पिताजी के ऑफिस वाली शादीशुदा महिला

Pitaji ke office wali shadishuda mahila:

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मेरा नाम आकाश है मैं लखनऊ का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 24 वर्ष है और मैं अपने मामा के साथ काम करता हूं। मैं उनके कारोबार में उनके साथ ही काम करता हूं क्योंकि उनके कोई भी बच्चे नहीं है इसलिए वह मुझे ही अपने बच्चे की तरह पालते हैं,  उन्होंने ही मुझे बचपन से अपने साथ रखा है। मेरे माता-पिता भी लखनऊ में रहते हैं और मेरे पिताजी एक सरकारी कर्मचारी हैं, मेरे दो बड़े भाई हैं जो कि नौकरी कर रहे हैं। मैं कभी-कभार अपने घर चले जाता हूं, मैं जब अपने घर जाता हूं तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता है। मेरे मामा ने मुझे बचपन में ही गोद ले लिया था और वही मेरा सारा खर्चा उठाते हैं इसीलिए मैं उनके काम में उनका साथ देता हूं। मेरे मामा एक दिन मुझे कहने लगे कि तुम अपने पिताजी को कुछ पैसे दे देना क्योंकि मेरे पिताजी को कुछ पैसों की आवश्यकता थी इसलिए उन्होंने मेरे मामा से वह पैसे मांगे थे।

मैं अब अपने पिताजी के ऑफिस में चला गया और जब मैं उनके ऑफिस में गया तो मैं अपने पिताजी के साथ ही बैठा हुआ था और मैंने उन्हें वह पैसे दे दिए। मेरे पिताजी मेरे बारे में पूछने लगे कि तुम कैसे हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं अच्छा हूं और मामा के साथ ही काम कर रहा हूं। मेरे पिताजी मेरे मामा के बारे में भी पूछने लगे और कहने लगे वह कैसा है, मैंने कहा कि वह बहुत ही अच्छे हैं और उनका काम भी अच्छे से चल रहा है। मैं अपने पिताजी के साथ ही उनके ऑफिस में बैठा हुआ था तभी एक महिला आई और वह मेरे पिताजी से कुछ काम के बारे में बात कर रही थी, वह मेरे पास में ही बैठ गई। कुछ देर बाद मेरे पिताजी ने मेरा इंट्रोडक्शन उन महिला से करवाया, उनका नाम राधिका है और उनकी शादी अभी कुछ समय पहले ही हुई है। मुझे राधिका को देख कर बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि वह दिखने में बहुत सुंदर है और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब वह मेरे साथ बैठी हुई थी। वह जिस प्रकार से मुझसे बात कर रही थी मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और मैं सोच रहा था कि काश यह मुझे पहले मिली होती तो शायद मैं राधिका से शादी कर लेता लेकिन यह हुआ नहीं क्योंकि उसकी शादी हो चुकी है।

मैंने अपने पिताजी से कहा कि मुझे देर हो रही है मैं फिर कभी आप के ऑफिस में आऊंगा। मैं अपने पिताजी के ऑफिस से चला गया और जब मैं वापस आ रहा था तो मैं सोच रहा था कि राधिका कितनी सुंदर है और वह कितनी सिंपल और साधारण है यदि उनके जैसी ही लड़की मुझे कोई मिलती तो मैं उससे शादी कर लेता क्योंकि मुझ पर किसी भी प्रकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है। मुझे यह बात अच्छे से मालूम है कि मेरे मामा ने बहुत अच्छी काशी प्रॉपर्टी जोड़ रखी है, वह सब उन्होंने मेरे नाम ही कर दी है इसलिए उसका जितना भी किराया आता है वह सब मेरे मामा मेरे ही खाते में डाल देते हैं। मैं यह सोचते सोचते अपने मामा के ऑफिस में पहुंच गया और उनके साथ में ही मैं बैठा हुआ था। वह मुझसे कहने लगे कि तुमने अपने पिताजी को पैसे दे दिये, मैंने उन्हें कहा कि हां मैंने पिताजी को पैसे दे दिए हैं। वह मुझे कहने लगे कि तुम एक काम करो, तुम आज ऑफिस का काम संभाल लो मैं कहीं बाहर जा रहा हूं और कुछ लोग तुमसे मिलने के लिए ऑफिस में आएंगे तो तुम उन्हें सारी डिटेल दे देना। मैंने उन्हें कहा कि ठीक है आप चले जाइए मैं ऑफिस में ही हूं और ऑफिस का काम संभाल लूंगा। अब मेरे मामा निश्चिंत होकर ऑफिस से चले गये। मैं ऑफिस में ही बैठा हुआ था, कुछ देर बाद उनके कुछ परिचित लोग ऑफिस में आए और वह मुझसे सारे काम की डिटेल मांगने लगे,  मैंने उन्हें फाइल दे दी और उन्होंने वह फाइल काफी देर तक देखी, उसके बाद वह कुछ देर तक मेरे साथ ही ऑफिस में बैठे हुए थे फिर वह कहने लगे कि हम लोग अभी चलते हैं, हम लोग कल वापस आ जाएंगे और तुम्हारे मामा से मिलेंगे। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप कल ऑफिस में आ जाएगा आपको मेरे मामा ऑफिस में ही मिल जाएंगे, अब वह लोग यह कहते हुए चले गए और मैं भी ऑफिस में ही बैठा हुआ था। काफी देर हो गई थी इसलिए मैं सोचने लगा कि मैं अब घर चलता हूं। जब मैं उस दिन घर लौट रहा था तो मुझे राधिका दिखाई दी।

जब मुझे राधिका दिखी तो मैंने उनसे बात नहीं की लेकिन उन्होंने मुझसे बात की और कहने लगी कि आज तुम अपने पिताजी से मिलने के लिए ऑफिस में आए थे, मैं उस वक्त वहीं बैठी हुई थी। मैंने उन्हें कहा कि हां मैं आपको पहचान गया लेकिन मुझे लगा कि शायद आपने मुझे नहीं पहचाना इस वजह से मैंने आपसे बात नहीं की। अब मैं और राधिका जी बात कर रहे थे और मैंने उनसे उनका नंबर भी ले लिया, मैंने जब उनका नंबर लिया तो वह कहने लगे कि मुझे घर के लिए देर हो रही है इसलिए मैं अभी घर चलती हूं और वह अपने घर चली गई। उसके बाद मैंने उन्हें कुछ दिनों बाद फोन किया, जब मैंने उन्हें फोन किया तो उन्होंने पहले तो मुझसे ज्यादा बात नहीं कि, मुझे लगा कि शायद वह कहीं बिजी होंगे, फिर मैंने उसके बाद उनसे फोन पर बात नहीं की और अब मैं अपने काम में ही बिजी था लेकिन काफी समय बाद उनका फोन मुझे आया और वह कहने लगे कि तुम कैसे हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं तो अच्छा हूं। मैंने उनसे कहा कि मैंने आपको काफी समय पहले फोन किया था परंतु आप शायद कहीं बिजी थी इस वजह से आप अच्छे से बात नहीं कर पाए और मैंने उसके बाद आप से बात नहीं की। वह कहने लगी, हां उस वक्त मैं ऑफिस में थी इसलिए मैं तुमसे बात नहीं कर पाई लेकिन उस दिन के बाद हम दोनों की बातें होने लगी और हम दोनों ही आपस में बहुत बात करते हैं थे।

मैं जब भी राधिका को फोन करता तो हम दोनों ही एक दूसरे के बारे में बातें करते थे लेकिन एक दिन मैंने राधिका से बहुत अश्लील बातें की और उस दिन राधिका का मन भी हो गया हम दोनों ही अश्लील बातें कर रहे थे। काफी दिन हो गए थे जब हम मिले नही थे मैं अपने पापा के ऑफिस में गया हुआ था वहां पर राधिका भी थी। राधिका ने मुझे देखा तो मुझे देखते हुए वह मुझसे मिलने आ गई। उसने मुझे देखते ही कहा कि मेरी चूत मे खुजली हो रही है। वह मुझे कहने लगी कि क्या तुम मुझे चोदोगे मैंने उसे कहा कि क्यों नहीं। वह मुझे एक खंडहर से कमरे में ले गई वहां पर कोई भी आता जाता नहीं था और हम दोनों वहां चले गए। राधिका ने मेरे लंड को निकालते हुए अपने मुंह में ले लिया और बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मेरे लंड को चूस रही थी मैं भी बहुत खुश था। मैंने भी उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया उसका दूध भी मेरे गले में जाने लगा। मैंने राधिका को घोड़ी बना दिया और उसके बाद जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत मे गया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। जब मैं अपना लंड  उसकी चूत मे डाल रहा था तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने उसे बड़ी तेज धक्के मारे वह मुझे कहने लगी कि तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है जब तुम्हारा लंड मेरी योनि में जा रहा है। जैसे ही मेरा लंड राधिका की योनि के अंदर बाहर होता तो हम दोनों ही उत्तेजित हो जाते हैं। मेरे लंड और राधिका की योनि से जो गर्मी निकल रही थी वह बहुत ही अच्छी थी। राधिका की चूत बहुत गिली हो चुकी थी और मेरा लंड आसानी से राधिका की योनि में जा रहा था जिससे कि मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। राधिका को भी बहुत अच्छा लग रहा था अब हम दोनों ही पूरे जोश में आ चुके थे और मैं बहुत तेजी से राधिका को धक्के मार रहा था जिससे कि हम दोनों के अंदर से बहुत गर्मी बाहर आ रही थी। हम दोनों ही उस गर्मी को नहीं झेल पाए और जैसे ही मेरा वीर्य पतन राधिका कि चूत में हुआ तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और उसकी योनि से मेरा माल टपक रहा था। उसने जब अपनी चूत को साफ किया तो मुझे बहुत अच्छा लगा उसके बाद मैं अपने पिताजी के दफ्तर से चला गया। हम दोनों के बीच अब कई बार सेक्स संबंध बन चुके हैं राधिका मेरे बिना बिल्कुल नहीं रह सकती। वह हमेशा कहती है कि मुझे तुम्हारा लंड अपनी योनि में लेना है।


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