नीचे आओ सरिता सेक्स करते हैं

Niche aao sarita sex karte hain:

Hindi sex kahani, antarvasna मेरी पैदाइश हरियाणा के छोटे से गांव में हुई और बचपन में कुछ साल तक मैंने वहां पर पढ़ाई की उसके बाद मेरे पिताजी कुरुक्षेत्र में आकर बस गए उन्होंने वहां पर अपना व्यवसाय शुरू कर लिया। उसके बाद मैंने कुरुक्षेत्र से अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की मैंने कुछ समय वहां पर जॉब भी की लेकिन मुझे कुरुक्षेत्र में नहीं रहना था मेरे बहुत बड़े सपने थे जिन्हें कि मैं पूरा करना चाहता था। मैं हमेशा से ही मुंबई जाना चाहता था इसलिए मैंने मुंबई जाने के बारे में सोच लिया था लेकिन मेरे पिताजी ने मुझे कहा बेटा पहले तुम पढ़ाई तो कर लो उसके बाद ही तो वहां पर कोई अच्छी नौकरी तुम्हें मिल पाएगी या फिर वहां पर कुछ अच्छा काम कर पाओगे। मैंने कॉलेज तो पूरा कर लिया था लेकिन वह चाहते थे कि मैं कोई ऐसी डिग्री लूँ जिससे कि वहां पर मुझे आसानी से नौकरी मिल सके इसीलिए मैंने एमबीए करने के बारे में सोचा।

मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि तुम दिल्ली से एमबीए कर लो, वह कभी भी नहीं चाहते थे कि मैं किसी भी चीज में पीछे रह जाऊं इसलिए मैंने दिल्ली से अपना एमबीए किया। कुछ सालों बाद मैं मुंबई चला गया मै मुंबई गया तो वहां पर शुरूआत में मुझे जिस कंपनी में जॉब मिली वहां पर मुझे ज्यादा सैलरी नहीं मिला करती थी लेकिन धीरे धीरे मेरा प्रमोशन होता गया और मुझे अब अच्छी सैलरी मिलने लगी थी और मैं अब अपनी लाइफ अच्छे से जी पा रहा था। कहीं ना कहीं इन सब के पीछे मेरे पिताजी का ही हाथ है यदि वह मेरा सपोर्ट नहीं करते तो शायद मैं कभी भी इतना आगे नहीं बढ़ पाता यह सब मेरे पिताजी की वजह से ही हो पाया था। मैं अपने काम में ही ज्यादातर बिजी रहता था और जब शाम को मुझे वक्त मिलता तो मैं अपने दोस्तों के साथ में समय बिता लिया करता। कभी कबार हम लोग मूवी देखने चले जाते थे और कभी दोस्तों के साथ ही कहीं घूमने का प्लान बन जाता था बस यही मेरी जीवनशैली थी और ऐसे ही मेरा जीवन चल रहा था। मुझे एक दिन मेरी मौसी का फोन आया मेरी मौसी का फोन मुझे काफी समय बाद आया था मैंने मौसी से कहा मौसी आज आपने मुझे कैसे याद किया मेरी मौसी मुझे कहने लगी बेटा मुझे तुमसे एक जरूरी काम था।

मैंने उन्हें कहा जी मौसी कहिये क्या जरूरी काम था वह मुझे कहने लगी बेटा कावेरी की भी मुंबई में जॉब लगी है मैं तो उसे वहां भेजना नहीं चाहती थी लेकिन कावेरी मुझसे जिद कर रही है कि मुझे मुंबई में ही जाना है और वही जॉब करनी है। मैंने अपनी मौसी से कहा मौसी इसमें गलत क्या है यदि वह मुंबई में जॉब करना चाहती है तो इसमें उसने क्या गलत कह दिया। मौसी कहने लगी बेटा तुम्हें तो पता है आजकल जमाना कितना खराब है और वह अकेले मुंबई में कैसी रहेगी। मैंने अपनी मौसी से कहा आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए मैं भी तो यहीं पर हूं और मैं उसका ध्यान रख लूंगा आप उसकी बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए मेरी मौसी कहने लगी बेटा इसीलिए तो मैंने तुम्हें फोन किया था। मैंने मौसी से कहा आप रहने दीजिए आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा आप कावेरी को यहां पर भेज दीजिए वह अपना ध्यान रख लेगी। कुछ समय बाद कावेरी भी मुंबई में आ गई कुछ दिनों तक तो कावेरी मेरे साथ ही रही लेकिन फिर वह कहने लगी भैया मुझे यहां से जाने में काफी समय लग जाता है इसलिए मैं सोच रही हूं कि मैं वहीं आस-पास अपने लिए कोई घर देख लूं। मैंने कावेरी से कहा देखो बहन तुम मेरे साथ रह सकती हो इसमें कोई दिक्कत की बात नहीं है लेकिन वह कहने लगी कि मैं अपने ऑफिस के आस-पास ही कहीं देख लूंगी। मैंने उसे रोका नहीं और कहा ठीक है यदि तुम्हें वहां कुछ रहने लायक दिखे तो मुझे बता देना वह कहने लगी ठीक है भैया मैं आपको बता दूंगी। एक दिन कावेरी ने अपने लिए वहां पर एक फ्लैट देख लिया उसने मुझे कहा भैया क्या आप फ्लैट देखने के लिए आ आएंगे मैंने उसे कहा क्यों नहीं हम लोग इस रविवार को वहां पर चलते हैं। हम दोनों मेरी छुट्टी के दिन फ्लैट देखने के लिए चले गए मुझे वहां पर ठीक लगा और मैंने उसे कहा हां तुम यहां पर रह सकती हो लेकिन इसका किराया काफी ज्यादा है।

वह कहने लगी भैया मैं मैनेज कर लूंगी और क्या पता कोई और भी मेरे साथ रहने के लिए तैयार हो जाए मैंने कहा फिर तो ठीक है तुम देख लो जैसा तुम्हें लगता है। कावेरी ने वह फ्लैट किराए पर ले लिया क्योंकि कावेरी ज्यादा किसी को नहीं जानती थी इसलिए मुझे ही उसके फ्लैट में सामान को शिफ्ट करना पड़ा। मैंने अपने कुछ दोस्तों से भी कहा था कि वह मेरी मदद कर दे कावेरी का सारा सामान हमने शिफ्ट कर दिया तभी मेरी मौसी का मुझे फोन आया वह कावेरी की चिंता कर रही थी वह कहने लगे क्या कावेरी अकेले रह पाएगी। मैंने मौसी से कहा मौसी आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं भी तो यहीं पर हूं और वह अपना ध्यान रख लेगी मैं उससे मिलने के लिए आता रहूंगा। मेरी मौसी इस बात को मान चुकी थी और मुझे भी अब कोई दिक्कत नहीं थी मैं कावेरी से मिलने के लिए जाता रहता था। कावेरी भी खुश थी क्योंकि उसे शायद मेरी वजह से ही अपनी फ्रीडम मिल पाई थी नहीं तो मेरी मौसी उसे कभी भी मुंबई नहीं भेजती कई बार उसने मुझसे इस बारे में बात की और कहा भैया आप की वजह से ही मैं मुंबई में जॉब करने के लिए आ पाई हूं। मैंने कहा कावेरी देखो बहन तुम अपना ध्यान रख सकती हो और अब तुम बड़ी हो चुकी हो तुम्हें तुम्हारे फैसले लेने का अधिकार खुद ही है। मैंने मौसी से सिर्फ इतना ही तो कहा है कि मैं उसका ध्यान रखूंगा और वैसे भी तुम बहुत समझदार और सुलझी हुई लड़की हो। एक दिन मुझे कावेरी ने कहा भैया मैं अपने साथ अपने ऑफिस में काम करने वाली लड़की को रखने के बारे में सोच रही थी मैंने कावेरी से कहा वह लड़की ठीक तो है ना।

वह कहने लगी हां भैया वह बहुत अच्छी है और उसका नेचर भी अच्छा है वह पुणे की रहने वाली है और मेरे साथ मेरे ऑफिस में ही जॉब करती है उसने मुझसे यह बात कही कि मेरे लिए कहीं कोई घर देख लेना तो मैंने उससे कहा तुम मेरे साथ रह सकती हो। मैंने कावेरी से कहा ठीक है यदि वह लड़की अच्छी है तो तुम उसे अपने साथ रख लो कावेरी ने उसे अपने साथ में रख लिया। मैं कावेरी से रोज फोन पर बात किया करता था क्योंकि उसकी जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही थी। कावेरी ने मुझे कहा कि भैया मेरे साथ में सरिता रहने के लिए आ चुकी है और हम दोनों साथ में रहने लगी हैं मैंने कावेरी से कहा मैं कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस के काम से बाहर जा रहा हूं और जब वापस लौटूंगा तो तुमसे मिलने के लिए आऊंगा। कावेरी कहने लगी ठीक है भैया आप जब वापस लौटे तो मुझे फोन कर दीजिएगा मैंने कहा तुम अपना ध्यान देना मैं जब वापस लौट आऊंगा तो मैं तुम्हें फोन करूंगा। मुझे अहमदाबाद अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में जाना था और मैं अमदाबाद चला गया जब मैं वहां से वापस लौटा तो मैंने कावेरी को फोन कर दिया और उसे कहा मैं आज तुमसे मिलने के लिए आ रहा हूं। मैं जब कावेरी से मिलने के लिए गया तो वहां पर मैंने उसकी सहेली थी कावेरी ने मेरी मुलाकात सरिता से कारवाई। सरिता से बात कर के मुझे अच्छा लगा उसके बाद में कावेरी से मिलने के लिए जाता रहता था लेकिन एक दिन जब मै कावेरी से मिलने गया तो वह ऑफिस में थी।

मैंने जब सरिता से पूछा तो सरिता कहने लगी आज उसका कोई जरूरी काम था इसलिए वह ऑफिस में चली गई है। मेरे साथ सरिता बैठी हुई थी हम दोनों बात कर रहे थे मैंने सरिता की गोरी टांगों को देखा तो मेरा मन उसे चोदने का होने लगा मैं उसकी चूत मारना चाहता था। मैंने सरिता को इशारे करने शुरू किए जिससे वह भी मुझे देखने लगी मैंने जब सरिता को अपनी बाहों में लिया तो वह पूरी तरीके से मचलने लगी थी। मैंने उसे अपनी बाहों में लेकर उसके नरम और गुलाबी होठों को कस करना शुरू किया पहले उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना चाहिए क्योंकि वह घबरा रही थी कि उसे मेरे साथ सेक्स करना चाहिए या नहीं। जब उसके अंदर से भी उत्तेजना बाहर निकलने लगी तो वह पूरी तरीके से मेरी बाहों में आ गई मैंने जब उसके कपड़े खोले तो उसने काले रंग की पैंटी ब्रा पहनी थी जिसमें कि उसका बदन किसी परी से कम नहीं लग रहा था। उसकी बड़ी गांड देख कर तो मेरा लंड हिलोरे मारने लगा मेरा लंड एकदम से खड़ा हो चुका था। मैंने उसकी ब्रा को खोला तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी मैंने उसके स्तनों का रसपान काफी देर तक किया।

मैंने जब उसके बदन को ऊपर से लेकर नीचे तक चाटा तो उसकी योनि से तरल पदार्थ बाहर की तरफ को आने लगा और वह पूरी तरीके से मचलने लगी। जब मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसकी योनि से गिला पदार्थ बाहर निकल रहा था और वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी। जब मेरा लंड उसकी योनि में घुस चुका था तो उसके मुंह से सिसकिया निकलने लगी वह अपने पैरों को खोलकर मुझे कहने लगी और तेज धकके दो। मै उसे बड़ी तेज गति से धक्के दे रहा था जिससे कि हम दोनों के अंदर गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मुझे भी उसे चोदने में बहुत मजा आता। उसकी मादक आवाज से मैं इतना उत्तेजित हो जाता कि कुछ ही क्षणों बाद मेरा वीर्य पतन हो गया जब मेरा वीर्य पतन सरिता की योनि में हुआ तो वह खुश हो गई और कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन आप यह बात कभी कावेरी को मत बता देना। मैंने उसे कहा नहीं मैं उसे कभी भी नहीं बताऊंगा तुम बिल्कुल चिंता मत करो उसे भी मेरी आदत हो चुकी थी वह हर रोज मेरा इंतजार किया करती लेकिन मेरा भी वहां जाना संभव नहीं हो पाता था। जब भी में जाता तो हम दोनों जमकर सेक्स का मजा लेते।


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