पेलकर बदन हिला डाला

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Pelkar badan hila daala पापा ने मुझे कहा कि शोभित बेटा तुम क्या हम लोगो की ट्रेन की टिकट करवा दोगे मैंने पापा से कहा हां पापा मैं कल ही आप लोगों की ट्रेन की टिकट करवा दूंगा। पापा भैया और भाभी को मिलने के लिए अहमदाबाद जाना चाहते थे भैया अहमदाबाद में ही नौकरी करते हैं और काफी समय हो गया था पापा भैया और भाभी को नहीं मिले थे। मैंने भी सोचा कि क्यों ना आज भैया को फोन कर लूं और मैंने उस दिन भैया को फोन किया। मैंने जब भैया को फोन किया तो काफी देर तक मेरी और भैया की बातें हुई मैंने भैया को बताया कि पापा और मम्मी आप लोगों के पास कुछ दिनों के लिए आ रहे हैं। भैया ने मुझे कहा कि हां यह तो मुझे मालूम है कि पापा और मम्मी मेरे पास आ रहे हैं मैंने भैया से कहा कि कल मैं उन लोगों की ट्रेन की रिजर्वेशन करवा दूंगा। भैया ने कहा ठीक है तुम उन लोगों का रिजर्वेशन करवा देना। मैंने भैया से काफी देर तक बात की और फिर मैंने फोन रख दिया। मैं फोन रख चुका था और मैंने जब अगले दिन पापा और मम्मी की ट्रेन की रिजर्वेशन करवा दी तो मैंने पापा को टिकट दे दिया।

पापा मुझे कहने लगे कि बेटा यह ट्रेन की टिकट तुमने कब की करवाई है मैंने पापा से कहा कि पापा यह दो दिन बाद की है तो वह कहने लगे कि ठीक है। पापा और मम्मी अपना सामान पैक कर रहे थे जब वह अपना सामान पैक कर रहे थे तो मैंने उनसे कहा कि लेकिन आप लोग वहां से वापस कब लौटेंगे। वह लोग कहने लगे कि बेटा हम लोग जल्द ही वापस लौट आएंगे काफी दिन हो गए हैं तुम्हारे भैया से हम लोग मिले भी नहीं है तो सोचा क्यों ना उनसे भी मुलाकात कर ले। दो दिनों के बाद पापा और मम्मी को मैं रेलवे स्टेशन तक छोड़ने के लिए गया जब मैं उन्हें रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए गया तो उसके बाद हम ट्रेन का इंतजार कर रहे थे हम लोगों ने थोड़ी देर तक इंतजार किया और फिर थोड़ी ही देर में ट्रेन आ चुकी थी। जब ट्रेन आई तो मैंने उन लोगों का सामान ट्रेन में रख दिया और पापा मम्मी सीट में बैठ चुके थे उसके बाद मैंने उन्हें कहा कि अब मैं चलता हूं। उस दिन रविवार था इसलिए मैं जब घर पहुंचा तो मेरा मन अकेला नहीं लग रहा था मैंने गौरव को फोन किया गौरव मेरा दोस्त है।

मैंने उसे फोन पर कहा कि पापा मम्मी घर पर नहीं है तो मैं तुमसे मिलने के लिए आ रहा हूं वह मुझे कहने लगा कि ठीक है तुम मुझसे मिलने के लिए आ जाओ। मैं गौरव को मिलने के लिए चला गया जब मैं गौरव को मिलने उसके घर गया तो गौरव की मम्मी घर पर ही थी उन्होंने मुझे कहा तुम काफी दिनों बाद घर पर आ रहे हो। मैंने उन्हें कहा कि हां आंटी ऑफिस में काम रहता है जिस वजह से आप लोगों के घर पर आना नहीं हो पाता है लेकिन आज पापा मम्मी घर पर नहीं थे तो सोचा कि गौरव से मिल लेता हूं। मैं और गौरव उसी के रूप में बैठे हुए थे मैंने गौरव को कहा चलो आज कहीं घूम आते हैं तो गौरव मुझे कहने लगा कि ठीक है हम लोग आज शॉपिंग करने के लिए चलते हैं। हम दोनों उस दिन मॉल में चले गए जब हम लोग मॉल से शॉपिंग करके बाहर निकले तो मैंने गौरव को कहा चलो हम लोग मूवी देख लेते हैं और फिर हम दोनों ने मूवी की टिकट खरीद ली।

हम लोगों ने मूवी की टिकट खरीद ली थी और उसके बाद हम दोनों ही मूवी देखने लगे जैसे ही मूवी खत्म हुई तो हम लोग बाहर आ गए। जब हम लोग बाहर आए तो उसके बाद हम लोग घर लौट आये उस दिन मैं जब घर पहुंचा तो मुझे राधिका का फोन आया राधिका हमारे ऑफिस में पहले जॉब किया करती थी लेकिन अब राधिका ने ऑफिस से जॉब छोड़ दी थी। मैंने राधिका को कहा कि आज तुमने मुझे कैसे याद किया तो राधिका मुझे कहने लगी कि शोभित मैं जिस जगह जॉब कर रही थी वहां से मेरी जॉब छूट चुकी है क्या तुम मेरी जॉब की बात कहीं कर सकते हो। मैंने राधिका से कहा लेकिन तुमने वहां से जॉब क्यो छोड़ी तो राधिका ने मुझे कहा कि वहां पर मुझे एक लड़का काफी ज्यादा परेशान कर रहा था इसलिए मुझे कुछ ठीक नहीं लगा और मैंने वहां से जॉब छोड़ना ही ठीक समझा लेकिन मेरे पास अब जॉब नहीं है मैं काफी दिनों से घर पर ही हूं। मैंने राधिका को कहा ठीक है मैं तुम्हारी मदद कर दूंगा और मैंने अगले दिन अपने कुछ दोस्तों को फोन किया और जल्द ही राधिका की जॉब लग गई।

राधिका की जॉब लग चुकी थी तो उसने मुझे फोन किया और कहने लगी कि यह सब तुम्हारी वजह से ही हो पाया है। मैंने उसे कहा कि राधिका तुमने मुझसे मदद मांगी थी तो मैंने तुम्हारी मदद की। राधिका से मेरी सिर्फ फोन पर ही बात हो पाती थी हम लोगों की मुलाकात नहीं हो पाती थी। पापा और मम्मी अभी भी भैया और भाभी के पास अहमदाबाद में ही थे वह लोग अभी भी वहां से लौटे नहीं थे। मैंने जब पापा को फोन किया तो वह लोग कहने लगे कि बेटा हम लोग अभी कुछ दिन और यहां पर रहेंगे। पापा और मम्मी अभी भी अहमदाबाद से आए नहीं थे मैं घर पर अकेला ही रहता था और घर पर मैं काफी बोर हो रहा था तो मैने सोचा कि मैं गौरव के पास चला जाता हूँ। गौरव और मैं छुट्टी के दिन कहीं ना कहीं घूमने के लिए चले जाया करते थे और मुझे काफी अच्छा लगता है जब भी मैं और गौरव कहीं घूमने जाते। एक दिन गौरव और मैंने शराब पी ली उस दिन जब हम लोगों ने ड्रिंक कर ली तो मुझे काफी नशा हो गया था। मैंने राधिका को फोन किया उस दिन राधिका और मैं दूसरे से बात कर रहे थे। मेरा उस दिन राधिका से अश्लील बातें करने का मन हो रहा था और मैंने राधिका से उस दिन काफी बातें की।

जब सुबह मुझे होश आया तो मैंने राधिका को फोन किया। मैंने राधिका को कहा कल रात के लिए मैं तुमसे माफी मांगना चाहता हूं। राधिका ने मुझे कहा तुम्हें मुझसे माफी मांगने की जरूरत नहीं है परंतु मुझे क्या मालूम था कि राधिका अब मेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए उतावली है और वह मेरे साथ सेक्स करना चाहती है। राधिका भी मुझे फोन करने लगी थी वह मुझसे बातें करने लगी हम दोनों एक दूसरे से खूब बातें करने लगे। हम लोग एक दूसरे से बातें करते तो हम दोनों को ही बहुत ज्यादा अच्छा लगता। मुझे राधिका से बात कर के काफी अच्छा लगता और राधिका को भी मुझसे बात करना बहुत अच्छा लगता। मैं और राधिका एक दूसरे के साथ सेक्स करना चाहता थे। मैने एक दिन राधिका को अपने घर पर बुला लिया क्योंकि मैं घर पर अकेला ही रहता था इसलिए मैंने राधिका को अपने पास बुलाया। वह जब मुझसे मिलने के लिए आई तो उसे यह बात अच्छे से मालूम थी मैं उसकी चूत के मजे लेने वाला हूं इसलिए वह पूरी तरीके से तैयार होकर आई थी। जब वह उस दिन घर पर आई तो वह मेरी गोद में बैठी मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा। जब मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा तो मैं उत्तेजित होने लगा था और राधिका की भी गर्मी को मैंने पूरी तरीके से बढ़ा दिया था।

राधिका मुझे कहने लगी मेरी गर्मी को तुमने बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। उसने अपने हाथों में मेरे लंड को ले लिया। जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर उसे चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था। वह भी मजे मे आने लगा था राधिका के अंदर की गर्मी काफी ज्यादा बढने लगी थी। वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी तुमने बहुत ज्यादा बढ़ा दी है। राधिका ने मेरे अंदर की गर्मी को बहुत ही ज्यादा बढ़ा दिया था अब मैं इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने राधिका से कपड़े उतारने के लिए कहा तो राधिका ने अपने कपड़े उतारे। मैने उसके नंगे बदन को महसूस करना शुरू किया मैं उत्तेजित होने लगा। मैंने उसकी ब्रा को खोला तो उसके स्तन मेरे सामने थे। मैंने अब राधिका के स्तनों को अपने मुंह में लेना शुरू किया। राधिका मुझे कहने लगी तुम बहुत ही अच्छे तरीके से मेरी गर्मी को बढ़ा रहे हो। मैंने राधिका को कहा तुमने भी तो मेरे लंड को बहुत ही अच्छे से चूसा और मेरी गर्मी को बढा कर रख दिया था। वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी। राधिका बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मैंने राधिका की चूत को चाटना शुरू किया। जब मैने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो उसकी चूत से पानी निकलने लगा और वह उत्तेजित होने लगी। वह मुझे कहने लगी मेरी उत्तेजना तुमने पूरी तरीके से बढ़ा कर रख दी है। मैंने राधिका को कहा मेरी गर्मी को भी तो तुमने बढ़ा दिया है।

अब राधिका मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा चुकी थी जैसे ही मैंने अपने मोटे लंड को राधिका की चूत के अंदर उतारना शुरू किया तो उसकी योनि के अंदर मेरा मोटा लंड जा चुका था। मेरा मोटा लंड राधिका की योनि में प्रवेश हो चुका था वह चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है। अब मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था जिस प्रकार से मैं राधिका की चूत में लंड को डालता राधिका को इतना ज़्यादा मज़ा आने लगा था कि वह मुझे कहने लगी तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैं राधिका को बड़ी तेजी से चोदा रहा था मैंने राधिका को बहुत देर तक चोदा। मुझे एहसास होने लगा था मेरा लंड अब मेरा साथ ज्यादा देर तक दे नहीं पाएगा क्योंकि मेरे अंडकोष से मेरा वीर्य बाहर की तरफ को निकलने लगाता था। राधिका की टाइट चूत के अंदर मैंने अपने माल को गिराकर अपनी इच्छा को पूरा किया। राधिका हमेशा मेरे लंड को लेने के लिए प्यासी रहती और वह जब भी मुझसे मिलने के लिए आती तो मैं उसे चोदा करता और मुझे उसके साथ सेक्स करने में बहुत मजा आता।


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