पत्नी को नंगा देख लंड उछलने लगा

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Patni ko nanga dekh lund uchhalne laga मैं अपने ऑफिस के लिए तैयार होकर निकल रहा था तभी मुझे महेश का फोन आया और महेश मुझे कहने लगा कि और भाई तुम अभी कहां हो। मैंने उसे कहा कि मैं तो अभी अपने ऑफिस के लिए निकल रहा हूं वह मुझे कहने लगा कि मैं तुमसे यह कहना चाहता हूं कि आज शाम को तुम मेरे घर पर डिनर के लिए आ जाओ। मैंने उसे कहा कि लेकिन अचानक से तुमने यह प्लान कैसे बना लिया तो उसने मुझसे कहा कि यह प्लान अचानक से नहीं बना है मैं तो बस सोच रहा था कि तुम घर आओगे तो कम से कम तुमसे इतने दिनों बाद मुलाकात तो हो जाएगी लेकिन मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाया था इसलिए मैं तुम्हें फोन नहीं कर पाया। मैंने महेश को कहा ठीक है मैं सुचित्रा से पूछ लेता हूं कि वह क्या कहती है उसके बाद ही मैं तुम्हें फोन कर पाऊंगा महेश कहने लगा कि ठीक है तुम भाभी से पूछ लो और जो भी तुम्हारा प्लान होगा मुझे बता देना मैंने महेश को कहा ठीक है।

मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही थी इसलिए मैंने सुचित्रा से ज्यादा देर तक तो बात नहीं की क्योंकि मैं घर के बाहर ही था इसलिए मैंने उस वक्त सुचित्रा से कहा कि आज शाम को हम लोग महेश के घर जा रहे हैं। सुचित्रा कहने लगी कि लेकिन तुमने यह बात मुझे कल क्यों नहीं बताई तो मैंने सुचित्रा से कहा कि मुझे महेश ने अभी थोड़ी देर पहले ही तो फोन किया था तभी तो मैंने तुमसे पूछा कि क्या आज तुम ऑफिस से जल्दी आ जाओगी या फिर तुम्हें ऑफिस से आने में देर हो जाएगी। सुचित्रा कहने लगी नहीं आज तो मैं ऑफिस से जल्दी आ जाऊंगी मैंने उसे कहा ठीक है तुम शाम को तैयार हो जाना और मैं भी ऑफिस से जल्दी घर आ जाऊंगा। सुचित्रा और मैं दोनों ही जॉब करते हैं मेरी और सुचित्रा की मुलाकात एक दिन एक पार्टी में हुई थी और वहीं पर मैंने चित्र को पसंद कर लिया था उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे। जब मैंने सुचित्रा को अपने दिल की बात कही तो वह भी मना ना कर सकी और उसने मेरे रिश्ते को स्वीकार कर लिया।

मैं तो इस बात से बड़ा ही खुश था कि सुचित्रा ने मेरे प्रपोज को स्वीकार कर लिया है और हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छे से रिलेशन को चला रहे हैं। सुचित्रा और मैंने कुछ समय पहले ही शादी की है और हम लोग अपने मम्मी पापा से मिलने के लिए जयपुर भी जाते रहते हैं। मेरा परिवार और सुचित्रा का परिवार जयपुर में ही रहता है और हम लोग अहमदाबाद में रहते हैं लेकिन इतने सालों से मैं अहमदाबाद में रह रहा हूं तो अब अहमदाबाद में भी काफी अच्छा लगने लगा है। मैं जब शाम के वक्त अपने ऑफिस से लौटा तो सुचित्रा तैयार हो रही थी मैंने सुचित्रा से कहा कि तुम जल्दी से तैयार हो जाओ वह कहने लगी कि रोहित बस थोड़ी देर में ही मैं तैयार हो जाती हूँ। मैं भी तैयार होने लगा, मैं जल्दी से तैयार हो गया था तैयार होने के तुरंत बाद ही मैंने सुचित्रा से कहा कि चलो तुम भी अब जल्दी से तैयार हो जाओ तो वह कहने लगी बस 5 मिनट में मैं तैयार हो जाती हूं। मैंने उसे कहा कि मैं कार पार्किंग में हूं और तुम ही पर आ जाना सुचित्रा कहने लगी ठीक है आप चलिए मैं भी बस आती ही हूं। मैं पार्किंग में चला गया मैं कार में बैठा हुआ था लेकिन अभी तक सुचित्रा आई नहीं थी कार पार्किंग के वहां पर नेटवर्क नहीं आता इसलिए मैं सुचित्रा को फोन भी नहीं कर पा रहा था मुझे वहां पर 15 मिनट हो गए थे और अभी तक सुचित्रा आई नहीं थी। थोड़ी देर बाद सुचित्रा मुझे आगे से आते हुए दिखाई दी तो मैंने भी अपनी कार को स्टार्ट कर लिया और सुचित्रा जैसे ही बैठी तो मैंने सुचित्रा को कहा कि हम लोगों को तो काफी देर हो चुकी है। सुचित्रा कहने लगी कोई बात नहीं थोड़ी ही देर में हम महेश के घर पर चले जाएंगे। मैंने कार स्टार्ट कर ली थी और हम लोग महेश के घर करीब आधे घंटे बाद पहुंच गए थे, आधे घंटे बाद जब हम लोग महेश के घर पर पहुंचे तो महेश हम लोगों का इंतजार कर रहा था। मैं महेश से काफी दिनों बाद मिल रहा था पहले महेश मेरे ऑफिस में काम किया करता था और हम दोनों साथ में ही काम करते थे लेकिन महेश ने वहां से रिजाइन देने के बाद दूसरे ऑफिस में जॉब कर ली।

महेश और उसकी पत्नी हम लोगों का इंतजार कर रहे थे महेश की पत्नी का नाम आकांक्षा है आकांक्षा और महेश की शादी को अभी 6 महीने ही हुए हैं। मैं महेश और आकांक्षा की शादी में भी गया था उस वक्त सुचित्रा नहीं आ पाई थी क्योंकि सुचित्रा अपने ऑफिस के काम से मुंबई गई हुई थी इसलिए उस समय सुचित्रा नहीं पाई थी। हम सब लोग साथ में बैठे हुए थे तो महेश मुझे कहने लगा कि तुम लोगों को आने में काफी देर हो गई मैंने महेश को बताया कि हां हम लोगों का आने में देर हो गई क्योंकि मैं ऑफिस से थोड़ा लेट आया था। मेरे पास इसके अलावा और कोई भी जवाब नहीं था मैं और महेश एक दूसरे से बात कर रहे थे तो आकांक्षा ने तब तक डिनर तैयार कर लिया था और हम सब लोगों ने साथ में डिनर किया। काफी दिनों बाद मैं महेश को मिला था तो महेश के साथ बात करके मुझे काफी अच्छा लग रहा था। महेश ने शुरुआती दौर में मेरी काफी मदद की थी उस वक्त मुझे पैसों की जरूरत थी तो महेश ने ही मेरी मदद की उसके बाद से महेश से मेरी अच्छी दोस्ती होती चली गई और मुझे महेश के साथ एक अपनापन सा लगता है। महेश मेरा बहुत ही अच्छा दोस्त है मुझे कभी भी कोई परेशानी होती तो मैं सबसे पहले महेश से ही शेयर किया करता हूं।

हम लोगों ने डिनर कर लिया था और डिनर करने के बाद मैंने महेश को कहा कि अब हम लोग चलते हैं तो महेश कहने लगा की रोहित तुम लोग आज हमारे घर पर ही रुक जाओ। मैंने उसको कहा नहीं महेश आज मेरा जाना जरूरी है क्योंकि कल मुझे ऑफिस जल्दी जाना है तो महेश कहने लगा कि ठीक है अगर ऐसी बात है तो हम लोग फिर दोबारा मिलते हैं। मैंने महेश को कहा ठीक है और अब मैं और सुचित्रा घर लौट आए थे हम लोग जब घर लौटे तो उस वक्त यही कोई 12:30 बज रहे थे। सुचित्रा अब कपड़े चेंज करने लगी वह मेरे सामने कपड़े बदल रही थी मैं उसे देखे जा रहा था जब सुचित्र पैंटी ब्रा में थी तो मैंने उसे कस कर पकड़ लिया। उसने गुलाबी रंग की पैंटी ब्रा पहनी हुई थी उसके गोरे बदन पर वह बहुत अच्छी लग रही थी काफी दिन हो गए थे जब सुचित्रा और मैं एक दूसरे के साथ अंतरंग संबंध नहीं बना पाए थे। मैंने सुचित्रा को कस कर पकड़ लिया जब सरिता मेरी बाहों में थी तो मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरु कर दिया मैंने उसकी पैंटी के अंदर से उसकी चूत को सहलाना शुरु किया तो वह भी मचलने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने सुचित्रा को पूरी तरीके से गर्म कर दिया था। उसे मैंने बिस्तर पर लेटा दिया जब मैंने सुचित्रा को बिस्तर पर लेटाया तो मैंने उसके पैरों को खोला हुआ था जब मैंने उसके पैरों को खोल लिया था तो उसे अब मजा आने लगा था। मैंने उसके पैरों को खोल कर उसकी चूत पर अपने लंड को रगडना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी अभी तुम मेरी चूत को चाट लो। मैंने जब अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा तो वह मचलने लगी। वह मेरे बालों को खीचने लगी वह बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी और उसकी उत्तेजना इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मेरे अंदर से निकलती हुई गर्मी को अब मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। मैंने जैसे ही सुचित्रा की योनि पर अपने मोटे लंड लगाकर अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है।

हम दोनों बिल्कुल रह नहीं पा रहे थे मैंने अपने तेज झटको से सुचित्रा के बदन को हिला दिया। उसके स्तन बड़े ही तेजी से हिल रहे थे मैंने उन्हें अपने हाथों में ले लिया और मैं उन्हें अपने हाथों में लेकर दबाने लगा तो मुझे मजा आने लगा। मैं उसके बदन को बड़े अच्छे से महसूस कर रहा था मैंने उसके स्तन को चूसना शुरू कर दिया उसके स्तनों को चूस कर मज़ा आ रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैं सुचित्रा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था अब सुचित्रा की सिसकारियां बढ़ती जा रही थी वह अपनी मादक आवाज से मुझे कहती मुझे और तेजी से चोदो। मै जिस प्रकार से उसको चोद रहा था वह कह रही थी मुझे अच्छा लग रहा है। मैं उसे लगातार धक्के दे रहा था थोड़ी देर बाद सुचित्रा ने मुझे कहा मुझे तुम्हारे लंड के ऊपर से बैठना है।

वह मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर ले चुकी थी मेरा लंड उसकी चूत की गहराई में चला गया तो मुझे अच्छा लगने लगा। मुझे उस वक्त मजा आने लगा था जब वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करती और मेरे अंदर की गर्मी को बढ़ाती जा रही थी। सुचित्रा के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा बस ऐसे ही अब तुम अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करती जाओ जिससे कि मुझे भी ऐसे ही मजा आता रहे। सुचित्रा और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश हो चुके थे हम दोनों की गर्मी अब इतनी अधिक हो चुकी थी कि उसे रोक पाना बड़ा ही मुश्किल हो रहा था। सुचित्रा की बड़ी चूतडे मेरे लंड से टकरा रही थी और मेरे अंडकोषो मे दर्द हो रहा था मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चला था। मैंने उसकी चूत के अंदर बाहर बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू किए तो मुझे भी एहसास होने लगा मैं ज्यादा देर तक अपने आपको रोक नहीं पाऊंगा। मैंने सुचित्रा की चूत के अंदर अपने वीर्य को गिराकर उसकी गर्मी को शांत किया और उसके बाद हम दोनों एक दूसरे की बाहों में सो गए।


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