रमेश जी की गांड की खुजली मिटाई

Ramesh ji ki gaand ki khujli mitayi:

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मेरा नाम रजनीश है और मैं 32 वर्ष का एक युवक हूं। मैं कंपनी में नौकरी करता हूं और उस के सिलसिले में ही मेरा अक्सर नए नए शहरों में जाना होता है। मुझे मेरी कंपनी में काम करते हुए बहुत वर्ष हो चुके हैं। मेरी शादी को भी 3 वर्ष हो चुके हैं और मेरी पत्नी भी मेरे साथ ही रहती है। मैं इटावा का रहने वाला हूं और कोलकाता में नौकरी करता हूं। मैं अपने गांव बहुत ही कम जाता हूं। क्योंकि मुझे समय नहीं मिल पाता है। अधिकतर मैं अपने काम के सिलसिले में इधर उधर ही रहता हूं। इसलिए मैंने अपने माता-पिता को भी इटावा से कोलकाता बुला लिया है। ताकि मैं कभी बाहर जाऊं तो मेरी पत्नी को किसी भी प्रकार से कोई समस्या ना हो। इस बार भी मैं बस में आ रहा था तो मेरे बगल में एक व्यक्ति बैठे हुए थे। वह बहुत ही सभ्य मालूम हो रहे थे। जब वह किसी से बात कर रहे थे तो वह बड़ी ही तहजीब से बात कर रहे थे। अब उन्होंने मुझसे भी बात की। उन्होंने मुझसे मेरा नाम पूछा। मैंने उन्हें अपना नाम बताया। उसके बाद मैंने भी उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम रमेश बताया।

वह मुझसे पूछने लगे कि तुम क्या काम करते हो  मैंने उन्हें बताया कि मैं एक कंपनी में जॉब करता हूं और कई वर्षों से यहीं पर जॉब कर रहा हूं। मैंने जब उनसे उनके घर के बारे में पूछा तो वह कहने लगे कि मेरे घर पर कोई भी नहीं रहता। मैं घर में अकेला ही रहता हूं। मेरे बच्चे लोग मुंबई में रहते हैं और बहुत कम कोलकाता आते हैं। मैंने उन्हें पूछा कि आप क्या करते हैं। वह कहने लगे कि मेरा अपना ही एक कारोबार है। जिसे मैं बहुत वर्षों से कर रहा हूं। जब उन्होंने यह बात बताई तो मैंने भी उन्हें कहा कि मैं भी अपना कुछ काम शुरू करने की सोच रहा हूं। क्योंकि मुझे नौकरी करते हुए अब बहुत वर्ष बीत चुके हैं  इसलिए मैं चाहता हूं कि मैं अपना ही कुछ काम शुरू कर दू। उन्होंने मुझे कहा कि तुम कोलकाता में कहां पर रहते हो। मैंने उन्हें बताया तो वह कहने लगे वह मेरे घर के पास ही है। उन्होंने मुझे कहा कि तुम्हें जब भी मेरी आवश्यकता हो तो तुम मेरे पास आ जाना। मैं तुम्हारी मदद कर दूंगा। हम लोग जब कोलकाता पहुंचे तो उन्होंने मुझसे मेरा नंबर भी ले लिया। मैंने उन्हें अपना नंबर दे दिया था और मैं अपने ऑफिस चला गया और ऑफिस के काम में ही लगा हुआ था।

एक दिन उनका फोन आया। वह कहने लगे तुम्हारे घर पर सब लोग ठीक हैं। मैंने उन्हें बताया कि हां घर में सब लोग अच्छे हैं। अब उन्होंने मुझे कहा कि तुम कहां हो। क्या तुम मुझे मिलने आओगे। मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। मैंने उन्हें कहा कि अभी फिलहाल मुझे ऑफिस से समय नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से मैं आपके पास नहीं आ सकता लेकिन मैं समय निकालते हुए आपके पास जरुर आऊंगा। क्योंकि मुझे भी काम शुरु करना है। एक दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी थी तो मैंने रमेश जी को फोन कर दिया और उन्हें कहा कि मैं आपके घर पर तो नहीं आ सकता लेकिन हम लोग कहीं सेंट्रल प्लेस में मिल लेते हैं। उन्होंने मुझे कहा कि उनका एक छोटा सा रेस्टोरेंट है। तो तुम वहां पर आ जाना। उन्होंने मुझे मेरे फोन पर अपने रेस्ट्रोरेंट का एड्रेस मैसेज कर दिया। मैं जब उस रेस्टोरेंट में पहुंचा तो वह पहले से ही वहां पर बैठे हुए थे। उन्होंने मुझे देखते ही मुझसे हाथ मिला लिया और कहने लगे कि तुम कैसे हो। मैंने उन्हें बताया कि मैं बहुत अच्छा हूं।

फिलहाल अपने ऑफिस के काम में ही बिजी हूं। वह कहने लगे अब बताओ तुम्हें क्या पूछना था। मैंने उन्हें बताया कि मुझे अपना बिजनेस शुरू करना है। उसके लिए मैं आपसे मदद लेना चाहता हूं। उन्होंने मुझे बताया कि तुम मेरे कारखाने में आ जाओ और वहां पर देख लेना की मैं किस तरीके से काम करता हूं। मैंने उन्हें पूछा कि आपका किस चीज का कारोबार है। वह कहने लगे कि मेरा प्लास्टिक मेकिंग का कारोबार है। जितने भी प्लास्टिक के आइटम बनती है वह सब मेरे कारखाने में ही बनती है। मैं भी बहुत ज्यादा उत्सुक हो गया और मैंने कहा कि मैं भी इसी तरीके का कोई काम सोच रहा था। वह मुझे कहने लगे कि तुम कभी कारखाने में आ जाना तो वहीं पर मैं तुम्हें दिखा दूंगा कि किस तरीके से मशीनें काम करती हैं और मशीनें कहां पर मिलती हैं। मैं तुम्हें सब बता दूंगा। यह कहते हुए मैंने उनसे कहा कि अब मैं अपने घर के लिए निकलता हूं। क्योंकि मुझे कहीं जाना है। यह कहते हुए मैं वहां से चला गया। कुछ दिनों बाद मैंने रमेश जी को दोबारा से फोन किया। मैंने उनसे कहा कि मैं आप का कारखाना देखना चाहता हूं। वह मुझे अपने कारखाने में ले गए। जब मैं उनके कारखाने में गया तो वहां पर बहुत सारे व्यक्ति काम कर रहे थे और उनका कारखाना बहुत ज्यादा बडा था। वह मुझे सब कुछ अच्छे से जानकारी दे रहे थे और बता रहे थे की कौन सी मशीन कितने की मिलती है और इस समय कहा से लानी पड़ेगी। मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब उन्होंने मुझे इन सब के बारे मे जानकारी दी।

वह कहने लगे कि तुम मेरे साथ मेरे घर चलो मैंने कहा कि मैं आपके घर में क्या करूंगा। वह कहने लगे तुम मेरे साथ चलो और तुम मुझे मेरे घर पर भी छोड़ देना। मैं उनके साथ उनके घर पर चला गया जब मै उनके घर पर गया तो उनके साथ कोई भी नहीं रहता था इसलिए वह खुद ही सारा काम करते हैं। अब उन्होंने मेरे लिए चाय बनाई और मुझे चाय पिलाई। जब उन्होंने चाय पिलाई तो वह मेरे बगल में ही बैठ गए और मेरे पैरों पर अपने हाथ को सहलाने लगे। पहले मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था और मैंने उन्हें कुछ बोला भी नहीं लेकिन उन्होंने थोड़ी देर बाद मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरे हाथ से चाय का कप नीचे गिर गया। वह अब मेरे लंड को बाहर निकालकर उसे हाथ से हिलाने लगे मुझे यह बहुत ही अटपटा लग रहा था लेकिन वह बड़ी तेजी से मेरे लंड को हिलाने लगे। अब उन्होंने उसे मुंह के अंदर लेना शुरु कर दिया वह बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूसते जाते। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड कितना बड़ा है उन्होंने मुझे कहा कि मेरी गांड में अपने लंड को डाल दो। मैंने इससे पहले कभी भी आज तक किसी की गांड नहीं मारी थी।

मैंने उन्हें कहा कि मैं यह नहीं कर सकता वह कहने लगे कि मेरी गांड में खुजली हो रही है और तुम्हें इसे मिटाना ही पड़ेगा। उन्होंने मुझे सरसों का तेल लाकर दिया और मेरे लंड पर लगा दिया। जब उन्होंने मेरे लंड पर तेल लगाया तो मेरा लंड बहुत ज्यादा चिकना हो गया और उसमें से तेल टपकने लगा। उन्होंने अपनी गांड को मेरी तरफ करते हुए मेरे लंड से सटा दिया। जब उन्होंने मेरे लंड से अपनी गांड को मिलाया तो मैंने भी एक ही झटके में उनकी गांड के अंदर अपने डाल को डाल दिया। मैंने जब उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगे और मैं ऐसे ही उन्हें धक्के दे रहा था। मैं बड़ी तेज तेज धक्के दे रहा था जिससे उनका शरीर पूरा हिलने लगा और वह मुझे कहने लगे तुम तो मेरी गांड बहुत ही अच्छे से मार रहे हो। वह अपनी गांड को मेरी तरफ सरकाते जाते और मैं ऐसे ही उन्हें झटके दिए जा रहा था। मैंने उन्हें इतनी तीव्र गति से धक्के देना शुरु किया कि मेरा पूरी लंड बुरी तरीके से छिल गया और उनकी गांड भी अंदर से छिल चुकी थी लेकिन मुझे अब बहुत ज्यादा मज़ा आने लगा। और मैंने उनकी चूतड़ों को कसकर पकड़ते हुए उन्हें बड़ी तीव्र गति से धक्का देना शुरू किया जिससे कि उनकी गांड हिलने लगी। वह अपनी गांड को मेरी तरफ करने लगे जैसे ही वह मेरे लंड से गांड को मिलाते तो मैं उतनी ही तेजी से उन्हें धक्का मारता। उन्हें बहुत ही मजा आ रहा था वह कहने लगे कि मुझे आज बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। उन्होंने मेरे लंड पर अपनी गांड से तेज तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। उन्होंने इतनी तेज धक्के मारे कि मेरा माल उनकी गांड के अंदर ही जा गिरा और मैं बहुत शांत होकर ऐसे ही बैठ गया। वह कहने लगे कि तुमने आज मेरी गांड को बहुत ही अच्छे से मारा मुझे बहुत मजा आया। बहुत समय बाद किसी ने मेरी ऐसी गांड मारी है मैंने उनसे पूछा कि आप यह सब क्यों करवाते हैं। वह कहने लगे कि मेरी गांड में खुजली होती है मुझे वह खुजली को मिटाना पड़ता है इसलिए मुझे अपनी गांड मरवानी पड़ती है।

 


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