पापा की प्यारी हुस्न परी

Papa ki pyari husn pari:

Hindi sex kahani, antarvasna मैं अपने बैंक की नौकरी से बड़ा खुश था मेरे जीवन में सब कुछ बड़े ही अच्छे से चल रहा था मेरे परिवार की हर एक जरूरतों को मैं पूरा कर दिया करता था लेकिन मुझे क्या पता था कि जल्द ही हमारे जीवन में भूचाल आने वाला है और वह भूचाल भी ऐसा आया कि जैसे सब कुछ एक ही झटके में ले गया। मैं तनाव की स्थिति से गुजर ना रहा था और मुझे कुछ समझ ही नहीं आया कि ऐसे मौके पर मुझे किसकी सलाह लेनी चाहिए। हमारे पड़ोस में रहने वाले गौतम जी जोकि निहायती बत्तमीज किस्म के इंसान थे उन्होने हमारे पूरे मोहल्ले में कोई पसंद नहीं करता लेकिन मुझे भी क्या पता था कि अब हम लोग भी उसी मुसीबत से गुजरने वाले हैं।

एक दिन हम दोनों परिवारों के बीच जमीन को लेकर झगड़ा शुरू हुआ तो वह थमने का नाम ही नहीं ले रहा था अब झगड़े इतने बढ़ गए की गौतम के परिवार के कुछ लोग लाठी डंडे लेकर हमारे घर में तोड़फोड़ करने के लिए पहुंच गए। हालांकि किसी को कोई नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन यह बात मेरे दिल पर लग चुकी थी और मैंने ठान लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं गौतम के परिवार को छोड़ने वाला नहीं हूं। हमारी तरफ से भी कुछ लोग आए थे लेकिन उस वक्त मैंने उन्हें समझा दिया कि यह सब ठीक नहीं है हमें कानून का सहारा लेना चाहिए लेकिन मेरी सबसे बड़ी भूल थी कि मैंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। जब पुलिस के संज्ञान में यह बात आई तो वह भी हमारे घर पर आए और उन्होंने हमारे परिवार वालों से भी गवाही ली उसके बाद वह चले गए। आस पड़ोस के भी कुछ लोगों से पूछा गया सब लोग पुलिस से दूर ही नजर आए लेकिन फिर भी मैं किसी को भी छोड़ने वाला नहीं था। गौतम के परिवार को तो मैं किसी भी हाल में माफ करने वाला नहीं था और उसी के चलते मैंने अपने परिचित से कहा कि हमारे घर में कुछ समस्या हो गई है तो आप हमारी मदद कर दीजिये। वह हमारी मदद करने के लिए तैयार हो गए और कहने लगे कि मैं आपको अपने एक मित्र का नंबर देता हूं वह काफी बड़े वकील है आप उनसे सलाह मशवरा लीजिएगा। मुझे क्या पता था कि मैं तो इन सब चीजों में फंसकर ही रह जाऊंगा और मेरी जीवन की जमा पूंजी भी सारी खत्म होती चली जाएगी।

मैंने मामले की रिपोर्ट तो पुलिस स्टेशन में करवा ही दी थी उसके बाद मैंने वकील से सारी बात कह दी। वह मुझे कहने लगे अरे गोमतीदास जी आप चिंता ना करें सब कुछ मैं ठीक कर दूंगा ऐसे मामले तो ना जाने मेरे पास कितने आते रहते हैं और हर रोज मैं ऐसे मामलों का निपटारा करवाता रहता हूं। मुझे भी अब उन पर पूरा यकीन था जिस प्रकार से वह अपनी बात रख रहे थे उससे लग गया था कि मैं यह केस तो जरूर जीत जाऊंगा। गौतम के परिवार और हमारे बीच में जमीन को लेकर कुछ विवाद हो गए थे हमारे घर के सामने हम ने एक जमीन काफी समय पहले खरीदी थी लेकिन उस पर हम लोगों ने कुछ भी नहीं बनवाया था और गौतम का चाहता था कि हम उसे अपने कब्जे में कर ले। जब मुझे इस बात की जानकारी मिली तो मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने गौतम से कहा कि देखिए यह बिल्कुल उचित नहीं है। मैंने तो बडी शालीनता से उन्हें कहा था लेकिन वह तो आग बबूला हो गये और मुझे कहने लगे आपको जो करना है कर लीजिए यह अब हमारी जमीन है। मुझे उसका बहुत ही बुरा लगा कि गौतम का परिवार इतना ज्यादा गिरा हुआ भी हो सकता है और उन्होंने भी कोर्ट में केस दायर कर दिया था। हम दोनों की याचिकाओं पर सुनवाई अब चलने लगी थी सुनवाई का दौर बढ़ता जा रहा था कोर्ट में बार बार हमें आना पड़ता इस वजह से मेरी नौकरी पर भी असर पड़ने लगा था। मैंने वकील साहब से कहा अरे वकील साहब कुछ कीजिए तो शुक्ला जी कहने लगे अरे साहब मैं तो लगा हुआ हूं आप देख रहे हैं ना। वह मुझसे पैसे लिए जा रहे थे लेकिन अब तक जमीन का कोई भी फैसला नहीं हो पाया था मेरा समय और पैसे दोनों ही बर्बाद हो रहे थे मैं पूरी तरीके से कोर्ट कचहरी में गिर कर रह गया था।

मुझे ऐसा लगने लगा कि जैसे मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी है ना जाने कितने पैसे मेरे अब तक लग चुके थे उतने में तो मैं एक नई जमीन खरीद चुका होता। अब मैं पूरी तरीके से वकीलों के बीच में फंस चुका था और वह लोग जैसे मुझे नोचने को तैयार थे मैं काफी तनाव में आ चुका था मैं जब घर पर गया तो मेरी पत्नी मुझे कहने लगी आजकल आप बिल्कुल भी किसी से बात नहीं करते हैं। मैंने अपनी पत्नी को बताया जब से यह कोर्ट कचहरी के चक्कर में फंसा हूं तब से पूरा समय ही बर्बाद हो जाता है और काम के लिए तो जैसे समय ही नहीं मिल पाता। मेरी पत्नी ने मुझे हिम्मत देते हुए कहा आप हिम्मत मत हारिये हम लोग आपके साथ खड़े हैं मैं अपनी पत्नी से कहने लगा यदि मुझे पता होता कि मुझे इतनी लंबी लड़ाई लड़नी होगी तो मैं कभी भी ऐसा नहीं करता। अपनी ही जमीन के लिए इतनी जद्दोजहद करनी पड़ रही है मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा कि कैसे इस जंजाल से बाहर निकला जाए। मेरे लिए तो वह जमीन का टुकड़ा अब गले की हड्डी बन चुका था लेकिन बात मेरे दिल पर भी लगी थी इसलिए ना तो मैं पीछे हटने को तैयार था और ना ही गौतम पीछे हटने को तैयार थे। एक दिन पुलिस इस्पेक्टर हमारे पास आये और कहने लगे देखिए गोमती दास जी आप और गौतम जी आपस में समझौता कर लीजिए यह दोनों के लिए ठीक रहेगा बेवजह कब तक आप दोनों कोर्ट में लड़ाइयां लड़ते रहेंगे और वैसे भी अब जमीन का निपटारा होने वाला नहीं है।

वह इस्पेक्टर मुझे बड़े समझदार दिखे और गनीमत रही कि वह मेरे दूर के रिश्तेदार भी निकल गए। उन्होंने मुझे एक दिन पुलिस स्टेशन में बुलवाया और कहा देखिए गोमती दास जी आप हमारे रिश्तेदार भी हैं अब मैं आपको यही सलाह दूंगा कि आप दोनों आपस में समझौता कर लीजिए इसमे आप भी अपना समय बर्बाद करेंगे और गौतम जी भी अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। मैंने उन्हें कहा मैं तो अपनी जमीन वापस लेकर ही रहूंगा और मैं गौतम को बिल्कुल भी छोड़ने वाला नहीं हूं वह कहने लगे मैं आपको गौतम से मिलवा देता हूं आप एक बार उनसे मिल लीजिए। उन्होंने मुझे जब पुलिस स्टेशन में गौतम से मिलवाया तो वह भी अपनी गलती पर पछता रहा था और वह मुझे कहने लगा की आप ही वह जमीन रख लीजिए। मुझे तो ऐसा लगा जैसे कि मुझे किसी ने वह जमीन दोबारा लौटा दी हो गौतम के मुंह से यह बात सुनकर मुझे अच्छा लगा। गौतम को भी अपनी गलती का एहसास हो चुका था क्योंकि उसने जिस प्रकार से मेरी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी उससे उसे भी बड़ा नुकसान हुआ था और वह भी कोर्ट कचहरी के चक्कर में पूरी तरीके से उलझ कर रह गया था जिससे कि उसके घर की स्थिति भी खराब होने लगी थी। मेरे दिल मे अब भी गौतम के लिए नफरत भरी हुई थी उसे कभी भी मै माफ नहीं कर सकता था। उसी के चलते मैंने उससे एक दिन बड़े प्यार से बात की और कहा देखो गौतम तुमने अब समझोता कर लिया है और अब सब कुछ ठीक हो चुका है लेकिन तुम्हारा भी तो इसमें काफी नुकसान हुआ होगा। गौतम मुझे कहने लगा बस आप पूछिए मत मैं ही जानता हूं कि किस प्रकार से कोर्ट में मेरी हालत खराब हुई और आर्थिक रूप से भी मैं काफी परेशानी में चल रहा हूं। मुझे इस बात की खुशी थी कि गौतम पूरी तरीके से आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुका है और उसके पास कोई भी काम नहीं था।

वह सिर्फ अपने लालच की वजह से यह सब भुगत रहा था मुझे इस बात की तो खुशी थी कि कम से कम गौतम को मैंने सबक तो सीखा ही दिया था हालांकि मेरा भी उसमें बहुत नुकसान हुआ था। गौतम की आर्थिक स्थिति को मै भली-भांति जानता था इसलिए उसके परिवार में उसकी बड़ी बेटी जो की दिखने में बड़ी ही लाजवाब और छरहरे बदन की थी उसकी शादी अब तक नहीं हो पाई थी। उसके भी कुछ अरमान थे लेकिन गौतम की घर की स्थिति इतनी पतली थी कि वह अपने परिवार का अच्छे से भरण-पोषण भी नहीं कर पा रहा था। मैंने इसी का फायदा उठाते हुए उसकी बड़ी लड़की मीना के साथ शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए थे शुरुआत में तो वह मुझ देख कर दूर चली जाती थी लेकिन धीरे-धीरे मैंने उसे पैसों का लालच देना शुरू किया था। वह अब मेरे पास आने को तैयार हो चुकी थी जब पहली बार मैंने उससे होटल में ले जाकर चोदा था तो मुझे बड़ा मजा आया था। जब वह पहली बार मुझसे मिलने आई तो मैंने उसके नरम और गुलाबी होठों को बड़ी देर तक चूसा और उनका रसपान कर के मुझे बड़ा आनंद आ रहा था।

मैंने जब उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाना शुरू किया तो मेरे अंदर से गर्मी बाहर निकलने लगी और जैसे ही मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया तो मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था। मैंने मीना के बदन से सारे कपड़े उतार दिए थे जब मैंने उसके बदन से सारे कपड़े उतारे तो मैंने उसकी गीली हो चुकी योनि को अपनी उंगली से सहलाना शुरू किया जिससे कि वह उत्तेजित हो गई। मैंने जैसे ही अपने मोटे से लंड को उसकी योनि के अंदर धक्का देते हुए घुसाया तो उसकी योनि से तरल पदार्थ कुछ ज्यादा ही तेजी के साथ बाहर को निकलने लगा। मेरे धक्को से उसका शरीर हिलने लगा क्योंकि उसे पैसों की सख्त जरूरत थी इसलिए वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए आई थी। मैं उसके बाप की स्थिति अच्छे से जानता था मैंने उसे घोड़ी बनाकर काफी देर तक चोदा। जब मेरा मन नहीं भरा तो मैंने अपने लंड पर तेल की मालिश करते हुए उसकी गांड मे लंड को घुसा दिया। जैसे ही उसकी गांड के छेद में मेरा लंड प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी और उसके मुंह से बड़ी तेज चीख निकलने लगी। उसी के साथ मुझे उसे धक्के देने में इतना आनंद आने लगा कि कुछ समय बाद मेरे वीर्य की पिचकारी से मैंने उसके पूरे बदन को नहला दिया। जब भी मीना को पैसों की जरूरत होती तो मीना मेरे पास दौड़ी चली आती और मैं उसे चोदकर खुश कर दिया करता।


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