ऑफिस की शुभचिंतक ने बीवी की कमी को पूरा किया

Office ki shubhchintak ne biwi ki kami ko ko pura kiya:

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मेरा नाम राकेश है मैं एक सीधा और साधारण सा व्यक्ति हूं लेकिन मैं अपनी शादी से बिल्कुल भी खुश नहीं हूं, हालांकि मेरी लव मैरिज हुई है परंतु मैं और मेरी पत्नी अब एक दूसरे के साथ बिल्कुल भी खुश नहीं है और हम दोनों एक दूसरे से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है क्योंकि मैं बहुत ही सिंपल नेचर का व्यक्ति हूं और मेरी पत्नी बहुत ही मॉडल ख्यालातो की है। हम दोनों हमेशा ही इन झगड़ों के बीच में उलझे रहते हैं, हम एक दूसरे को कभी भी समय नहीं दे पाते। एक बार मैं अपनी पत्नी के साथ घर में बैठा हुआ था, मैंने अपनी पत्नी से कहा कि आज मेरा आराम करने का मन है, वह मुझे कहने लगी कि जब भी मेरा कहीं घूमने का मन होता है तो तुम हमेशा पहले ही बहाना बना देते हो। मुझे यह बात बहुत ही अजीब लगी, मैंने उससे कहा कि जब तक तुम मुझे कुछ बताओगी नहीं तो मुझे कहां से पता चलेगा। वह कहने लगी तुम्हें शायद मेरी बातों का पहले ही पता चल जाता है कि मैं कहीं घूमने जाने वाली हूं इसलिए तुम बहाना बना देते हो।

मैंने अपनी पत्नी से कहा कि तुम तो हर एक छोटी बात को सिर्फ झगड़े तक लेकर जाती हो,  कभी भी तुम मेरी बात को समझने की कोशिश नहीं करती, मैंने तो कभी भी तुमसे नहीं कहा कि मैं तुम्हारे साथ नहीं जाना चाहता, एक बार तुम यह बात मुझे प्यार से कह देती तो शायद मैं तुम्हारे साथ चल लेता लेकिन अब मैं तुम्हारे साथ बिल्कुल भी नहीं चलने वाला। मैं सोचता हूं कि हम दोनों एक दूसरे के साथ इतने सालों से रह रहे हैं लेकिन हम दोनों एक दूसरे को अभी तक क्यों नहीं समझ पाए, शुरुआत में तो मैं और मेरी पत्नी के बहुत अच्छे संबंध थे, हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्रेम भी करते थे लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया तो हम दोनों के बीच में दूरियां बढ़ती चली गई। कुछ तो मेरी पत्नी ने खुद ही मुझसे अपनी दूरियां बढ़ा ली क्योंकि वह हमेशा ही मुझसे गलत बात करती है और यदि मैं उसे कुछ समझाने की कोशिश भी करता हूं तो वह बातों को दूसरी दिशा में ही मोड़ लेती है। मेरे घर का तनाव इतना ज्यादा बड़ चुका था की मुझे बिलकुल समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए क्योंकि मुझे उस वक्त कोई भी ऐसा इंसान नहीं मिल रहा था जो कि मुझे समझ पाता या फिर मेरी बातों को समझ कर उसका कुछ हल निकाल पाता।

उसी समय हमारे ऑफिस में एक लड़की भी आई थी, उसका नाम रचना है। रचना से शुरुआत में मेरी इतनी अच्छी बातचीत नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे हम दोनों की बातें भी होने लगी थी। जब हम दोनों एक दूसरे से अच्छे से परिचित हो गए थे और एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय हम लोग बिताने लगे तो मुझे कई बार ऐसा लगता था कि मुझे रचना के साथ ही अपने जीवन को आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि मैं अपनी पत्नी से बिल्कुल ही निराश हो चुका था और अपने रिलेशन से तो मैं पूरी तरीके से टूट सा गया था। मेरे और मेरी पत्नी के बीच के झगड़े की बात रचना से भी छुपी नहीं थी और उसे भी सब कुछ पता चल गया था। वह मुझे कहने लगी तुम्हें तुम्हारी पत्नी से इस बारे में चर्चा करनी चाहिए और तुम दोनों को एक दूसरे से साथ बात करनी चाहिए, मैंने रचना से कहा मैंने कई बार अपनी पत्नी को इस बारे में समझाने की कोशिश की परंतु वह मेरी बात बिलकुल नहीं समझना नहीं चाहती और हर बात में मुझसे झगड़ती रहती है। जब यह बात मैंने रचना से कहीं तो वह कहने लगी यह तुम दोनों की आपस की बात है यदि तुम इसमें किसी और को कहोगे तो शायद वह तुम्हारी बात कभी नहीं समझेगा और उल्टा तुम दोनों के रिलेशन में दरार पैदा हो जाएंगे। एक तरफ रचना थी जो कि मेरे रिश्ते को बचाना चाहती थी और एक तरफ मेरी पत्नी जो कि हमेशा ही मुझ से झगड़ती रहती और मेरी हर बात पर वह कुछ ना कुछ कमियां निकालती। मुझे ऐसा लग रहा था कि शायद मुझे अपने दिल की बात रचना से कह देनी चाहिए। मैंने एक दिन रचना से अपने दिल की बात की जब मैंने रचना से यह बात कही तो रचना मुझे कहने लगी कि मैं किसी का घर बर्बाद कर के कैसे अपना घर बसा सकती हूं मैंने उससे कहा कि मैं तुमसे प्रेम करता हूं और तुम मुझे बहुत अच्छे से समझती हो इसलिए मैं तुम्हारे साथ ही अपना जीवन बिताना चाहता हूं।

वह मुझे कहने लगी यदि तुम इस प्रकार की बात करोगे तो शायद मुझे अच्छा नहीं लगेगा, तुम यदि अपनी पत्नी से एक बार पूछ लो कि वह तुमसे डिवोर्स लेना चाहती है तो उसके बाद ही मैं तुम्हारे साथ रहने को तैयार हूं। मेरे और मेरी पत्नी के बीच में ज्यादा कुछ बचा नहीं था सिर्फ उससे इस बारे में बात करनी बाकी थी। जब मैंने उससे बात की तो वह कहने लगी कोई बात नहीं तुम अपने तरीके से अपना जीवन चला सकते हो, मैं भी अलग रहना ही पसंद करूंगी। वह अपने मायके चली गई और मुझे ऐसा लगा कि शायद मैं इतने वर्षों से किसी अनजान व्यक्ति के साथ रह रहा था, उसने एक ही झटके में रिश्ता तोड़ दिया, मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने उसी वक्त रचना को फोन किया और उसे कहा कि मेरी पत्नी अपने मायके जा चुकी है और उसके चेहरे पर बिल्कुल भी तनाव नहीं था। उसे भी बहुत अचंभा हुआ, वह कहने लगी यह तो बहुत गलत हुआ। मुझे बहुत अकेला सा लग रहा था इसलिए मैंने रचना को कहा कि तुम मुझसे मिलने के लिए आ जाओ और जब वह मुझसे मिलने आई तो हम दोनों साथ में बैठे हुए थे। मेरा उस दिन बहुत ही मूड खराब था इसलिए मैंने शराब के दो तीन पैक भी मार लिए।

मैंने जब शराब पी ली तो मैं बहुत टेंशन में आ गया रचना ने मुझे बहुत सपोर्ट किया, उसने मुझे गले लगा लिया। मैंने रचना से कहा कि मैंने अपनी पत्नी को कोई भी कमी नहीं की लेकिन वह फिर भी उसका मेरे प्रति नजराया बिल्कुल भी अच्छा नहीं था उसने एक झटके में ही रिश्ता खत्म कर दिया। जब रचना ने मुझे गले लगाया तो मैंने भी उसके होठों पर किस कर दिया। हम दोनों एक दूसरे के बदन को महसूस करना चाहते थे मैंने जब रचना को नंगा किया तो उसे कोई भी आपत्ति नहीं हुई। मैंने उसके स्तनों का रसपान जमकर किया मैं उसके निप्पल को चूसता तो उसके चूचो से पानी सा निकला रहा था, मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैंने काफी देर तक  उसके निप्पलो का आनंद लिया। जब उसने मुझसे कहा अब तुम मेरी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दो तो मैंने भी देरी नहीं की, जब मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को टच किया तो वह पूरी तरीके से मजे मे थी। मैंने भी धीरे से उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया जब मेरा लंड उसकी योनि की गहराइयों में उतरा तो वह पूरे मूड मे हो चुकी थी। मैं भी उसे धक्के मारने लगा उसने अपने पैरो को इतना चौडा कर लिया कि मैं आसानी से उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल रहा था। मैंने उसे तेजी से चोदा जैसे ही उसका पानी बड़ी तेजी से निकलने लगा मै भी उसकी योनि का आनंद 5 मिनट तक ले पाया, वह मुझे कहने लगे तुम्हारा तो बहुत जल्दी हो गया। कुछ देर तो हम दोनों साथ में बैठे थे, जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मेरा लंड दोबारा से खड़ा हो गया वह उसकी चूत मे जाने के लिए उतारू था। मैंने भी उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया, मैंने बड़ी तेजी से रचना की योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसी ही मेरा लंड रचना की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और अपने मुंह से गर्म सांसे लेने लगी। उसकी गर्म सांसे मुझे अपनी और इतनी ज्यादा आकर्षित करती कि मैं भी उसे बड़ी तेजी से चोदता और वह अपने पैरों को खोल लेती ताकि मेरा लंड उसकी योनि के अंदर आसानी से जा सके। जिस प्रकार से उसने मेरा साथ दिया मैंने उसके साथ 10 मिनट तक सेक्स किया लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य पतन होने वाला था तो मैंने रचना के मुंह के अंदर अपने लंड को डाल दिया। उसने चूसते हुए मेरे लंड से सारा जूस बाहर निकाल लिया, जब मैंने उसके मुंह में वीर्य डाला तो उसने एक ही झटके में सारे वीर्य को निगल लिया।


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