पापा के दोस्त की बेटी को ऑफिस में चोदा

Papa ke dost ki beti ko office me choda:

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मेरा नाम राजेश है मैं अपने पिताजी के साथ ही काम करता हूं,  मेरी उम्र 28 वर्ष है। मेरे पिताजी का इलेक्ट्रॉनिक्स आइटमो का काम है। मेरे पिताजी का एक बहुत बड़ा शोरूम है और वह उसमें ही काफी वक्त से काम कर रहे हैं। मैंने भी अपनी पढ़ाई के बाद उन्ही के साथ काम करना शुरू कर दिया। मेरे पिताजी का काम बहुत अच्छा चलता है और उनके बहुत ही पुराने कस्टमर हैं जो कि हमसे सामान खरीदते हैं। मेरे पिताजी हमेशा ही उन्हें सामान अच्छे दामों पर देते हैं, जिससे कि वह हमेशा ही हमारे पास आते हैं और मेरे पिताजी का उनसे बहुत ही अच्छा संबंध रहता है। मेरी मां भी एक ब्यूटी पार्लर चलाती हैं और वह बहुत ही बिजी रहती है इसलिए वह ज्यादा वक्त मुझे नहीं दे पाती है और ना ही उनके पास ज्यादा समय होता है क्योंकि उनका पार्लर भी बहुत अच्छा चल रहा है और उनके सारे ही हाई प्रोफाइल क्लाइंट है।

मेरी छोटी बहन तो अपने कॉलेज की मस्तियों में खोई रहती है, वह तो बिल्कुल अपने कॉलेज में ही मस्त है। उसका कभी भी कुछ पता नहीं चलता, कभी वह घर पर जल्दी आ जाती है और कभी वह कई दिनों तक घर पर ही नहीं रहती। मेरे पिताजी ने उसे बहुत ही छूट दे रखी है इस वजह से वह मेरे पिताजी की बातों को बिल्कुल भी नहीं मानती। मैं अपने पिताजी के साथ सुबह काम पर जाता हूं और शाम को ही उनके साथ काम से घर लौटता हूं। एक दिन हम लोग अपनी दुकान में बैठे हुए थे और आपस में बात कर रहे थे, उस दिन मेरे पिताजी मुझे कहने लगे कि मेरे एक मित्र है वह विदेश में रहते हैं लेकिन वह लोग अब यही आना चाहते हैं। मैंने उन्हें कहा कि वह विदेश में क्या करते हैं, वह कहने लगे कि वह विदेश में एक अच्छी कंपनी में नौकरी करते है लेकिन अब उन्होंने वहां नौकरी छोड़ दी है और अब वह यहीं पर कुछ काम करना चाहते हैं। उन्हें उनके साथ में कोई ईमानदार पार्टनर चाहिए जो उनके साथ काम कर पाए। मैंने अपने पिताजी से कहा कि मैं भी कुछ नया काम करने की सोच रहा हूं यदि आप मुझे उनसे मिलवा दे तो हम लोग आपस में बात करके कोई नया काम शुरू कर देते हैं।

मेरे पिताजी कहने लगे ठीक है मैं तुम्हें उनसे मिलवा देता हूं और मेरे पिताजी ने मुझे उन से मिलवा दिया। जब मैं उनसे मिला तो उस दिन उनके साथ उनकी लड़की भी थी। उन्होंने अपनी लड़की का परिचय करवाया और मेरे पिताजी ने भी उन अंकल से मेरा परिचय करवाया। उनकी लड़की का नाम आरोही है और आरोही से जब मैं पहली बार मिला तो वह मुझे बहुत अच्छी लगी क्योंकि वह भी अपने पिताजी के साथ काम शुरू करना चाहती थी लेकिन जिस प्रकार की उसकी सोच है, उससे मुझे लगा कि वह बहुत ही आगे तक जाएगी।  वह अपने काम के प्रति बहुत सीरियस है। मेरे पिताजी ने अपने दोस्त से कहा कि मेरा लड़का भी आपके साथ काम शुरू करना चाहता है। अब हम दोनों ने आपस में बात की और आरोही भी वहीं बैठी हुई थी, वह भी हमसे बात कर रही थी। अब हम लोगों ने मिलकर एक काम शुरू कर दिया। हमने अपनी शर्ट बनाने की कंपनी खोली, जिसमें कि हम लोग खुद की बनाई हुई शर्ट बेच रहे थे और आरोही भी उसमें हमारी बहुत मदद करती थी। आरोही ने सारा मार्केट का काम संभाला हुआ था और वह काफी बड़े ऑर्डर मार्केट से उठा रही थी, जिससे कि हमें बहुत ही मुनाफा हो रहा था। धीरे-धीरे हम दोनों का काम अच्छे से चलने लगा लेकिन उसी बीच उन अंकल की तबीयत खराब हो गई है और वह घर पर ही थे। उन्होंने मुझे फोन किया और कहने लगे कि मैं कुछ दिनों तक ऑफिस नहीं आ पाऊंगा इसलिए आरोही ही अब काम संभालेगी। मैं और मेरे पिता जी उनसे मिलने के लिए उनके घर भी गए। हम लोग जब उनके घर गए तो वह बहुत ज्यादा बीमार थे, वह अपने बिस्तर पर ही लेटे हुए थे। वह ज्यादा बात भी नहीं कर पा रहे थे इसलिए हमने उनसे ज्यादा बात नहीं की। हमने उनके हालचाल पूछें और फिर हम लोग अपने घर वापस लौट आये, उसके बाद मैं अपने काम पर ही व्यस्त था। आरोही और मेरे बीच बहुत अच्छी दोस्ती हो गई थी और हम दोनों बहुत ही अच्छे से काम संभाल रहे थे। हम दोनों अपनी मेहनत से काम कर रहे थे और हमें बहुत अच्छे ऑर्डर भी मिलने लगे। हम लोग कई बड़े ऑर्डर उठाते, जिससे कि हमें बहुत मुनाफा हो रहा था।

अब हम लोग काम के सिलसिले में बाहर भी जाने लगे और हम लोगो ने कई ऑर्डर अन्य राज्यों से भी उठाए। हमारा काम बहुत अच्छा चलने लगा तो हम लोगों ने अब अपना काम और बढ़ा दिया। हम लोग जींस भी बनाने लगे थे, हमारे द्वारा बनाई हुई जींस जितने भी दुकानदारों के यहां पर जाती तो वह कहते कि आप बहुत ही अच्छी जीन्स बनाते हैं क्योंकि हम लोग जो कपड़ा अपनी जींस में इस्तेमाल करते है वह बहुत ही अच्छा होता है और उसकी गुणवत्ता बहुत ही अच्छी होती है, इसी वजह से मार्केट में हमारे कपड़ों की डिमांड बहुत रहती थी। आरोही और मैं हमेशा ही साथ में बैठकर बिजनेस के बारे में बात करते हैं और हमेशा ही सोचते कि किस प्रकार से हम बिजनेस को और ज्यादा आगे बढ़ा सकते हैं। आरोही काम को लेकर इतनी सीरियस थी कि उसने मुझसे कभी भी कुछ और बात नहीं कि। हम दोनों सिर्फ काम के बारे में ही बात करते थे। एक दिन हम दोनों बैठे हुए थे तो मैं आरोही से पूछने लगा कि क्या सिर्फ तुम काम को लेकर ही इतनी सीरियस होती हो, मैंने आरोही से कहा कि मैंने आज तक तुम्हें कभी भी हंसते हुए नहीं देखा और ना ही तुमने कभी मुझसे कुछ मजाक किया है।

वह मुझसे कहने लगी कि मैं अपने काम को लेकर बहुत सीरियस हूं इसलिए मैं अपने जीवन में सिर्फ अपने काम को ही महत्व देती हूं। मैंने उसे कहा यह तो अच्छी बात है कि तुम सिर्फ अपने काम के बारे में सोचती हो परंतु तुम अपने लिए भी वक्त निकाल पाती हो या नहीं, वह कहने लगी कि मैंने कभी भी इस बारे में नहीं सोचा। हम दोनों ही अपने ऑफिस में बैठे हुए थे और वह भी मुझसे कहने लगी कि मैं कुछ काम कर के अभी वापस लौटती हूं। वह ऑफिस से चली गई और करीबन एक घंटे बाद वापस लौटी। जब आरोही वापिस लौटी तो वह मेरे सामने ही बैठी हुई थी और वह बहुत पसीना हो रही थी। मैंने उसे कहा कि तुम्हें बहुत पसीना आ रहा है मैंने उसे पानी की बोतल दी तो मेरा हाथ उसके स्तनों पर लग गया। जब मेरा हाथ आरोही के स्तनों पर लगा तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने भी आरोही के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया लेकिन उसका भी मूड खराब हो गया और उसने भी अपने कपड़े खोल दिए। वह मेरे पास आकर बैठ गई उसने मेरी पैंट से मेरे लंड को बाहर निकालते हुए अपने मुंह में समा लिया और मेरे लंड को अपने गले तक लेने लगी। मुझे इतना अच्छा महसूस हो रहा था जब वह मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले रही थी और उसे चूस रही थी। उसने काफी देर तक ऐसा किया और अब मेरा पानी भी निकलने लगा था। आरोही की योनि पर एक भी बाल नहीं थे और मैं उसकी योनि को अपनी उंगली से सहलता जा रहा था। मैंने अपने लंड को आरोही के योनि में डाल दिया जैसे ही उसकी योनि में मेरा लंड गया तो उसकी योनि से खून निकल आया और वह चिल्लाने लगी। वह पूरी मचलने लगी थी लेकिन मैंने उसे बिल्कुल भी नहीं छोड़ा और उसे में धक्के देते रहा। मुझे इतना आनंद आ रहा था जब मैं उसे चोद रहा था। वह मुझसे कहती कि मुझे बहुत अच्छा लगता है जब तुम मुझे झटके मार रहे हो और मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब मैं उसको चोद रहा था। क्योंकि जिस प्रकार से वह मचल रही थी मुझे उसे देखकर अंदर से कुछ ज्यादा ही उत्तेजना आने लगी और मै उसे बड़ी तेजी से झटके मारने लगा लेकिन हम दोनों के शरीर से इतनी ज्यादा गर्मी बाहर निकलने लगी कि मेरा वीर्य न जाने कब आरोही के योनि में गिर गया मुझे पता भी नहीं चला। उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए हम दोनों आपस में बैठे हुए थे लेकिन हम दोनों बहुत थक चुके थे। उसके बाद से तो मैं हमेशा ही आरोही को बहुत अच्छे से चोदता हूं और उसे भी बड़ा आनंद आता है।


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