प्यार की गर्मी को बुझाया

Pyar ki garmi ko bujhaya:

Hindi sex stories, Kamukta मैं पुणे का रहने वाला हूं मैं जिस ऑफिस में काम करता हूं उस ऑफिस में मुझे काम करते हुए पांच वर्ष हो चुके हैं मैं मैनेजर की पोस्ट में वहां पर काम कर रहा हूं मेरी उम्र 33 वर्ष है लेकिन मैंने अभी तक शादी नहीं की है। मैं कॉलेज के समय अपने ही क्लास में पढ़ने वाली माधुरी से प्यार किया करता था हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे लेकिन मेरे परिवार की स्थिति उस वक्त कुछ ठीक नहीं थी जैसे तैसे मेरे पिताजी हम लोगों की पढ़ाई का खर्चा उठा रहे थे। माधुरी का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था और वह लोग बहुत अच्छे घराने से थे इसी वजह से शायद हम दोनों का रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल पाया क्योकि माधुरी को अपने हिसाब से जीने की आदत थी। मैं उस वक्त बहुत ज्यादा परेशान रहा करता था क्योंकि मेरे पिताजी घर में अकेले कमाने वाले थे तो मुझे उनकी हमेशा चिंता लगी रहती थी।

उन्होंने अपने जीवन के इतने वर्ष हम लोगों को दे दिए और उसके बदले उन्होंने हमसे किसी भी चीज की कभी मांग नहीं की थी। मैं चाहता था कि वह खुश रहे मैं यही सोचता था कि मैं पढ़ लिखकर कुछ बन जाऊं तो उन्हें एक अच्छी जिंदगी दे पाऊं। मैंने माधुरी से इस बारे में बात की थी और माधुरी को कहा मुझे तुम्हारा साथ चाहिए माधुरी ने पहले तो मुझे कहा कि हां मैं तुम्हारे साथ हूं लेकिन जैसे-जैसे हम दोनों का रिश्ता आगे बढ़ता गया तो माधुरी को भी एहसास हुआ कि वह मेरे साथ खुश नहीं रह पाएगी इसीलिए उसने मुझसे अपने रिश्ते खत्म कर लिये। कुछ ही समय बाद जब हम लोगों का कॉलेज पूरा हुआ तो माधुरी ने किसी और से ही शादी कर ली थी मैं माधुरी से बहुत प्यार करता था मुझे उसके जाने का बहुत दुख हुआ लेकिन मुझे अपने परिवार के लिए जीना था और अपने पिताजी के लिए मुझे कुछ करना है। मैंने काफी मेहनत की उसके बाद मैंने अपने ही बलबूते एमबीए किया और मेरी नौकरी एक अच्छी कंपनी में लग गई मैं अपने माता पिता को हर वह खुशियां देना चाहता हूं जो उन्होंने अपने जीवन में कभी सोचा भी नहीं होगा।

मैंने अपना पूरा जीवन अपने माता पिता को समर्पित कर दिया इसलिए शायद मुझे कभी इन सब चीजों के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिला मेरी मम्मी मुझे कई बार कहती है कि सुधीर बेटा तुम शादी कर लो तुम्हारी उम्र हो चुकी है और अब तो तुम अच्छी जॉब भी लग चुके हो। मैं अपनी मां से हमेशा कहता कि मैं आप लोगों के लिए यह सब कुछ करना चाहता हूं, मेरे पिताजी ने मेरी दोनों बहनों की शादी भी बहुत ही अच्छे से की उन्होंने कभी भी उन्हें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। काम के प्रति मैं इतना ज्यादा ईमानदार रहता हूं कि मैं कभी भी किसी काम में कोई गलती बर्दाश्त नहीं कर सकता था इसी के चलते एक दिन हमारे ऑफिस में एक नई लड़की आई उसका नाम रचना है। उसने कुछ समय पहले ही अपना एमबीए पूरा किया था उसके बाद उसकी हमारे कंपनी में जॉब लग गयी थी उसकी हमारी कंपनी में जॉब लगी तो उसे मेरे बारे में शायद ज्यादा कुछ मालूम नहीं था। एक दिन रचना से किसी काम में गलती हुई तो मैंने उसे बहुत डांटा शायद उसे इस बात का बहुत बुरा लगा उसके बाद वह जब भी मुझे देखती तो उसके दिल में मेरे प्रति डर बैठ चुका था और शायद उसने अपने दिमाग में मेरे लिए एक अलग ही कल्पना कर ली थी। जबकि मैं बिल्कुल उसके विपरीत था ऑफिस में जितने भी लोग थे सब लोग मुझसे बहुत कम ही बातें किया करते थे क्योंकि मैं काम के प्रति बहुत ही ईमानदार था और काम में किसी भी प्रकार की गलती मुझे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं थी। इसी के चलते रचना और हमारे ऑफिस के और भी लोग मुझसे बहुत कम बातें किया करते थे एक दिन हमारे ऑफिस की कैंटीन में सब लोग बैठे हुए थे मैं ऑफिस की कैंटीन में बहुत कम ही जाया करता था लेकिन उस दिन मैं अपने ऑफिस की कैंटीन में चला गया। मैं जैसे ही गया तो रचना और उसके साथ हमारे ऑफिस के कुछ लोग बैठे हुए थे रचना कहने लगी कि सुधीर सर तो बहुत ही ज्यादा सख्त मिजाज है वह सबको बहुत डांटते हैं उनके चेहरे पर तो मुस्कान भी नहीं रहती।

मैं यह सब बातें सुन रहा था लेकिन उन लोगों ने मुझे नहीं देखा था मैंने जैसे ही रचना के कंधे पर हाथ रखा तो वह डर गई और उसने अपनी नजरें झुका ली सब लोग वहां से उठकर चले गए। रचना भी वहां से जा रही थी तभी मैंने रचना को कहा रचना तुम यहां पर बैठना मुझे तुमसे कुछ काम था रचना मेरे सामने बैठ गई लेकिन उसने अपनी नजरों को नीचे झुकाया हुआ था वह मेरी तरफ देख ही नहीं रही थी। मैंने रचना से कहा तुम मेरे बारे में क्या सोचती हो उसने कोई जवाब नहीं दिया लेकिन मैंने उसे जब दोबारा यही सवाल पूछा तो वह मुझे कहने लगी सर आप बहुत अच्छे हैं और आप काम पूरी लगन के साथ करते हैं। मैंने रचना से कहा लेकिन तुम तो मेरे बारे में कुछ और ही सोचती हो रचना कहने लगी नहीं सर ऐसा कुछ भी नहीं है मैंने रचना से कहा देखो अभी मैं तुमसे खुल कर बात कर रहा हूं। शायद तुमने मेरे बारे में कुछ गलत सी धारणा अपने दिमाग में पाली हुई है लेकिन मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं हूं, हां मैं काम के लिए कुछ ज्यादा ही ईमानदार हूं यदि काम में कुछ भी गलती होती है तो मुझे वह बिल्कुल भी बर्दाश नहीं होती लेकिन उसका यह मतलब तो नहीं है कि मैं गलत इंसान हूं और तुम इतने सारे लोगों के बीच में जो मेरे बारे में कह रही थी क्या वह ठीक है। रचना मुझसे कहने लगी सर सॉरी मैंने उसे कहा कोई बात नहीं ऐसा होता है यदि हमारे साथ भी कोई ऐसा करता तो शायद हम भी उसके बारे में यही बोलते लेकिन आगे से तुम इस बात का ध्यान रखना कि कभी भी किसी इंसान को जब तक जान ना लो तब तक उसके बारे में कोई भी धारना अपने दिमाग में मत बना लेना।

वह मुझे कहने लगी सर मुझे माफ कर दीजिए मैंने उसे कहा कोई बात नहीं, रचना को इस बात का डर था कि कहीं मैं उसे जॉब से ना निकाल दूं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था। उसके बाद रचना बड़े ही अच्छे से काम करने लगी और वह ऑफिस में पूरी तरीके से ध्यान देने लगी मैं रचना के काम से बहुत खुश था और रचना शायद मुझे पसंद भी आने लगी थी। एक दिन मैंने रचना को अपने परिवार वालों से मिलाने की सोची लेकिन मैं नहीं जानता था कि रचना के दिल में मेरे लिए क्या है क्या रचना मुझसे भी प्यार करती है या फिर मैं उससे एक तरफा ही प्यार करता हूं। मैंने उसे अपने परिवार से मिलवाया जब वह मेरे घर पर आई तो वह मेरे मम्मी पापा से मिली वह बहुत खुश हुए उस दिन हम सब लोगों ने साथ में ही लंच किया। उसके बाद रचना को मैं उसके घर छोड़ने जा रहा था वह कहने लगी सर आप बहुत ही अच्छे हैं आपके मम्मी पापा से जब मैं मिली तो मुझे आपके बारे में मालूम हुआ कि आप दिल के बहुत अच्छे हैं और अपने माता-पिता के लिए आपने अपनी पूरी जिंदगी को समर्पित कर दिया है। मैंने रचना से कहा देखो रचना पहले शायद मैं ऐसा नहीं था लेकिन समय के साथ मुझे बदलना पड़ा और इसीलिए मैं अब काम के प्रति इतना ज्यादा सीरियस हो चुका हूं। मैंने रचना को उसके घर पर छोड़ा और वहां से मैं अपने घर लौट आया। मुझे नहीं मालूम था कि रचना भी दिल ही दिल मुझे चहाने लगी होगी जब भी वह ऑफिस में मुझे देखती तो उसके चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान होती मैं उसे देख कर खुश हो जाया करता। एक दिन मैंने रचना के साथ कैंडल लाइट डिनर करने की सोची उस दिन मैंने उसे अपने दिल की बात कह दी मैंने उसके हाथ को पकड़ते हुए कहा रचना आई लव यू।

रचना ने भी मुझे कहा सर मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं मैंने उसे कहा अब तुम मुझे सर ना ही कहो तो ठीक रहेगा। उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को खुश रखने की कोशिश किया करते इसी बीच एक दिन रचना मेरे घर पर आई तो मेरे माता-पिता मेरी बहन के घर गए हुए थे। उस दिन हम दोनों को एक साथ अकेले में समय बिताने का मौका मिला हम दोनों ने काफी देर तक बात की जब मैंने रचना के हाथों को अपने हाथों में लिया तो मुझे एहसास हुआ कि वह कुछ चाहती है। मैंने उसके बालों को सहलाना शुरु किया जब मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा तो वह उत्तेजित हो गई जैसे ही मैंने रचना के होठो को चूमना शुरू किया तो वह बिस्तर पर लेट गई। मैंने धीरे धीरे उसके कपड़े उतारने शुरू किए मैंने रचना के बदन से सारे कपड़े उतार दिए थे वह नग्न अवस्था में थी। रचना के स्तनो को मैं चूस रहा था तो मुझे उसके स्तनो को चूसने में बड़ा मजा आता काफी देर तक मैंने रचना के नरम होठों का चुंबन किया। जैसे ही उसकी योनि को मैंने चाटना शुरू किया तो उसकी योनि से गरम पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा मैंने अपने लंड को रचना की योनि पर सटा दिया और अंदर की तरफ धकेला।

जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो उसकी योनि से खून का बहाव निकलने लगा उसकी योनि से बहुत तेज खून निकल रहा था मैं उसे तेज गति से धकके दिए जाता। मुझे उसे धक्के मारने में बहुत मजा आ रहा था वह भी पूरे जोश में आ चुकी थी मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा किया तो वह मेरा पूरा साथ देने लगी। मैं जब उसके होठों को चूमता तो उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही गरम पदार्थ बाहर की तरफ को निकलने लगता मेरे धक्के इतने तेज होते उसक शरीर हिल जाता। जैसे ही मेरा वीर्य गिरा तो रचना ने मुझे गले लगा लिया और कहा आज तो मुझे आपने अपना बना लिया मैंने उसे कहा तुम्हें तो मैं कब का अपना बना चुका हूं। रचना से अभी मेरी शादी नहीं हो पाई है लेकिन हम दोनों अब एक दूसरे से प्यार करते हैं और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत अच्छा समय बिताते है।


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