प्रतिमा की चिकनी चूत

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Pratima ki chikni chut मेरे और मेरी पत्नी के बीच बिल्कुल भी संबंध अच्छे नहीं थे हम दोनों के डिवोर्स की नौबत तक आ चुकी थी। हम दोनों की शादी को 5 साल हो चुके हैं और अब तक हम दोनों के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा। किसी प्रकार मैंने अपनी शादी के 5 साल अपनी पत्नी के साथ बिताये लेकिन अब मैं उसके साथ नहीं रहना चाहता था और हम दोनों की रजामंदी से हम दोनों ने एक दूसरे को डिवोर्स दे दिया। वह मेरी जिंदगी से जा चुकी थी पापा और मम्मी ने उसके बाद मुझे कहा कि आदित्य बेटा तुम शादी कर लो लेकिन मैं शादी करना नहीं चाहता था क्योंकि मेरा शादीशुदा जीवन बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहा और मैं शादी करने के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं था।

मैं अपने काम पर पूरी तरीके से ध्यान दे रहा था मैंने कुछ समय पहले ही अपना स्टार्टप शुरू किया और उसके लिए मुझे कुछ लोगों की जरूरत थी। मैंने ऑफिस में कुछ  स्टाफ को हायर कर लिया था मेरा काम थोड़े ही समय में अच्छा चलने लगा और मैं काफी खुश था कि मेरा काम अब अच्छे से चलने लगा है। एक दिन हमारे ऑफिस में काम करने वाली लड़की प्रतिमा जो कि कुछ दिनों पहले ही आई थी उसके साथ मैं बैठा हुआ था प्रतिमा ने मुझे कहा कि सर आप बहुत ही मेहनत से काम करते हैं।

प्रतिमा मुझसे बात कर रही थी तो मुझे भी उससे बात करके अच्छा लग रहा था वह मेरे बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती थी लेकिन मुझे प्रतिमा से बात करके अच्छा लगा। धीरे धीरे मैं प्रतिमा के बहुत नजदीक होने लगा था और प्रतिमा के साथ मुझे काफी अच्छा लगता, उसे भी मेरे साथ काफी अच्छा लगने लगा था। हालांकि मैंने अपने दिमाग से शादी का ख्याल तो निकाल दिया था लेकिन प्रतिमा को देखकर मुझे लगने लगा कि मुझे दोबारा से शादी कर लेनी चाहिए। मैं प्रतिमा के साथ दोबारा शादी करने के लिए तैयार हो चुका था लेकिन प्रतिमा की फैमिली इस बात के लिए तैयार नहीं थी और उन्होंने प्रतिमा को ऑफिस आने से भी मना कर दिया।

मैं प्रतिमा को मिलने के लिए बहुत तड़प रहा था लेकिन प्रतिमा से मेरी किसी भी प्रकार की कोई बात हो नहीं पा रही थी। ना तो मेरी प्रतिमा से कोई बात हो रही थी और ना कि उससे मेरा कोई सम्पर्क हो पा रहा था परंतु एक दिन प्रतिमा का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि मुझे आपसे मिलना था। मैंने प्रतिमा को कहा कि ठीक है हम लोग मिलते हैं, मैंने उससे कहा तुम ऑफिस में ही आ जाओ तो प्रतिमा मुझसे मिलने के लिए ऑफिस में ही आ गई। मुझे उससे मिलकर बहुत ही अच्छा लगा मैंने प्रतिमा से उस दिन काफी देर तक बातें की वह मुझे कहने लगी कि आदित्य मैं आपके बिना अब रह नहीं सकती हूं।

प्रतिमा मुझसे शादी करना चाहती थी लेकिन मैं प्रतिमा के परिवार की रजामंदी के बिना उससे शादी नहीं करना चाहता था। मैंने प्रतिमा को समझाने की कोशिश की और उसे कहा कि जल्द ही मैं तुम्हारी फैमिली को इस बात के लिए मना लूंगा। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं प्रतिमा से शादी करने के लिए इतना तड़पने लूंगा। मैं प्रतिमा के साथ शादी करना चाहता था लेकिन प्रतिमा की फैमिली वाले इस बात के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। उन्हें मुझसे कोई भी परेशानी नहीं थी लेकिन उन लोगों को यह बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या प्रतिमा मेरे साथ खुश रह पाएगी क्योंकि जिस प्रकार मेरी पुरानी शादीशुदा जिंदगी अच्छे से नहीं चल पाई उससे उन लोगों को लग रहा था कि कहीं मेरा रिश्ता प्रतिमा के साथ भी अच्छा नहीं चल पायेगा तो क्या होगा इसलिए वह लोग घबराए हुए थे।

मैंने उन्हें बताने की कोशिश की और मेरी मां प्रतिमा से काफी खुश थी मेरे परिवार वाले उसकी फैमिली और हमारे रिश्ते को स्वीकार कर चुके थे मेरे परिवार को प्रतिमा से कोई भी परेशानी नहीं थी। मुझे प्रतिमा के साथ में शादी करनी थी और हम लोग शादी करने के लिए तैयार थे। जब मेरी और प्रतिमा की शादी हो गई तो हम दोनों बहुत ज्यादा खुश थे कि हम दोनों की शादी हो चुकी है। मैंने प्रतिमा के साथ में काफी अच्छा समय बिताना शुरू कर दिया था मैं प्रतिमा को ज्यादा से ज्यादा समय देने की कोशिश करता और वह भी हमेशा मेरा साथ देती। मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब भी हम दोनों साथ में होते। एक दिन मैं और प्रतिमा घर पर थे उस दिन प्रतिमा ने मुझे कहा कि आदित्य आप कुछ दिनों के लिए ऑफिस से ब्रेक ले लीजिए और हम लोग कहीं घूमने के लिए चलते हैं।

मैंने भी प्रतिमा की बात मान ली और प्रतिमा को कहा कि तुम मुझे सिर्फ एक हफ्ते का समय दो एक हफ्ते बाद हम लोग कहीं ना कहीं घूमने के लिए जाएंगे। प्रतिमा मेरी बात से बहुत खुश थी और एक हफ्ते के बाद हम लोग साथ में घूमने के लिए जाना चाहते थे। मैंने घूमने का फैसला किया और फिर हम दोनों गोवा चले गए, जब हम लोग गोआ गए तो प्रतिमा बहुत ज्यादा खुश थी और वह मुझे कहने लगी कि आदित्य आज आपके साथ में कितना अच्छा लग रहा है। हम दोनों ने गोवा में एक हफ्ता साथ बिताया था और पता ही नहीं चला कि कब वह समय बीत गया और हम लोग वापस लौट आए।

वापस लौटने के बाद मैं अपने काम पर ध्यान देने लगा था और प्रतिमा मम्मी पापा की देखभाल अच्छे से करती थी। मम्मी पापा प्रतिमा से बहुत खुश रहते थे और वह हमेशा ही कहते कि प्रतिमा बहुत ही अच्छी लड़की  है। मेरी शादीशुदा जिंदगी बहुत ही अच्छे से चलने लगी थी और मेरे जीवन में सब कुछ ठीक हो चुका था। प्रतिमा के साथ मैं बहुत ज्यादा खुश हूं और वह मेरा हमेशा ही ध्यान रखती है। एक दिन मै ऑफिस से काफी थका हुआ घर लौटा। प्रतिमा ने मुझे कहा मैं आपके पैर दबा देती हूं वह मेरे पैरों को दबाने लगी। अब हम दोनों एक दूसरे के साथ कुछ देर तक बैठे हुए थे लेकिन मैंने प्रतिमा की हाथ को अपनी ओर खींचा और उसे अपनी बाहों में ले लिया। वह मेरी बाहों में आ चुकी थी।

अब हम दोनों रह नहीं पा रहे थे। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और प्रतिमा मेरे लंड के लिए तडप रही थी उसने अपने मुंह में मेरे लंड को ले लिया था वह मेरे लंड को सकिंग करने लगी थी। अब मेरा लंड भी तन कर खडा हो गया था वह मेरे लंड को अच्छे से चूसने लगी थी मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। प्रतिमा ने मेरे लंड से पानी भी निकाल दिया था वह बडे अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी। हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से बढ रही थी। हम दोनों की गर्मी बहुत ही बढ़ने लगी थी मैं बिल्कुल भी नहीं रह पा रहा था और ना ही प्रतिमा रह पा रही थी।

मैंने प्रतिमा के कपड़ों को उतारा और उसकी ब्रा को उतारने के बाद मैंने उसके गोरे स्तनों को चूसना शुरु किया। वह अब बहुत ही ज्यादा तडप उठी थी। अब प्रतिमा बहुत गरम हो चुकी थी उसकी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। मुझसे भी बिल्कुल रहा नहीं जा रहा था। मैं अपने आपको रोक नही पा रहा था हमारी गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैंने प्रतिमा की पैंटी को नीचे उतारते हुए उसकी चूत को सहलाना शुरू किया अब वह भी तडपने लगी थी वह कहने लगी मेरी गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। मैंने उसकी योनि पर अपनी जीभ को लगाकर अंदर की तरफ डाला तो वह गर्म होने लगी थी अब वह अपने पैरो को चौड़ी करने लगी थी। प्रतिमा की चूत से बहुत ही ज्यादा पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मैंने उसकी योनि में लंड को लगाया वह बहुत ज्यादा गर्म होने लगी थी अब वह मुझे कहने लगी मेरी चूत मे लंड को घुसा दो।

मैंने प्रतिमा की चूत पर लंड को लगाकर अपने पूरे लंड को प्रतिमा की योनि की चूत के अंदर तक घुसा दिया था। प्रतिमा गर्म हो चुकी थी मेरा लंड उसकी चूत मे था मैं उसे तेजी से धक्के दे रहा था। प्रतिमा की सिसकारियां बढ़ती जा रही थी वह बहुत ही ज्यादा गर्म होती जा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। प्रतिमा की चूत से पानी निकल रहा था और मैं बहुत ज्यादा गरम हो चुका था। मैं अब अपने आपको रोक नहीं पा रहा था। प्रतिमा ने अपने दोनों पैरों को आपस में मिला लिया। मैं उसे बड़ी तेजी से चोदने लगा था। मुझे उसे चोदने में मजा आ रहा था और वह बहुत तडप रही थी मैं उसे तेजी से चोद रहा था। अब मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा था। मैंने प्रतिमा की योनि के अंदर अपने माल को गिरा दिया था।


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