पति रूठे तो रूठे पर आशिक ना रूठे

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Pati ruthe to ruthe par ashiq na ruthe मैंने प्रदीप से कहा तुम आज कहां जा रहे हो आज तो छुट्टी है ना प्रदीप ने मुझे जवाब दिया मैं आज अपने दोस्तों के साथ जा रहा हूं। मैंने प्रदीप से कहा कभी आप मेरे साथ भी समय बिता लिया कीजिए प्रदीप कहने लगे आरोही हमारी शादी को करीब 5 वर्ष हो गए हैं 5 वर्षों में क्या मैंने तुम्हें कभी समय नहीं दिया है। मैंने प्रदीप से कहा जाओ आपसे तो बात करना ही व्यर्थ है आप अपने दोस्तों के साथ ही चले जाओ उसके बाद प्रदीप अपने दोस्तों के साथ चले गए। मेरी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं लेकिन अभी तक प्रदीप को अपनी जिम्मेदारी का एहसास ही नहीं हुआ है। उनके माता-पिता दोनों ही स्कूल में बढ़ाते है लेकिन प्रदीप बड़े ही लापरवाह है वह किसी भी चीज को कभी आसानी से समझते ही नहीं है। मुझे हमेशा ही इस बात की चिंता सताती रहती थी कि मेरे भविष्य का क्या होगा मैंने प्रदीप के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी लेकिन प्रदीप को तो मेरी कोई फिक्र ही नहीं थी।

मैंने जब अपनी सासू मां से इस बारे में बात की तो मैंने उन्हें बताया कि मैं नौकरी करना चाहती हूं तो वह मुझे कहने लगी बेटा यदि तुम्हें नौकरी करनी है तो तुम नौकरी कर सकती हो। मैंने कहा लेकिन प्रदीप को तो यह पसंद ही नहीं है वह कहने लगी मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि तुम नौकरी कर सकती हो प्रदीप और तुम्हारे बीच में आपस में क्या बातचीत होती है वह तुम ही जानो मैं  उसमें भला क्या कह सकती हूं। मैं और प्रदीप एक दूसरे से बातचीत तो कर देते थे और एक ही घर में रहते थे लेकिन शायद हम दोनों के रास्ते अलग थे। मुझे कई बार लगता है कि मेरे माता-पिता ने प्रदीप के साथ मेरी शादी करवा कर बहुत ही गलत किया क्योंकि प्रदीप को अपनी जिम्मेदारी का कोई भी एहसास नहीं था और ना ही वह मुझे समय देते थे। मैं हमेशा ही सोचती कि काश वह मुझे समय दे पाते लेकिन उनके पास तो मेरे लिए समय ही नहीं होता था वह अपने दोस्तों में ही इतने मशगूल रहते थे कि यदि मैं उन्हें कुछ कह देती तो वह मुझे ही उल्टा कह दिया करते वह कहते कि तुम्हें मेरे मामलों में बोलने की जरूरत नहीं है।

मुझे कई बार लगता कि मुझे प्रदीप से अलग हो जाना चाहिए लेकिन यह रूढ़िवादी समाज शायद मेरी बातों को ना समझ पाता और ना ही मेरी माता पिता मुझे अब इस स्थिति में देखना चाहते हैं कि मैं प्रदीप अलग हो जाऊं इसीलिए मैं प्रदीप के साथ ही रह रही हूं और अपनी जिंदगी को मैं बिताये जा रही हूं। मेरे कई सपने चकनाचूर हो गए थे और मैं हमेशा ही मन ही मन सोचती रहती कि कब मैं अपने सपनों को पूरा कर पाऊंगी भी या नही। मैंने अपनी कंपनी से रिजाइन कर दिया था ताकि मुझे प्रदीप आगे नौकरी करने देंगे लेकिन प्रदीप ने मेरे सारे सपनों को तोड़ कर रख दिया है वह कहते हैं कि जब घर में किसी भी चीज की कमी नहीं है तो तुम्हें नौकरी करने की आवश्यकता क्या है और वैसे भी महिलाओं का घर से बाहर जाना कुछ ठीक नहीं है। प्रदीप एक पढ़े-लिखे पुरुष होने के बावजूद भी अपनी इस प्रकार की मानसिकता रखते है वह मुझे शायद अपने आप से दूर कर रहे थे। अब तक मैंने 5 वर्ष तो शादी के जैसे तैसे काट लिए थे लेकिन अब मुझसे बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा था मैं अंदर ही अंदर से टूट रही थी और बहुत ही ज्यादा परेशानी से गुजर रही थी। मेरी परेशानी की वजह सिर्फ और सिर्फ मेरे अंदर की अंतरात्मा थी जो कि मुझे कहने लगी कि अब तुम्हें नौकरी करनी चाहिए। मेरी जितनी भी सहेलियां थी वह सब नौकरियां कर रही है मुझे लगता था कि शायद मैंने बहुत बड़ी भूल की जो अपनी नौकरी छोड़ दी मुझे प्रदीप के कहने पर नहीं आना चाहिए था। एक दिन प्रदीप घर पर ही थे उस दिन मैंने उन्हें कहा कि मुझे आपसे बात करनी है तो वह कहने लगे कहो आरोही मैंने उन्हें कहा देखो प्रदीप मैं तुमसे शादी कर के अब बहुत ज्यादा पश्चता रही हूं। प्रदीप मुझे कहने लगे तुम यह किस प्रकार की बात कर रहे हो मैंने प्रदीप से कहा मैं बिल्कुल ठीक कह रही हूं यदि मैं तुमसे शादी नहीं करती तो मैं अब तक नौकरी कर रही होती और तुमने मेरे सारे अरमानों के पंख टोक टोक कर कुतर कर रख दिये है तुम ही बताओ की क्या मुझे नौकरी छोड़नी चाहिए थी कब तक मैं घर पर रहूंगी मुझे घर पर अब अच्छा नहीं लगता मुझे घर काटने को दौड़ता है।

प्रदीप कहने लगे ठीक है तुम देख लो तुम्हें जैसा उचित लगता है मेरे  विद्रोह का शायद उन पर कुछ फर्क पड़ गया था और इसी वजह से वह मेरी नौकरी के लिए मान चुके थे और मैंने इतने वर्षों बाद अपने नौकरी के लिए जॉब इंटरव्यू दिया तो मुझे पूरी उम्मीद थी कि मेरा जरूर सिलेक्शन हो जाएगा क्योंकि अब भी मैं पहले की तरह ही बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट थी और मुझे पूरी उम्मीद थी कि मैं जरूर एक अच्छी कंपनी में नौकरी लग जाऊंगी। जिस कंपनी में मेरी नौकरी लगी उस कंपनी में नौकरी लगते ही मैं बहुत खुश हो गई क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी इतनी अच्छी कंपनी में नौकरी लग जाएगी। इतने सालों के अंतराल के बाद मेरी नौकरी एक अच्छी कंपनी में लग चुकी थी प्रदीप और मेरे रिश्ते में अब दूरियां बढ़ने लगी थी हम दोनों एक ही छत के नीचे रहते थे लेकिन फिर भी एक दूसरे से अलग थे। इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी मैंने तो सिर्फ प्रदीप से कहा था कि मैं नौकरी करना चाहती हूं लेकिन प्रदीप ने मेरी बातों को शायद दिल पर ले लिया था और वह मुझे कहने लगे कि तुम्हें अब जो करना है तुम कर लो मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूंगा। हम दोनों के रिश्ते में पूरी तरीके से अनबन होनी शुरू हो गई थी।

मेरे और प्रदीप के बीच अब बिल्कुल भी पहले जैसा रिश्ता नहीं थे प्रदीप मेरे साथ होते हुए भी वह मेरे साथ नहीं थे क्योंकि उनके और मेरे बीच अब कुछ भी बातें होती ही नहीं थी। जब भी उनसे कुछ बात करो तो वह मुझसे झगड़ पडते थे और मुझे भी लगने लगा कि प्रदीप से मुझे बात नहीं करनी चाहिए। मैं अपने आप से ही परेशान रहने लगी थी और उसी दौरान मेरी परेशानी का हल हमारे ऑफिस में काम करने वाले नौजवान युवक ने निकाल लिया उसका नाम अविनाश है। अविनाश कुछ समय पहले ही अपनी पढ़ाई पूरी कर के जॉब करने लगे थे। अविनाश की समझदारी और उसकी बातों से मैं उससे प्रभावित हो गई थी ना चाहते हुए भी मैं अविनाश की तरफ खींची चली जाती। अविनाश भी मुझसे खुश रहते थे वह जब मेरे साथ बैठते तो मैं उन्हें कहती आप कभी घर पर आईए? वह कहने लगे क्यों नहीं आप बुलाएंगे तो जरुर आएंगे एक दिन हम दोनों साथ में बैठे हुए थे अविनाश अपनी गर्लफ्रेंड के बारे में मुझे बता रहे थे उन दोनों के बीच में कुछ ठीक नहीं चल रहा था। अविनाश ने मुझे अपने घर पर बुला लिया मैं जब अविनाश के घर पर गई तो उस दिन हम दोनों साथ में बैठ कर बात कर रहे थे तभी अविनाश ने मेरी तरफ देखा और मेरे होठों को चूम लिया। मेरे लब अविनाश के लब से टकराने लगे थे हम दोनों ही उत्तेजित होने लगे थे। हमारी गर्मी बढ़ने लगी थी अविनाश ने मेरे होठों को बहुत देर तक चूसा मेरे होठों से अविनाश ने खून भी निकाल कर रख दिया। अविनाश ने मुझे अपने बिस्तर पर लेटा दिया था जिस प्रकार से अविनाश ने मेरे बदन को महसूस किया मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरी शादी की सुहागरात की पहली रात हो। अविनाश ने मेरे सूट को उतारते हुए मेरी पिंक रंग की ब्रा को भी उतार फेंका। अविनाश मुझे कहने लगे आरोही जी आपके बदन का हर एक हिस्सा कितना कमाल का है। मैंने अविनाशी से कहा तुम्हारी गर्लफ्रेंड से भी ज्यादा कमाल का है तो वह कहने लगे अरे वह तो आपके सामने कुछ भी नहीं है।

यह कहते ही अविनाश ने मेरे स्तनों को अपने हाथों में लिया और अपने मुंह के अंदर समा लिया। वह मेरे स्तनों को बड़े ही अच्छे तरीके से रसपान कर रहे थे अविनाश ने मेरे स्तनों से पानी भी निकाल कर रख दिया था मैं बहुत ज्यादा मचलने लगी थी। मेरी तड़प इतनी ज्यादा बढ़ गई कि मैंने अविनाश को नीचे लेटाते हुए अविनाश के मोटे लंड को अपनी योनि में समा लिया। अविनाश कहने लगे आपने यह क्या कर दिया। मैंने अविनाश से कहा मुझसे रहा नहीं जा रहा है और इसी के साथ मैंने अविनाश के लंड के ऊपर नीचे अपनी चूतडो को करना शुरू कर दिया। मैंने अपने दोनों हाथों को अविनाश की छाती पर रखा हुआ था और बड़ी तेजी से अपनी चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी। अविनाश का लंड एकदम सीधा तन कर खड़ा था वह मेरी योनि के हिसाब से एडजेस्ट हो जाया करता लेकिन मैंने अपनी चूतडो को पूरी ताकत के साथ ऊपर नीचे किया। जिससे कि अविनाश के अंदर उत्तेजना बढ़ चुकी थी वह बिल्कुल भी रह ना सके। अविनाश कहन लगे कसम से आज तो मजा ही आ गया।

मैंने अविनाश से कहा मुझे भी बड़ा मजा आ रहा है और यह कहते ही अविनाश ने मुझे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया। मेरी चूत के अंदर अविनाश ने अपने लंड को घुसा दिया था अविनाश का मोटा लंड मेरी चूत मे जाते ही मेरे मुंह से तेज आवाज निकल पड़ी। उस तेज आवाज के साथ अविनाश ने मुझे बहुत तेजी से चोदा। मै खुशी थी प्रदीप के साथ बिताए हुए पल में सब भूल चुकी थी क्योंकि अविनाश जिस प्रकार से मेरे साथ संबंध बना रहे थे उससे मैं प्रदीप के साथ बिताए हुए हर वह पल भूल चुकी थी और मुझे अविनाश ने बहुत ही देर तक चोदा। जिससे कि मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बुझ गई और अविनाश ने अपने वीर्य को मेरी चूतडो के ऊपर गिरा दिया। मै अविनाश के साथ समय बिताती तो मुझे अच्छा लगता मैं अपने सारे गमो को भूल चुकी थी। अविनाश के साथ मुझे समय बिताना अच्छा लगता था इसलिए हम दोनों ज्यादा समय साथ मे बिताया करते और अविनाश की गर्लफ्रेंड भी उसे अब छोड़ कर जा चुकी थी इसलिए अविनाश को मेरी जरूरत तो होती ही थी।


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