पैसो की बौछार होने लगी

Paison ki bauchhar hone lagi:

Hindi sex stories, antarvasna मैं झारखंड का रहने वाला हूं मेरा नाम सोनू है मैं एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता हूं मेरे पिताजी मजदूरी कर के घर का खर्चा चलाया करते थे लेकिन एक दिन उनके पैर पर एक बड़ा पत्थर गिर गया जिससे कि वह चोटिल होकर घर पर ही रहते थे। मैं भी छोटे-मोटे काम कर के घर का खर्चा चलाया करता था मेरे सपने हमेशा से ही बड़े थे मैंने कुछ करने का सोचा था लेकिन अपने घर की परिस्थितियों की वजह से मैं कुछ कर ही नहीं पाया। मेरी उम्र 24 वर्ष की हो चुकी है मेरे पापा की स्थिति भी ठीक नही थी। मैं अपनी पढ़ाई भी नहीं कर पाया मैंने दसवीं के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी क्योंकि मुझे लगा कि मुझे कुछ कर लेना चाहिए इसलिए मैंने गांव के ही एक दुकानदार के पास काम करने के बारे में सोचा और उसके पास ही मैंने काफी वर्षों तक काम किया।

जिससे कि हमारे घर में कुछ पैसे आ जाया करते थे मैं सिर्फ पैसों के लिए काम किया करता था लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे ऐसा क्या करना चाहिए जिससे कि मेरा जीवन बदल जाए। मैं काफी परेशान हो चुका था मुझे सिर्फ यह चिंता सताती रहती थी कि मेरे परिवार का क्या होगा। मैं जब अपनी मां के चेहरे पर देखता तो मुझे उनकी मायूसी साफ नजर आती और वह कितने मजबूर थे यह भी मुझे मालूम पड़ता लेकिन उसके बावजूद भी मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैंने फैसला कर लिया कि मुझे कुछ करना चाहिए उसी वक्त मुझे मेरा एक दोस्त मिला जो कि हमारे ही गांव का है मैंने उसे कहा यार मुझे तुम्हारे साथ ही काम करना है। वह मुझे कहने लगा लेकिन तुम कोलकाता आकर क्या काम करोगे मैंने उसे कहा बस मुझे तुम्हारे साथ चलना है उसने मुझे कहा ठीक है तुम मेरे साथ चलना। मुझे कुछ मालूम नहीं था कि मुझे क्या करना है लेकिन मैं फिलहाल एक बड़े शहर जाना चाहता था क्योंकि गांव में इतने समय तक काम करने के बदले ना तो कभी अच्छे पैसे मिलते और ना ही मेरे घर की स्थिति में कुछ सुधार हो रहा था। मेरे पिताजी भी मजदूरी कर के घर का खर्चा चला ही रहे थे लेकिन उनकी उम्र भी होने लगी थी वह भी भला कब तक मजदूरी कर कर के घर का खर्चा चलाते इसी वजह से मैंने कोलकाता जाने का फैसला किया।

मैं अपने दोस्त के साथ कोलकाता चला गया उसने मुझे एक फैक्ट्री में काम पर लगा दिया मैं उस फैक्ट्री में दिन रात मेहनत करता मुझे अपने गांव से बेहतर तो कुछ पैसे मिल रहे थे लेकिन मुझे यह समझ नहीं आता कि क्या मैं जिंदगी भर दिन रात ऐसी ही मेहनत करता रहूंगा। मैं सुबह के वक्त निकल जाया करता और शाम को घर लौटता मुझे कई बार अपने ऊपर बहुत तरस आता था। मैं जब बड़ी गाड़ियां और बड़े-बड़े घर देखता तो मुझे लगता क्या जिंदगी भर में ऐसे ही मेहनत करता रहूंगा मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था मैं काफी परेशानी मे रहता था। मुझे अपने माता पिता की याद हमेशा आती रहती लेकिन मेरी मजबूरी मेरे आड़े आ जाती तभी उसी दौरान शायद मेरी किस्मत बदलने वाली थी एक दिन मैं सुबह काम से निकल रहा था तो रास्ते में काफी भीड़ थी तभी मेरे आगे से एक व्यक्ति चल रहे थे लेकिन शायद उनकी नजर में वह गड्ढा नहीं आया और वह जैसे ही आगे बढ़े तो उनका पैर उस गड्ढे में फस गया। पीछे से मैं ही आ रहा था तो मैं दौड़ता हुआ उनके पास गया और मैंने उनका पैर निकालने की कोशिश की लेकिन मुझे काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। वहां पर आसपास के लोगों ने भी मेरी काफी मदद की और जब उनका पैर गड्ढे से बाहर निकाला तो वह मुझे कहने लगे बेटा तुम्हारा क्या नाम है। मैंने उन्हें बताया मेरा नाम सोनू है वह मुझे कहने लगे तुम्हारा बहुत धन्यवाद यदि तुम समय पर नहीं आते तो शायद मुझे बहुत दिक्कत होती। मैंने उन्हें कहा नहीं अंकल ऐसी कोई बात नहीं है यह तो मेरा फर्ज था उन्होंने मुझसे पूछा बेटा तुम क्या करते हो तो मैंने उन्हें बताया मैं एक फैक्ट्री में काम करता हूं। मुझे नहीं मालूम था कि वह इतने अमीर होंगे वह बड़े ही सिंपल और साधारण से लग रहे थे उन्होंने मुझे कहा तुम मुझे अपना नंबर दे दो उन्होंने मुझसे मेरा फोन नंबर ले लिया और मैंने उन्हें अपना नंबर दे दिया।

मैंने जब उन्हें अपना मोबाइल नंबर दिया तो मुझे नहीं मालूम था कि वह मुझे फोन करने वाले हैं मैं अगले दिन फैक्टरी में था तो मुझे मेरे नंबर पर एक अनजान नंबर से फोन आया। मैंने फोन उठाया तो वह वही अंकल थे वह मुझे कहने लगे मैं गोविंद बोल रहा हूं मैंने उन्हें कहा जी अंकल कहिये आप कैसे हैं वह कहने लगे मैं ठीक हूं मैं तुमसे मिलना चाहता था। मैंने उन्हें कहा मैं तो अभी फैक्ट्री में हूं मैं आपसे अभी नहीं मिल पाऊंगा वह मुझे कहने लगे मैं तुम्हें अपने घर का पता दे रहा हूं तुम मेरे घर पर आ जाना। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं जब शाम के वक्त घर लौट आऊंगा तो मैं आपसे मिलता हुआ चलूंगा उन्होंने मुझे मेरे मोबाइल नंबर पर अपने घर का पता भेज दिया। जब उन्होंने अपने घर का पता मुझे भेजा तो मैं शाम के वक्त उनके घर पर चला गया मैं शाम को उनके घर पर गया तो मैंने देखा उनका घर काफी बड़ा है। मैं उनका घर देखकर दंग रह गया मुझे तो उम्मीद भी नहीं थी कि उनका घर इतना बड़ा होगा लेकिन जब मैंने उनका घर देखा तो मैं पूरी तरीके से चौक गया वह मुझे कहने लगे बेटा तुम अंदर आओ। जब मैं उनके हॉल में बैठा तो मैं घबरा रहा था लेकिन उन्होंने मुझे अपने परिवार से मिलाया और कहा यदि कल यह व्यक्ति सही समय पर नहीं आता तो शायद मेरी जान भी जा सकती थी लेकिन इसी की वजह से आज मैं सही सलामत हूं।

मुझे नहीं मालूम था कि वह दिल के इतने अच्छे हैं उन्होंने मुझे अपने पूरे परिवार से मिलवाया और उन लोगों ने मेरी बड़ी इज्जत और खातिरदारी की उन्हें मेरी गरीबी का अंदाजा नहीं था। जब उन्होंने मुझे कहा यदि तुम्हें बुरा ना लगे तो तुम हमारे घर पर काम कर सकते हो मैंने उन्हें कहा लेकिन मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूं और भला मैं आपके घर पर क्या काम करूंगा वह कहने लगे तुम्हें कुछ नहीं करना बस तुम्हें घर पर रहना है और घर की देखभाल करनी है। उनका घर इतना ज्यादा बड़ा था कि उनके घर पर कई नौकर चाकर थे और उन्हें ही देखने के लिए उन्होंने मुझे रख लिया मैंने भी उनके घर पर काम करने के बारे में सोच लिया मैं अब उनके घर पर ही काम करने लगा था। मुझे वहां बहुत अच्छा लगता वह लोग मुझे बहुत ही सम्मान देते हैं और उसके बदले में वह मुझे अच्छे खासे पैसे भी दे दिया करते थे। उनका मुझ पर बहुत एहसान था और गोविंद जी तो मुझे बहुत सम्मान दिया करते वह मेरी ईमानदारी से बहुत ज्यादा प्रभावित थे इसलिए मैं उनका बहुत ही चाहिता बन चुका था। मुझे उनके घर पर करीब एक साल हो चुका था और इस एक साल में मैंने उनके परिवार के साथ बहुत ही अच्छे तरीके से घुलना मिलना सीख लिया था। मैं उनके परिवार के साथ ही रहता था उन्होंने मुझे एक कमरा भी दिया हुआ था जिसमें कि मैं रहता था उनके घर में उनके चार लड़के हैं और उनका परिवार काफी बड़ा है। घर कि मैं ही सारी जिम्मेदारी संभालता था और घर में जो भी चीजों की आवश्यकता होती या कुछ भी कभी जरूरत होती तो सब लोग मुझे ही कहा करते थे। गोविंद जी का पूरा परिवार मुझे घर का सदस्य मानता था और उसी दौरान उनकी बेटी घर पर आई मैं उसे पहली बार ही मिला था क्योंकि उनकी बेटी घर पर बहुत कम आती थी।

वह शादीशुदा है लेकिन ना जाने उसके अंदर इतना घमंड क्यों भरा पड़ा है वह मुझसे भी बहुत गलत तरीके से पेशाती थी लेकिन एक दिन मैंने उसके घमंड को पूरी तरीके से चकनाचूर कर दिया और उसके बाद वह मुझ पर फिदा हो गई। उसका नाम मालती है वह मेरी तरफ आकर्षित हो चुकी थी और मुझसे वह हमेशा चिपकने की कोशिश किया करती एक दिन उसे मौका मिल गया तो उसने मेरे होठों को किस कर लिया। मैंने भी मालती को कसकर दीवार पर सटा दिया उस दिन हम दोनों के बीच बड़े ही गर्मजोशी से किस हुआ। मालती मेरे ऊपर डोरे डालने लगी जब मालती को मौका मिला तो उसने मुझे अपने पास बुला लिया उस दिन मैंने उसे उसके बिस्तर पर चोदा। वह बिस्तर पर लेटी हुई थी मैंने कुछ देर तक तो उसके होठों को किस किया और उसके बाद मैंने जब उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो वह उत्तेजित होने लगी। मैंने उसकी योनि को बहुत देर तक चाटा और उसके स्तनों का भी जमकर रसपान किया जब वह पूरी तरीके से जोश में आ गई तो वह मुझे कहने लगी अब मुझसे नहीं रहा जा रहा। उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी वह मेरे लंड को बड़े अच्छे से सकिंग करती उसने मेरे लंड से पानी भी निकाल कर रख दिया था मुझे काफी मजा आ रहा था।

उसी समय मैंने उसकी टाइट चूत के अंदर अपने लंड को धक्का देते हुए अंदर की तरफ को डाल दिया जब मेरा लंड अंदर घुसा तो वह चिल्लाने लगी मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू किए उसे बहुत मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत आनंद आता। मैं काफी तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था जैसे ही मेरा वीर्य मालती की योनि में गिरा तो वह मुझसे चिपक कर कहने लगी आज तो मजा आ गया। उसने अपनी चूतडो को मेरी तरफ किया और मैंने अपने लंड पर तेल को लगाते हुए मालती की गांड में घुसा दिया। मेरा लंड उसकी टाइट गांड में चला गया उसे बड़ा मजा आ रहा था मैं उसे तेजी से धक्के दे रहा था। उसके अंदर का जोश और भी बढ़ता जा रहा था जिससे कि वह मुझसे अपनी चूतड़ों को मिलाए जा रही थी और जैसे ही मेरा वीर्य मालती की गांड में गिरा तो वह खुश हो गई। उसके बाद तो वह मेरी दीवानी हो गई और मुझ पर पैसों की बौछार करने लगी जब भी उसे मेरे साथ सेक्स करना होता तो वह मुझे पैसे दिया करती।


Comments are closed.