पैर खोलो बस लंड चला गया

Antarvasna, hindi sex stories:

Pair kholo bas lund chala jaye मुझे अपने कॉलेज जाना था कॉलेज में हमारे एग्जाम चल रहे थे मैंने अपनी मां से कहा मां मैं कॉलेज जा रही हूं तो मां कहने लगी ठीक है बेटा लेकिन तुम कॉलेज से वापस कब लौटोगी तो मैंने मां से कहा मां मैं कॉलेज से तो शाम को ही लौट पाऊंगी। मां कहने लगी ठीक है बेटा तुम अपना एग्जाम अच्छे से देना और उसके बाद मैं कॉलेज चली गई। मैं पढ़ने में अच्छी थी इसलिए मेरे हमेशा से ही अच्छे नंबर आते रहे हैं जिससे कि मेरे पापा और मेरी मां को मुझसे बहुत ज्यादा उम्मीदें थी। मैं जब कॉलेज पहुंची तो मेरी सहेली मुझसे कहने लगी कि मुझे लगता है कि आज मेरा पेपर बिल्कुल भी अच्छा नहीं जाने वाला है क्योंकि मैंने पढ़ाई बिल्कुल भी नहीं की है। मैंने अपनी सहेली को कहा कि तुम चिंता मत करो तुम्हारा पेपर जरूर अच्छा जाएगा और मैं जब एग्जामिनेशन हॉल में गई तो वहां पर मैंने अपना एग्जाम दिया एग्जाम खत्म हो जाने के बाद मैं एग्जाम हॉल से बाहर चली आई।

मैं जब बाहर आई तो हमारे साथ ही पढ़ने वाला रोहित मुझसे कहने लगा कि महिमा तुम्हारा एग्जाम कैसा रहा? वह जब मुझसे यह सवाल पूछ रहा था तो तभी मेरी सहेली राधिका भी वहां पर आ गई मैंने उससे कहा कि मेरा एगजाम तो अच्छा हुआ। मैंने उन लोगों से भी पूछा कि तुम्हारा एग्जाम कैसा हुआ तो वह कहने लगे कि हमारा एग्जाम भी अच्छा हुआ और उसके बाद मैं अपने घर वापस लौट आई। जब मैं घर वापस लौटी तो मैं अपनी मां के साथ कुछ देर बैठी रही और मां से मैं बात कर रही थी मैंने मां को कहा मां आज मुझे तुमसे बात करने में अच्छा लग रहा है लेकिन मां कहने लगी कि महिमा बेटा तुम जाकर अपने कपड़े बदल लो। मैंने उन्हें कहा नहीं मां मुझे कुछ देर तुम्हारे साथ बैठकर बात करनी है और कुछ देर मैं मां के साथ बैठ कर बात करती रही मैंने मां से कहा मां मेरे कॉलेज का यह आखिरी वर्ष है और मैं चाहती हूं कि इसके बाद मैं अपनी नौकरी करने के लिए कहीं बाहर जाऊं क्या आप मुझे नौकरी करने के लिए बाहर भेजोगे। मैंने यह बात अपनी मां से पूछी तो मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम यह बात अपने पापा से ही पूछना मैंने मां को कहा ठीक है मां यह बात मैं पापा से ही पूछ लूंगी।

मैंने मां से कहा मां पापा कब तक ऑफिस से वापस लौटेंगे तो वह मुझे कहने लगी कि तुम्हारे पापा को आने में तो देर हो जाएगी। मैंने उस दिन पापा का इंतजार किया क्योंकि मेरे कॉलेज के एग्जाम भी अब खत्म होने वाले थे मैं चाहती थी कि मैं पापा से इस बारे में पूछूं। मैं अपने सपनों को पूरा करना चाहती थी लेकिन उस दिन पापा को ऑफिस से आने में देर हो गई थी इसलिए मैं पापा से बात नहीं कर पाई और उस दिन मेरी उनसे कोई भी बात नहीं हो पाई थी। अगले दिन सुबह मैंने जब पापा से इस बारे में पूछा तो उस दिन पापा का मूड बहुत ही अच्छा था और उन्होंने मुझसे कहा कि महिमा बेटा कहो तुम्हें मुझसे क्या बात करनी थी तुम्हारी मां कुछ बता रही थी लेकिन उन्होंने मुझे स्पष्ट रूप से नहीं बताया। मैंने अपने पापा से कहा कि पापा मैं नौकरी करने के लिए कहीं बाहर जाना चाहती हूं वह मुझे कहने लगे की महिमा बेटा भला इसमें मुझे क्या आपत्ति होगी तुम यह बात मुझसे कल ही पूछ लेती। मैंने पापा को कहा पापा आप कल देर से घर आए थे इसलिए मुझे लगा कि मैं आपसे सुबह ही इस बारे में बात कर लूंगी। पापा ने जैसे ही मुझे यह कहा कि तुम बाहर नौकरी करने के लिए चले जाना तो मैं बहुत ज्यादा खुश थी मैंने उन्हें गले लगा लिया पापा कहने लगे कि महिमा बेटा लेकिन तुम पहले अपने एग्जाम तो दे लो। मैंने उन्हें कहा हां पापा मैं अपने एग्जाम अच्छे से दे रही हूं और मेरे इस वर्ष भी अच्छे नंबर आएंगे वह कहने लगे की मुझे भी बहुत अच्छा लगेगा जब तुम्हारे इस वर्ष भी अच्छे नंबर आएंगे। पापा अपने ऑफिस की तैयारी करने लगे और वह थोड़ी देर बाद ऑफिस के लिए निकल चुके थे और मैं मां के साथ ही बैठी हुई थी मां और मैं साथ में बैठ कर बात कर रहे थे तो मां मुझे कहने लगी की महिमा बेटा अब तो तुम खुश हो तुम्हारे पापा ने तुम्हें बाहर नौकरी करने की इजाजत दे दी है, इस बात से मैं खुश नहीं थी। दीदी की शादी को दो वर्ष हो चुके हैं और दीदी का भी घर पर काफी कम आना होता है मां कहने लगी कि अगर तुम भी नौकरी करने के लिए कहीं बाहर चली जाओगी तो मैं घर में अकेली हो जाऊंगी। मैंने मां से कहा आपको तो पता ही है कि मैं बचपन से ही सपने देख रही हूं कि मैं किसी बड़े शहर में जाकर नौकरी करूं और मुझे कुछ बड़ा करना है।

मां कहने लगी हां बेटा मैं जानती हूं कि तुम्हारे काफी बड़े सपने हैं और मुझे यह भी मालूम है कि तुम अपने सपनों को भी जरूर पूरा कर लोगी। मैं मां के साथ काफी देर तक बैठी रही और मेरे कॉलेज के एग्जाम खत्म हो चुके थे थोड़े ही समय बाद कॉलेज का रिजल्ट आने वाला था और जब रिजल्ट आने वाला था तो सब लोग बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जब रिजल्ट आया तो मैं अच्छे नंबरों से पास हो गई और अब मैं अपनी नौकरी किसी बड़े शहर में जाकर करना चाहती थी मैंने मुंबई का रुख किया और मैं मुंबई चली गई। हालांकि मैं मुंबई में किसी को जानती नहीं थी और मेरे लिए वहां पर सब कुछ नया था शहर भी काफी बड़ा था और मेरे लिए वहां पर रहना इतना आसान नहीं था लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होता चला गया और मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब पर करने लगी। मैं बहुत ही ज्यादा खुश थी और मुझे बहुत अच्छा भी लगा कि मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब कर रही हूं। मैं जब पहली बार अपनी जॉब से छुट्टी लेकर घर आई तो पापा और मम्मी दोनों ही बहुत खुश थे, कुछ दिनों तक घर में रुकने के बाद मैं वापस मुंबई लौट गई थी।

मैं मुंबई वापस लौट आई थी मुंबई मे मेरे काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी। एक शाम हम लोग पार्टी करने के लिए पब में गए हुए थे उस दिन मैंने कुछ ज्यादा ही ड्रिंक कर ली थी जिस वजह से मुझे काफी नशा हो गया था। उस दिन हमारे साथ राहुल भी था राहुल मेरे ऑफिस में ही काम करता है और वह उस दिन मुझे अपने घर पर ले गया रात के वक्त मैं राहुल के घर पर सो चुकी थी जब सुबह मैं उठी तो राहुल नाश्ता तैयार कर रहा था उसने मुझे कहा महिमा तुम नाश्ता कर लो। मैंने उससे कहा कल रात को मुझे कुछ ज्यादा ही नशा हो गया था तो राहुल कहने लगा हां कल तुम्हे बहुत नशा हो गया था। राहुल और मैंने साथ मे ब्रेकफास्ट किया उसके बाद मैंने उससे कहा मैं अपने घर जा रही हूं क्योंकि उस दिन छुट्टी थी तो राहुल कहने लगा आज तो ऑफिस का ऑफ है तो तुम यहीं रुक जाओ। मैं और राहुल साथ में बैठे हुए थे मैंने राहुल से उसके बारे में पूछा क्योंकि राहुल कभी मेरे नजदीक नहीं था लेकिन उसकी अच्छाइयों ने मुझे बहुत प्रभावित किया था। मैं उसके साथ बात कर रही थी उस दिन मैं घर चली गई लेकिन हम लोग जब भी एक दूसरे के साथ होते तो हमें बहुत अच्छा लगता। मैं एक दिन राहुल के फ्लैट पर थी उस दिन मैंने राहुल से कहा आज मैं तुम्हें अपने हाथ का खाना बना कर खिलाती हूं। मैं राहुल के लिए खाना बना रही थी तभी राहुल मेरे पीछे से आया उसने मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया उसने जब मेरे कमर को कस कर पकड़ा तो मैंने पीछे मुडने की कोशिश की लेकिन मैं हिल नहीं पा रही थी राहुल का लंड मेरी गांड पर टकरा रहा था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। राहुल की पकड़ जब मेरी कमर से ठीली हुई तो मैंने तुरंत पलट कर देखा तो राहुल ने मेरे होठों को चूम लिया मैं कुछ कह ना पाई और ना ही वह कुछ कह रहा था लेकिन मैं उसके होठों को बड़े अच्छे तरीके से किस कर रही थी। मैंने राहुल का साथ बहुत ही अच्छे से दिया अब हम दोनों ही पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुके थे और मेरी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही थी।

मैंने राहुल को कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही हूं राहुल और मैं बेडरूम में चले आए। राहुल ने मेरे कपड़े खोलते हुए मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा को उतार दिया राहुल ने जब मेरी ब्रा को उतारा तो उसने अपने लंड को बाहर निकाला और वह मेरे दोनों स्तनों के बीच मे अपने लंड को रगड़ रहा था। मेरी नजर राहुल के लंड पर पड़ रही थी और मैं राहुल के लंड को अपने मुंह मे लेने के लिए तड़प रही थी मैंने उसके लंड को अपने हाथों में लिया तो मुझे गर्मी का एहसास हुआ और मैंने उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने उसके लंड को बहुत देर तक चूसा और उसकी गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी मेरे अंदर गर्मी बहुत अधिक हो चुकी थी। मैंने राहुल के लंड को बहुत देर तक चूसा अब मैं बिल्कुल भी रह ना सकी राहुल ने मेरे स्तनों का रसपान बहुत अच्छे से किया और मेरे स्तनों से उसने दूध भी बाहर निकाल कर रख दिया था मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी। राहुल ने जब अपने लंड को मेरी चूत के अंदर घुसाया तो मैंने राहुल से कहा तुम अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दो और राहुल ने मेरी चूत के अंदर लंड को घुसा दिया।

उसका लंड मेरी योनि के अंदर जा चुका था कि मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। राहुल ने पूरी ताकत के साथ मुझे चोदना शुरू कर दिया था मैं अपने पैरों को खोलती तो वह मेरी जांघो को कस कर पकड़ लेता मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मै उसे बोलती तुम ऐसे ही मेरा साथ देते रहो मैंने राहुल के साथ बहुत ही अच्छे से दिया उसने मुझे पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया था हालांकि मेरी चूत से अभी भी खून निकल रहा था। मेरी चूत से खून निकलना अभी तक बंद नहीं हुआ था लेकिन राहुल के साथ सेक्स कर के मैं बहुत ज्यादा खुशी हो गई मुझे ऐसा लग रहा था कि राहुल मुझे पूरी तरीके से संतुष्ट कर देगा और राहुल ने उस दिन मुझे पूरी तरीके से संतुष्ट कर दिया। राहुल ने मेरी चूत के मजे काफी देर तक लिए उसने मेरी चूत में अपने वीर्य को गिरा कर अपनी और मेरी इच्छा को पूरा किया। उस दिन के बाद मैं राहुल के लिए बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी।


Comments are closed.