निशा की चूत में मेरा लंड

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Nisha ki chut me mera lund एक दिन मां ने मुझे कहा कि दिनेश बेटा तुम अपने चाचा के घर चले जाओ मैंने मां से कहा मां लेकिन क्या कोई जरूरी काम था। मां ने मुझे कहा दिनेश बेटा तुम्हारे चाचा जी कि तबीयत आज कुछ ठीक नहीं है इसलिए तुम उनके घर पर चले जाओ और तुम्हारी चाची भी अपने मायके गई हुई हैं उनके घर पर कोई भी नहीं है, मां ने मुझे कहा कि तुम अपने चाचा के लिए खाना लेकर जाना। मां ने चाचा जी के लिए टिफिन पैक किया और मैं टिफिन लेकर चाचा जी के घर पर चला गया। मैं चाचाजी के घर पर पहुंचा जब उन्होंने दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि उनका चेहरा उतरा हुआ था क्योंकि उनकी तबीयत खराब थी। मैंने चाचा जी से पूछा कि आपकी तबीयत ठीक नहीं है तो वह मुझे कहने लगे कि नहीं दिनेश बेटा मेरी तबीयत ठीक नहीं है मुझे आज काफी ज्यादा कमजोरी सी महसूस हो रही है और मुझे बुखार भी आ रहा था। मैंने चाचा जी से कहा कि आप फिर घर पर क्यों नहीं आ गए तो वह मुझे कहने लगे कि मैं शाम के वक्त घर पर आ जाऊंगा। मैंने चाचा जी से कहा की ठीक है अब मैं चलता हूं तो उन्होंने मुझे कहा कि दिनेश बेटा थोड़ी देर बैठ जाओ फिर चले जाना। मैं थोड़ी देर चाचा के साथ बैठा और फिर मैं घर चला आया वह भी आराम कर रहे थे और मैं घर लौट आया था।

जब मैं घर लौटा तो मां ने मुझसे कहा कि क्या तुम्हारे चाचा ने खाना खा लिया था मैंने मां से कहा हां मां चाचा जी ने खाना खा लिया था। चाचा जी हमारी ही कॉलनी में रहते हैं इसलिए हम लोग चाचा जी के घर पर चले जाया करते हैं। मेरा भी यह कॉलेज का आखिरी वर्ष है मैं अपने करियर को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहता हूं। शाम को जब चाचा जी घर पर आए तो चाचा जी की तबीयत अब ठीक थी वह कहने लगे कि अब मेरी तबीयत पहले से बेहतर है चाचा जी ने हमारे घर पर डिनर किया और फिर वह चले गए। चाची अगले दिन घर आ गई थी अगले दिन मैं भी अपने कॉलेज से लौटते वक्त चाचा जी के घर पर गया था और जब मैं उनके घर पर गया तो चाचा जी घर पर नहीं थे चाची ही घर पर थी। मैंने चाची से कहा कि चाचा जी क्या अपने ऑफिस गए हुए हैं तो चाची ने मुझे कहा कि हां तुम्हारे चाचा जी ऑफिस गए हुए हैं उसके बाद मैं भी अपने घर लौट आया था चाचा जी की तबीयत अब ठीक थी। मेरे कॉलेज के एग्जाम भी अब नजदीक आने वाले थे जब मेरे कॉलेज के एग्जाम खत्म हो गए तो उसके बाद मैं अपने करियर को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहने लगा मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था और अभी तक हम लोगों का रिजल्ट भी नहीं आया था।

जिस दिन हमारा रिजल्ट आया उस दिन मैं अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं था क्योंकि मुझे लगा था कि मेरे अच्छे नंबर आएंगे परंतु मेरे अच्छे नंबर नहीं आ पाए थे। जल्द ही हमारे कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट आने वाला था जब मुझे इसकी जानकारी मिली तो मैं इस बात से काफी खुश था और मैं सोच रहा था कि अगर मेरा कैंपस प्लेसमेंट में सिलेक्शन हो जाएगा तो मेरी चिंता दूर हो जाएगी और ऐसा ही हुआ। मेरा कैंपस प्लेसमेंट में सिलेक्शन हो गया और मेरी नौकरी हैदराबाद की एक मल्टीनेशनल कंपनी में लग गई। हालांकि पापा और मम्मी इस बात से खुश नहीं थे क्योंकि वह लोग चाहते थे कि मैं उन लोगों के साथ ही जयपुर में रहूं लेकिन मेरा सिलेक्शन हैदराबाद की एक कंपनी में हो चुका था और मुझे हैदराबाद जाना था। पापा के ही एक परिचित हैदराबाद में रहते हैं पापा ने जब उनसे मेरे लिए घर देखने की बात कही तो उन्होंने मेरे लिए एक फ्लैट देख लिया था। हालांकि वह फ्लैट काफी ज्यादा छोटा था लेकिन फिर भी मैं वहां पर एडजेस्ट कर रहा था। मुझे हैदराबाद में जॉब करते हुए एक महीना हो चुका था और जब मुझे महीने की पहली तनख्वाह मिली तो मैं काफी ज्यादा खुश हुआ। मैंने पापा और मम्मी को फोन करके बताया कि आज मुझे सैलरी मिली है वह लोग भी मेरी पहली सैलरी से काफी खुश थे। समय बीता जा रहा था और मुझे हैदराबाद में एक साल हो चुका था इस एक साल में मेरी हैदराबाद में काफी अच्छी दोस्ती भी हो चुकी थी।

मेरे ऑफिस में काम करने वाले रोहन के साथ मेरी सबसे ज्यादा गहरी दोस्ती हो गई थी इसलिए रोहन मुझसे मिलने के लिए अक्सर आया करता था और हम लोग घूमने का प्लान बना लिया करते थे। जब भी हम लोगों की छुट्टी होती तो हम लोग कहीं ना कहीं घूमने के लिए चले जाया करते थे मुझे बहुत ही ज्यादा खुशी होती थी जब मैं और रोहन साथ में घूमने के लिए जाते। हैदराबाद में एक साल होने के दौरान मैं अपने घर सिर्फ एक बार ही आ पाया था लेकिन मैं सोच रहा था कि मैं कुछ दिनों के लिए घर चला जाऊं। मैंने अपने ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाई कर दिया और जब मुझे छुट्टी मिली तो मैं अपने घर चला आया जब मैं अपने घर पर पहुंचा तो पापा और मम्मी बहुत ही ज्यादा खुश थे वह लोग मुझे कहने लगे कि बेटा तुमने बहुत ही अच्छा किया जो घर आ गए। मैं भी इस बात से काफी खुश था कि कुछ दिनों के लिए ही सही लेकिन मैं घर तो चला आया और थोड़े दिन तक घर पर रहने के दौरान मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगा और मैं काफी खुश भी था।

मुझे मालूम ही नहीं पड़ा कि कब मेरी छुट्टी खत्म हो गई और मुझे अब वापस हैदराबाद लौटना था मैंने अपनी ट्रेन की रिजर्वेशन करवा ली थी और मैं ट्रेन से ही हैदराबाद जाने वाला था। मैं जब रेलवे स्टेशन पर पहुंचा तो वहां पर ट्रेन आ चुकी थी और मैं ट्रेन में बैठ गया, पापा मुझे छोड़ने के लिए आए हुए थे और फिर थोड़ी देर बाद पापा भी चले गए। पापा के चले जाने के बाद मैं पापा और मम्मी दोनों को ही मिस कर रहा था। मेरे सामने वाली सीट मे एक लड़की बैठी हुई थी। मैंने उसे देख रहा था मुझे उसका चरित्र कुछ ठीक नहीं लग रहा था। वह बार-बार मेरी तरफ ही देखे जा रही थी मैं भी उसे देख रहा था। मैंने उसे आंखों ही आंखों में इशारा किया तो वह भी मेरे पीछे बाथरूम की तरफ चली आई। हम लोग बाथरूम के पास ही खड़े होकर एक दूसरे से बातें करने लगे। जब हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मैंने उस लड़की का नाम पूछा उसने मुझे बताया उसका नाम निशा है। मैंने निशा से कहा तुम कहां रहती हो? उसने मुझे बताया मैं हैदराबाद में ही रहती हूं। मैंने भी निशा को कहा मैं भी हैदराबाद में रहता हूं। मैंने निशा के हाथ को पकड़ा तो उसे कोई आपत्ति नहीं थी।

मैंने निशा को अपने साथ बाथरूम में चलने के लिए कहा वह मेरे साथ बाथरूम में चलने के लिए तैयार हो गई। जब वह मेरे साथ बाथरूम मे आई तो मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया।अब हमारी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि निशा अपने आपको रोक नहीं पाई और ना ही मैं अपने आपको रोक पाया। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसे हिलाना शुरू किया। मैंने  जब निशा से कहा तुम मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर इससे सकिंग करो। निशा ने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू कर दिया। उसे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था और मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था।

वह मेरे लंड को मुंह में लेकर बहुत ज्यादा खुश हो गई थी। मेरे और निशा के बीच अब गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि हम दोनों ही एक दूसरे के साथ अब संभोग का मजा लेना चाहते थे। मैने निशा के कपड़े उतारकर उसकी ब्रा को उतार दिया।  जब उसकी ब्रा उतारकर मैंने उसके स्तनों के बीच में लंड रगडना शुरु किया। मेरा लंड मेरे वीर्य को बाहर की तरफ गिराने लगा था। मैंने निशा के मुंह पर अपने वीर्य को गिराया तो तो मैं अपने आपको रोक नहीं पाया मेरा वीर्य निशा के मुंह के ऊपर गिर चुका था। उसने अपने मुंह को साफ करते हुए कहा तुम मेरी चूत मैं अपने मोटे लंड को घुसा दो। मैंने जब निशा की चूत को चाटना शुरू किया तो उसे अच्छा लगने लगा और वह तड़पने लगी। मैं अपने लंड को उसकी योनि के अंदर घुसाना शुरू किया धीरे-धीरे मेरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया और निशा की चूत से खून बाहर को निकलने लगा। मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था जब मैंने सुहाने की चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था। मेरा लंड निशा की चूत की गहराई में कहीं खो चुका था। मैने निशा की चूत को अपना बना लिया था। मैं जिस प्रकार से उसकी योनि का मजा लेकर उसे चोद रहा था उससे वह बहुत ज्यादा खुश हो गई थी।

वह मुझे कहने लगी मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा है। निशा के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी निशा और मुझे काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था और हम दोनों के अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि हम दोनों ने एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा लिया और हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी देर तक चुदाई की। मैने जब निशा को कहा मुझे काफी अच्छा लग रहा है तो वह कहने लगी मुझे भी अच्छा लग रहा है। मैने निशा को कहा मेरा माल तुम्हारी में योनि के अंदर गिरने वाला है। मैंने निशा की चूत में अपने माल को गिरा दिया था। अब निशा की योनि में मेरा माल गिर चुका था और मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगा जब मैंने उसकी कोमल चूत मे अपने माल को गिरा दिया था। मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसकी योनि से मेरा वीर्य बाहर निकाल रहा था। निशा ने मुझे कहा मुझे तुम्हारे साथ दोबारा से सेक्स के मज़े लेने हैं मैंने निशा को बिस्तर पर लेटा दिया और अपने मोटे लंड पर तेल की मालिश करते हुए निशा की चूत के अंदर लंड को घुसाया।

निशा की चूत में मेरा लंड अंदर जा चुका था और मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगा। वह मुझे कहने लगी मुझे अच्छा लग रहा है मैं उसे बहुत ही ज्यादा तेजी से धक्के मार रहा था जिससे कि वह तेज सिसकारियां ले रही थी और मुझे कहने लगी तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के मारते रहो। मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है निशा कहने लगी मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा है तुम ऐसे ही मुझे चोदते रहो। निशा अपनी चूतडो को उठाने की कोशिश करती तो मैं उसे तेजी से धक्के मारकर उसकी गर्मी को शांत करने की कोशिश करता लेकिन वह अब इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी कि मैंने उसकी योनि में अपने माल को गिराकर उसकी इच्छा को पूरा किया और वह खुश हो गई। जब मैंने उसकी इच्छा को पूरा किया तो वह मुझे कहने लगी आज मुझे मजा आ गया जिस प्रकार से तुमने मुझे चोदा है।


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