पायल तुझे चोदने का सपना पूरा जरुर होगा – 1

Payal tujhe chodne ka sapna pura jarur hoga-1:

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सभी नर और नारियों को का प्यार भरा नमस्कार | मैं केशव दिल्ली की एक बड़ी कंपनी में सेल्स की जॉब करता हूँ। यह मेरी दूसरी कहानी है | आज मैं आप सभी के सामने एक नई कहानी ले कर आया हूँ । बात कुछ साल पहले की कुंवारे केशव और सुलोचना के बीच की है  जब हम पंजाब में रहते थे । यह कहानी उन सभी लंड  और चूत को के लिए है जो अपने पहले सेक्स के लिए कोशिश कर रहे हैं । भगवान् करे उनको जल्द ही लंड  और चूत के मिलन में डुबकी लगाने का मौका मिले । जब मैंने नई-नई नौकरी किया था और मुझे पंजाब में ज्वाइन करने के लिए कहा गया था। मैं कंपनी के काम से दिल्ली बहुत आता-जाता था । इस दौरान हम दोनों ने मतलब मैंने और पायल ने दिल्ली में जा कर अपना-अपना कौमार्य खोया । किस तरह पायल तैयार हुई ? कैसे मैंने उसको चुदाई के लिए तैयार किया ? ये सब आपको यहाँ पर मिलेगा ।

आज मुझे पता नहीं वो कहाँ है ? पर अगर वो इस कहानी को पढ़ रही होगी तो वो भी उन पलों को याद कर रही होगी । पंजाब में किराए का मकान लिया जिसमें ऊपरी मंजिल में मकान-मालिक का परिवार और नीचे के दो रूम के सैट में मैं और पीछे के दो रूम के सैट में एक मल्होत्रा परिवार रहता था। मल्होत्रा साहब के परिवार में मियां-बीवी, एक लड़का और एक लड़की पायल (उम्र 20 साल) रहते थे । उनका लड़का न्यू जेर्सी में रहता था । हम दोनों के बीच में मकान का आँगन कॉमन था। पायल एक बहुत ही सुन्दर और सेक्सी फिगर वाली लड़की थी | उसके हाईट 5 फुट 5 इंच और उसका फिगर 32B-28-30 का था । वो पंजाबी थी तो गोरी और मस्त थी जैसा कि ज्यादातर पंजाबी लड़कियाँ होती हैं । पायल हर समय घर पर ही रहती थी और होटल मैंनेजमेंट के एंटरेन्स एग्जाम की तैयारी कर रही थी। पिता जॉब पर जाते और देर रात लौटते थे | उसकी माँ एक स्कूल में टीचर थीं और शाम के वक़्त ट्यूशन पढ़ाती थीं ।

हम दोनों अक्सर बातें करते थे और मेरा उनके घर पर बहुत आना-जाना था | अक्सर मैं उनके घर पर ही खाना खाता था। सच कहूँ तो मेरा दिल पायल पर आ गया था और मैं उसको चोदना चाहता था पर उसकी इच्छा का मुझको पता नहीं थी । बस इतना मालूम था कि उसको मेरा साथ अच्छा लगता है। कभी-कभी मैं उसको इधर-उधर छूने भी लगा था | वो बिल्कुल बुरा नहीं मानती थी बल्कि वो एक मुस्कराहट देती । एक दिन मैं अपने काम पर नहीं गया और घर पर ही था पर यह बात उन सब को पता नहीं थी ।

करीब 12 बजे जब मैं आँगन में गया तो देखा कि पायल सिर्फ टॉवल में खड़ी थी और वो अभी नहा कर ही निकली थी | टॉवल उसके सीने पर बंधा था और वो जाँघों तक ही था । मैं सन्न रह कर सिर्फ उसको एक टक देखता रहा । वो भी सन्न रह गई और कुछ पलों में उसको होश आया और वो अन्दर भाग गई । मैं भी कुछ समय के लिए समझ नहीं सका कि क्या करूँ । फिर मैं भी उसके पीछे उसके कमरे में गया और देखा कि वो वैसे ही खड़ी है और उसकी सांसें तेज-तेज चल रही थी । मेरा लंड भी खड़ा हो गया था। मैं धीरे से उसके पीछे गया और उसकी गर्दन पर अपने होंठ रखा कर हल्का सा किस किया । वो काँपटे कहने लगी आप जाओ यहाँ से | मैंने कुछ बोला और तभी किसी ने उसके घर की घंटी बजाई और मैं जल्दी से अपने कमरे में चला गया । थोड़ी देर बाद मैंने बहुत कोशिश किया पर उसने अपना दरवाज़ा नहीं खोला । इसके बाद वो मेरे सामने ज्यादा नहीं आती थी । अकेली तो बहुत कम आती थी पर हम दोनों की नज़रें बदल गई थीं । अब वो मुझको बहुत प्यार भरी नज़रों से देखती और  मैं भी रोज़ उसकी याद में लंड का पानी निकाल देता । पर मुझको कोई मौका नहीं मिल रहा था कि मैं कुछ कर सकूं । मैंने बहुत कोशिश किया कि कोई मौका मिले और फिर एक दिन ऐसा मौका मिल भी गया । पायल को दो एग्जाम पेपर देने दिल्ली जाना था । पर उन लोगों को पंजाबी होने के बावजूद दिल्ली का कुछ भी नहीं पता था । तब उसकी माँ ने मुझे बुलाया और कहा बेटा  तुम तो दिल्ली बहुत जाते हो क्या तुम शकर नगर नाम की जगह जानते हो ? मैंने कहा हाँ | तो आंटी ने कहा बेटा पायल के एग्जाम का सेंटर है वहाँ क्या तुम पायल और अंकल के साथ जाकर उसे एग्जाम दिला दोगे ? मैंने कहा हाँ आंटी जरुर ! मैं मन ही मन बहुत खुश हो गया कि चलो कुछ पल साथ रहने का मौका मिलेगा और पायल के दिल की बात जानने में भी आसानी होगी ।

 

आंटी ने कहा ठीक है फिर मैं तुम तीनों का रिजर्वेशन करवा देती हूँ | मैंने कहा ठीक है | हम सबको 5 दिन बाद निकलना था । मैं खुश था और मैं भी तैयारी में जुट गया । आखिर वो पल भी आ गया जब हमको निकलना था | रात की ट्रेन थी और  हम सब स्टेशन आ गए । हम सबकी ए.सी 2  में सीट बुक थीं । सुबह हम लोग जब दिल्ली पहुँचने वाले थे तभी पायल के घर से मकान-मालिक का फ़ोन आया कि पायल की माँ गिर गई हैं और उनके कमर में काफी चोट आई है । यह सब सुन कर हम घबरा गए पर जब मैंने अपने मकान-मालिक से बात किया तब पता चला कि वो लोग उनको हॉस्पिटल ले गए हैं और अब वो ठीक हैं दोपहर के बाद उनके कमर का एसरे होगा और उन्होंने बोला कि अंकल का आना जरूरी है । यह सोच कर हमने  लौटने का प्लान बनाया पर अंकल बोले कि अकेला मैं लौट जाता हूँ तुम पायल को एग्जाम दिला कर कल आ जाना । पर मैंने कहा नहीं हम सब वापस चलते हैं । तब अंकल बोले बेटा अब जो होना था वो हो गया और पायल की पूरे साल की मेहनत बेकार हो जाएगी और इसका साल भी ख़राब होगा। पायल ने कहा पर पापा ऐसा कैसे हो सकता है मैं कैसे केशव के साथ | पर उसके पापा ने उसे बीच में ही रोक के समझाया बेटा देखो, साल मत ख़राब करो और मैं तो वापस जा ही रहा हूँ न ? मैंने कहा अंकल मैं कैसे पायल के साथ रुकूँगा ? अंकल ने कहा देखो केशव तुम समझदार हो और जिम्मेदार भी हो तो तुम जरूर ठीक से एग्जाम दिला दोगे और फिर एक दिन की ही तो बात है कल तो रात तक तुम आ ही जाओगे । फिर हम दोनों ने मिल कर अंकल को ट्रेन में बिठा दिया और वो ट्रेन के जाने के बाद हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा । मैंने देखा कि पायल अपनी माँ के लिए बहुत परेशान थी । तरो मैंने कहा देखो घबराओ नहीं सब ठीक हो जाएगा और तुम सिर्फ अपने एग्जाम पर ध्यान दो और बाकी सब भगवान पर छोड़ दो जो होगा वो अच्छा ही होगा। पायल ने कहा हाँ पर – मैंने कहा देखो अंकल गए हैं और भी लोग है वहाँ वो सब उनकी ठीक से देखभाल करेंगे । तुम परेशान होगी तो तुम्हारा एग्जाम भी ख़राब होगा और फिर माँ क्या सोचेगी इसलिए तुम सिर्फ एग्जाम में ध्यान दो और फिर मैं हूँ ना । पायल ने कहा हाँ तुम साथ तो हो । यह कह कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई । यह देख कर मैं खुश हो गया और उसका हाथ हल्के से पकड़ कर बाहर चल दिया । जैसे ही मैंने उसका हाथ पकड़ा तो उसने मेरी तरफ देखा लेकिन बोली कुछ नहीं । मैंने पहाड़गंज में होटल साक्या पैलेस में एक AC रूम ले लिया । यह वही होटल था जहाँ मैं अक्सर दिल्ली आकर रुकता था | एग्जाम पेपर दिन में 3 बजे से था और हमको 2 बजे तक वहाँ पहुँचना था । मैंने टाइम देखा तो सिर्फ 6 बज रहे थे मेरे पास उसको पटाने के लिए बहुत टाइम था । कमरे में आकर मैंने चाय आर्डर की और हम दोनों बैठ कर उसकी मम्मी के बारे में बात करने लगे । मैंने देखा कि पायल बहुत ही ज्यादा परेशान थी । शायद मेरे साथ अकेले कमरे में होने की बात को जान कर वो ज्यादा दिक्कत में थी । मैंने उससे कहा देखो पायल, तुम इस तरह परेशान होगी तो तुम्हारा पेपर ख़राब हो जाएगा और तुम मैंनेजमेंट नहीं कर पाओगी ।

 

फिर मैं थोड़ा रुक कर बोला और एक बात इस बात के लिए मत परेशान हो कि तुम मेरे साथ अकेली हो और मैं तुम्हारे साथ कुछ कर दूँगा । तुम मेरी जिम्मेदारी हो और मैं उसको बखूबी निभाऊँगा । मेरी इस बात का असर तुरंत हुआ, वो हल्के से मुस्कराई और मेरी तरफ देख कर बोली मैं जानती हूँ । जहाँ तक मेरा मन था मैं यह बात जानता था कि इससे अच्छा मौका मुझे  कभी नहीं मिलेगा । फ्रेंड्स ये कहानी यहाँ खत्म नही होती इसीलिए मैं आगे की कहानी में बताऊंगा कि कैसे मैंने उसे चोदा और उसकी प्यारी चूत का रस मुझे सुगन्धित कर गया | उम्मीद करता हूँ कि आप लोग मेरा इन्तेजार जरुर करेंगे |


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