफ किया वह मुझे कहने लगे मैं अभी चलता हूं। मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन वह चले गए परंतु उन्होंने मेरी इच्छा पूरी कर दी थी इतने बरसों से मेरी किसी के लंड को नहीं लिया था पर उन्होंने एक ही झटके में मेरी इच्छा पूरी कर दी। कुछ समय बाद प्रंशात भी जेल से रिहा हो गए और मुझे इतने समय बाद वह मुझे मिले तो वह भी मेरे लिए तड़प रहे थे। अब मेरे दोनों ही हाथो में लड्डू थे एक तरफ प्रशांत थे और दूसरी तरफ शांतनु थे। मैं दोनों के साथ ही अपने जीवन को बिता रही थी मुझे बहुत ज्यादा खुशी थी। अंजली को भी मैंने सब कुछ बता दिया था।


Comments are closed.