पैंट से बाहर झाकंती टाइट गांड

Antarvasna, hindi sex story: मैं ट्रेन में सफ़र कर रहा था ट्रेन में सफर करने के दौरान मेरी मुलाकात रोहन के साथ हुई रोहन से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई क्योंकि रोहन और मैं एक ही शहर लखनऊ के रहने वाले थे इसलिए हम दोनों की काफी जमने लगी। रोहन और मैं जब लखनऊ पहुंचे तो रोहन ने मुझसे मेरा नंबर लिया और कहा अमन कभी तुम्हें समय मिले तो तुम घर पर जरूर आना मैंने रोहन को कहा क्यों नहीं। पापा मेरा इंतजार कर रहे थे मैं जब रेलवे स्टेशन से बाहर आया तो उन्होंने मुझे कहा अमन बेटा तुम कैसे हो मैंने उन्हें कहा पापा मैं तो ठीक हूं। उन्होंने मुझे कार में बैठने के लिए कहा और हम लोग घर चले आए जब हम लोग घर आए तो मां ने मेरे लिए अपने हाथ का बनाया हुआ स्वादिष्ट खाना तैयार किया हुआ था। मां मुझे कहने लगी बेटा तुम खाना खा लो मैं नहाने के लिए चला गया और करीब आधे घंटे बाद नहा कर जब मैं बाथरूम से बाहर निकला तो मैं और पापा खाने की टेबल में बैठे हुए थे।

पापा ने मम्मी को कहा कि सुधा तुम भी खाने के लिए आ जाओ मां भी हमारे साथ ही बैठ गई और हम सब लोगों ने दोपहर का लंच किया। लंच करने के बाद मुझे बहुत गहरी नींद आ रही थी क्योंकि मैंने काफी ज्यादा खाना खा लिया था इसलिए मैं अपने रूम में आराम करने के लिए चला गया। कुछ देर आराम करने के बाद पापा मेरे रूम में आए और कहने लगे कि अमन बेटा तुमने अब आगे क्या सोचा है तो मैंने पापा से कहा पापा मेरी पढ़ाई तो पूरी हो चुकी है अब आपके साथ ही मैं आपके बिजनेस में हाथ बढ़ाना चाहता हूं। पापा का मसालों का कारोबार है और वह काफी समय से इस काम को कर रहे हैं पहले इसे मेरे दादाजी किया करते थे और मैं चाहता हूं कि अब मैं इसे आगे बढ़ाऊँ। मैंने जब पापा से अपनी इच्छा जाहिर की तो पापा कहने लगे कि अमन बेटा मुझे बहुत खुशी होगी अगर तुम काम को संभालो मैंने पापा को कहा हां पापा मैं आपके साथ अब आगे काम को संभालना चाहता हूं।

पापा मेरे साथ कुछ देर बैठे हुए थे उस वक्त करीब 5:30 बज रहे थे मां ने पापा और मुझे चाय पीने के लिए आवाज़ दी और हम दोनों ही हॉल में चले गए। अब हम लोगों ने चाय पी और पापा कहने लगे कि मैं रमेश से मिल आता हूं रमेश मेरे चाचा जी का नाम है पापा और रमेश चाचा साथ में ही काम करते हैं रमेश चाचा की कोई भी संतान नहीं है जिस वजह से वह मुझे ही अपना वारिश समझते हैं और मुझे वह बहुत प्यार करते हैं। अब पापा जा चुके थे और मैं घर पर ही था मैंने मां से कहा मां मैं भी अपने दोस्तों से मिल आता हूं फिर मैं अपने दोस्तों से मिलने के लिए चला गया मैं जब उस दिन अपने दोस्त निखिल को मिला तो निखिल से मिलकर मैं बहुत खुश था निखिल से काफी दिनों बाद मैं मिल रहा था। निखिल ने मुझे आयशा के बारे में बताया निखिल ने कहा कि आयशा और वह दोनों रिलेशन में है आयशा हमारे साथ कॉलेज में ही पढ़ती थी लेकिन मैंने कभी सोचा नहीं था कि वह निखिल के साथ रिलेशन में रह सकती है क्योंकि निखिल और वह कभी आपस में बात करते ही नहीं थे और ना ही उन दोनों की बिल्कुल आपस में बनती थी। निखिल ने जब मुझे इस बारे में बताया तो मैं चौक गया मैंने निखिल को कहा चलो यह तो अच्छी बात है कि तुम्हें आयशा का साथ मिला वैसे आयशा बहुत ही अच्छी लड़की है। निखिल मुझे कहने लगा कि हां तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो अमन पहले मुझे लगता था कि आयशा बहुत ही घमंडी है लेकिन जब से हम दोनों रिलेशन में है तब से मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं और आयशा मेरी हर एक बात मानती है। मैं और निखिल साथ में काफी देर तक रहे निखिल ने मुझे कहा कि क्या कल तुम फ्री हो मैंने उसे कहा मैं तो फ्री ही हूं भला मेरा क्या काम होगा मैं तो घर पर ही हूं। निखिल मुझे कहने लगा कि ठीक है कल मैं आयशा को भी कह दूंगा और वह भी हमारे साथ मूवी देखने के लिए आ जाएगी मैंने निखिल से कहा ठीक है उसके बाद मैं अपने घर चला आया। जब मैं घर वापस लौटा तो उस वक्त पापा भी घर आ चुके थे तो पापा ने मुझे कहा अमन बेटा कल तुम मेरे साथ ऑफिस चलना मैंने पापा से कहा पापा लेकिन कल तो मैं निखिल के साथ मूवी देखने के लिए जाऊंगा। पापा ने कहा ठीक है बेटा तुम फिर मेरे साथ कुछ दिनों बाद ऑफिस चलना मैंने पापा से कहा ठीक है पापा। अगले दिन मैं सुबह तैयार हो चुका था और मैंने निखिल को फोन किया तो निखिल मुझे कहने लगा कि अमन मैं तुम्हें लेने के लिए तुम्हारे घर ही आ रहा हूं।

निखिल और आयशा मेरे घर पर ही आ गए जब वह दोनों आए तो मैंने आयशा को अपनी मां से मिलवाया पापा तो घर पर नहीं थे निखिल पहले भी मां से कई बार मिल चुका था क्योंकि वह घर पर अक्सर आया जाया करता था। अब हम लोग मूवी देखने के लिए चले गए उस दिन हम लोगों ने मूवी देखी और उसके बाद हम लोगों ने साथ में अच्छा समय बिताया हम लोग फूड कोर्ट में बैठे हुए थे तो मैंने आयशा को पूछा कि आयशा तुमने आगे क्या सोचा है। वह मुझे कहने लगी कि अमन मैंने फिलहाल तो ऐसा कुछ नहीं सोचा है लेकिन मैं तो निखिल के साथ शादी करना चाहती हूं आयशा के पापा भी एक बिजनेसमैन है और वह मेरे पापा को भी जानते थे मुझे इस बात का पता नहीं था जब आयशा ने मुझे इस बारे में बताया तो मुझे यह बात पता चली। हम लोग उस दिन काफी देर तक साथ में रहे फिर निखिल ने मुझे मेरे घर छोड़ा और आयशा और वह अपने घर के लिए चले गए कुछ दिनों बाद मैं भी पापा के साथ ऑफिस जाने लगा और मैं लोगो से मिलने लगा था। मैं पापा के साथ पहले काम देखना चाहता था पापा ने काफी मेहनत से इस काम को आगे बढ़ाया था पापा मुझे काम की हर एक बारीकियां बता रहे थे तो मुझे भी अच्छा लगता।

पापा भी काफी खुश थे कि मैं उनके साथ मन लगाकर काम कर रहा हूं। हमारे ऑफिस मे एक लड़की काम करने के लिए आई पापा ने उसे एकाउंट्स का काम दिया था उसका नाम ललिता है। ललिता दिखने मे बहुत ही सुंदर है जब भी वह ऑफिस में आती तो मैं उसे देखकर हमेशा खुश हो जाया करता उसके सुडौल स्तन देख मेरा लंड हमेशा तन कर खड़ा हो जाता। एक दिन मैंने उसकी बड़ी गांड पर अपने हाथ को लगाया तो वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी। उसके अंदर भी कुछ तो चल रहा था मैं जब भी उससे बात करता तो वह हमेशा ही मुझसे बात करके मुस्कुराती थी उसकी मुस्कुराहट मे कुछ तो राज छुपा हुआ था जो कि मैं अभी तक नहीं समझ पाया था लेकिन उसकी चूत मारने के लिए मै उतावला था। एक दिन वह ऑफिस में टाइट शर्ट और पैंट पहने हुए आई हुई थी जिसमें कि उसकी गांड का उभार और उसके बड़े स्तन साफ नजर आ रहे थे। पापा उस दिन ऑफिस में नहीं आए थे इसलिए मैंने उसे अपने कैबिन में बुला लिया था वह केबिन में आई। जब वह मेरे सामने बैठी हुई थी तो उसे देख मेरा लंड तन कर खड़ा हो रहा था मैं उसकी चूत मारने के लिए बहुत ज्यादा उतावाला था। मैंने जब उसके हाथ को पकड़ लिया तो वह कहने लगी सर यह आप क्या कर रहे हैं? मैंने उससे कहा तुम मुझे बहुत ही पसंद हो वह इस बात से मुस्कुराने लगी। मैंने उसे कहा क्या तुम्हें घूमने का शौक है तो वह कहने लगी हां सर मुझे घूमने का बड़ा शौक है। मैंने उसे कहा चलो आज कहीं घूम आते हैं वह भी मुझे मना ना कर सकी। मैं उसे अपने साथ घुमाने के लिए ले गया हम दोनों लॉन्ग ड्राइव पर निकले मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा तो वह मेरी तरफ देख रही थी।

जब मैं उसकी जांघ को सहला रहा था तो उसने भी अपने हाथ को मेरे लंड की तरफ बढाया और मेरे लंड को दबाना शुरू किया तो मैं समझ गया अब वह मुझसे चूत मरवाने के लिए तैयार है। मैंने गाड़ी को एक किनारे लगाया और उसके होठों को चूम लिया था मैंने उसके होठों को चूमा तो वह उत्तेजित हो गई। मैंने उसे अपने लंड को चूसने के लिए कहा उसने अपने होठों से मेरे लंड को चूसना शुरू किया। मैं फिर वापस ऑफिस लौट आया जब हम लोग ऑफिस लौटे तो हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ी हुई थी। मैंने अपने केबिन को अंदर से बंद कर लिया और उसकी पैंट को मैंने उतारा तो उसकी फूलदार पैंटी को भी मैंने उतार दिया और उसकी चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसाना चाहा लेकिन उसकी चूत के अंदर मेरी उंगली नहीं जा रही थी। मैंने उसे कहा तुम अपनी शर्ट उतार दो उसने अपनी शर्ट को उतारा जब मैंने उसके स्तनों को देखा तो मैं पागल हो गया। मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया मुझे अच्छा लग रहा था जब मैं उसके स्तनों को चूस रहा था।

मैंने उसे कुर्सी पर बैठने के लिए कहा और मैने उसके पैरों को चौडा कर लिया उसकी चूत मेरे सामने थी उसकी गोरी और मुलायम चूत देखकर मै उसकी चूत को चाटने लगा। मैने उसकी चूत को चाटने से उसकी गर्मी को पूरा बढ़ा दिया। मैंने उसकी चूत पर लंड को लगाया तो वह मुझे कहने लगी आप मेरी चूत मे अपने लंड को घुसा दो। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो ललिता ने मुझे कहा आपका लंड बहुत ही मोटा है। मैंने उसे कहा तुम्हारी बड़ी गांड देख मेरा मन तुम्हारी चूत मारने का कब से कर रहा था लेकिन आज तुमने मुझसे अपनी चूत मरवा ही ली, वह मुस्कुराने लगी। मैंने उसके पैरों को चौड़ा कर के उसे तेज गति से चोदना शुरु कर दिया उसकी सिसकियो मे लगातार बढ़ोतरी हो रही थी और उसकी गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ने लगी थी कि वह मुझे कहने लगी सर आप अपने माल को मेरे स्तनों पर गिरा दीजिए। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला मैं समझ चुका था कि उसकी इच्छा पूरी हो चुकी है मैंने अपने माल को उसके स्तनों पर गिराया। उसने मेरे लंड को चूसना शुरू किया बहुत देर तक वह मेरे लंड को चूसती रही फिर उसने अपने कपड़े पहने और वह अपना काम करने लगी।


Comments are closed.