पहली चूत पत्नी की

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Pahli chut patni ki मैं बिहार के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं गांव में रोजगार के लिए कोई भी साधन नहीं था इसलिए मैं अपने दोस्त रमेश के कहने पर लखनऊ आ गया। जब मैं लखनऊ आया तो लखनऊ में मेरे लिए सब कुछ नया था और मेरे दोस्त रमेश ने मुझे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी लगवा दी थी। मैं वहां पर नौकरी करने लगा मेरी तनख्वाह 8000 थी मुझे हर महीने 8000 मिल जाया करते थे मैं अपनी नौकरी से बहुत खुश था। कुछ पैसे मैं हर महीने घर भिजवा दिया करता जिससे कि मेरे बूढ़े मां बाप को भी काफी मदद मिल जाया करती थी। वह लोग भी अब काम नहीं कर पाते थे और खेती-बाड़ी के काम से उतना ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ करता था लेकिन अब मैं नौकरी करने लगा था इसलिए मेरे जीवन में अब धीरे-धीरे बदलाओ आने लगा था। मैं जब नए लोगों को देखता और नए नए लोगों से मिलता तो मैं उनसे कुछ ना कुछ सीखने की कोशिश किया करता।

मुझे लगने लगा कि शायद मैं अब ज्यादा दिनों तक यह नौकरी नहीं कर पाऊंगा मैं कुछ बड़ा करने की सोचने लगा मेरे सपने भी बड़े थे और अब लखनऊ जैसे शहर में शायद मैं कुछ बड़ा देखने लगा था। जल्द ही मैंने फैसला किया कि मै यहां से दिल्ली चला जाऊंगा। मैंने यह बात रमेश को बताई तो रमेश मुझे कहने लगा कि लेकिन माधव तुम दिल्ली जाकर क्या करोगे तुम यहां पर अच्छे से नौकरी कर रहे हो और सब कुछ तो ठीक चल रहा है वह मुझे कहने लगा कि तुम यहीं पर कोई दूसरी नौकरी देख लो। रमेश चाहता था कि मैं लखनऊ में ही काम करूं लेकिन मेरा मन अब लखनऊ में काम करने का बिल्कुल भी नहीं था और मैं दिल्ली चला आया। मैं जब दिल्ली आया तो दिल्ली में मेरे पास कुछ नौकरी तो नहीं थी लेकिन मुझे दिल्ली आने के कुछ दिनों बाद ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई और मैं अब नौकरी करने लगा। मेरा गुजारा तो चल जाता था लेकिन मैं कुछ बड़ा करना चाहता था इसलिए मैंने अब आसपास जान पहचान बनानी शुरू कर दी। एक दिन मैंने अपने परिचित गोविंद से कहा कि मुझे कहीं पर कोई काम करना है तो वह कहने लगा कि उसके लिए तो पैसे लगते हैं क्या तुम्हारे पास पैसे हैं।

मैंने गोविंद को कहा कि थोड़े बहुत पैसे मैंने इतने सालों में जमा किये है और अगर तुम मुझे कहीं कोई काम दिलवा सको तो मेरे उपर तुम्हारा बड़ा एहसान होगा। वह मुझे कहने लगा कि ठीक है मैं तुम्हारे लिए कहीं कोई ऐसा काम देखता हूं जिसे कि तुम कर पाओ। गोविंद मेरे पास करीब एक हफ्ते बाद आया जब वह एक हफ्ते बाद मेरे पास आया तो गोविंद ने मुझे कहा कि उसके एक पहचान के मैनेजर है  और वह जहां नौकरी करते हैं उनके वहां पर एक छोटी सी कैंटीन है अगर तुम उसे चलाना चाहो तो मैं तुम्हारी बात उनसे करता हूँ। मैंने गोविंद को कहा हां जरूर मैं उस कैंटीन को चला लूंगा, मैंने अगले दिन ही मैनेजर से मिलने का फैसला किया और गोविंद ने मुझे उनसे मिलवाया। जब गोविंद ने मुझे उनसे मिलवाया तो उन्होंने मुझे सारी बात बता दी और कहा कि यह कैंटीन मैं तुम्हें चलाने के लिए दे दूंगा लेकिन इसके लिए तुम्हे मुझे कुछ पैसे डिपाजिट में देने होंगे मैंने उन्हें कहा ठीक है पैसे मैं आपको दे दूंगा। उन्होंने मुझे कहा कि मुझे दस हजार डिपाजिट में चाहिए होगा और उसके बाद तुम उस कैंटीन को चलाना। उन्होंने मुझे वह कैंटीन दिलवा दी और मैं अब अच्छे से काम करने लगा मैं पूरी मेहनत के साथ काम कर रहा था और सब कुछ अच्छे से चल रहा था। कैंटीन का काम भी अच्छा चलता था क्योंकि वहां पर काफी लोग आया करते थे ऑफिस के ही काफी लोग हो जाते थे तो मेरे काम में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं थी। काम अच्छे से चल रहा था इसलिए मेरे पास अब पैसे भी अच्छे आने लगे थे मैं बहुत ही ज्यादा खुश था मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं दिल्ली में आकर इतने पैसे कमा लूंगा। मैंने 8000 की नौकरी की शुरुआत की थी और अब मैं काफी पैसे कमाने लगा था एक साल में ही मैंने दिल्ली में अपना घर ले लिया यह मेरे लिए तो काफी बड़ी बात थी। मैं अपने माता-पिता को अपने पास बुलाना चाहता था और उन्हें मैंने अपने पास बुला लिया जब वह लोग मेरे पास आए तो वह लोग मेरी तरक्की देखकर बड़े खुश हुए और कहने लगे कि माधव तुमने तो दिल्ली में घर ले लिया है हम बड़े खुश हैं।

वह लोग मेरे साथ ही रहने लगे थे लेकिन मेरी मां चाहती थी कि मैं शादी कर लूं मेरी मां ने मुझे कहा कि माधव बेटा तुम कोई अच्छी सी लड़की देख कर शादी कर लो अब तो तुम अच्छा कमाने लगे हो तुम्हारी जिंदगी में सब कुछ ठीक हो चुका है। मैंने उन्हें कहा कि हां आप यह तो ठीक कह रहे हैं लेकिन मैं अभी शादी नहीं करना चाहता हूं अब मैंने अपने दो तीन काम और शुरू कर दिए थे जिससे कि मुझे काफी अच्छा पैसा मिल जाता था और मैं बहुत ज्यादा खुश भी हो गया था कि मेरा काम अच्छे से चलने लगा है। मुझे भी अब ऐसा लगने लगा कि मुझे शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि अब दिल्ली में मेरी काफी लोगों से पहचान हो चुकी थी इसलिए मैंने जब अपने एक परिचित से अपनी शादी के बारे में बात की तो वह कहने लगे कि मेरी नजर में एक लड़की है लेकिन वह लोग काफी गरीब है अगर तुम चाहो तो मैं उनसे तुम्हारी शादी की बात कर सकता हूं। मैंने उन्हें कहा कि अगर आप मेरी शादी की बात करें तो मुझे बहुत ही अच्छा लगेगा, यदि वह लोग गरीब है तो मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं जानता हूं कि गरीबी में आदमी किस तरीके से जीता है।

उन्होंने अब मेरी शादी की बात कि मैं जब पहली बार लता से मिला तो मुझे लता को देखकर बहुत ही अच्छा लगा पहली बार मैं लता को मिला था और मैं लता से अब शादी करने के लिए तैयार हो चुका था और उसे भी कोई एतराज नहीं था। कुछ ही समय मे हम दोनों की जल्दी शादी हो गई और हम दोनों अब शादीशुदा जीवन में बन चुके थे। हम लोग काफी खुश थे और मैं तो बहुत ही ज्यादा खुश था कि मैं अब लता से शादी कर के अपना शादीशुदा जीवन अच्छे से बिता रहा हूं मेरे जीवन में सब कुछ ठीक हो चुका था। लता और मैं जब शादी की पहली रात एक दूसरे के साथ बातें कर रहे थे तो उस दिन लता काफी शर्मा रही थी। जब मैंने लता का हाथ पकड़ते हुए उसके होठों को चूम लिया तो लता मुझे कहने लगी माधव मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रहा है और मुझे बहुत घबराहट सी हो रही है। लता बहुत ज्यादा शर्मीली है उसे मैंने कहा तुम घबराओ मत अब मैंने उसके कपड़े खोलकर जब उसके स्तनों को अपने हाथ से दबाना शुरू किया तो वह शर्माने लगी मैंने जैसे ही उसकी चूत में उंगली को लगाया तो उसकी चूत के अंदर से पानी बाहर निकलने लगा था। उसकी योनि के अंदर से निकलता हुआ पानी मुझे बहुत ही गर्म कर रहा था मेरे अंदर की गर्मी तो बढ़ती ही जा रही थी और लता के अंदर से निकलता हुई आग इतनी बढ़ चुकी थी कि उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकलने लगा था। मैने जब लता की चिकनी चूत में लंड घुसा कर अंदर की तरफ किया तो उसकी चूत से खून निकल आया था और उसकी सील टूट चुकी थी। उसकी चूत से खून निकल चुका था मुझे अच्छा लगने लगा था मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था। लता की कोमल चूत मुझे अपनी और खींच रही थी मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखते हुए उसे बड़ी जोरदार तरीके से धक्के मारने शुरू कर दिए। मैं उसे जिस प्रकार से धक्के मार रहा था उससे मैंने लंड उसकी चूत की दीवार से टकरा रहा था और उनसे एक अलग प्रकार की आवाज पैदा हो रही थी।

लता की शर्म भी दूर हो चुकी थी और वह सिसकियो मे तब्दील हो चुकी थी उसकी सिसकारियां मुझे अपनी और खींच रही थी और मुझे ऐसा लगता जैसे मैं उसे बस चोदता जाऊ। मैं ज्यादा देर उसकी चूत के मजे ना ले सका मेरे लंड ने दम तोड़ दिया और मेरा वीर्य बाहर की तरफ आ गया। उसके बाद मुझे उसको दोबारा से चोदना था मैंने उसे घोड़ी बना दिया घोडी बनाने के तुरंत बाद ही मैंने उसे चोदना शुरू किया। मै उसकी चूत के मजे ले रहा था तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसे बड़ी जोरदार तरीके से धक्के देने शुरू कर दिए और उसकी चूतड़ों पर मैं बड़ी तेजी से प्रहार करता जा रहा था उसकी चूतड़ों पर जिस प्रकार से मैं प्रहार कर रहा था उससे मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी।

उसके बाद मै बहुत ज्यादा मचलने लगा था वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा। मुझे भी लगने लगा था वह झड चुकी है वह मेरा साथ ज्यादा देर तक नहीं दे पाएगी लेकिन फिर भी मैं उसे चोदता ही रहा और उसकी चूत की खुजली को मैंने पूरी तरीके से मिटा दिया। मैं उसको पूरी तरीके से संतुष्ट कर चुका था करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद जब मैंने उसकी योनि के अंदर अपने माल को गिराया तो वह खुश हो गई और मुझे कहने लगी आज मुझे बड़ा मजा आ गया। मैंने उसे कहा मजा तो मुझे भी बहुत आ गया मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ चुकी थी। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश थे। लता ने मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर दोबारा से हिलाना शुरू किया तो मैंने उसे कहा तुम लंड को अपने मुंह में ले लो। उसने अपने मुंह में मेरे लंड को ले लिया और उसे चूस कर उसने मेरे अंदर की गर्मी को तो पूरी तरीके से मिटा दिया था और मेरे माल को भी बाहर गिरा दिया था। जिस से कि मैं पूरी तरीके से खुश हो चुका था और वह भी बहुत ज्यादा खुश हो चुकी थी हम दोनों एक दूसरे के साथ अपनी जिंदगी बड़े अच्छे से बिता रहे हैं और हम दोनों बहुत खुश हैं।


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