पेलकर रेल बना दिया

Antarvasna, hindi sex story: मैं रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था लेकिन ट्रेन अभी आई नहीं थी ठंड का मौसम था इसलिए मैं वहीं पास में एक चाय के स्टॉल में चला गया। मैंने दुकानदार से कहा भैया मेरे लिए कड़क चाय बना देना तो वह कहने लगा ठीक है साहब अभी आपके लिए चाय बना देता हूं। वह मेरे लिए चाय बना रहा था और थोड़ी ही देर बाद उसने मुझे चाय बना कर दे दी। मैं चाय पीने लगा चाय पीने के बाद मैंने उसे पैसे दिए और फिर मैं अपनी सीट में जाकर बैठ गया। मैं सीट में जाकर बैठा तो मेरे सामने एक व्यक्ति आकर बैठे शायद उन्हें भी जयपुर ही जाना था। जब वह मेंरे सामने बैठे तो उसके कुछ देर बाद वह मुझसे बात करने लगे और कहने लगे कि भैया क्या आप भी जयपुर जा रहे हैं? मैंने उन्हें कहा हां मैं भी जयपुर जा रहा हूं। उन्होंने मुझे बताया कि मैं भी जयपुर ही जा रहा हूं वह कहने लगे कि ठंड की वजह से ट्रेन बहुत देरी से चल रही है और कोहरा भी बहुत ज्यादा है। मैंने उन्हें कहा मुझे भी यहां करीब आधे घंटे से ऊपर हो चुका है लेकिन अभी तक ट्रेन का कुछ पता नहीं है।

हम लोग ट्रेन का काफी देर तक इंतजार करते रहे लेकिन जब मुझे पता चला कि ट्रेन आने वाली नहीं है तो मैं वहीं वेटिंग रूम में सो गया। वेटिंग रूम में मैं सो चुका था मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे इतनी गहरी नींद आ गई जब अगली सुबह मैं उठा तो मैं सोचने लगा की अब ट्रेन आने वाली नहीं है इसलिए मुझे हम बस से ही जाना पड़ेगा। मैं बस से ही जयपुर के लिए निकलना चाहता था तो मैं बस से ही जयपुर के लिए निकल पड़ा। शाम होते-होते मैं जयपुर पहुंच चुका था जयपुर पहुंचने के बाद मैं जब अपने घर पहुंचा तो मेरी मां कहने लगी कि अविनाश बेटा तुम तो आज सुबह आने वाले थे। मैंने मां को कहा कि मां कल रात को ही मैं रेलवे स्टेशन में पहुंच गया था लेकिन ट्रेन कल रात को आई ही नहीं इस वजह से सुबह मुझे बस से ही आना पड़ा। मां कहने लगी बेटा तुम थक गए होंगे तो तुम आराम कर लो मैंने मां से कहा नहीं मां मैं कल वहीं वेटिंग रूम में सो गया था। मां कहने लगी की ठीक है बेटा मैं तुम्हारे लिए कुछ बना देती हूं।

मैंने मां से कहा मां मैं अभी हाथ मुंह धो लेता हूं आप मेरे लिए कुछ बना दीजिए मुझे काफी भूख लग रही है। मैं बाथरूम में चला गया और बाथरूम से हाथ मुंह धोने के बाद मैं अपने हॉल में आया तो मां ने मेरे लिए चाय और पराठे बना दिए थे। मैंने मां से कहा मां तुमने तो बहुत जल्दी बना दिया मां कहने लगी बेटा तुम्हें भूख लगी होगी इसलिए मैंने जल्दी से बना दिया। मैंने मां को कहा ठीक है मां अब मैं कुछ खा लेता हूं तो मां कहने लगी ठीक है बेटा तुम खा लो मैं पड़ोस में हो आती हूं। मां हमारे पड़ोस में चली गई और उसके बाद मैं भी अपने कमरे में चला आया मैं अपने कमरे में अपने बिस्तर पर लेटा ही था की मुझे कुछ पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई और मैं सो गया। मैं सो चुका था उसके बाद जब मैं उठा तो मैंने देखा कि उस वक्त रात के 10:00 बज रहे थे मैंने मां से कहा मां मुझे नींद आ गई थी मां कहने लगी कोई बात नहीं बेटा मैं समझ सकती हूं तुम बहुत थक गए होंगे। मां ने मेरे लिए खाना बना दिया था मैं और मां ही घर पर रहते हैं हम दोनों का इस दुनिया में और कोई भी नहीं है। पापा के देहांत हो जाने के बाद हम दोनों ही हम घर पर रह गए मुझे कई बार लगता कि मेरी बूढ़ी मां घर पर अकेले रहती है तो मुझे भी शादी कर लेनी चाहिए लेकिन अभी तक मुझे ऐसी कोई लड़की नहीं मिली थी जिससे कि मैं शादी कर पाता। अगले दिन मैं अपनी दुकान में जा रहा था जब मैं दुकान में जा रहा था तो उस वक्त मेरी मोटरसाइकिल का टायर पंचर हो गया। मैं पंचर लगवाने के लिए पास के ही एक पंचर वाले के पास गया और उससे कहा कि भैया मेरी मोटरसाइकिल का टायर पंचर हो चुका है उसने मुझे कहा कि बस 10 मिनट में आपका टायर का पंचर लगा देता हूं। मैं वहीं बैठा हुआ था और जब मैं वहां बैठा हुआ था तो उसने 10 मिनट में ही मेरे टायर का पंचर लगा दिया और मैं वहां से अपनी दुकान में चला गया। हमारी दुकान बाजार के बीचो-बीच है वह दुकान मेरे पापा ने काफी वर्षों पहले खरीदी थी और दुकान काफी अच्छी भी चलती है।

दुकान में काम करने वाले लड़के जो की दुकान के पास ही कमरा लेकर रहते हैं तो मैं जब दुकान में पहुंचा तो वह लोग आ चुके थे और वह दुकान की साफ सफाई कर रहे थे। उन्होंने मुझे देखते हुए कहा कि अविनाश भैया आप कब आए मैंने उन्हें कहा कि मैं तो कल ही आ गया था लेकिन कल मुझे आने में देर हो गई थी। वह कहने लगे कि हम लोग तो सोच रहे थे कल आप दुकान में आ जाएंगे लेकिन आप दुकान में आए ही नहीं। दुकान में काम करने वाले बंटी ने मुझे पैसे दिए और कहा कि भैया यह पैसे हैं कल दुकान में इतनी ही बिक्री हो पाई मैंने उसे कहा ठीक है और फिर वह पैसे मैंने अपनी जेब में रख लिए। मैं दुकान में बैठा हुआ था और समय का कुछ पता ही नहीं चला, शाम के वक्त मैं घर लौट आया। जब मैं शाम को घर लौट आया तो मां और मैं एक दसरे से बातें करते रहे फिर मैं सोने के लिए अपने कमरे में चला गया। बस ऐसे ही जिंदगी चल रही थी कुछ भी नया नहीं हो रहा था। एक दिन हमारे पड़ोस में मैंने देखा पड़ोस में रहने वाले गौतम भैया के घर पर एक लड़की आई हुई है पता करने पर मुझे मालूम पड़ा कि वह उनकी कोई रिश्तेदार है उसका नाम मुझे पता चल चुका था उसका नाम काव्या है।

काव्य दिखने में बेहद ही सुंदर और सिंपल किस्म की लड़की है उसे जब भी मैं देखता तो मुझे अच्छा लगता है। वह उन्हीं के साथ रहती थी गौतम भैया और हमारे बीच में काफी अच्छा पारिवारिक संबंध है वह लोग हमारे घर पर भी आते रहते हैं। एक दिन मैं घर पर ही था उस दिन काव्या हमारे घर पर आई हुई थी वह मीनाक्षी भाभी के साथ घर पर आई थी। मीनाक्षी भाभी ने मेरी काव्या से बात करवाई अब मै काव्या से बात करने लगा था। हम दोनों की बातें होती थी एक दिन काव्या शायद अपने किसी काम से घर लौट रही थी तो मैंने उसे रास्ते में देख लिया और उसे देखते ही मैंने अपनी मोटरसाइकल रोकी और काव्य को कहा कि मैं भी घर ही जा रहा हूं मै तुम्हें घर तक छोड़ देता हूं तो काव्या कहने लगी नहीं मैं चली जाऊंगी लेकिन मैंने उससे कहा जब हमारी मंजिल एक है तो हमे एक साथ चले जाना चाहिए। वह इस बात पर मुस्कुराने लगी और वह मेरे साथ बैठ गई। अब वह मेरे साथ बैठ गई थी जब वह मेरी बाइक में बैठी तो जैसे ही मैं ब्रेक लगाता तो उसके स्तनों मुझसे टकरा जाते जब उसके स्तन मुझसे टकराते तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आता। मुझे और भी ज्यादा मजा आया था जब मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा उसने मुझे कुछ नहीं कहा शायद वह भी उत्तेजित हो रही थी और मजे ले रही थी। एक दिन जब काव्या और मैं साथ में बैठे थे तो उस दिन मैंने उसका हाथ पकड़ लिया लेकिन उसने कुछ नहीं कहा मुझे उस दिन बहुत ही अच्छा मौका मिला जब मेरी मां हमारे पड़ोस में ही गई हुई थी और काव्या घर पर आई हुई थी। काव्या और मैं साथ में बैठे हुए थे मैंने उस दिन का काव्या के हाथों को पकड़कर उसकी जांघों को सहलाने शुरू किया जब मैंने उसके स्तनों को दबाकर उसे उत्तेजित करने की कोशिश की तो वह मेरी गोद में आई और मेरा लंड उसकी गांड मे टकराकर खड़ा होने लगा मुझे बहुत मजा आने लगा। काव्या को बहुत ज्यादा मजा आने लगा था हम दोनों की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी हमारे गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने उसे कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं वह मेरी तरफ देखकर कहने लगी मैं भी अपने आपको रोक पा रही हूं।

मैंने उसे वहीं सोफे पर लेटाया और उसके पतले और गुलाबी होठों को मैं अपने होठों से टकराने लगा तो उसे मज़ा आने लगा। जब मैं ऐसा करता तो उसकी उत्तेजना बढ़ जाती है और उसे बहुत मजा आता। हम दोनों की गर्मी अधिक हो चली थी इसलिए हम दोनों एक दूसरे के साथ संभोग का मजा लेना चाहते थे। मैंने काव्य के बदन से कपड़े उतारकर उसके गोरे स्तनों को अपने हाथ में लेकर जब उन्हें दबाना शुरू किया तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और उसे भी मजा आ रहा था मैंने उसकी पैंटी को उतारकर उसकी चूत को अपनी उंगली सहलाया तो उसकी चूत से पानी बाहर निकलने लगा था वह अपने आपको रोक नहीं पा रही थी।

मेरे अंदर की गर्मी भी अब बढने लगी थी मैंने जब अपने मोटे लंड को उसकी चूत पर सटाकर अंदर डाला तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी तुमने मेरी चूत फाड़ दी मैंने उसे कहा लेकिन आज मुझे मजा भी आ गया। मैंने देखा कि उसकी सील टूट चुकी थी उसकी सील टूट जाने के बाद उसकी चूत से खून आने लगा लेकिन मैं उसकी आंखो में देख रहा था तो मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि वह मुझसे प्यार करने लगी है। मैंने उसके दोनों पैरों को उठाकर अब उसे बड़ी तीव्र गति से चोदना शुरु कर दिया मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था मेरे अंदर की गर्मी बहुत अधिक होने लगी थी। मेरे अंदर की आग इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था और ना ही वह रह पा रही थी। वह कहने लगी आज वाकई में मुझे मजा आ गया जिस प्रकाश से मैंने उसको संतुष्ट किया उससे वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी मैंने अपने वीर्य की पिचकारी को उसकी चूत में गिराकर उसकी तरीके आग को शांत कर दिया था। उसके बाद हम दोनों के बीच कई बार सेक्स संबंध बनते ही रहते थे।


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