नया लंड लेने का मजा

Naya lund lene ka maja:

Antarvasna, hindi sex stories रविवार के दिन मैं और मेरे पति  कुलदीप साथ में बैठे हुए थे हम दोनों आपस में अक्षय की पढ़ाई को लेकर बात कर रहे थे। अक्षय ने अभी अपनी पांचवी की परीक्षा दी है उसका स्कूल हमारे घर से सौ मीटर की दूरी पर है वहां पर वह पढ़ने के लिए जाता है। हम लोग चाहते थे कि अक्षय का हम किसी अच्छे स्कूल में दाखिला करवाएं और कुलदीप भी चाहते थे कि अक्षय अच्छे स्कूल में पढ़े। उनका सपना था कि वह अक्षय को अच्छे स्कूल में पढ़ाएं लेकिन घर की कुछ समस्याओं के कारण अक्षय को हम अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ा पाये लेकिन अब हमारी स्थिति पहले से बेहतर है।

कुलदीप कहने लगे माधुरी मुझे तो समय नहीं मिल पाता लेकिन तुम्हें जब समय मिले तो तुम स्कूल के बारे में पता करना और मुझे बताना। मैंने कुलदीप से कहा मैंने पड़ोस की महिमा दीदी से कहा था तो उन्होंने मुझे बताया कि जिस स्कूल में उनकी लड़की पढ़ने जाती है वह स्कूल काफी अच्छा है। मैंने कुलदीप से कहा कि मैं एक बार वहां जाकर बात कर आती हूं कुलदीप कहने लगे हां तुम समय निकाल कर वहां चले जाना। काफी दिनों से कुलदीप और मैं साथ में कहीं गए नहीं थे मैंने कुलदीप से मजाकिया अंदाज में कहा तुम तो जैसे मुझे घुमाना ही भूल चुके हो लगता है अब मैं आपको अच्छी नही लगती हूं। कुलदीप पर इस बात पर मुस्कुराने लगे और मुझे कहने लगे हां माधुरी अब तुम मुझे अच्छी नही लगती हो, इस बात से मुझे भी हंसी आ गई कुलदीप ने हमारी पुरानी यादों को ताजा किया। जब उन्होंने मुझे कहा कि पहली बार तुमसे मेरी मुलाकात कैसे हुई थी तो जैसे मैं उस समय की यादों को अपने दिमाग में अब तक संजोये ही बैठी थी और वह सब यादे मेरे सामने आने लगी। मैं तो जैसे अपने और कुलदीप की यादों को याद करने लगी, कुलदीप मुझे कहने लगे अरे बाबा तुम चिंता मत करो मैं तुम्हें आज ही अपने साथ घुमाने ले चलता हूं। कुलदीप और मुझे एक साथ बाहर डिनर करें भी काफी समय हो चुका था इसलिए हम दोनों उस रात अक्षय को अपने साथ लेकर डिनर पर ले गए।

काफी समय बाद हम दोनों को एक अच्छा समय मिल पाया था नहीं तो कुलदीप अपने ऑफिस के काम में बिजी रहते थे और मैं घर का ही काम संभालती जिससे कि हम दोनों की जिंदगी बिल्कुल नीरस हो चुकी थी। उस दिन जब हम दोनों ने साथ में अच्छा समय बिताया तो मुझे काफी खुशी हुई काफी समय से मैंने अपने घर के बाहर पप्पू की दुकान का सोडा नहीं पिया था तो रात को हम दोनों ने आते वक्त पप्पू की दुकान में सोडा पिया। कुछ देर हम दोनों बातें करने लगे हम दोनों बातों में इतना मशगूल थे कि मुझे मालूम ही नहीं पड़ा कि कब मेरे कंधे से मेरे पर्स को किसी ने तेज रफ्तार बाइक में आते हुए लड़के ने अपने हाथों में ले लिया और वह वहां से उड़न छू हो गए। जब तक मैं और कुलदीप कुछ सोचने की स्थिति में आते तब तक वह लोग वहां से निकल चुके थे मुझे इस बात का बहुत दुख था कि उन्होंने मेरे पर्स को चोरी कर लिया है। मेरे पर्स में मेरे काफी कुछ डाक्यूमेंट्स थे और कुछ पैसे भी थे उस दिन हम दोनों का मूड बहुत अच्छा था लेकिन जब मेरा पर्स चोरी हुआ तो उसके बाद हम दोनों का मूड ही अपसेट हो गया। हम दोनों वहां से पुलिस स्टेशन गये और वहां पर हमने अपनी कंप्लेंट दर्ज करवा दी लेकिन उस कंप्लेंट का भी कोई फायदा नहीं हुआ मेरा पर्स कहीं मिला ही नहीं। काफी दिन बाद जब मैं अक्षय के एडमिशन के लिए स्कूल में गई तो वहां पर मेरी मुलाकात प्रिंसिपल से हुई प्रिंसिपल का कद ज्यादा लंबा नहीं था उनकी हाइट 5 फुट 7 इंच के आसपास रही होगी। स्कूल देख कर ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं किसी होटल में आ गई हूं वहां पर सारे टीचर इंग्लिश में बात कर रहे थे। मैं जब प्रिंसिपल से मिली तो उन्होंने मुझसे चेयर पर बैठने के लिए कहा वह कहने लगे आपको अपने बच्चे का कौन सी क्लास में एडमिशन करवाना है मैंने उन्हें कहा मुझे सिक्स में अपने बच्चे का एडमिशन करवाना है। मैंने जब मैडम से स्कूल की फीस और पढ़ाई के बारे में पूछा तो प्रिंसिपल साहब ने अपने चश्मे को उतार कर मेज पर रखा। कुछ देर तक तो ऑफिस में सन्नाटा था फिर प्रिंसिपल साहब ने मुझे कहा आप अपने बच्चे का यहां एडमिशन करवा दीजिए हमारा स्कूल शहर का सबसे टॉप स्कूल है और हमारा रिजल्ट भी हर वर्ष अच्छा रहता है।

मुझे भी उनकी बातों पर यकीन हो गया था उन्होंने मुझे अपनी बातों में कन्वेंस कर लिया मैं अब अपने बच्चे का एडमिशन वहीं करवाना चाहती थी लेकिन सबसे बड़ी समस्या तो फीस की थी स्कूल की फीस काफी ज्यादा थी। सुबह के वक्त स्कूल बस बच्चों को लेने के लिए आती थी मैंने जब अपने पति कुलदीप से इस बारे में बात की तो वह कहने लगे कोई बात नहीं हम वहां पर अक्षय का एडमिशन करवा देते हैं। मैंने अपने पति को जिस प्रकार से बताया था कि स्कूल बहुत ही अच्छा है और वहां पर पढ़ाई बहुत अच्छी है तो वह मान चुके थे और आखिरकार हम लोगों ने अक्षय का दाखिला उसी स्कूल में करवा दिया। अब वह सुबह के वक्त स्कूल चला जाया करता था हम उसे स्कूल बस में बैठा देते और अक्षय स्कूल चला जाया करता था उसके बाद मैं अपने घर का काम करती। मेरे पास अब समय काफी रहने लगा था क्योंकि मुझे अब अक्षय की टेंशन नहीं थी पहले अक्षय को मैं खुद ही स्कूल छोड़ने जाया करती थी और खुद ही स्कूल लाती थी लेकिन अब यह समस्या मेरी दूर हो चुकी थी। मैंने एक दिन कुलदीप से बात की कुलदीप का मूड उस दिन बहुत अच्छा था मैंने कुलदीप से कहा मेरे पास काफी समय बच जाया करता है तो मैं सोच रही थी कि मैं कुछ काम कर लूं खाली समय का भी इस्तेमाल हो जाएगा और दो पैसे घर के लिए मैं कमा भी लूंगी।

कुलदीप मुझे कहने लगे वैसे तो इसकी आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि तुम्हें लगता है कि तुम घर में खाली समय में कुछ करना चाहती हो तो तुम देख सकती हो मैंने कुलदीप से कहा ठीक है मैं अपने लिए कोई काम देखना शुरू करती हूं। मुझे जब मेरी सहेली रूपा मिली तो उसने मुझे कहा कि तुम मेरे साथ पार्लर में काम करोगी, मैं उसके साथ काम करने के लिए राजी हो गई। मुझे कुछ काम आता तो नहीं था लेकिन रूपा ने हीं मुझे सारा काम सिखाया और मैं उसके साथ पार्लर में काम करने लगी। अब हम दोनों यह काम करने लगे थे तो हमने सोचा कि हम लोग पार्टनरशिप में अपना ब्यूटी पार्लर खोल लेते है। मैंने इस बारे में कुलदीप से सलाह मशवरा लिया तो कुलदीप भी इस बात के लिए तैयार हो गए। कुछ ही समय बाद रूपा और मैंने अपना ब्यूटी पार्लर खोल लिया हमारे पास अब कुछ कस्टमर ऐसे आने लगे थे जो कि सिर्फ हम से ही ब्यूटी पार्लर का काम करवाया करते थे। कई कबार तो हम लोग किसी की शादी समारोह में घर में भी चले जाया करते थे। हमारा काम अच्छे से चलने लगा था एक दिन मुझसे एक महिला कहने लगी आजकल तो सेक्स करने का बड़ा मजा आ रहा है। वह ना जाने किसके साथ अपने नाजायज रिशते चला रहे थे उन्होने मुझे भी सलाह दी कि तुम भी किसी के साथ अपने संबंध चलाओ तुम्हें बड़ा अच्छा लगेगा। मुझे भी लगा कि मुझे किसी के साथ सेक्स करना चाहिए क्योंकि कुलदीप और मेरे बीच में तो काफी समय से सेक्स हो रहा था लेकिन मैं भी चाहती थी कि मैं किसी नौजवान युवक के साथ सेक्स संबंध बनाऊ इसीलिए मैंने अपने पड़ोस में रहने वाले कल्पेश के साथ नैन मट्टका शुरु कर दिया।

जब हम दोनों के नैन से नैन टकराने लगे तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा मैं कल्पेश के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थी। कल्पेश ने जब मुझे अपने घर पर बुलाया तो मैं थोड़ा हिचकीचा रही थी लेकिन जब मैं कल्पेश से मिली तो उसके साथ उस दिन मैंने सेक्स का जमकर आनंद लिया। मैंने उसके होठों को चूसना शुरू किया तो उसने भी मेरे बदन से मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए जब उसने मेरे बदन से मेरे सारे कपड़े उतार दिए तो मैं नग्नअवस्था में थी और कल्पेश ने मेरे स्तनों का जमकर रसपान किया। कल्पेश मेरे स्तनों को काफी देर तक अपने मुंह में लेकर चूसता जिससे कि उसने मेरे स्तनों से दूध भी बाहर निकाल दिया था। मैं भी तड़पने लगी थी मैंने कल्पेश के काले और मोटे लंड को अपने हाथों में लिया और उसे हिलाना शुरू किया जिससे कि वह पूरी तरीके से बेचैन हो गया। उसकी उत्तेजना इतनी ज्यादा बढ़ गई कि उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया जिससे कि मेरे अंदर से गर्मी बाहर निकलने लगी और उसने मेरी योनि का रसपान बहुत देर तक किया।

जब उसने मेरी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मैं चिल्लाने लगी मेरे मुंह से एकाएक तेज आवाज निकलने लगी। मैं उसे  कहती कल्पेश तुम तेजी से करो ना वह अपनी पूरी ताकत मेरे ऊपर झोक देता और काफी देर तक उसने मेरे साथ सेक्स संबंध बनाए। जब हम दोनों की उत्तेजना चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी तो मैं झड़ चुकी थी मैंने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया जिससे कि कल्पेश को मुझे धक्का मारने में बहुत मजा आ रहा था लेकिन जब उसकी वीर्य की पिचकारी उसने मेरे स्तनों पर गिराई तो मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि किसी ने गरम बूंदे मेरे शरीर पर किसी ने गिरा दी हो। मैंने उसे कहा आज के बाद क्या तुम मुझे मिलोगे तो कल्पेश कहने लगा क्यों नहीं हम लोग आज के बाद मिलते रहेंगे और एक दूसरे की जरूरतो को पूरा करते रहेंगे। मेरे लिए कल्पेश के साथ सेक्स करना एक अच्छा अनुभव था और मैं अपने पति के साथ जमकर सेक्स का आनंद उठाया करती थी। मेरा काम भी अच्छे से चल रहा था और मुझे इस बात की खुशी थी कि मेरे पति मेरी हर एक इच्छा को पूरा कर दिया करते हैं और जो कुछ रही सही कसर होती है वह कल्पेश पूरा कर देता है और कुछ समय पहले मैने अक्षय के प्रिंसिपल साहब पर भी डोरे डालने शुरु किए है लगता है वहां भी मेरा काम बन जाएगा। एक और नया लंड मुझे मिल जाएगा।


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