सब्र ना कर सकी

Sabr na kar saki:

antarvasna, kamukta मेरे दोस्त का नाम अनिल है एक दिन उसने मुझे कहा कि यार तुम मेरे साथ घूमने के लिए चलो, मैंने अनिल से कहा अनिल मेरी अभी तनख्वाह आई नहीं है मुझे पिछले दो महीने से तनख्वाह नहीं मिली है जिस वजह से मेरे पास ना तो पैसे हैं और ना मैं तुम्हारे साथ आ सकता हूं, वह मुझे कहने लगा तुम्हें मेरे साथ तो चलना ही पड़ेगा मैं इस वक्त अपने साथ किसे लेकर जाऊं क्योंकि सब लोग बिजी हैं और किसी के पास भी समय नहीं है, मैंने अनिल से कहा तुम अकेले ही घूम आओ, वह कहने लगा यार अकेले घूमने में क्या मजा आता है मैंने उसे कहा लेकिन मेरे पास पैसे नहीं है तो भला मैं तुम्हारे साथ कैसे आ सकता हूं। अनिल मुझ पर बहुत भरोसा करता है और वह मुझे कहने लगा अमन तूम मेरे साथ चलो तुम यदि मेरे साथ चलोगे तो मुझे अच्छा लगेगा तुम कहीं से पैसों का बंदोबस्त कर लो, मैंने उसे कहा मेरे पास पैसों का बंदोबस्त नहीं हो पाएगा तो वह कहने लगा कि चलो मैं ही तुम्हारा खर्चा उठाता हूं लेकिन तुम मेरे साथ चल तो सकते हो, मैंने भी सोचा चलो फ्री में ही घूमने का मौका मिल रहा है तो क्यों ना हम लोग घूम आते हैं।

मैंने अनिल से पूछा लेकिन तुमने कहां घूमने का प्लान बनाया है तो वह कहने लगा मैंने तो मनाली जाने की सोची है और यदि तुम्हे कहीं और चलना है तो तुम बताओ, मैंने अनिल से कहा यदि पैसे तुम ही खर्च कर रहे हो तो तुम्हें जहां ठीक लगे। मैं और अनिल उस रात एक साथ बैठे हुए थे मैंने अनिल से पूछा लेकिन तुम्हें अचानक से घूमने की क्या सूझी तो अनिल कहने लगा यार मैं सोच तो काफी समय से सोच रहा था लेकिन तुम्हें तो पता है कि समय का भाव कितना है और अपनी नौकरी में ही इतने व्यस्त रहते हैं कि अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं निकाल पाते इसीलिए इस वक्त मेरी छुट्टी थी तो सोचा चलो कुछ दिन घुम आते हैं। अनिल सरकारी नौकरी करता है और वह जिस विभाग में हैं उसी विभाग में मेरे पिताजी भी काम करते हैं मैंने सरकारी नौकरी के लिए काफी ट्राई किया लेकिन शायद मेरे नसीब में सरकारी नौकरी थी ही नहीं इसलिए मैंने एक प्राइवेट नौकरी करने की सोची परंतु मैं जिस जगह नौकरी करता हूं वहां पर भी तरह तरह की दिक्कत है पिछले दो महीने से मेरी तनख्वाह नहीं आई है जिस वजह से मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं, मैंने भी सोचा कि चलो इस बहाने कम से कम मेरा भी मूड फ्रेश हो जाएगा क्योंकि इतने समय से मैं नौकरी कर रहा हूं लेकिन पैसों को लेकर आए दिन मुझे बहुत परेशानी होती है, हम दोनों मनाली घूमने के लिए निकल पड़े अनिल और मैं कार से ही गए थे क्योंकि चंडीगढ़ से मनाली की दूरी ज्यादा नहीं है इसलिए हम दोनों ने कार से ही जाना उचित समझा।

जब हम दोनों घर से निकले तो उस वक्त हम दोनों ने अपना सारा सामान गाड़ी में रख लिया था ताकि रास्ते में कोई दिक्कत ना हो जब हम लोग चंडीगढ़ से निकले तो रास्ते में मुझे बड़ी जोरदार भूख लगी मैंने अनिल से कहा अनिल तुम कहीं गाड़ी रोक लो मुझे बहुत तेज भूख लग रही है अनिल कहने लगा चलो थोड़ी देर बाद कार रोकते हैं वहां पर हम लोग खाना खा लेंगे। अनिल और मैंने एक ढाबे पर अपनी गाड़ी लगा दी और वहां पर हम दोनों खाने के लिए चले गए जब हम उस ढाबे पर बैठे हुए थे तो वहां के मालिक सरदार थे मैंने लड़के से कहा कि तुम लस्सी लगा दो उन्होंने दो बड़े-बड़े गिलास लस्सी के लिए लगाये, गर्मी काफी हो रही थी इसलिए मैंने एक गिलास तो उसी वक्त पी लिया और उसके बाद दोबारा दूसरा क्लास भी लस्सी का मंगा लिया, अनिल मुझे लगा कि तुमने इतना बड़ा लस्सी का गिलास कैसे पी लिया, मैंने उसे कहा मुझे बहुत प्यास भी लगी थी और लस्सी भी बड़ी अच्छी थी,  तुम्हे पीने में मजा नहीं आ रहा होगा लस्सी तो वाकई में अच्छी है। हम दोनों ने वहां पर दोपहर का खाना खाया और कुछ देर हम लोगों ने वहां आराम किया मुझे नींद भी आ रही थी इसलिए मैंने कहा कि थोड़ी देर हम लोग कार में ही सो जाते हैं हम दोनों कार में ही थोड़ी देर लेट गए और जब हम लोग मनाली पहुंचे तो मनाली पहुंचकर हम लोगों ने होटल देखे लेकिन मुझे कुछ चीज समझ नहीं आ रहा था तभी एक व्यक्ति मिले उनसे हमने पूछा यहां पर कौन सा होटल ठीक रहेगा, वह कहने लगे कि मैं भी कोलकाता से आया हुआ था मैं आपको होटल का एड्रेस दे देता हूं आप लोग वहां चले जाइए वहां पर सब कुछ बहुत ही अच्छा है और सारी व्यवस्थाएं बहुत ही अच्छे से हैं।

हम लोगों ने भी सोचा कि चलो यह सही कह रहे होंगे हम लोग उस होटल में चले गए वह होटल दिखने में तो ठीक था जब हम लोगों ने वहां पर रूम के बारे में पूछा तो किराया भी हमें ठीक लगा और हम लोगो ने वहां पर रूम बुक करवा दिया, मैंने अनिल से कहा कि हम लोग यहां कितने दिन रुकने वाले हैं तो अनिल कहने लगा कि हम लोग अभी तो पहुंच रहे हैं देखते हैं कितने दिन यहां पर रुकेंगे। अनिल और मैं रूम में चले गये और फ्रेश होने लगे जिस वक्त अनिल रूम में फ्रेश हो रहा था उस वक्त कमरे की बेल बजी और मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो दरवाजे पर एक सुंदर सी लड़की खड़ी थी उसे देखकर मैं तो एकदम से चौक गया मुझे ऐसा लगा जैसे कि मैं कोई सपना देख रहा हूं मैंने उसकी तरफ देखा तो वह भी एकदम से घबरा गई वह मुझे कहने लगी सॉरी मैं गलत रूम में आ गई हूं, मैंने उसे कहा कोई बात नहीं और फिर वह वहां से चली गई, वह हमारे बगल वाले रूम में ही रुकी हुई थी और शायद उसके साथ उसकी फैमिली भी थी लेकिन मैं उसे देखकर पूरी तरीके से पागल हो गया जैसे ही अनिल बाथरूम से बाहर आया तो मैंने अनिल को सारी बात बताई अनिल कहने लगा तुम भी यार अभी तो हम लोग यहां घूमने आए हैं और तुम लड़की के चक्कर में पड़ गए, मैंने अनिल से कहा अरे वह वाकई में बहुत ज्यादा सुंदर थी तुम उसे देखोगे तो तुम्हें लगेगा की तुम सपना देख रहे हो।

उसके बाद मैं भी फ्रेश होने चला गया और हम दोनों शाम को टहलने के लिए निकल पड़े मनाली में उस वक्त काफी ज्यादा भीड़ थी और मौसम भी बहुत सुहाना था वहां की टिमटिमाती लाइट ऐसी लग रही थी जैसे कि सितारे जल रहे हो, उस दिन हम लोग पैदल ही घूमते रहे और अगले दिन जब हम लोगो ने पैराग्लाइडिंग की तो मुझे भी मजा आ गया और अनिल कहने लगा यार आज तो मजा ही आ गया। अनिल को घूमने का बहुत शौक है और अनिल के शौक की वजह से मेरा शौक भी पूरा हो रहा था नहीं तो शायद मैं भी घूमने के लिए घर से बाहर ना आ पाता क्योंकि एक तो मुझे समय पर पैसे नहीं मिलते थे और ना ही मेरे पास पैसे होते थे। मुझे होटल में जब दोबारा से वह लड़की दिखी तो मैं उसे देख कर पागल हो गया मैंने अनिल को बताया कि यह वही लड़की है, अनिल ने मुझे कहा तुम उससे बात क्यों नहीं कर लेते, मैंने भी हिम्मत करते हुए उससे बात कर ली उस वक्त तो उसके साथ कोई भी नहीं था मैंने उसका नाम पूछ लिया उसका नाम गौतमी है। मैं गौतमी के साथ काफी देर तक बात करता रहा तब मुझे पता चला कि वह अपने परिवार के साथ घूमने आई हुई है और मैंने उस दिन गौतमी का नंबर ले लिया, गौतमी मुझे कहने लगी कि तुम लोग कितने दिनों तक यहां रुकोगे, मैंने उसे कहा कि अभी तो हम लोगों ने ऐसा कुछ नहीं सोचा है लेकिन यहां पर काफी अच्छा लग रहा है, वह कहने लगी मुझे तो यहां बहुत मजा आ रहा है मैंने गौतमी से पूछा तुम कहां की रहने वाली हो तो वह कहने लगी कि मैं मुंबई से आई हूं।

हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे से बात करते रहे और उस रात मैंने जब गौतमी से फोन पर बात की तो मुझे उससे बात कर के अच्छा लगने लगा हम दोनों के बीच फोन सेक्स हो गया और अगले ही दिन जब गौतमी अपने आप पर काबू ना कर सकी तो उसने मुझे अपने रूम में बुला लिया। वह कहने लगी जल्दी से तुम मेरे साथ आज सेक्स करो कुछ ही देर में मम्मी पापा आ जाएंगे। मैंने भी जल्दी से उसके कपड़े उतार लिए और उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। वह मेरे लंड को भूखी शेरनी की तरह सकिंग कर रही थी उसने अपने गले तक मेरे लंड को ले लिया था और काफी देर तक उसने ऐसा ही किया। जब मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में चुसना शुरू किया तो उसे भी मजा आने लगा मैंने उसके स्तनों से खून भी निकाल दिया था उसके गोरे और मुलायम स्तनों का रसपान करके मुझे बड़ा मजा आया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर सटाया तो उसकी योनि से पानी बाहर की तरफ निकल रहा था। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और चौड़ा करते ही उसक योनि मे डाल दिया।

उसकी योनि में लंड जाते ही उसके मुंह से चीख निकल पड़ी और वह चिल्लाते हुए कहने लगी मजा आ गया तुम्हारे साथ सेक्स करने में मजा आ गया। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया और उसकी चूत मे तेजी से लंड डालने लगा। उसके मुंह से सिसकिया निकालती और उसे अंदर जाती है और गौतमी के अंदर भी उत्तेजना बढ़ जाती हम दोनों ने एक साथ काफी देर तक सेक्स का इंजॉय किया। गौतमी के साथ सेक्स करना मेरे लिए बड़ा ही मजेदार रहा जैसे ही मैंने अपने वीर्य को उसके मुंह के अंदर गिराया तो वह खुश हो गई और कहने लगी माल को अपने मुंह के अंदर लेकर मजा आ गया। मैने गौतमी को किस किया और कहा मैं तुम्हें बाहर मिलता हूं तुम तैयार होकर आ जाओ। उसने भी अपने कपड़े पहन लिया और कुछ ही देर बाद उसके मम्मी पापा भी आ चुके थे लेकिन गौतमी और मै घूमने के लिए निकल पड़े। मैंने अनिल से कार भी ले ली थी और उसको कहा कि तुम कुछ देर होटल में ही रुको मैं गौतमी को अपने साथ घुमा कर अभी वापस आता हूं, रास्ते में भी मैंने गौतमी के साथ सेक्स किया।


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